Cheetah CCB 3 Rescued: 20 दिनों से ग्वालियर के जंगलों में घूम रही थी मादा चीता CCB-3; रेस्क्यू कर भेजा कूनो

Cheetah CCB 3 Rescued: ग्वालियर। जंगलों में 20 दिनों से घूम रही कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता CCB-3 का गुरुवार को सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया गया। कूनो की विशेषज्ञ टीम और ग्वालियर वन विभाग ने बरी-पनिहार के जंगलों मेंसंयुक्त अभियान चलाकर कई घंटे की मशक्कत के बाद चीते को सुरक्षित पकड़कर वापस कूनो भेज दिया। सैटेलाइट कॉलर से रखी जा रही थी नजर वन विभाग के मुताबिक, चीते के गले में लगे सैटेलाइट कॉलर की मदद से उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। इसके अलावा वन अमले की ग्राउंड ट्रैकिंग टीम भी लगातार जंगल में उसकी लोकेशन ट्रैक कर रही थी। पिछले कुछ दिनों से मादा चीता शिकार की तलाश में जंगल से निकलकर रिहायशी इलाकों के करीब पहुंचने लगी थी। इसे देखते हुए वन विभाग ने लोगों और चीते दोनों की सुरक्षा के लिए रेस्क्यू का फैसला लिया। इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए लोकेशन मिलते ही शुरू हुआ ऑपरेशन गुरुवार दोपहर बरी-पनिहार के जंगल में चीते की सटीक लोकेशन मिलने के बाद विशेषज्ञ टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। सुरक्षित दूरी से चीते को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) किया गया। इसके बाद पशु चिकित्सकों की निगरानी में उसे पिंजरे में रखा गया और विशेष वाहन से सुरक्षित कूनो नेशनल पार्क रवाना कर दिया गया। पहले भी ग्वालियर तक पहुंच चुके हैं चीते वन विभाग के अनुसार, पिछले करीब 10 महीनों में कूनो नेशनल पार्क से कई चीते प्राकृतिक विचरण करते हुए श्योपुर और शिवपुरी के जंगलों से होते हुए ग्वालियर वन मंडल के घाटीगांव, तिघरा और पनिहार क्षेत्र तक पहुंच चुके हैं। यहां पर्याप्त शिकार और अनुकूल वातावरण होने के कारण कई चीते कुछ समय तक इन जंगलों में रुके भी हैं। नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध DFO ने बताया पूरी तरह सुरक्षित है चीता ग्वालियर वन मंडल के डीएफओ मुकेश पटेल ने बताया कि मादा चीता CCB-3 का रेस्क्यू पूरी तरह सफल रहा। पूरे अभियान के दौरान वन्यजीव विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों की टीम मौजूद रही। सभी जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए चीते को सुरक्षित हालत में कूनो नेशनल पार्क भेज दिया गया। ग्रामीणों से की अपील वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि जंगल या आसपास किसी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई दे तो उसके पास जाने या उसे घेरने की कोशिश न करें। इसकी जानकारी तुरंत वन विभाग को दें, ताकि विशेषज्ञ टीम समय रहते सुरक्षित कार्रवाई कर सके।
धर्मांतरण मामले में विशेष अदालत का मानवीय दृष्टिकोण, गर्भावस्था के आधार पर नीदा खान को जमानत, आदेश की कानूनी टिप्पणी चर्चा में

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के नासिक में धर्मांतरण से जुड़े एक मामले में विशेष अदालत ने आरोपी नीदा खान को जमानत प्रदान की है। अदालत का यह आदेश कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। न्यायालय ने अपने निर्णय में आरोपी की गर्भावस्था और अजन्मे बच्चे के हितों को महत्वपूर्ण आधार माना। साथ ही आदेश में भगवान कृष्ण के जन्म का संदर्भ देते हुए कहा गया कि किसी भी बच्चे को जेल में जन्म लेने से जुड़ी परिस्थितियों और उससे उत्पन्न सामाजिक प्रभावों का सामना नहीं करना चाहिए। विशेष अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी लगभग पांच माह की गर्भवती है और इस तथ्य को लेकर किसी प्रकार का विवाद नहीं है। न्यायालय ने कहा कि जमानत पर विचार करते समय केवल आरोपी की स्थिति ही नहीं, बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के अधिकारों और भविष्य को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। इसी आधार पर न्यायिक विवेक का उपयोग करते हुए जमानत मंजूर की गई। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश में भगवान कृष्ण के जन्म का उल्लेख केवल एक मानवीय और सांस्कृतिक संदर्भ के रूप में किया गया है। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस टिप्पणी का मामले के आरोपों की सत्यता या असत्यता से कोई संबंध नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत का निर्णय आरोपों के गुण-दोष पर आधारित अंतिम फैसला नहीं माना जाना चाहिए। मामले में नीदा खान पर आरोप है कि उन्होंने एक महिला सहकर्मी पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया और धार्मिक भावनाओं से जुड़े कथित आपत्तिजनक बयान दिए। जांच एजेंसियों के अनुसार, उन पर धार्मिक साहित्य वितरित करने, बुर्का उपलब्ध कराने और मोबाइल फोन में धार्मिक एप्लिकेशन इंस्टॉल कराने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण न्यायालय में सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा। विशेष अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और पुलिस द्वारा आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। न्यायालय ने माना कि जांच पूरी होने के बाद आरोपी की निरंतर न्यायिक हिरासत की आवश्यकता का मूल्यांकन अलग दृष्टिकोण से किया जा सकता है। साथ ही मामले से जुड़े अन्य आरोपियों के विरुद्ध दर्ज विभिन्न मामलों की जांच अभी भी जारी है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी आपराधिक मामले में जमानत दिए जाने का अर्थ आरोपी को दोषमुक्त घोषित करना नहीं होता। जमानत केवल एक अंतरिम कानूनी राहत होती है, जिसे न्यायालय उपलब्ध परिस्थितियों, जांच की स्थिति, आरोपी की व्यक्तिगत परिस्थितियों, साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना और अन्य कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रदान करता है। अंतिम निर्णय मुकदमे की पूरी सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही दिया जाता है। इस मामले में भी अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसके आदेश को आरोपों की वैधता पर टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। मुकदमे की सुनवाई नियमानुसार आगे जारी रहेगी और अभियोजन तथा बचाव पक्ष को अपने-अपने साक्ष्य और तर्क प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलेगा। अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक: इंडियामार्ट से एसी गैस खरीदने और बेटे की गिरफ्तारी का झांसा देकर 1.72 लाख उड़ाए

इंदौर । इंदौर में साइबर अपराधियों ने एक ही दिन में दो अलग-अलग वारदातों को अंजाम देकर दो लोगों से कुल 1.72 लाख रुपए की ठगी कर ली। एक मामले में इंडियामार्ट पर एसी गैस बेचने के नाम पर ऑटो पार्ट्स कारोबारी से 82 हजार रुपए हड़प लिए गए, जबकि दूसरे मामले में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक व्यक्ति को उसके बेटे की रेप केस में गिरफ्तारी का डर दिखाया गया और जमानत के नाम पर 90 हजार रुपए ट्रांसफर करा लिए गए। दोनों मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पहला मामला छोटी ग्वालटोली थाना क्षेत्र का है। रानी बाग निवासी ऑटो पार्ट्स व्यापारी पवनदीप सिंह खनूजा ने एसी गैस खरीदने के लिए इंडियामार्ट पर सप्लायर का नंबर तलाशा। वहां उन्हें श्रुति इंटरप्राइजेज के नाम से कुलदीप अग्रवाल का मोबाइल नंबर मिला। बातचीत के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप पर एसी गैस के 220 टिन का इनवॉइस और फोटो भेजकर 82 हजार रुपए ऑनलाइन जमा कराने को कहा। व्यापारी ने भरोसा कर मुंबई स्थित बैंक खाते में भुगतान कर दिया। इसके बाद आरोपी ने गति इंटरप्राइजेज के नाम से एक बिल्टी भी भेजी, लेकिन काफी समय तक सामान नहीं पहुंचा। जांच करने पर पता चला कि भेजी गई बिल्टी एआई तकनीक से तैयार की गई फर्जी दस्तावेज थी। जब आरोपी ने फोन उठाना बंद कर दिया, तब व्यापारी को ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने बैंक में भुगतान रोकने का प्रयास किया और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। दूसरी घटना कनाड़िया थाना क्षेत्र की है। राज वर्मा के पास व्हाट्सएप कॉल कर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति ने दावा किया कि उनके बेटे को रेप के आरोप में तीन अन्य युवकों के साथ गिरफ्तार किया गया है। ठग ने बेटे को जेल से बचाने के लिए तत्काल तीन लाख रुपए की मांग की और डर का माहौल बनाकर पैसे भेजने का दबाव बनाया। घबराए राज वर्मा ने अपने पास केवल 90 हजार रुपए होने की बात कही। इसके बाद ठगों ने बताए गए बैंक खाते में रकम ट्रांसफर करा ली। कुछ देर बाद जब उन्होंने अपने बेटे से संपर्क किया तो पता चला कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है। तब उन्हें एहसास हुआ कि वे साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। दोनों मामलों में साइबर हेल्पलाइन पर मिली शिकायतों के आधार पर संबंधित थानों में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों की पहचान में जुटी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन खरीदारी के दौरान केवल सत्यापित विक्रेताओं से ही लेनदेन करें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर अग्रिम भुगतान न करें और यदि कोई पुलिस, सीबीआई या अन्य अधिकारी बनकर फोन पर गिरफ्तारी या जमानत के नाम पर पैसे मांगे तो पहले संबंधित व्यक्ति या स्थानीय पुलिस से पुष्टि जरूर करें। ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन धोखाधड़ी की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने में दें।
मतदाता सूची शुद्धीकरण अभियान का व्यापक असर, ओडिशा सहित चार राज्यों से लाखों नाम हटे, निर्वाचन प्रक्रिया पर बढ़ी राजनीतिक हलचल

नई दिल्ली । देश के चार राज्यों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान के बाद मतदाता सूचियों में बड़े स्तर पर बदलाव दर्ज किए गए हैं। ओडिशा, मणिपुर, मिजोरम और सिक्किम में अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद 22 लाख से अधिक नाम सूची से हटाए गए हैं। संशोधित सूची जारी होने के साथ ही राजनीतिक दलों के बीच इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जबकि निर्वाचन प्राधिकरण का कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह निर्धारित नियमों और सत्यापन के आधार पर पूरी की गई है। इस अभियान का सबसे अधिक प्रभाव ओडिशा में देखने को मिला, जहां मतदाता सूची से 21 लाख से अधिक नाम हटाए गए। संशोधन के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 3.25 करोड़ रह गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, इनमें पुरुष और महिला मतदाताओं की संख्या लगभग संतुलित बनी हुई है तथा मतदाता लिंगानुपात में भी सुधार दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सूची से वे नाम हटाए गए हैं जो सत्यापन के दौरान मृत, स्थानांतरित या दोहराव वाले पाए गए। पूर्वोत्तर के राज्यों में भी विशेष पुनरीक्षण का असर दिखाई दिया। मणिपुर में हजारों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिसके बाद राज्य की संशोधित मतदाता संख्या 20 लाख से अधिक दर्ज की गई। इसी प्रकार मिजोरम में भी व्यापक सत्यापन के बाद हजारों नाम हटाए गए। राज्य की नई मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नए युवा मतदाताओं को भी शामिल किया गया है, जिससे चुनावी भागीदारी में नई पीढ़ी की हिस्सेदारी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। देश के सबसे कम आबादी वाले राज्य सिक्किम में भी पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत हजारों नाम सूची से हटाए गए। हालांकि कुल संख्या अन्य राज्यों की तुलना में कम रही, लेकिन निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि उद्देश्य सभी राज्यों में मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना था। इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सत्यापन अभियान चलाया गया और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आवश्यक संशोधन किए गए। इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बाद राजनीतिक दलों के बीच विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ विपक्षी दलों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन के मानकों को लेकर सवाल उठाए हैं तथा प्रभावित मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं निर्वाचन अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक संशोधन विधिक प्रावधानों के अनुरूप किया गया है और केवल उन्हीं नामों को हटाया गया है जो निर्धारित मानकों पर पात्र नहीं पाए गए। निर्वाचन प्राधिकरण का मानना है कि समय-समय पर मतदाता सूची का अद्यतन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मृत, स्थानांतरित और डुप्लिकेट नामों को हटाकर वास्तविक और पात्र मतदाताओं की सूची तैयार की जा सकती है। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य किसी भी पात्र मतदाता को वंचित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता बनाए रखना है। विशेषज्ञों का मानना है कि संशोधित मतदाता सूची का प्रभाव आगामी चुनावों की रणनीतियों पर भी पड़ सकता है। राजनीतिक दल अब नई मतदाता संरचना के आधार पर अपनी चुनावी तैयारियों और बूथ स्तर की रणनीति की समीक्षा कर सकते हैं। आने वाले समय में इस पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा जारी रहने की संभावना है, जबकि अंतिम उद्देश्य निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय चुनावी प्रक्रिया सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
चारधाम से लौटते वक्त मौत ने घेरा: 'बस छूट जाती तो पत्नी आज जिंदा होती', दौसा हादसे के पीड़ित की भावुक कहानी

मध्यप्रदेश । चारधाम यात्रा पूरी कर खुशियों के साथ घर लौट रहे इंदौर के वरिष्ठ पत्रकार चंद्रप्रकाश (चंदू) गुप्ता ने कभी नहीं सोचा था कि यह सफर उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द बन जाएगा। 30 जून की रात राजस्थान के दौसा जिले में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर हुए भीषण बस हादसे में उनकी पत्नी निर्मला गुप्ता की मौत हो गई। हादसे से कुछ घंटे पहले ही निर्मला ने मुस्कुराते हुए सोशल मीडिया पर ‘यात्रा पूरी’ लिखकर स्टेटस लगाया था। परिवार से बात हुई, भविष्य की योजनाएं बनीं, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही जिंदगी ने ऐसा मोड़ लिया जिसने पूरा परिवार बिखेर दिया। चंद्रप्रकाश गुप्ता बताते हैं कि उनकी पत्नी पिछले तीन वर्षों से दोबारा चारधाम यात्रा पर जाने की जिद कर रही थीं। पहले भी दोनों यात्रा कर चुके थे, लेकिन निर्मला का कहना था कि अब वहां काफी बदलाव हो चुके हैं और एक बार फिर दर्शन करना चाहती हैं। यात्रा की तैयारी पूरी थी और ट्रेन की कन्फर्म टिकट भी मिल चुकी थी, लेकिन सुविधा को देखते हुए बस से जाने का फैसला किया गया। आज उन्हें सबसे ज्यादा यही बात सालती है कि अगर उस दिन बस नहीं पकड़ी होती तो शायद उनकी पत्नी आज उनके साथ होती। हरिद्वार से लौटते समय बस पकड़ने के लिए दोनों ने काफी मशक्कत की। पहले गलत बस स्टैंड पहुंचे, फिर सामान उठाकर कई सौ मीटर पैदल चलना पड़ा। कई बार बस संचालक से संपर्क किया और आखिरकार इंदौर जाने वाली बस मिल गई। उस समय उन्हें लगा कि बस छूटने से बच गए, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यही बस निर्मला की आखिरी यात्रा साबित होगी। बस में बैठने के बाद निर्मला बेहद खुश थीं। उन्होंने बच्चों से फोन पर बात की और सोशल मीडिया पर ‘यात्रा पूरी’ का स्टेटस लगाया। इंदौर लौटने के बाद विदिशा, वृंदावन, सांवरिया सेठ और कुलदेवी के दर्शन की भी योजना बना ली गई थी। परिवार के साथ आने वाले दिनों की बातें हो रही थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। रात करीब ढाई बजे तेज धमाके के साथ बस आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऊपर की बर्थ पर सो रहे यात्री नीचे गिर पड़े और कुछ ही पलों में बस में अफरा-तफरी मच गई। चंद्रप्रकाश बताते हैं कि उनकी पत्नी खिड़की की तरफ सो रही थीं और उसी दिशा से ट्रेलर बस के अंदर तक घुस आया। उन्होंने कई बार पत्नी को आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने किसी तरह पत्नी का फंसा हुआ पैर निकाला और उन्हें बाहर लाने की कोशिश की, लेकिन तभी किसी ने उन्हें जबरदस्ती बस से बाहर खींच लिया। कुछ ही क्षणों में बस आग की लपटों में घिर गई। वे दोबारा पत्नी को बचाने दौड़े, लेकिन आग इतनी तेजी से फैल चुकी थी कि अंदर जाना असंभव हो गया। उनकी आंखों के सामने ड्राइवर भी स्टीयरिंग में फंसा रह गया और जिंदा जल गया। चंद्रप्रकाश कहते हैं कि हादसे के बाद के वे सात-आठ मिनट उनकी पूरी जिंदगी बदल देने वाले थे। मोबाइल, सामान और जीवनसाथी—सब कुछ एक साथ छिन गया। सबसे ज्यादा पीड़ा इस बात की रही कि आसपास मौजूद कई लोग वीडियो बनाते रहे, लेकिन मदद के लिए बहुत कम लोग आगे आए। आखिरकार एक युवक ने उन्हें अपना मोबाइल दिया, जिससे उन्होंने बेटे को फोन कर सिर्फ इतना कहा—”बहुत बड़ा हादसा हो गया है।” करीब 44 वर्षों तक साथ निभाने वाली निर्मला गुप्ता को याद करते हुए उनकी आंखें भर आती हैं। वे बताते हैं कि बच्चों की पढ़ाई से लेकर परिवार की हर जिम्मेदारी उन्होंने पूरी निष्ठा से निभाई। तीनों बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने और जीवन में आगे बढ़ाने में उनका सबसे बड़ा योगदान था। सरल स्वभाव, सादगी और परिवार के प्रति समर्पण ही उनकी पहचान थी। आज चंद्रप्रकाश गुप्ता के लिए चारधाम यात्रा की यादें आस्था से ज्यादा एक ऐसे दर्द की कहानी बन चुकी हैं, जिसने कुछ ही मिनटों में उनका पूरा संसार बदल दिया। उनके शब्दों में, “हम घर लौट रहे थे… लेकिन एक पल में सब खत्म हो गया।”
मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कीमती धातुओं में नरमी, सोना-चांदी शुरुआती कारोबार में फिसले, निवेशकों की नजर वैश्विक घटनाक्रम पर

नई दिल्ली । मध्यपूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता के बीच शुक्रवार को घरेलू सर्राफा बाजार की शुरुआत नरमी के साथ हुई। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में शुरुआती कारोबार के दौरान गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दोनों धातुओं में गिरावट की तीव्रता अलग-अलग रही, लेकिन शुरुआती रुझान निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाते रहे। एमसीएक्स पर सोने का अगस्त 2026 वायदा अनुबंध पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले कमजोर स्तर पर खुला। शुरुआती कारोबार में इसकी कीमत लगातार दबाव में रही और कुछ ही समय में गिरावट बढ़कर लगभग आधा प्रतिशत के करीब पहुंच गई। कारोबार के दौरान सोने का भाव प्रति 10 ग्राम लगभग 1.44 लाख रुपये के स्तर के आसपास पहुंच गया। इससे स्पष्ट हुआ कि वैश्विक तनाव के बावजूद निवेशकों की खरीदारी सीमित रही और बाजार में मुनाफावसूली का असर दिखाई दिया। चांदी के वायदा कारोबार में भी नरमी देखने को मिली। हालांकि इसकी गिरावट सोने की तुलना में अपेक्षाकृत कम रही। सितंबर डिलीवरी वाले अनुबंध में शुरुआती कारोबार के दौरान मामूली कमजोरी दर्ज की गई और कीमतें पिछले बंद स्तर से नीचे कारोबार करती रहीं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि चांदी की कीमतों पर औद्योगिक मांग और अंतरराष्ट्रीय रुझानों का भी महत्वपूर्ण प्रभाव रहता है, जिसके कारण इसमें उतार-चढ़ाव की प्रकृति सोने से कुछ अलग दिखाई देती है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी दोनों कीमती धातुओं का प्रदर्शन मिश्रित रहा। वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में हल्की कमजोरी दर्ज की गई, जबकि चांदी सीमित बढ़त के साथ कारोबार करती दिखाई दी। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक फिलहाल वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, अमेरिकी मौद्रिक नीति और भू-राजनीतिक घटनाक्रम का आकलन करते हुए सतर्क रणनीति अपना रहे हैं। मध्यपूर्व में हाल के दिनों में बढ़े सैन्य तनाव ने वैश्विक वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ाई है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों के तेज होने और जवाबी कार्रवाइयों के बाद निवेशकों की नजर लगातार घटनाक्रम पर बनी हुई है। ऐसे समय में सामान्यतः सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, लेकिन बाजार में मुनाफावसूली, डॉलर की चाल और निवेशकों की रणनीति जैसे अन्य कारक भी कीमतों को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कीमती धातुओं की कीमतें केवल भू-राजनीतिक घटनाओं से ही तय नहीं होतीं, बल्कि वैश्विक ब्याज दरों, डॉलर इंडेक्स, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता जैसे कई आर्थिक कारकों का भी उन पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इसलिए किसी एक घटना के आधार पर कीमतों की दिशा तय करना उचित नहीं माना जाता। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर मध्यपूर्व की स्थिति, वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार के रुख पर बनी रहेगी। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है या वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में कोई बड़ा बदलाव आता है, तो इसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक प्रत्येक नए घटनाक्रम का इंतजार कर रहे हैं, जिससे आगे की कीमतों की दिशा स्पष्ट हो सके।
नाना पटवारी ने मानी पुरानी ड्रग्स की लत, बोले- रिहैब के बाद छोड़ा नशा; कांग्रेस ने पुलिस कार्रवाई को बताया राजनीतिक प्रतिशोध

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। शुक्रवार को इंदौर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना पटवारी ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि वे करीब तीन साल पहले तक ड्रग्स का सेवन करते थे, लेकिन रिहैब सेंटर में इलाज के बाद उन्होंने नशा पूरी तरह छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि आज उनका ड्रग तस्करी से कोई संबंध नहीं है और उनकी सबसे बड़ी गलती सिर्फ इतनी है कि वे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में नाना पटवारी ने दावा किया कि ड्रग्स मामले में गिरफ्तार आरोपियों से उनका कोई लेन-देन या संबंध नहीं है। उन्होंने बताया कि वे अपनी कार की सर्विसिंग कराने गए थे, तभी पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई। उनके अनुसार थाने में उनसे केवल सामान्य पूछताछ की गई, लेकिन हिरासत में लेने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे दिन उन्हें अलग-अलग स्थानों पर घुमाया गया और देर रात बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया। नाना पटवारी ने कहा कि उनकी कार संजय कौशल उर्फ रॉनी के सर्विस सेंटर पर सर्विस होती है और वहीं काम करने वाले कुछ लोगों के बारे में पुलिस ने उनसे पूछताछ की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस स्कॉर्पियो वाहन की चर्चा हो रही है, वह उनकी नहीं बल्कि संजय कौशल की है और उसमें मिले किसी भी सामान से उनका कोई संबंध नहीं है। इस पूरे मामले को कांग्रेस ने राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार सत्ता का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं और उनके परिवारों को निशाना बना रही है। उनका कहना है कि नाना पटवारी का ड्रग तस्करी प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें केवल राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से हिरासत में लिया गया। दूसरी ओर इंदौर पुलिस का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह जांच के आधार पर की गई। डीसीपी नरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक राजेंद्र नगर क्षेत्र से ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार दो आरोपियों इरफान खान उर्फ गोलू चंदेरी और संजय कौशल उर्फ रॉनी ने पूछताछ के दौरान नाना पटवारी और मानव गंगवानी का नाम लिया था। इसी आधार पर दोनों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। पुलिस ने बताया कि फिलहाल कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है और जांच में जिसकी भूमिका सामने आएगी, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। नाना पटवारी पहले भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनके खिलाफ हत्या के प्रयास सहित लगभग दस आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आ चुकी है। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें एक पुराने मामले में गिरफ्तार किया गया था। वहीं वर्ष 2025 में जमीन विवाद और 2018 में महिला से कथित अभद्रता के मामले में भी उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। उनका नाम खुशी कूलवाल आत्महत्या मामले की जांच के दौरान भी सामने आया था, हालांकि उस मामले में उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रही है, जबकि पुलिस का कहना है कि जांच तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है।
रियल्टी सेक्टर में Oberoi Realty की मजबूत उड़ान, तकनीकी संकेतों से बढ़ा भरोसा; जानकारों ने ₹2,000 से ऊपर का लक्ष्य बताया

नई दिल्ली । शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच रियल एस्टेट क्षेत्र की प्रमुख कंपनी Oberoi Realty के शेयर निवेशकों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कंपनी के शेयरों में लगातार खरीदारी देखने को मिल रही है, जिसके चलते स्टॉक ने हाल ही में अपना नया 52-वीक हाई दर्ज किया है। बाजार खुलने के बाद भी शेयर मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया और निवेशकों का भरोसा इस काउंटर पर बना रहा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा तकनीकी संकेत आगे भी तेजी की संभावना की ओर इशारा कर रहे हैं। शुरुआती कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर लगभग 1.60 प्रतिशत की बढ़त के साथ करीब ₹1,904 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। हाल के दिनों में स्टॉक ने जिस तरह लगातार ऊंचे स्तर बनाए हैं, उससे यह संकेत मिल रहा है कि निवेशकों की दिलचस्पी इस शेयर में लगातार बढ़ रही है। मजबूत खरीदारी और सकारात्मक बाजार धारणा ने शेयर की चाल को और मजबूती दी है। तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार Oberoi Realty के साप्ताहिक चार्ट पर Inverse Head & Shoulders पैटर्न विकसित होता दिखाई दे रहा है। यह पैटर्न आमतौर पर तेजी का संकेत माना जाता है और इसके बनने के बाद स्टॉक में आगे भी अच्छी बढ़त देखने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शेयर इस संरचना की पुष्टि करता है तो आने वाले समय में इसमें नई तेजी का दौर शुरू हो सकता है। बाजार जानकारों का मानना है कि शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए यह स्टॉक अवसर प्रदान कर सकता है। उनका कहना है कि यदि मौजूदा तेजी बरकरार रहती है और शेयर महत्वपूर्ण स्तरों के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो निकट अवधि में इसका भाव ₹2,000 के स्तर को पार कर सकता है। हालांकि किसी भी निवेश निर्णय से पहले जोखिम प्रबंधन और उचित स्टॉप-लॉस का पालन करना आवश्यक माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी शेयर में केवल तकनीकी संकेतों के आधार पर निवेश करना पर्याप्त नहीं होता। निवेशकों को कंपनी के मूलभूत प्रदर्शन, रियल एस्टेट सेक्टर की स्थिति, आर्थिक माहौल और बाजार की समग्र दिशा पर भी ध्यान देना चाहिए। यदि व्यापक बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहता है तो ऐसे मजबूत शेयरों में निवेशकों की रुचि और बढ़ सकती है। रियल एस्टेट सेक्टर में पिछले कुछ समय से बेहतर गतिविधियां देखने को मिली हैं, जिसका लाभ कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों को मिला है। Oberoi Realty भी इसी सकारात्मक माहौल का फायदा उठाने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल है। कंपनी के शेयरों में लगातार बनी हुई मजबूती यह संकेत देती है कि बाजार प्रतिभागी इसके भविष्य को लेकर आशावादी नजर आ रहे हैं। हालांकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक प्रक्रिया है, इसलिए निवेशकों को किसी भी प्रकार का निर्णय सोच-समझकर और अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुरूप ही लेना चाहिए। आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की निगाह इस बात पर रहेगी कि क्या Oberoi Realty का शेयर ₹2,000 के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर नई ऊंचाई हासिल करने में सफल होता है या नहीं।
खेती छोड़ बना ड्रग तस्कर, मंदसौर से ब्राउन शुगर लाकर इंदौर में करता था सप्लाई, 11 लाख का माल जब्त

मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में नशे के कारोबार पर शिकंजा कसने के अभियान के तहत इंदौर पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। खजराना थाना पुलिस ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए 110 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। बरामद मादक पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 11 लाख रुपए आंकी गई है। शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया है कि वह मंदसौर से सस्ते दामों पर ब्राउन शुगर खरीदकर इंदौर में ऊंचे दामों पर बेचता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस अवैध कारोबार के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस के अनुसार मुखबिर से सूचना मिली थी कि बायपास स्थित वाघेला गार्डन के पास एक युवक बड़ी मात्रा में ब्राउन शुगर लेकर ग्राहकों की तलाश में घूम रहा है। सूचना मिलते ही खजराना थाना पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की और संदिग्ध युवक को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 110 ग्राम ब्राउन शुगर और एक मोबाइल फोन बरामद किया गया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 28 वर्षीय रामकिशन उर्फ रामनिवास गिरी निवासी ग्राम काटिया थाना सुवासरा जिला मंदसौर के रूप में हुई है। वह आठवीं तक पढ़ा है और खेती का काम करता था। पूछताछ में उसने बताया कि वह स्वयं भी नशे का आदी है। इसी लत और जल्दी पैसा कमाने की चाहत ने उसे नशे के कारोबार में धकेल दिया। आरोपी ने स्वीकार किया कि वह मंदसौर के कोटड़ी क्षेत्र से ब्राउन शुगर खरीदकर इंदौर लाता था और यहां अधिक कीमत पर बेचकर मोटा मुनाफा कमाता था। थाना प्रभारी मनोज सिंह सेंधव ने बताया कि आरोपी को पुलिस रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य ब्राउन शुगर की सप्लाई चेन का पता लगाना और उन लोगों की पहचान करना है जो इस अवैध कारोबार से जुड़े हुए हैं। पुलिस आरोपी के मोबाइल फोन की भी जांच कर रही है ताकि उसके संपर्क में रहने वाले सप्लायरों और ग्राहकों तक पहुंचा जा सके। इंदौर पुलिस का कहना है कि शहर में नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास नशे की खरीद-फरोख्त या संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। जनसहयोग और सख्त कार्रवाई के जरिए ही युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सकता है और समाज को इस गंभीर खतरे से सुरक्षित रखा जा सकता है।
Q1 नतीजों से पहले इन 9 शेयरों पर बढ़ा भरोसा, Ratnamani Metals और L&T समेत कई दिग्गज कंपनियों की रेटिंग में सुधार से निवेशकों की बढ़ीं उम्मीदें

नई दिल्ली । पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों का दौर शुरू होने के साथ ही शेयर बाजार की नजर अब कंपनियों के प्रदर्शन पर केंद्रित हो गई है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियों के बावजूद घरेलू निवेशकों का ध्यान उन कंपनियों पर है जिनसे बेहतर आय और मजबूत भविष्य की उम्मीद की जा रही है। ऐसे माहौल में कई प्रमुख कंपनियों के शेयरों को लेकर विश्लेषकों का भरोसा पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुआ है, जिससे निवेशकों की दिलचस्पी भी बढ़ती दिखाई दे रही है। हालिया मूल्यांकन के अनुसार नौ बड़ी और मिडकैप कंपनियों की औसत रेटिंग पिछले एक महीने में बेहतर हुई है। इनमें Ratnamani Metals, Larsen & Toubro, Atul Ltd, Jio Financial Services, Maruti Suzuki, Bharti Airtel और अन्य प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। रेटिंग में सुधार इस बात का संकेत माना जाता है कि बाजार विशेषज्ञ इन कंपनियों की कारोबारी स्थिति, आय क्षमता और आने वाले समय में विकास की संभावनाओं को पहले से अधिक मजबूत मान रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि पहली तिमाही के नतीजे इस बार बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। जिन कंपनियों की आय अनुमान से बेहतर रहेगी या जो आने वाली तिमाहियों के लिए सकारात्मक मार्गदर्शन देंगी, उनके शेयरों में बेहतर प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि निवेशक केवल बाजार की दैनिक चाल पर ध्यान देने के बजाय मजबूत बुनियादी स्थिति वाली कंपनियों की पहचान करने पर अधिक जोर दे रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, मेटल, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कंपनियों में सकारात्मक रुझान दिखाई देना इस बात का संकेत है कि विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। बड़े प्रोजेक्ट, बढ़ती मांग, पूंजीगत निवेश और बेहतर परिचालन क्षमता जैसी बातें इन कंपनियों के पक्ष में काम कर रही हैं। इसी वजह से कई ब्रोकरेज और रिसर्च संस्थानों ने इनके प्रति अपना दृष्टिकोण पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक किया है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल रेटिंग में सुधार के आधार पर निवेश का निर्णय लेना उचित नहीं होगा। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, आय में वृद्धि, नकदी प्रवाह, कर्ज का स्तर, प्रबंधन की रणनीति और उद्योग की संभावनाओं का भी सावधानी से आकलन करना चाहिए। हालांकि किसी शेयर की रेटिंग में लगातार सुधार यह संकेत जरूर देता है कि उसके मूलभूत कारकों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में विभिन्न क्षेत्रों की बड़ी कंपनियां अपने तिमाही नतीजे घोषित करेंगी। इन परिणामों से यह स्पष्ट होगा कि कंपनियां बदलते वैश्विक और घरेलू आर्थिक माहौल में किस तरह प्रदर्शन कर रही हैं। यदि उम्मीद के अनुरूप या उससे बेहतर नतीजे सामने आते हैं तो बाजार में निवेशकों का विश्वास और मजबूत हो सकता है। ऐसे समय में मजबूत फंडामेंटल, स्थिर कारोबार और बेहतर विकास क्षमता वाली कंपनियां निवेशकों की पहली पसंद बन सकती हैं, जबकि कमजोर प्रदर्शन करने वाली कंपनियों पर दबाव भी बढ़ सकता है। कुल मिलाकर पहली तिमाही के नतीजे आने वाले सप्ताहों में शेयर बाजार की दिशा और निवेशकों की रणनीति तय करने में अहम भूमिका निभाने वाले हैं।