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घर में सुख समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा चाहते हैं तो अपनाएं ये आसान वास्तु टिप्स बदल सकती है आपकी किस्मत

नई दिल्ली । भारतीय संस्कृति में वास्तु शास्त्र का विशेष महत्व माना गया है। प्राचीन समय से ही घर निर्माण और गृह व्यवस्था में दिशाओं तथा प्राकृतिक ऊर्जा का ध्यान रखने की परंपरा रही है। धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यदि घर का वातावरण संतुलित और व्यवस्थित हो तो परिवार के सदस्यों के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि वास्तु संबंधी मान्यताएं धार्मिक और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं और इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नियम नहीं माना जाता लेकिन आज भी बड़ी संख्या में लोग इनका पालन करते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मुख्य प्रवेश द्वार साफ सुथरा और आकर्षक होना चाहिए क्योंकि इसे सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का माध्यम माना जाता है। मुख्य द्वार के आसपास गंदगी या टूटे फूटे सामान नहीं रखने चाहिए। नियमित रूप से सफाई करने और प्रवेश द्वार पर शुभ प्रतीक लगाने की परंपरा भी इसी मान्यता से जुड़ी हुई है। पूजा घर को घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा का स्थान उत्तर पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। यहां स्वच्छता बनाए रखना और प्रतिदिन दीपक तथा धूप जलाना सकारात्मक वातावरण बनाने का प्रतीक माना जाता है। पूजा स्थल के आसपास अनावश्यक सामान रखने से बचना चाहिए ताकि स्थान शांत और व्यवस्थित बना रहे। रसोई को भी घर की समृद्धि से जोड़ा जाता है। वास्तु के अनुसार भोजन बनाते समय पूर्व दिशा की ओर मुख रखना शुभ माना जाता है। रसोई में स्वच्छता बनाए रखना और गैस चूल्हे तथा पानी के स्रोत को उचित दूरी पर रखना संतुलन का प्रतीक माना जाता है। रसोई में बासी भोजन और टूटे बर्तन लंबे समय तक नहीं रखने की सलाह दी जाती है। शयन कक्ष में भी कुछ सामान्य बातों का ध्यान रखना लाभकारी माना जाता है। बिस्तर के सामने टूटा हुआ दर्पण या अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक सामान रखने से बचना चाहिए। कमरा साफ सुथरा और हवादार हो तो मानसिक शांति और बेहतर वातावरण का अनुभव होता है। वास्तु के अनुसार दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना शुभ माना जाता है। घर में प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का प्रवेश भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सुबह खिड़कियां खोलने से घर का वातावरण ताजा रहता है और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। कई लोग घर में तुलसी का पौधा लगाना भी शुभ मानते हैं क्योंकि यह धार्मिक आस्था के साथ साथ पर्यावरण के लिए भी लाभकारी माना जाता है। वास्तु शास्त्र अनावश्यक वस्तुओं को लंबे समय तक घर में जमा रखने से बचने की सलाह देता है। टूटे फर्नीचर खराब घड़ी बंद इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या बेकार सामान घर में अव्यवस्था बढ़ाते हैं। नियमित रूप से ऐसे सामान हटाने से घर अधिक व्यवस्थित और खुला महसूस होता है। स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण मानसिक संतुलन बनाए रखने में भी मदद करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में प्रेम सहयोग और सम्मान का वातावरण सबसे बड़ा वास्तु उपाय माना जाता है। यदि परिवार के सदस्य आपसी विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ रहते हैं तो घर में सुख शांति का माहौल बना रहता है। इसलिए वास्तु के साथ साथ अच्छे व्यवहार ईमानदारी और सकारात्मक जीवनशैली को भी समान महत्व देना चाहिए। यही बातें किसी भी घर को खुशहाल और ऊर्जावान बनाने की सबसे बड़ी कुंजी मानी जाती हैं।

Weather Update 11 July बारिश का डबल अलर्ट कई राज्यों में गरज चमक के साथ झमाझम बारिश की संभावना

मध्यप्रदेश । 11 जुलाई को देश के अधिकांश हिस्सों में मानसून पूरी तरह सक्रिय रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत मध्य भारत पश्चिम भारत और दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहेगा। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश और 40 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है। दिल्ली एनसीआर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड मध्य प्रदेश राजस्थान बिहार झारखंड पश्चिम बंगाल महाराष्ट्र गुजरात कर्नाटक तमिलनाडु और केरल समेत कई राज्यों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है। कुछ इलाकों में जलभराव बिजली गिरने और तेज हवाओं की आशंका भी जताई गई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के कारण कई जिलों में जलभराव और नदी नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। वहीं मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी अच्छी बारिश होने की संभावना है जिससे किसानों को राहत मिल सकती है लेकिन अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सतर्क रहने की जरूरत होगी। दक्षिण भारत में कर्नाटक तमिलनाडु और केरल के कई इलाकों में भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है। पश्चिमी तट के कोंकण और गोवा क्षेत्र में भी तेज बारिश की संभावना है। मौसम विभाग ने समुद्र में जाने वाले मछुआरों को स्थानीय चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सक्रिय मानसून प्रणाली के कारण अगले कुछ दिनों तक देश के बड़े हिस्से में बारिश का सिलसिला बना रह सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में 15 जुलाई के बाद वर्षा की तीव्रता में बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल लोगों को बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों से दूर रहने सुरक्षित स्थान पर शरण लेने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की सलाह दी गई है।

बाघ की खाल से भस्म तक… महादेव के ये 10 प्रतीक बताते हैं जीवन, मृत्यु और ब्रह्मांड के गहरे रहस्य

नई दिल्‍ली । महादेव जो कुछ भी धारण करते हैं उसका बड़ा अर्थ होता है. शिव जी का स्वरूप अन्य सभी देवी-देवताओं से अलग और विचित्र है. गले में सांप, जटा में गंगा और मस्तक पर चंद्रमा का होना अपने भीतर गहरे रहस्यों को छुपाए हुए है. लेकिन क्या आपको पता है कि महादेव की धारण की हुई 10 प्रतीकों का क्या मतलब है. ब्रह्मांड, जीवन और मृत्यु के गहरे रहस्यों को दर्शाने वाले डमरू से लेकर भस्म तक महादेव के इन 10 मुख्य प्रतीकों का क्या अर्थ है. आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। महादेव के 10 मुख्य प्रतीक1. जटाएं: शिव जी की जटाएं उसकी सबसे बड़ी पहचान है जो अंतरिक्ष को दर्शाता है. 2. चंद्र: शिव जी के मस्तक पर स्थित चंद्रमा व्यक्ति के मन का प्रतीक है जो समय चक्र, मन के नियंत्रण, और शीतलता को दर्शाता है. 3. त्रिनेत्र: शिव की तीन आंखें भौतिक संसार से परे दिव्य दृष्टि, सर्वज्ञान और संतुलन को दर्शाती हैं. मान्यता है कि महादेव के त्रिनेत्र तीन गुणों का भी प्रतीक है- सत्व, रज, तम. त्रिनेत्र तीन कालों को भी दर्शाता है- भूत, वर्तमान, भविष्य. तीनों लोकों के बारे में भी बताता है- स्वर्ग, मृत्यु पाताल. 4. सर्पहार: सर्प जैसा हिंसक जीव महादेव के गले में विराजता है जो तमोगुणी व संहारक होकर भी शिव जी के वश में है और उनकी भक्ति में लीन है. नागराज वासुका का महादेव के गले में होना नियंत्रण और संतुलन को दर्शाता है. 5. त्रिशूल: शिव के हाथ में एक शस्त्र भी है, वह मारक शस्त्र त्रिशूल है जो भौतिक, दैविक, आध्यात्मिक इन तीनों तापों को नष्ट करने की शक्ति रखता है. 6. डमरू: शिव जी एक हाथ में डमरू धारण करते हैं जो तांडव के समय बजाते हैं. डमरू का नाद ब्रह्मा रूप माना गया है. यह डमरू सृष्टि के निर्माण, ब्रह्मांड की लय और चेतना का प्रतीक है. 7. मुंडमाला: शिव जी के गले में मुंडमाला का होना सती के अटूट प्रेम और अमरता को दर्शाता है. यह मुंडमाला इस बात का प्रतीक है कि शिव जी ने मृत्यु को अपने वश में किया हुआ है. 8. छाल: शिव जी अपने शरीर पर व्याघ्र चर्म यानी बाघ की खाल धारण करते हैं. बाघ एक हिंसक जानवर है जो अहंकार को भी दर्शाता है. जिसका मतलब है कि शिव ने हिंसा और अहंकार का दमन कर उसे अपने नीचे दबाया हुआ है. संसार के हर व्यक्ति को अपने भीतर की हिंसक भावना को अपने नीचे दबा देना चाहिए. 9. भस्म: महादेव अपने शरीर पर भस्म लगाते हैं. शिवलिंग का अभिषेक भी भस्म करने का विधान है. भस्म जीवन के गहरे रहस्य को बताता है. यह भस्म बताता है कि संसार नश्वर है. 10. वृषभ: शिव का वाहन वृषभ है यानी बैल दो शिव जी के साथ-साथ होता है. बैल धर्म का प्रतीक माना गया है जिस पर महादेव सवारी करते हैं. बैल के 4 पैर धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को बताता है जो महादेव की कृपा से प्राप्त होती है. (डिस्क्लेमर- यह सामग्री धार्मिक मान्यताओं, प्रचलित परंपराओं एवं उपलब्ध धार्मिक स्रोतों पर आधारित है. विभिन्न क्षेत्रों, समुदायों और परंपराओं के अनुसार मान्यताओं में अंतर संभव है.)

Datiya By-Poll: नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का बवाल, हाईवे जाम, पुलिस पर पथराव; SDOP समेत कई घायल

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Datiya By-Poll: मध्यप्रदेश। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए बीजेपी की उम्मीदवार सूची जारी होते ही जिले का माहौल गर्मा गया। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को टिकट नहीं मिलने से उनके समर्थकों में भारी नाराजगी देखने को मिली। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन इतना बढ़ गया कि मामला पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प तक पहुंच गया। 25 किलोमीटर तक लगा हाईवे पर जाम जानकारी के मुताबिक, नाराज समर्थकों ने ग्वालियर-झांसी नेशनल हाईवे पर प्रदर्शन शुरू कर दिया। देखते ही देखते करीब 25 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। हजारों वाहन घंटों तक फंसे रहे। प्रशासन ने काफी मशक्कत के बाद करीब 10 घंटे में यातायात को सामान्य कराया। E20 पेट्रोल विवाद को लेकर संजय राउत का दावा, बोले- गडकरी की छवि को खुद BJP पहुंचा रही नुकसान पुलिस पर पथराव, कई अधिकारी घायल हालात तब और बिगड़ गए जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इस दौरान कई सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ भी हुई। पत्थरबाजी में SDOP, थाना प्रभारी समेत कई पुलिसकर्मी और अधिकारी घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। पूरे शहर में बढ़ाई गई सुरक्षा घटना के बाद दतिया में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। जिले के संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। Aaj Ka Rashifal 11 July 2026: मेष-कन्या को करियर में बड़ी सफलता, तुला को संपत्ति लाभ के योग टिकट कटने से बढ़ी नाराजगी गौरतलब है कि दतिया उपचुनाव में बीजेपी ने पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। टिकट की घोषणा के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों में नाराजगी देखी जा रही थी, जो अब सड़क पर विरोध प्रदर्शन के रूप में सामने आई है।

सात राज्यों में होने वाले हैं विधानसभा चुनाव, बिना CM चेहरे के मैदान में उतरेगी BJP, जानिए क्‍या है नई रणनीति?

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश और गुजरात समेत अगले साल होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है। पार्टी चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद के चेहरे की घोषणा करने से बचने की योजना बना रही है। इसके बजाय भाजपा सामूहिक नेतृत्व और मौजूदा संगठनात्मक ढांचे के साथ चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ चुनावों के अनुभवों को देखते हुए भाजपा नेतृत्व का मानना है कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा नहीं करने से कई बार राजनीतिक लाभ मिलता है। इससे पार्टी के भीतर संभावित गुटबाजी की आशंका कम रहती है और चुनाव अभियान को व्यापक स्तर पर चलाने में मदद मिलती है। मौजूदा मुख्यमंत्रियों को मिल सकता है मौकाभाजपा की रणनीति के अनुसार, जिन राज्यों में पार्टी की सरकार है, वहां मौजूदा मुख्यमंत्री को चुनाव अभियान में प्रमुख भूमिका दी जा सकती है। हालांकि, चुनाव से पहले यह स्पष्ट घोषणा नहीं की जाएगी कि वही नेता दोबारा मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि वर्तमान नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ना फायदेमंद रहेगा, लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर पहले से घोषणा करने से सत्ता विरोधी माहौल बनने और पार्टी के अंदर अलग-अलग धड़े सक्रिय होने की संभावना बढ़ सकती है। सत्ता वाले राज्यों को बचाने पर फोकसअगले साल देश के सात राज्यों में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें पांच राज्यों में फरवरी-मार्च के दौरान और दो राज्यों में दिसंबर में चुनाव होने हैं। भाजपा की सरकार उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर, गोवा और गुजरात में है, जबकि पंजाब और हिमाचल प्रदेश में पार्टी सत्ता में नहीं है। भाजपा का लक्ष्य अपने मौजूदा राज्यों में सरकार बनाए रखना और बाकी राज्यों में भी बेहतर प्रदर्शन करना है। नई रणनीति पर पार्टी में मंथनभाजपा नेतृत्व चुनावी रणनीति में नए बदलावों पर विचार कर रहा है। पार्टी का मानना है कि सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ने से संगठन के सभी स्तरों को सक्रिय भूमिका मिलती है और विरोधियों को किसी एक चेहरे के खिलाफ अभियान चलाने का मौका कम मिलता है। आने वाले विधानसभा चुनावों में यह रणनीति भाजपा के लिए कितनी प्रभावी साबित होगी, इसका फैसला चुनावी नतीजों के बाद ही होगा।

E20 पेट्रोल विवाद को लेकर संजय राउत का दावा, बोले- गडकरी की छवि को खुद BJP पहुंचा रही नुकसान

नई दिल्‍ली । शिवसेना यूबीटी संजय राउत (Sanjay Raut) ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Union Minister Nitin Gadkari) को लेकर एक बड़ा दावा कर दिया है। संजय राउत के मुताबिक केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की छवि को खुद भारतीय जनता पार्टी (BJP) नुकसान पहुंचाना चाहती है क्योंकि गडकरी देश के अगले प्रधानमंत्री बनने के लिए एक मजबूत दावेदार हैं। संजय राउत ने कहा है कि नितिन गडकरी को बदनाम करने के पीछे कोई बाहरी ताकत नहीं, बल्कि खुद बीजेपी के ही कुछ बड़े नेता शामिल हैं। संजय राउत ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि गडकरी को लेकर जनता के बीच जो भी भ्रम फैलाया जा रहा है, उसके पीछे उनकी अपनी ही पार्टी के लोग हैं। राउत ने कहा, “गडकरी साहब को लेकर जो भ्रम फैला है, उसमें उनके ही पार्टी के लोगों का हाथ है। नितिन गडकरी को बदनाम करने में और कोई नहीं बल्कि भारतीय जनता पार्टी के ही लोग हैं…वे उन्हें किसी न किसी तरह से एक जाल में फंसाना चाहते हैं।” 2014 से पहले का दिया हवालाराउत ने अतीत का जिक्र करते हुए कहा, “2014 से पहले भी जब गडकरी को पार्टी अध्यक्ष के रूप में दूसरे कार्यकाल देने की चर्चा चल रही थी, तब भी उन्हें इसी तरह फंसाने की कोशिशें हुईं।” उन्होंने दावा किया कि नितिन गडकरी की लोकप्रियता अच्छी है और वे पीएम पद के अगले दावेदार हो सकते थे इसलिए भाजपा खुद ही साजिश रच रही। राउत ने कहा, “वे पीएम पद के एक मजबूत दावेदार हैं, इसलिए उन्हें इतना बदनाम कर दो कि जनता के बीच उनकी छवि खराब हो जाए। ये उनकी ही पार्टी के लोग कह रहे हैं। उनको भी सब पता है।” नितिन गडकरी क्यों चर्चा में?गौरतलब है कि नितिन गडकरी केंद्रीय मंत्री इन दिनों E20 पेट्रोल (20% एथेनॉल ब्लेंडेड फ्यूल) को लेकर विवादों में हैं। दरअसल भारत सरकार ने देश में 20 फीसदी एथेनॉल मिले हुए पेट्रोल को अनिवार्य कर दिया है। सरकार के इस कदम का खूब विरोध हो रहा है। हालांकि नितिन गडकरी ने सार्वजनिक रूप से चुनौती दी है कि E20 फ्यूल से गाड़ियों में कोई खराबी नहीं आती है। इस चुनौती के बाद बहस और तेज हो गई है। वाहन मालिकों का आरोप है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ियों के माइलेज में गिरावट आ रही है, पुरानी गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंच रहा है और लोगों को जबरन इसे अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आरोप हैं कि नितिन गडकरी के इसमें निजी हित भी हैं।

स्किन केयर में नींबू का सही उपयोग देगा प्राकृतिक निखार जानिए किन बातों का रखना चाहिए विशेष ध्यान

नई दिल्ली । स्किन केयर की दुनिया में नींबू का नाम लंबे समय से प्राकृतिक घरेलू उपायों में शामिल रहा है। विटामिन सी और साइट्रिक एसिड से भरपूर नींबू को कई लोग त्वचा की चमक बढ़ाने और अतिरिक्त तेल को कम करने के लिए उपयोग करते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नींबू हर व्यक्ति की त्वचा पर एक जैसा असर नहीं करता इसलिए इसका इस्तेमाल सोच समझकर और सावधानी के साथ करना चाहिए। सही तरीके से उपयोग करने पर यह त्वचा की देखभाल में सहायक हो सकता है जबकि गलत इस्तेमाल त्वचा में जलन और संवेदनशीलता बढ़ा सकता है। नींबू में मौजूद विटामिन सी त्वचा को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। यह कोलेजन बनने की प्रक्रिया में भी भूमिका निभाता है जिससे त्वचा अधिक स्वस्थ और ताजगी भरी दिखाई दे सकती है। कई लोग इसे त्वचा की रंगत को समान दिखाने और हल्के दाग धब्बों को कम करने के लिए घरेलू नुस्खों में शामिल करते हैं लेकिन इसके प्रभाव व्यक्ति की त्वचा और समस्या के अनुसार अलग अलग हो सकते हैं। यदि आपकी त्वचा सामान्य या तैलीय है तो नींबू का उपयोग हमेशा किसी अन्य प्राकृतिक सामग्री जैसे शहद दही एलोवेरा जेल या गुलाब जल के साथ मिलाकर करना बेहतर माना जाता है। सीधे नींबू का रस चेहरे पर लगाने से त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा परत प्रभावित हो सकती है और जलन या लालपन की समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए किसी भी घरेलू फेस पैक में इसकी मात्रा सीमित रखना उचित माना जाता है। नींबू का उपयोग करने से पहले त्वचा के छोटे हिस्से पर पैच टेस्ट करना एक अच्छी आदत है। यदि कुछ घंटों तक किसी तरह की खुजली जलन या एलर्जी महसूस न हो तभी इसका सीमित उपयोग करना चाहिए। जिन लोगों की त्वचा बहुत अधिक संवेदनशील या पहले से किसी त्वचा रोग से प्रभावित है उन्हें बिना विशेषज्ञ सलाह के नींबू का प्रयोग करने से बचना चाहिए। एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि नींबू लगाने के तुरंत बाद धूप में नहीं निकलना चाहिए। नींबू में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व त्वचा को सूर्य की किरणों के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकते हैं जिससे जलन या दाग बनने का खतरा बढ़ सकता है। यदि दिन के समय इसका उपयोग किया जाए तो बाद में चेहरा अच्छी तरह धोकर सनस्क्रीन लगाना जरूरी माना जाता है। त्वचा की देखभाल केवल किसी एक घरेलू उपाय पर निर्भर नहीं करती। पर्याप्त पानी पीना संतुलित भोजन करना अच्छी नींद लेना नियमित रूप से चेहरा साफ रखना और धूप से बचाव करना भी स्वस्थ त्वचा के लिए उतना ही आवश्यक है। यदि मुंहासे पिगमेंटेशन या अन्य त्वचा संबंधी समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें तो घरेलू उपायों के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना अधिक उचित रहता है। नींबू एक प्राकृतिक सामग्री है लेकिन प्राकृतिक होने का अर्थ यह नहीं कि वह हर व्यक्ति के लिए पूरी तरह सुरक्षित या उपयुक्त हो। इसलिए इसका उपयोग हमेशा संयम और सावधानी के साथ करना चाहिए। सही जानकारी और संतुलित स्किन केयर रूटीन अपनाकर ही त्वचा को लंबे समय तक स्वस्थ चमकदार और सुंदर बनाए रखा जा सकता है।

न्यूयॉर्क में AC पर 'बैन' का खतरा मंडराया, मेयर Mamdani ने दी चेतावनी, मचा हड़कंप

नई दिल्‍ली । New York इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी से जूझ रहा है. तापमान 100 डिग्री और हीट इंडेक्स 112 डिग्री तक पहुंचने का अनुमान है. इस बीच, शहर के नए मेयर ज़ोहरान मम्दानी (Zohran Mamdani) ने न्यू यॉर्कर्स के लिए एक बेहद जरूरी और कड़ा संदेश जारी किया है. यूरोप में हाल ही में आए AC नियमों के बाद अब न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड भी खतरे में है. मेयर ने साफ कहा है कि अगर ग्रिड को बचाना है और लोगों की जान सुरक्षित रखनी है, तो AC चलाने के तरीकों में तुरंत बदलाव करना होगा. Europe का AC नियम और New York का संकटयूरोपियन कमीशन ने हाल ही में एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत AC इंस्टॉल करने वालों को ग्राहकों को एनर्जी एफिशिएंसी की पूरी जानकारी देनी होगी. फ्रांस और स्पेन जैसे देशों में रिकॉर्ड गर्मी के कारण AC की बिक्री अचानक बहुत बढ़ गई है. अब ठीक वैसा ही संकट न्यू यॉर्क के सामने खड़ा हो गया है. न्यू यॉर्क का पावर ग्रिड इस समय शहर को ठंडा रखने के लिए अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है. Mayor Mamdani का ’78 डिग्री रूल’मेयर ज़ोहरान मम्दानी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए लोगों से अपील की है. उन्होंने लिखा कि न्यू यॉर्क में बाहर बहुत गर्मी है और हमारा पावर ग्रिड ओवरटाइम काम कर रहा है. मेयर ने सभी नागरिकों से अपने AC को 78 डिग्री पर सेट करने की अपील की है. इसके साथ ही उन्होंने इस्तेमाल में न आने वाली लाइटों और इलेक्ट्रॉनिक्स को बंद करने और प्लग निकालने के लिए कहा है. मेयर का मानना है कि ग्रिड स्थिर रहेगा तो AC चलता रहेगा और लोगों की जान बचाई जा सकेगी. सरकार खुद कर रही है नियमों का पालनइस संकट से निपटने के लिए सिर्फ आम जनता ही नहीं, बल्कि खुद न्यू यॉर्क प्रशासन भी कड़े कदम उठा रहा है. मेयर ने बताया कि सभी सरकारी इमारतों में भी 78 डिग्री का नियम लागू कर दिया गया है. पीक ऑवर्स के दौरान सरकारी दफ्तरों की लाइटें डिम या पूरी तरह बंद की जा रही हैं. गैर-जरूरी उपकरणों को पावर डाउन किया जा रहा है. प्रशासन ने न्यू यॉर्क की प्राइवेट कंपनियों से भी अपील की है कि वे इस संकट में शहर का साथ दें और बिजली की खपत कम करें. 112 डिग्री का टॉर्चर और हीट इमरजेंसीनेशनल वेदर सर्विस ने न्यू यॉर्क सिटी के लिए ‘एक्सट्रीम हीट वॉर्निंग’ जारी की है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह पिछले एक दशक की सबसे खतरनाक हीटवेव हो सकती है. गर्मी का अहसास (Heat Index) 112 डिग्री तक जा सकता है. इसके लिए शहर में ‘हीट इमरजेंसी प्लान’ एक्टिव कर दिया गया है. प्रशासन ने उन लोगों के लिए कूलिंग सेंटर्स खोले हैं, जिनके घरों में AC की सुविधा नहीं है. बुजुर्गों, बच्चों और सांस के मरीजों को घरों के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है. मेयर की कार्यशैली पर खड़े हुए सवालएक तरफ जहां मेयर मम्दानी शहर को गर्मी से बचाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यू यॉर्क का बिजनेस माहौल गरमा गया है. दुनिया के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल जेफ बेजोस (Jeff Bezos) ने न्यू यॉर्क के स्कूल सिस्टम पर सवाल उठाए हैं, जिसके बाद मेयर के साथ उनकी बहस छिड़ गई है. शार्क टैंक के केविन ओ’लेरी ने भी बेजोस का समर्थन करते हुए न्यू यॉर्क को ‘कम्पलीट डिजास्टर’ करार दिया है. ब्लैकरॉक के लैरी फिंक ने भी चेतावनी दी है कि भारी टैक्स और खराब माहौल के कारण अमीर लोग न्यू यॉर्क छोड़ सकते हैं, जिससे शहर को बड़ा आर्थिक नुकसान होगा.

Datiya bypoll election: BJP से नरोत्तम मिश्रा का टिकट केंसल, कौन हैं आशुतोष तिवारी? जो होंगे अगले उम्मीदवार

Narottam Mishra

Datiya bypoll election: मध्यप्रदेश। दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा ने अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है। जहां एक तरफ दावेदारी नरोत्तम मिश्रा का नाम चर्चा में था, वहीं दूसरी ओर बीजेपी अलग हे रणनीति बना रही थी। इसी रणनीति के तहत पार्टी ने चौंकाने वाला फैसला लेते हुए आशुतोष तिवारी को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। नरोत्तम मिश्रा ने तो नामांकन फॉर्म भी खरीद लिया था और चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं। ऐसे में ज्यादातर लोगों को यही उम्मीद थी कि टिकट उन्हें ही मिलेगा। लेकिन बीजेपी ने इस बार नए चेहरे पर भरोसा जताया। Datiya bypoll election: दतिया उपचुनाव में BJP की बढ़ी टेंशन! पूर्व BJYM अध्यक्ष ने की दावेदारी की मांग? आखिर कौन हैं आशुतोष तिवारी? आशुतोष तिवारी दतिया जिले के भांडेर इलाके से जुड़े हैं। लंबे समय से बीजेपी में सक्रिय हैं और फिलहाल प्रदेश प्रकोष्ठ प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। पार्टी में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है और उन्हें RSS का करीबी भी बताया जाता है। आशुतोष पहले मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन भी रह चुके हैं। इसके अलावा पार्टी में कई अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं, जिनमें खेती संगठन महामंत्री का पद भी शामिल है। सतना में खौफनाक कांड : पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की कर दी हत्या, 3 महीने बाद मिला कंकाल नरोत्तम मिश्रा का टिकट क्यों कटा? पार्टी ने इसकी कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई है, लेकिन सूत्रों की मानें तो बीजेपी के आंतरिक सर्वे और इंटेलिजेंस रिपोर्ट में नरोत्तम मिश्रा की स्थिति मजबूत नहीं बताई गई थी। माना जा रहा है कि इसी फीडबैक के बाद पार्टी ने उम्मीदवार बदलने का फैसला लिया। टिकट मिलने के बाद क्या बोले आशुतोष? उम्मीदवार घोषित होने के बाद आशुतोष तिवारी ने खुशी जताते हुए कहा कि वे पार्टी के एक छोटे से कार्यकर्ता हैं। पार्टी ने जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी ईमानदारी से निभाएंगे। वहीं नरोत्तम मिश्रा को लेकर उन्होंने कहा कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और चुनाव में उनका मार्गदर्शन और सहयोग मिलेगा। MP Weather: तीन दिन हल्की बारिश के आसार, 14 जुलाई से फिर तेज बारिश की संभावना कब होगा चुनाव? दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधायकी खत्म होने के बाद खाली हुई थी। इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा। 13 जुलाई नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है, जबकि 3 अगस्त को चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे। वहीं कांग्रेस भी जल्द अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर सकती है। ऐसे में दतिया का उपचुनाव इस बार काफी दिलचस्प होने वाला है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ता साम्राज्य Meta बना रहा ऐसा डेटा सेंटर जिसकी बिजली खपत चौंका देगी

नई दिल्ली । आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज रफ्तार दुनिया को नई तकनीकी ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है लेकिन इसके साथ ऊर्जा की बढ़ती मांग भी वैश्विक चिंता का विषय बनती जा रही है। फेसबुक इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा ने कनाडा में अपने पहले एआई डेटा सेंटर के निर्माण का ऐलान किया है। यह परियोजना केवल अपने आकार और निवेश के कारण ही नहीं बल्कि अपनी भारी बिजली खपत को लेकर भी चर्चा में है। कंपनी के अनुसार यह डेटा सेंटर लगभग 8 लाख घरों के बराबर बिजली की खपत करेगा जो किसी बड़े शहर की ऊर्जा जरूरत के समान मानी जा रही है। मेटा इस डेटा सेंटर का निर्माण कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में कर रही है। इस परियोजना पर 9 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया जाएगा। इसके साथ ही मेटा के दुनिया भर में डेटा सेंटरों की संख्या बढ़कर 33 हो जाएगी जबकि कनाडा में यह कंपनी का पहला डेटा सेंटर होगा। शुरुआती चरण में इसकी क्षमता 1 गीगावॉट रखी जाएगी जिसे भविष्य में बढ़ाकर 1.8 गीगावॉट तक किया जा सकता है। अल्बर्टा को इस परियोजना के लिए इसलिए चुना गया क्योंकि यहां प्राकृतिक गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और अन्य क्षेत्रों की तुलना में बिजली उत्पादन की लागत अपेक्षाकृत कम है। इसके अलावा यहां का ठंडा मौसम सर्वर को ठंडा रखने में मदद करेगा जिससे कूलिंग सिस्टम पर होने वाला खर्च कम किया जा सकेगा। बड़े डेटा सेंटरों के लिए तापमान नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण और महंगे कार्यों में से एक माना जाता है। हालांकि इस परियोजना का सबसे बड़ा मुद्दा इसकी बिजली खपत बन गया है। मेटा ने स्वीकार किया है कि यह डेटा सेंटर 8 लाख घरों के बराबर बिजली का उपयोग करेगा। इतनी बड़ी ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए कंपनी बिजली उत्पादन और स्थानीय पावर ग्रिड के विस्तार में भी निवेश करने की योजना बना रही है। इसके बावजूद पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस परियोजना को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लगातार विस्तार से प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ेगा। बिजली के अलावा डेटा सेंटरों को बड़ी मात्रा में पानी की भी आवश्यकता होती है। सर्वरों को ठंडा रखने के लिए प्रतिदिन लाखों लीटर पानी खर्च किया जाता है। हाल ही में एक बड़ी टेक कंपनी ने खुलासा किया था कि उसके डेटा सेंटरों ने एक वर्ष में अरबों गैलन पानी का उपयोग किया। ऐसे में भविष्य में बढ़ते एआई डेटा सेंटर जल संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एआई तकनीक का विस्तार और तेज होगा जिससे डेटा सेंटरों की संख्या और क्षमता दोनों बढ़ेंगी। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुमान के अनुसार वर्ष 2030 तक दुनिया भर के डेटा सेंटरों की वार्षिक बिजली खपत लगभग 945 टेरावाट घंटे तक पहुंच सकती है। यह जापान जैसे विकसित देश की कुल वार्षिक बिजली खपत से भी अधिक होगी और वर्तमान स्तर की तुलना में लगभग दोगुनी मानी जा रही है। तकनीकी प्रगति और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना आने वाले समय की सबसे बड़ी चुनौती होगी। एआई ने उद्योगों शिक्षा स्वास्थ्य और संचार के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोली हैं लेकिन इसके लिए जरूरी ऊर्जा और संसाधनों का प्रबंधन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि अब दुनिया भर में स्वच्छ ऊर्जा ग्रीन डेटा सेंटर और ऊर्जा दक्ष तकनीकों पर तेजी से काम किया जा रहा है ताकि भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर्यावरण के लिए भी टिकाऊ साबित हो सके।