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'भारत आकर लगा जैसे अपने घर में हूं, हमारा डीएनए एक जैसा है', अफगान मंत्री ने की भारत की तारीफ

नई दिल्ली। भारत दौरे पर आए अफगानिस्तान के कृषि, सिंचाई एवं पशुपालन मंत्री मौलवी अताउल्लाह ओमारी ने नई दिल्ली में आयोजित एक व्यापारिक कार्यक्रम के दौरान भारत के आतिथ्य और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत पहुंचने के बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह अपने ही देश और अपने लोगों के बीच हों। साथ ही उन्होंने दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि “हमारा डीएनए एक है।” मौलवी अताउल्लाह ओमारी पहली बार भारत की यात्रा पर आए हैं। विदेश मंत्रालय के सहयोग से PHDCCI द्वारा आयोजित भारत-अफगानिस्तान व्यापार अवसर उद्योग इंटरैक्टिव सेशन में उन्होंने कहा कि भारत सरकार, विदेश मंत्री और यहां के लोगों ने उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके अनुसार यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे अफगानिस्तान के लोगों के लिए सकारात्मक संदेश है। भारत-अफगानिस्तान संबंधों पर दिया जोरअपने संबोधन में ओमारी ने कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध हैं। उन्होंने कहा कि भारत में उन्हें अपनापन महसूस हुआ और दोनों देशों के लोगों के बीच गहरा जुड़ाव दिखाई देता है। उनके अनुसार यह रिश्ते भविष्य में भी सहयोग को नई मजबूती दे सकते हैं। कृषि क्षेत्र में भारत से मांगा सहयोगअफगान मंत्री ने कहा कि उनके देश की लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि, पशुपालन और सिंचाई पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि अफगानिस्तान अपने कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ना चाहता है और इस दिशा में भारत की विशेषज्ञता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। संयुक्त समिति की बैठक के बाद आया बयानओमारी का यह बयान भारत और अफगानिस्तान के बीच संयुक्त समिति की चौथी बैठक के अगले दिन सामने आया। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के संयुक्त सचिव एम. आनंद प्रकाश और अफगानिस्तान की ओर से विदेश मंत्रालय के महानिदेशक शुएब बयारलाई ने की। कई अहम क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चाविदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक में मानवीय सहायता, विकास साझेदारी, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, खेल, व्यापार, वीजा सुविधा और क्षेत्रीय संपर्क जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। भारत ने दोहराया कि वह अफगानिस्तान के विकास और वहां के लोगों के कल्याण के लिए सहयोग जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

सतना में खौफनाक कांड : पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर पति की कर दी हत्या, 3 महीने बाद मिला कंकाल

सतना । सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र से तीन महीने पहले लापता हुए युवक विपिन कुमार यादव की गुमशुदगी के मामले में पुलिस ने एक बेहद सनसनीखेज खुलासा किया है. पुलिस की सघन जांच में सामने आया कि युवक की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसकी अपनी ही पत्नी आंचल यादव ने अपने प्रेमी सुनील कुशवाहा के साथ मिलकर कराई थी. शादी से पहले से चल रहे प्रेम प्रसंग के कारण दोनों ने मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया. योजना के मुताबिक प्रेमी सुनील अपने साथी संदीप बहरोलिया के साथ मिलकर विपिन को घुमाने के बहाने ले गया और उसकी हत्या कर दी. आरोपियों ने पकड़े जाने के डर से शव को पहले एक कुएं में फेंक दिया था, लेकिन जब पुलिस की जांच तेज हुई तो उन्होंने शव को कुएं से निकालकर जमीन में दफन कर दिया था. पुलिस ने कार्यपालक दंडाधिकारी की मौजूदगी में दफन किए गए स्थान की खुदाई करवाकर मृतक का शव बरामद कर लिया है. इस मामले में तत्परता दिखाते हुए पुलिस ने आरोपी पत्नी आंचल यादव और उसके प्रेमी सुनील कुशवाहा को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस ने महिला और उसके प्रेमी को भेजा जेलदोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया. जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है. पुलिस के मुताबिक युवक विपिन यादव 26 मार्च को गायब हो गया था. उसके पिता द्वारा उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई थी. गुम इंसान की जांच के दौरान थाना प्रभारी को यह तथ्य आए कि उसकी पत्नी टीकर की रहने वाली थी और उसका टीकर के ही एक व्यक्ति के साथ में अवैध संबंध थे. शक के आधार पर मृतक की पत्नी को हिरासत में ले लिया गया और कड़ाई से पूछताछ के बाद उसने पूरा राज उगल दिया. जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया. मामले में पुलिस ने मजिस्ट्रेट से परमिशन लेकर शव उत्खनन की कार्रवाई की गई है. उत्खनन की कार्रवाई के दौरान कंकाल बरामद हुआ है. फिलहाल मामले में महिला और उसके प्रेमी को न्यायिक हिरासत में भेजने के बाद जेल भेज दिया गया है.

विकसित भारत का सपना तभी होगा साकार जब जनसंख्या और संसाधनों के बीच बनेगा संतुलन

– विश्व जनसंख्या दिवस 2026 हर वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है ताकि दुनिया को बढ़ती आबादी और उससे जुड़ी चुनौतियों के प्रति जागरूक किया जा सके। वर्ष 2026 की थीम युवाओं की उम्मीदों और आकांक्षाओं को साकार करना आज और भविष्य के लिए है। यह संदेश बताता है कि किसी भी देश की वास्तविक ताकत केवल उसकी आबादी की संख्या नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता होती है। यदि युवा शिक्षित स्वस्थ कुशल और आत्मनिर्भर होंगे तो वही देश विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। आज भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश है। यह स्थिति एक ओर विशाल मानव संसाधन का अवसर देती है तो दूसरी ओर शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार आवास जल और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों पर भारी दबाव भी पैदा करती है। विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल आर्थिक प्रगति पर्याप्त नहीं होगी बल्कि जनसंख्या और उपलब्ध संसाधनों के बीच संतुलन बनाना भी उतना ही जरूरी होगा। देश वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। इस दिशा में सरकार बुनियादी ढांचे शिक्षा डिजिटल तकनीक और उद्योगों के विस्तार पर तेजी से काम कर रही है। लेकिन यदि जनसंख्या वृद्धि संसाधनों की क्षमता से अधिक तेज रही तो विकास की गति प्रभावित हो सकती है। रोजगार के अवसर सीमित होंगे शहरों पर दबाव बढ़ेगा कृषि भूमि घटेगी जल संकट गहराएगा और पर्यावरणीय चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जनसंख्या स्थिरीकरण का सबसे प्रभावी रास्ता शिक्षा और जागरूकता है। खासकर महिलाओं की शिक्षा स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता आर्थिक सशक्तिकरण और परिवार नियोजन को बढ़ावा देने से स्वाभाविक रूप से जनसंख्या वृद्धि दर नियंत्रित होती है। दुनिया के कई देशों का अनुभव भी यही बताता है कि बेहतर शिक्षा और आर्थिक विकास के साथ परिवार का आकार अपने आप छोटा होने लगता है। भारत के सामने सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध प्रवासन जैसी चुनौतियां भी समय समय पर चर्चा का विषय बनती रही हैं। यह मुद्दा कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है इसलिए सीमा प्रबंधन और कानूनी प्रक्रियाओं का प्रभावी पालन भी आवश्यक माना जाता है। हालांकि जनसंख्या से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा करते समय संविधान की भावना समानता और सामाजिक सौहार्द को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी है। विश्व स्तर पर भी आबादी लगातार बढ़ रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार दुनिया की जनसंख्या 8 अरब से अधिक हो चुकी है और हर वर्ष करोड़ों नए लोग इसमें जुड़ रहे हैं। भारत की आबादी भी लगातार बढ़ रही है जिसके कारण शिक्षा स्वास्थ्य परिवहन ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ना स्वाभाविक है। इसलिए अब आवश्यकता केवल जनसंख्या नियंत्रण की नहीं बल्कि मानव संसाधन के बेहतर विकास की भी है। भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है। यदि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा आधुनिक कौशल बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के अवसर मिलते हैं तो यही जनसांख्यिकीय लाभांश देश को वैश्विक आर्थिक शक्ति बना सकता है। वहीं यदि इन क्षेत्रों में पर्याप्त निवेश नहीं हुआ तो यही बड़ी आबादी भविष्य में बेरोजगारी और सामाजिक चुनौतियों का कारण भी बन सकती है। विश्व जनसंख्या दिवस का संदेश स्पष्ट है कि जनसंख्या को बोझ नहीं बल्कि राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी बनाया जाए। इसके लिए संतुलित जनसंख्या नीति गुणवत्तापूर्ण शिक्षा महिलाओं का सशक्तिकरण स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार और युवाओं के कौशल विकास पर समान रूप से ध्यान देना होगा। तभी विकसित आत्मनिर्भर और समृद्ध भारत का सपना वास्तविकता में बदल सकेगा।

ढाका में भारत ने जताई कड़ी आपत्ति: सेमिनार में जम्मू-कश्मीर का गलत नक्शा दिखाए जाने पर किया विरोध

नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के दौरान भारत ने जम्मू-कश्मीर को लेकर दिखाए गए कथित गलत नक्शे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। यह मामला उस समय सामने आया जब एक प्रस्तुति के दौरान भारतीय मानचित्र में जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दर्शाया गया। यह सेमिनार बांग्लादेश इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज (BIISS) में आयोजित किया गया था। कार्यक्रम का विषय था ‘सार्क को फिर से मजबूत बनाने के रास्ते’। सेमिनार में भारत में बांग्लादेश के पूर्व उच्चायुक्त रह चुके अहमद तारिक करीम प्रस्तुति दे रहे थे। इसी दौरान प्रदर्शित किए गए नक्शे पर भारतीय पक्ष ने आपत्ति जताई। ढाका स्थित भारतीय उच्चायोग की सेकंड सेक्रेटरी पूजा कुमारी झा ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए कहा कि प्रस्तुत किया गया नक्शा गलत है और जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस तरह के चित्रण का विरोध करता है। करीम ने अपनी ओर से सफाई देते हुए कहा कि यह नक्शा केवल सांकेतिक (प्रतीकात्मक) उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया था और इसमें वास्तविक सीमाओं को प्रदर्शित नहीं किया गया है। हालांकि, भारतीय अधिकारी ने इस स्पष्टीकरण से असहमति जताते हुए दोबारा भारत का आधिकारिक रुख दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। Kudos to this diplomat. She’s so brave and called out the subtle propaganda using fake maps of India in the right diplomatic way. Since they may do it again, India must back her now and train other diplomats to stand up strongly against such tactics.pic.twitter.com/v9Bt12I3SP — Aravind (@aravind) July 10, 2026 बाद में करीम ने पूछा कि क्या पूजा झा भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इस पर उन्होंने स्वयं को भारतीय उच्चायोग की अधिकारी बताया। इसके बाद करीम ने कहा कि उनकी आपत्ति को नोट कर लिया गया है और फिर अपनी प्रस्तुति जारी रखी। सेमिनार में बांग्लादेश की विदेश मामलों की राज्य मंत्री शमा ओबैद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। अपने संबोधन में उन्होंने दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने और सार्क को अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने संगठन की कार्यक्षमता, वित्तीय मजबूती और बेहतर फॉलो-अप व्यवस्था को प्राथमिकता देने की बात कही। ओबैद ने यह भी संकेत दिया कि बांग्लादेश आने वाले महीनों में सार्क सदस्य देशों के बीच विश्वास बढ़ाने के उद्देश्य से कुछ नई पहल पर विचार कर रहा है। इनमें ढाका में मौजूद सार्क देशों के राजदूतों के साथ बैठकें और काठमांडू स्थित सार्क सचिवालय के साथ समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई भारतीय सोशल मीडिया यूजर्स ने पूजा कुमारी झा की तत्परता की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने मौके पर ही भारत का आधिकारिक पक्ष स्पष्ट रूप से सामने रखा।

20 अगस्त से बदलेगी शनि की चाल, इन 3 राशियों को रहना होगा सावधान, जानें असर और उपाय

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को कर्मों का न्यायाधीश माना जाता है। उनकी चाल या राशि परिवर्तन का प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है। 20 अगस्त 2026 को शनि एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय स्थिति में प्रवेश करेंगे। इस बदलाव का असर सभी राशियों पर दिखाई देगा, लेकिन मेष, कर्क और वृश्चिक राशि के जातकों के लिए यह समय कुछ चुनौतियां लेकर आ सकता है। इन तीन राशियों पर रहेगा विशेष प्रभावमेष राशिशनि की बदलती चाल का असर कार्यक्षेत्र में महसूस हो सकता है। नौकरी या व्यवसाय में दबाव बढ़ने के साथ सहकर्मियों से मतभेद और कार्यों में रुकावट आने की संभावना है। इस दौरान विवादों से दूरी बनाए रखना और धैर्य के साथ निर्णय लेना लाभदायक रहेगा। कर्क राशिकर्क राशि के जातकों को स्वास्थ्य संबंधी मामलों में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होगी। मानसिक तनाव, पारिवारिक मतभेद और आर्थिक लेनदेन में लापरवाही परेशानी का कारण बन सकती है। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले सोच-समझकर कदम उठाएं। वृश्चिक राशिवृश्चिक राशि वालों के लिए यह समय कार्यों में देरी और आर्थिक चुनौतियां ला सकता है। बड़े निवेश करने से फिलहाल बचना बेहतर रहेगा। साथ ही, वाणी पर संयम रखें और हर निर्णय धैर्य के साथ लें। शनि के अशुभ प्रभाव कम करने के उपायज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शनि देव की कृपा पाने और संभावित कठिनाइयों को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं—– प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।– प्रतिदिन ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें।– शनिवार के दिन सरसों का तेल, काले तिल और उड़द की दाल का दान करना शुभ माना जाता है।– जरूरतमंद, निर्धन और असहाय लोगों की सेवा एवं सहायता करें। धैर्य और अनुशासन से मिलेगा लाभज्योतिष के अनुसार, शनि देव व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यदि कार्य ईमानदारी और निष्ठा से किए जाएं तो कठिन समय भी सकारात्मक परिणाम दे सकता है। ऐसे में घबराने के बजाय संयम, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना अधिक लाभकारी माना जाता है। शनि का यह परिवर्तन एक सामान्य ज्योतिषीय प्रक्रिया है। सावधानी, धैर्य और उचित उपायों के साथ इस अवधि की चुनौतियों का सामना अपेक्षाकृत सहज तरीके से किया जा सकता है।

शनि पूजा में तेल अर्पित करने का क्या है रहस्य जानिए धार्मिक मान्यता आध्यात्मिक महत्व और शुभ लाभ

नई दिल्ली । सनातन धर्म में शनिवार का दिन भगवान शनि की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। देशभर के शनि मंदिरों में इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर सरसों का तेल अर्पित करते हैं और सुख शांति तथा समृद्धि की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शनि न्याय के देवता हैं जो प्रत्येक व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर फल प्रदान करते हैं। यही कारण है कि शनिवार को शनि पूजा और तेल अर्पित करने की परंपरा आज भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ निभाई जाती है। धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान शनि पर सरसों का तेल चढ़ाने की परंपरा का संबंध भगवान हनुमान से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि जब भगवान हनुमान ने शनि देव को संकट से मुक्त कराया तब शनि देव के शरीर पर लगी पीड़ा को शांत करने के लिए तेल लगाया गया। उसी समय से यह विश्वास प्रचलित हुआ कि शनिवार के दिन श्रद्धापूर्वक तेल अर्पित करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। हालांकि यह एक धार्मिक मान्यता है और अलग अलग परंपराओं में इसकी व्याख्या भिन्न हो सकती है। ज्योतिष शास्त्र में भी शनिवार को तेल अर्पित करने का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसा माना जाता है कि शनि ग्रह अनुशासन धैर्य न्याय और कर्म का प्रतीक है। श्रद्धा के साथ की गई पूजा व्यक्ति को आत्मसंयम और सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करती है। कई श्रद्धालु इस दिन सरसों के तेल का दीपक जलाकर शनि मंत्र का जाप करते हैं और शनि चालीसा का पाठ करते हैं। धार्मिक विश्वास है कि इससे मानसिक शांति प्राप्त होती है और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति मिलती है। शनिवार की पूजा में केवल तेल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता बल्कि अच्छे कर्मों का पालन भी उतना ही आवश्यक बताया गया है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना बुजुर्गों का सम्मान करना सत्य और ईमानदारी के मार्ग पर चलना तथा किसी के साथ अन्याय न करना शनि देव की कृपा प्राप्त करने के महत्वपूर्ण उपाय माने जाते हैं। कई श्रद्धालु इस दिन काला तिल उड़द की दाल सरसों का तेल और भोजन का दान भी करते हैं जिसे पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार शनिवार को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना और हनुमान मंदिर में जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि भगवान हनुमान की उपासना से शनि देव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन में आने वाली बाधाओं को कम करने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यही कारण है कि शनिवार को मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि पूजा का वास्तविक उद्देश्य केवल अनुष्ठान करना नहीं बल्कि जीवन में अच्छे विचार और श्रेष्ठ कर्मों को अपनाना है। श्रद्धा विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ भगवान शनि की आराधना करने वाला व्यक्ति अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक जागरूक बनता है। इसलिए शनिवार को तेल अर्पित करने की परंपरा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि कर्म अनुशासन सेवा और सदाचार का संदेश भी देती है।

MP Weather: तीन दिन हल्की बारिश के आसार, 14 जुलाई से फिर तेज बारिश की संभावना

भोपाल। मध्य प्रदेश में अगले तीन दिनों तक मौसम अपेक्षाकृत शांत रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार 11 से 13 जुलाई तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर रहेगा, जबकि इस दौरान कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। हालांकि 14 जुलाई से कुछ जिलों में फिर से तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग भोपाल के मुताबिक, फिलहाल सक्रिय मौसम प्रणाली कमजोर पड़ रही है, जिसके चलते अगले तीन दिनों तक रिमझिम बारिश का सिलसिला बना रहेगा। शनिवार को भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर सहित प्रदेश के सभी 55 जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश होने का अनुमान है। इस दौरान 40 से 50 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवाएं भी चल सकती हैं। अगले सप्ताह सक्रिय होगा नया मौसम तंत्रमौसम विभाग के अनुसार पाकिस्तान के ऊपर एक पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टरबेंस) सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से अगले सप्ताह प्रदेश के मौसम में बदलाव देखने को मिलेगा और कुछ इलाकों में फिर से भारी बारिश का दौर शुरू हो सकता है। खरीफ फसलों के लिए राहतभरा संकेतमौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारी बारिश का सिलसिला थमना खरीफ फसलों के लिए लाभदायक साबित होगा। लगातार तेज बारिश के कारण कई जिलों के खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई थी, जिससे फसलों में गलन का खतरा बढ़ने लगा था। बारिश की तीव्रता कम होने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। सामान्य से अधिक हुई बारिशप्रदेश में जून महीने के दौरान आंधी और बारिश का दौर बना रहा, लेकिन इसके बावजूद जून के अंत तक सामान्य से करीब 30 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई थी। वहीं जुलाई के पहले नौ दिनों में हुई अच्छी बारिश ने यह कमी पूरी कर दी है। आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में अब तक 240 मिमी (करीब 9.5 इंच) बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि सामान्य वर्षा 222.1 मिमी (करीब 8.8 इंच) मानी जाती है। इस तरह प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 8 से 10 प्रतिशत अधिक बारिश रिकॉर्ड की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 8 प्रतिशत कम वर्षा हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 24 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। भोपाल, इंदौर सहित प्रदेश के 30 जिलों में अब तक सामान्य से ज्यादा वर्षा हो चुकी है।

Aaj Ka Rashifal 11 July 2026: मेष-कन्या को करियर में बड़ी सफलता, तुला को संपत्ति लाभ के योग

नई दिल्ली । प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास के अनुसार 11 जुलाई 2026, शनिवार का दिन कई राशियों के लिए करियर, व्यापार, निवेश और आर्थिक मामलों में नए अवसर लेकर आ रहा है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि पर बन रहे ग्रहों के विशेष संयोग से कुछ राशियों को भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा, जबकि कुछ को निर्णय लेते समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होगी। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल। मेष (Ariesभाग्य का पूरा साथ मिलेगा। कारोबार में लाभ के नए अवसर बनेंगे और पुराने प्रयास सफल होंगे। नौकरी में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। परिवार से सुखद समाचार मिलने से मन प्रसन्न रहेगा।शुभ रंग: नीलाशुभ अंक: 7 वृषभ (Taurusरुका हुआ धन वापस मिलने के योग हैं। नौकरीपेशा लोगों को अनुभव का लाभ मिलेगा। दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ समय अच्छा बीतेगा। छोटी यात्रा के भी संकेत हैं।शुभ रंग: सुनहराशुभ अंक: 1 मिथुन (Gemini)बड़े फैसले सोच-समझकर लें। कार्यस्थल पर विरोधियों से सावधान रहें। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न करें। पुराने मित्र से मुलाकात हो सकती है।शुभ रंग: मैरूनशुभ अंक: 3 कर्क (Cancer)साझेदारी में किया गया काम लाभ देगा। नई योजनाओं को मंजूरी मिल सकती है। जोखिम भरे निवेश से बचें। खान-पान का विशेष ध्यान रखें।शुभ रंग: क्रीमशुभ अंक: 8 सिंह (Leoकार्यक्षेत्र में अधिकारियों का सहयोग मिलेगा। लंबित कार्य पूरे होने की संभावना है। निवेश में जल्दबाजी न करें। परिवार का पूरा सहयोग मिलेगा।शुभ रंग: गुलाबीशुभ अंक: 8 कन्या (Virgo)करियर और व्यापार में शानदार सफलता मिलेगी। इंपोर्ट-एक्सपोर्ट कारोबार से जुड़े लोगों को बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी।शुभ रंग: ऑफ व्हाइटशुभ अंक: 5 तुला (Libra)भूमि, भवन और प्रॉपर्टी से लाभ के योग हैं। रुके हुए काम पूरे होंगे। नई तकनीक सीखने का अवसर मिलेगा। माता-पिता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।शुभ रंग: बैंगनीशुभ अंक: 7 वृश्चिक (Scorpio)पुराने सपने पूरे हो सकते हैं। व्यापार में छोटे लेकिन निश्चित लाभ को प्राथमिकता दें। धार्मिक यात्रा का योग बन सकता है। करियर में शुभ समाचार मिलेगा।शुभ रंग: नारंगीशुभ अंक: 2 धनु (Sagittarius)धन और प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। नए क्लाइंट और व्यावसायिक अवसर मिलेंगे। परिवार का सहयोग मिलेगा। सामाजिक सम्मान बढ़ेगा।शुभ रंग: कालाशुभ अंक: 9 मकर (Capricorn)नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। पुराने निवेश से अच्छा लाभ होगा। विदेश जाने या उच्च शिक्षा के प्रयास सफल हो सकते हैं। खर्चों पर नियंत्रण रखें।शुभ रंग: भूराशुभ अंक: 3 कुंभ (Aquariusकानूनी और वित्तीय मामलों में सतर्क रहें। निवेश सोच-समझकर करें। विदेशी कंपनियों या अंतरराष्ट्रीय कार्यों से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है। स्वास्थ्य पर ध्यान दें।शुभ रंग: गुलाबीशुभ अंक: 6 मीन (Pisces)रुकी हुई डील पूरी हो सकती है। करियर में पदोन्नति या वेतन वृद्धि के संकेत हैं। सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। पैसों के लेन-देन में पूरी जांच-पड़ताल के बाद ही निर्णय लें।शुभ रंग: लालशुभ अंक: 4

मिट्टी के नीचे छिपे इतिहास का सच ऐसे आता है दुनिया के सामने जानिए पुरातत्व उत्खनन की वैज्ञानिक प्रक्रिया

– डॉ. राधेश्याम द्विवेदी  मानव सभ्यता के अतीत को समझने के लिए केवल लिखित इतिहास ही पर्याप्त नहीं होता। कई ऐसे तथ्य और घटनाएं होती हैं जिनका उल्लेख किसी ग्रंथ या दस्तावेज में नहीं मिलता लेकिन उनके प्रमाण धरती की परतों के भीतर सुरक्षित रहते हैं। इन्हीं छिपे हुए साक्ष्यों को खोजने और वैज्ञानिक आधार पर उनका अध्ययन करने की प्रक्रिया को पुरातत्व उत्खनन कहा जाता है। यही कारण है कि पुरातत्व को इतिहास की सबसे प्रमाणिक और वैज्ञानिक विधि माना जाता है। भारत का गौरवशाली अतीत सिंधु सभ्यता से लेकर वैदिक काल मौर्य गुप्त और मध्यकालीन इतिहास तक अनेक संस्कृतियों और सभ्यताओं से समृद्ध रहा है। इन सभ्यताओं के बारे में जो जानकारी आज उपलब्ध है उसका बड़ा हिस्सा पुरातत्व उत्खनन से प्राप्त हुआ है। जमीन के भीतर दबे प्राचीन नगर मंदिर मूर्तियां सिक्के मिट्टी के बर्तन अभिलेख मुहरें कंकाल और अन्य अवशेष इतिहास की उन परतों को सामने लाते हैं जिन्हें केवल साहित्यिक स्रोतों से समझ पाना संभव नहीं होता। पुरातत्व उत्खनन पूरी तरह वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत किया जाता है। सबसे पहले विशेषज्ञ ऐसे स्थलों की पहचान करते हैं जहां प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिलने की संभावना होती है। इसके लिए सतही सर्वेक्षण रिमोट सेंसिंग हवाई फोटोग्राफी और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाता है। इसके बाद संबंधित स्थल को छोटे छोटे ग्रिड में विभाजित कर योजनाबद्ध तरीके से खुदाई की जाती है ताकि हर वस्तु की सही स्थिति और स्तर का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जा सके। उत्खनन के दौरान अलग अलग परिस्थितियों के अनुसार विभिन्न विधियों का उपयोग किया जाता है। किसी स्थान की समय श्रृंखला जानने के लिए गहराई में खुदाई की जाती है जबकि किसी विशेष काल की पूरी बस्ती को समझने के लिए बड़े क्षेत्र में क्षैतिज उत्खनन किया जाता है। स्तूप या गोलाकार स्मारकों के अध्ययन के लिए चतुर्थांश पद्धति अपनाई जाती है। प्रत्येक चरण में प्राप्त सामग्री का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाता है जिससे उसकी आयु उपयोग और ऐतिहासिक महत्व का निर्धारण किया जा सके। खुदाई से प्राप्त प्रत्येक वस्तु का विस्तृत दस्तावेजीकरण भी किया जाता है। उसकी तस्वीरें स्थान गहराई स्थिति और अन्य जानकारियां दर्ज की जाती हैं। इसके बाद प्रयोगशालाओं में कार्बन डेटिंग धातु विश्लेषण मृदा परीक्षण और अन्य आधुनिक तकनीकों की सहायता से उनका अध्ययन किया जाता है। इन वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर इतिहासकार और पुरातत्वविद किसी सभ्यता के सामाजिक आर्थिक धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन का पुनर्निर्माण करते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण देशभर में ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और उत्खनन का कार्य करता है। इसका उद्देश्य केवल नई खोज करना नहीं बल्कि प्राचीन स्मारकों और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखना भी है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास को प्रमाणिक रूप से जान सकें। आज आधुनिक तकनीक ने पुरातत्व अनुसंधान को और अधिक सटीक तथा प्रभावी बना दिया है जिससे कई नई जानकारियां लगातार सामने आ रही हैं। इतिहास केवल किताबों में लिखी कहानियों का नाम नहीं बल्कि धरती के भीतर छिपे उन प्रमाणों का भी दस्तावेज है जो समय की कसौटी पर खरे उतरते हैं। पुरातत्व उत्खनन हमें यह विश्वास दिलाता है कि अतीत की वास्तविक तस्वीर वैज्ञानिक तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही सामने लाई जा सकती है। यही वजह है कि यह विधि इतिहास लेखन की सबसे विश्वसनीय और प्रमाणिक आधारशिला मानी जाती है।

IRCTC की नई वेबसाइट का इंतजार खत्म जल्द लॉन्च होगा बीटा वर्जन तत्काल टिकट बुकिंग होगी पहले से ज्यादा तेज

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे करोड़ों यात्रियों के ऑनलाइन टिकट बुकिंग अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन यानी IRCTC की नई वेबसाइट का इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है। रेलवे की ओर से संकेत दिए गए हैं कि नई वेबसाइट का बीटा वर्जन जल्द जारी किया जाएगा जबकि इसका फाइनल वर्जन 15 जुलाई तक आम यात्रियों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। नई वेबसाइट का उद्देश्य टिकट बुकिंग को पहले से अधिक तेज सुरक्षित और आसान बनाना है ताकि यात्रियों को बार बार आने वाली तकनीकी परेशानियों से राहत मिल सके। पिछले कुछ वर्षों में सबसे बड़ी शिकायत तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान वेबसाइट की धीमी गति और सर्वर पर बढ़ते दबाव को लेकर रही है। जैसे ही बुकिंग शुरू होती है बड़ी संख्या में यूजर एक साथ लॉग इन करते हैं जिससे वेबसाइट कई बार क्रैश हो जाती है या बहुत धीमी हो जाती है। नई वेबसाइट को इसी समस्या को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है ताकि हाई ट्रैफिक के दौरान भी बुकिंग प्रक्रिया बिना रुकावट जारी रह सके। रिपोर्ट्स के अनुसार नई वेबसाइट की क्षमता एक मिनट में करीब एक लाख टिकट बुक करने की होगी। यदि यह लक्ष्य सफल होता है तो यात्रियों को तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान पहले जैसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसके अलावा वेबसाइट का इंटरफेस भी पहले से अधिक आधुनिक और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया जा रहा है जिससे नए और पुराने दोनों तरह के यूजर आसानी से टिकट बुक कर सकेंगे। नई वेबसाइट में कई ऐसे बदलाव देखने को मिल सकते हैं जिनकी लंबे समय से मांग की जा रही थी। अनावश्यक कैप्चा और बार बार आने वाले पॉप अप को कम किया जाएगा ताकि टिकट बुकिंग की प्रक्रिया तेज हो सके। इसके साथ ही सभी क्लास की सीटों की उपलब्धता एक ही स्क्रीन पर दिखाई देने की संभावना है जिससे यात्रियों को अलग अलग विकल्प देखने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। यात्रियों की सुविधा के लिए पैसेंजर डिटेल्स सेव करने का विकल्प भी बेहतर तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा। इससे बार बार नाम उम्र और अन्य जानकारी भरने की जरूरत नहीं होगी और नियमित यात्रियों का समय बचेगा। साथ ही पेमेंट गेटवे से जुड़ी समस्याओं को भी कम करने की तैयारी की जा रही है ताकि भुगतान के दौरान ट्रांजैक्शन फेल होने जैसी दिक्कतें कम हों। रेलवे बुकिंग सिस्टम में बॉट्स और फर्जी ऑटोमेटेड बुकिंग पर भी सख्ती करने की योजना बना रहा है। नई तकनीक की मदद से ऐसे सिस्टम पर नियंत्रण रखने का प्रयास किया जाएगा ताकि वास्तविक यात्रियों को टिकट मिलने की संभावना बढ़ सके। बीटा वर्जन लॉन्च होने के बाद यात्रियों और विशेषज्ञों से मिले सुझावों के आधार पर आवश्यक सुधार किए जाएंगे और उसके बाद वेबसाइट का अंतिम संस्करण सार्वजनिक किया जाएगा। भारतीय रेलवे में आज लगभग 88 प्रतिशत आरक्षित टिकट ऑनलाइन बुक किए जाते हैं। यही वजह है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत बनाना रेलवे की प्राथमिकता बन चुका है। बीते वर्षों में रेलवे ने तत्काल टिकट बुकिंग के लिए आधार सत्यापन जैसे कई नियम लागू किए हैं और अब नई वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग को और अधिक सुरक्षित तेज तथा भरोसेमंद बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। यदि सभी सुविधाएं तय समय पर लागू होती हैं तो आने वाले दिनों में यात्रियों का टिकट बुकिंग अनुभव पहले से कहीं अधिक बेहतर हो सकता है।