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इंदौर में साइबर ठगों का डबल अटैक, इंजीनियर से ₹1.12 लाख और छात्रा से ₹40 हजार की ऑनलाइन ठगी

इंदौर । इंदौर में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। शहर में ऑनलाइन ठगी के दो अलग-अलग मामलों में बदमाशों ने एक सिविल इंजीनियर और एक छात्रा को अपना शिकार बनाकर कुल 1.52 लाख रुपए से अधिक की धोखाधड़ी कर ली। दोनों मामलों में पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पहला मामला राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र का है, जहां धनवंतरी नगर स्थित साईं विला अपार्टमेंट निवासी सिविल इंजीनियर आनंद बनवडीकर के क्रेडिट कार्ड से बिना उनकी अनुमति के ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर दिए गए। आनंद के मुताबिक 8 जुलाई को दोपहर उनके मोबाइल पर लगातार ट्रांजेक्शन के मैसेज आए। जांच करने पर पता चला कि उनके आईसीआईसीआई बैंक के क्रेडिट कार्ड से दो बार 51-51 हजार रुपए और दूसरे क्रेडिट कार्ड से 10 हजार रुपए का भुगतान किया गया। इस तरह कुल 1 लाख 12 हजार रुपए उनके खाते से निकल गए। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने बैंक से संपर्क कर दोनों क्रेडिट कार्ड तत्काल ब्लॉक करवा दिए। शिकायत में बताया गया है कि ट्रांजेक्शन अमेजन सेलर सर्विस और कैशफ्री इनोवेटिव रिटेल आईडी के माध्यम से किए गए। पुलिस अब संबंधित बैंक खातों और ऑनलाइन भुगतान के स्रोत की जांच कर रही है। दूसरा मामला भंवरकुआ थाना क्षेत्र का है, जहां एक छात्रा इंस्टाग्राम पर ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान साइबर ठगी का शिकार हो गई। छात्रा मोना नागर ने पुलिस को बताया कि उसने इंस्टाग्राम पर ‘सुमन वूमन’ नाम के अकाउंट से 999 रुपए की ड्रेस ऑर्डर की थी। ऑर्डर के बाद एक युवक ने फोन कर वेरिफिकेशन के नाम पर पहले 500 रुपए जमा कराने को कहा। युवक ने बातचीत के दौरान अलग-अलग प्रक्रिया बताकर कई बार ऑनलाइन भुगतान कराया। छात्रा उसकी बातों में आ गई और कुछ ही देर में उसके बैंक खाते से करीब 40 हजार रुपए निकल गए। ठगी का एहसास होने पर उसने तत्काल साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज कराई। दोनों मामलों में पुलिस डिजिटल ट्रांजेक्शन, बैंक रिकॉर्ड और संबंधित ऑनलाइन अकाउंट की जांच कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वेरिफिकेशन लिंक या सोशल मीडिया शॉपिंग ऑफर पर बिना पुष्टि किए भुगतान न करें और संदिग्ध ट्रांजेक्शन होने पर तुरंत बैंक तथा साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।

बारिश से पहले इंदौर में जर्जर भवनों पर चला बुलडोजर, जेल रोड का मकान ढहाया, एक मालिक को दो दिन की मोहलत

मध्य प्रदेश। मानसून के दौरान जर्जर भवनों से होने वाले संभावित हादसों को रोकने के लिए इंदौर नगर निगम ने शहरभर में विशेष अभियान शुरू कर दिया है। इसी क्रम में सोमवार को निगम की टीम ने जेल रोड स्थित एक खतरनाक मकान को मशीनों की मदद से ध्वस्त कर दिया। वहीं पास ही स्थित एक अन्य भवन की जर्जर गैलरी को हटाने के लिए मकान मालिक को दो दिन का अंतिम समय दिया गया है। इसके अलावा कुमार मोहल्ला में नगर निगम के पुराने और जर्जर क्वार्टरों को भी हटाने की कार्रवाई की गई। नगर निगम की कार्रवाई जोन क्रमांक-3 के अंतर्गत जेल रोड क्षेत्र में की गई, जहां लंबे समय से जर्जर हालत में खड़ा भवन लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बना हुआ था। भवन अधिकारी पल्लवी पाल ने बताया कि नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर शहर के जर्जर भवनों का सर्वे कराया जा रहा है और जिन इमारतों से दुर्घटना की आशंका है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर हटाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार जेल रोड स्थित भवन के समीप मेट्रो स्टेशन का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य के दौरान लगातार हो रहे कंपन के कारण भवन की गैलरी हिलने लगी थी और उसके कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई थी। इसी खतरे को देखते हुए निगम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे भवन को गिरा दिया, ताकि बारिश के दौरान कोई बड़ा हादसा न हो। कार्रवाई के दौरान पास के एक अन्य मकान की गैलरी भी बेहद जर्जर पाई गई। भवन स्वामिनी विनोदिनी अग्रवाल मौके पर मौजूद नहीं थीं, इसलिए निगम ने उन्हें नोटिस जारी कर गैलरी हटाने के लिए दो दिन का समय दिया है। यदि निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं की गई तो नगर निगम स्वयं गैलरी हटाकर खर्च की वसूली नियमानुसार करेगा। इसके बाद निगम का अमला कुमार मोहल्ला पहुंचा, जहां नगर निगम के पुराने और अनुपयोगी क्वार्टरों को हटाने की कार्रवाई की गई। कार्रवाई से पहले कर्मचारियों ने भवनों से सामान सुरक्षित बाहर निकलवाया और उसके बाद मशीनों की मदद से जर्जर ढांचों को तोड़ दिया गया। नगर निगम ने नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके मकान का कोई हिस्सा कमजोर या जर्जर हो चुका है तो उसे समय रहते हटवा लें। इससे बारिश के दौरान भवन गिरने जैसी घटनाओं से बचा जा सकेगा और जनहानि की आशंका भी कम होगी। अधिकारियों का कहना है कि मानसून के पूरे मौसम में शहरभर में ऐसे जर्जर भवनों की पहचान कर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।

हॉर्न से भड़का युवक, दंपती की कार पर बरपाया कहर; बोनट पर चढ़कर की तोड़फोड़, दो हिरासत में

इंदौर । इंदौर में बीच सड़क पर मामूली बात को लेकर दबंगई का एक और मामला सामने आया है। रावजी बाजार थाना क्षेत्र में रविवार रात रास्ता खाली कराने के लिए हॉर्न बजाना एक दंपती को भारी पड़ गया। बीच सड़क पर खड़े युवक ने गुस्से में कार पर हमला बोल दिया। उसने पहले कार के बोनट पर चढ़कर हंगामा किया और फिर सामने का शीशा सहित कई कांच तोड़ दिए। पूरी घटना कार में बैठे दंपती ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर ली, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार सिंधी कॉलोनी निवासी बाबू पंजवानी अपनी पत्नी के साथ कार से पलासिया चौराहे के पास से गुजर रहे थे। शराब दुकान के सामने सड़क के बीच एक युवक खड़ा था, जिससे रास्ता अवरुद्ध हो गया था। दंपती ने केवल रास्ता खाली कराने के लिए हॉर्न बजाया, लेकिन युवक इस बात पर भड़क गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक युवक ने पहले कार के बोनट पर हाथ मारकर गुस्सा जाहिर किया और फिर सीधे बोनट पर चढ़ गया। इसके बाद उसने कार के आगे के शीशे और अन्य कांच तोड़ दिए। पूरी घटना के दौरान दंपती कार के अंदर ही मौजूद रहे और अपनी सुरक्षा के लिए बाहर नहीं निकले। उन्होंने मोबाइल से पूरी वारदात रिकॉर्ड कर ली। घटना के बाद पीड़ित दंपती रावजी बाजार थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाबू पिता मुकेश (19) निवासी भोरासला तथा अंकित पिता दिलीप केलवा (23) निवासी गोविंद नगर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार बाबू नल फिटिंग का काम करता है, जबकि अंकित एक सैलून संचालित करता है। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो और शिकायत के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। आरोपियों की भूमिका स्पष्ट होने के बाद उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की गुंडागर्दी और कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हबीबगंज पुलिस की दो बड़ी चूक कोर्ट में उजागर, एक केस 5 साल गलत कोर्ट में चला, पॉक्सो में दो आरोपी बरी

मध्य प्रदेश। भोपाल की हबीबगंज थाना पुलिस की विवेचना में हुई गंभीर लापरवाहियां अदालत में उजागर हुई हैं। दो अलग-अलग मामलों में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अदालत ने एक मामले में पांच वर्षों से चल रहे ट्रायल को निरस्त कर किशोर न्याय बोर्ड भेजने के निर्देश दिए, जबकि दूसरे पॉक्सो प्रकरण में विवेचना की गंभीर खामियों के चलते दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इन दोनों मामलों ने पुलिस की जांच प्रक्रिया और दस्तावेजी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। पहला मामला वर्ष 2021 के एक मारपीट प्रकरण से जुड़ा है। पुलिस ने घटना के समय 17 वर्षीय किशोर को बालिग मानकर गिरफ्तार किया और उसके खिलाफ नियमित सत्र न्यायालय में चालान पेश कर दिया। इसके बाद करीब पांच वर्षों तक नियमित अदालत में ट्रायल चलता रहा। जब मामला अंतिम बहस के दौर में पहुंचा तो बचाव पक्ष ने अदालत के सामने किशोर की वास्तविक उम्र से जुड़े दस्तावेज पेश किए। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि गिरफ्तारी से पहले ही किशोर के आधार कार्ड की प्रति थाने में जमा कराई जा चुकी थी, जिसमें उसकी जन्मतिथि 14 मार्च 2004 दर्ज थी। इसके बावजूद पुलिस ने उसे बालिग बताते हुए नियमित अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी, जबकि कानून के अनुसार मामला किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाना चाहिए था। अदालत ने जन्मतिथि की पुष्टि के लिए माता-पिता और संबंधित ग्राम पंचायत सचिव के बयान दर्ज किए। मूल जन्म रजिस्टर के आधार पर यह प्रमाणित हुआ कि घटना के समय किशोर की उम्र 17 वर्ष से कुछ अधिक थी। इसके बाद अदालत ने नियमित न्यायालय में चल रही कार्यवाही समाप्त करते हुए थाना प्रभारी को सभी दस्तावेज किशोर न्याय बोर्ड में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। वहीं सह-आरोपी के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी। दूसरा मामला 15 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के आरोप से जुड़ा था। विशेष पॉक्सो अदालत में सुनवाई के दौरान पुलिस की जांच में कई गंभीर कमियां सामने आईं। विवेचना अधिकारी ने दावा किया कि पीड़िता को बेंगलुरु से बरामद किया गया था, लेकिन इस कार्रवाई से संबंधित कोई आधिकारिक रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। इतना ही नहीं, बेंगलुरु की स्थानीय पुलिस को भी बरामदगी की सूचना नहीं दी गई थी। अदालत ने यह भी पाया कि कथित बरामदगी पंचनामे पर मुख्य आरोपी के हस्ताक्षर तक नहीं कराए गए। इन परिस्थितियों में अदालत ने माना कि जांच प्रक्रिया में गंभीर खामियां हैं और बचाव पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। इसी आधार पर दोनों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि पीड़िता द्वारा आरोप लगाने के बावजूद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी तत्काल नहीं की गई। रिकॉर्ड के अनुसार पीड़िता की बरामदगी के तीन दिन बाद आरोपी को केवल नोटिस देकर गिरफ्तार किया गया, जबकि दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी भी कई दिन बाद हुई। इस देरी और जांच प्रक्रिया की कमियों ने अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर कर दिया। इन दोनों मामलों ने स्पष्ट किया है कि विवेचना में छोटी-सी लापरवाही भी न्यायिक प्रक्रिया को वर्षों तक प्रभावित कर सकती है। अदालत के फैसलों ने यह संदेश दिया है कि जांच एजेंसियों के लिए कानूनी प्रक्रिया, दस्तावेजी साक्ष्य और निर्धारित नियमों का पालन करना अनिवार्य है, क्योंकि जांच में हुई त्रुटियों का सीधा असर न्याय मिलने की प्रक्रिया पर पड़ता है।

ऑपरेशन हमदर्द बना अपनों तक पहुंचने का सहारा, जीआरपी तैयार कर रही बेसहारा लोगों का डिजिटल डोजियर

मध्य प्रदेश। रेलवे स्टेशन अक्सर हजारों यात्रियों की आवाजाही के साथ कई ऐसी कहानियों के भी गवाह बनते हैं, जहां कोई अपनों से बिछड़ जाता है तो कोई मजबूरी में स्टेशन को ही अपना ठिकाना बना लेता है। ऐसे ही लोगों को नई जिंदगी और परिवार का साथ दिलाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश जीआरपी ने ‘ऑपरेशन हमदर्द’ शुरू किया है। यह अभियान केवल बेसहारा लोगों की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें उनके परिवार से मिलाने और जरूरतमंदों के पुनर्वास का भी माध्यम बन रहा है। एक जुलाई से शुरू हुए इस विशेष अभियान के तहत रेलवे स्टेशनों पर रहने वाले बेसहारा, लावारिस और बिछड़े लोगों का डिजिटल डोजियर तैयार किया जा रहा है। इसमें उनकी तस्वीर, पहचान, व्यक्तिगत जानकारी और उपलब्ध अन्य विवरण दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर उनकी पहचान आसान हो सके और परिजनों तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया जा सके। अभियान के शुरुआती 11 दिनों में ही 363 लोगों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा चुका है। केवल शनिवार को ही 31 लोगों की पहचान दर्ज की गई, जिनमें 21 पुरुष, 7 महिलाएं, 2 बालक और एक बालिका शामिल रहे। अभियान के दौरान कई भावुक कर देने वाले मामले भी सामने आए। आमला रेलवे स्टेशन पर मिले मोहम्मद कौशर करीब दस वर्षों से भीख मांगकर जीवन गुजार रहे थे। पूछताछ में उन्होंने बिहार के बेगूसराय का पता बताया। जीआरपी ने स्थानीय पुलिस और जनप्रतिनिधियों की मदद से उनके परिवार का पता लगाया। जब वीडियो कॉल पर वर्षों बाद भाई से बातचीत हुई तो दोनों की आंखें नम हो गईं। बाद में परिवार भोपाल पहुंचा और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद कौशर को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। एक अन्य मामले में आमला स्टेशन पर मिली 16 वर्षीय किशोरी ने बताया कि घर में डांट पड़ने के बाद वह नाराज होकर बिना बताए निकल आई थी। जीआरपी ने तुरंत उसके पिता से संपर्क किया और कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर उसे सुरक्षित परिवार तक पहुंचा दिया। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर भी दो छोटे भाई-बहन अकेले बैठे रोते मिले। उनके पिता मोबाइल चार्जर लेने बाहर गए थे और लौटने में देर हो गई थी। बच्चों की घबराहट देखकर जीआरपी ने उन्हें सुरक्षित रखा और कुछ ही देर में पिता को तलाश कर दोनों बच्चों को उनके हवाले कर दिया। जीआरपी अधिकारियों के अनुसार अभियान का उद्देश्य केवल पहचान दर्ज करना नहीं है, बल्कि बेसहारा लोगों को सामाजिक संस्थाओं और आश्रय गृहों से जोड़कर उनका पुनर्वास भी सुनिश्चित करना है। वहीं, नाबालिग बच्चों से जुड़े मामलों में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत आवश्यक कार्रवाई की जा रही है, ताकि उनकी सुरक्षा और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सकें। ‘ऑपरेशन हमदर्द’ तकनीक और संवेदनशील पुलिसिंग का ऐसा प्रयास बनकर उभरा है, जो रेलवे स्टेशनों पर भटक रहे लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण साबित हो रहा है। डिजिटल डोजियर के जरिए न केवल उनकी पहचान सुरक्षित हो रही है, बल्कि उन्हें अपनों तक पहुंचाने और सम्मानजनक जीवन दिलाने की दिशा में भी ठोस पहल की जा रही है।

फसल खराब हुई तो अब मिलेगा ज्यादा मुआवजा, सरकार ने बढ़ाई बीमित राशि; 31 जुलाई तक करा सकते हैं बीमा

मध्य प्रदेश। खरीफ सीजन में खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य सरकार ने इस बार प्रमुख खरीफ फसलों की बीमित राशि बढ़ा दी है। इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, सूखा या अन्य कारणों से खराब होती है। नई व्यवस्था के तहत धान, मक्का और सोयाबीन की फसल पर मिलने वाले बीमा क्लेम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे नुकसान की भरपाई पहले की तुलना में बेहतर तरीके से हो सकेगी। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार धान की बीमित राशि में प्रति हेक्टेयर 4100 रुपए, मक्का में 2350 रुपए और सोयाबीन में 3910 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका असर सीधे क्लेम राशि पर पड़ेगा। अनुमान है कि धान उत्पादक किसानों को लगभग 10 प्रतिशत, मक्का किसानों को करीब 7 प्रतिशत और सोयाबीन उत्पादकों को लगभग 5 प्रतिशत तक अधिक क्लेम मिल सकेगा। हालांकि बीमित राशि बढ़ने के साथ बीमा प्रीमियम में भी मामूली वृद्धि होगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों के लिए कहीं अधिक लाभदायक साबित होगा। फसल को नुकसान होने की स्थिति में अतिरिक्त क्लेम किसानों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद करेगा और अगली फसल की तैयारी के लिए भी सहारा देगा। सरकार ने फसल बीमा का लाभ समझाने के लिए उदाहरण भी दिया है। आगर-मालवा जिले में मक्का की थ्रेशोल्ड उपज 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर निर्धारित है। यदि किसी किसान की उपज केवल 30 क्विंटल रहती है तो वर्ष 2025 में 34,650 रुपए की बीमित राशि के आधार पर उसे 8,663 रुपए का क्लेम मिलता था। इस वर्ष बीमित राशि बढ़कर 37 हजार रुपए होने से समान नुकसान की स्थिति में किसान को लगभग 9,250 रुपए का क्लेम मिलेगा। इसी तरह सागर जिले में असिंचित धान की बीमित राशि बढ़ने से प्रति हेक्टेयर मिलने वाला क्लेम लगभग 322 रुपए तक बढ़ जाएगा। पहले जहां नुकसान की स्थिति में 6,238 रुपए मिलते थे, अब वही राशि बढ़कर करीब 6,560 रुपए हो जाएगी। दतिया जिले में सोयाबीन किसानों को भी राहत मिलेगी, जहां बीमित राशि बढ़ने के कारण क्लेम में लगभग 467 रुपए प्रति हेक्टेयर की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ऋण लेने वाले किसानों के लिए बीमा सामान्यतः अनिवार्य रहता है। यदि कोई ऋणी किसान बीमा नहीं कराना चाहता है तो उसे संबंधित बैंक में निर्धारित समय सीमा के भीतर लिखित रूप से इसकी सूचना देनी होगी। वहीं गैर-ऋणी किसानों के लिए बीमा पूरी तरह स्वैच्छिक है और वे अपनी इच्छा से योजना का लाभ ले सकते हैं। राज्य सरकार ने खरीफ फसलों के बीमा के लिए 31 जुलाई अंतिम तिथि निर्धारित की है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि समय रहते बीमा कराकर अपनी फसल को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के खिलाफ सुरक्षित करें, ताकि विपरीत परिस्थितियों में उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके।

5 दिन की राहत के बाद फिर बदलेगा मौसम, 16 जुलाई से एक्टिव होगा नया सिस्टम, मध्यप्रदेश में तेज बारिश की संभावना

मध्य प्रदेश। इंदौर के सुमन नगर इलाके में 23 जून को हुए गैस पाइपलाइन विस्फोट की भयावहता अब भी लोगों के जेहन में ताजा है। इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसे 38 वर्षीय विजय पटेल उर्फ लल्ला पिछले 20 दिनों से अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। उनका पूरा शरीर आग की लपटों में घिर गया था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जलती हुई हालत में करीब 200 मीटर तक दौड़ने और सड़क पर लेट-लेटकर आग बुझाने के बाद किसी तरह अपनी जान बचाई। अब उनका परिवार इलाज, मुआवजे और सरकारी मदद की उम्मीद लगाए बैठा है। 23 जून की दोपहर सुमन नगर जैन मंदिर के पास अवंतिका गैस पाइपलाइन में अचानक विस्फोट हुआ। धमाके के साथ आग का विशाल गुबार उठा और कुछ ही सेकेंड में आसपास का इलाका उसकी चपेट में आ गया। विजय पटेल उस समय बाइक से ड्यूटी पर जा रहे थे और सीधे आग की लपटों में घिर गए। कुछ ही पलों में उनका पूरा शरीर जलने लगा। आसपास मौजूद लोग हादसा देखते रहे, लेकिन कोई उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। अपनी जान बचाने के लिए विजय ने जलती हुई बाइक छोड़ दी और दौड़ना शुरू कर दिया। करीब 200 मीटर तक भागने के बाद भी जब कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने सड़क पर बार-बार लेटकर शरीर में लगी आग बुझाने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आग तो बुझ गई, लेकिन तब तक उनका शरीर करीब 40 प्रतिशत तक झुलस चुका था। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विजय ने हिम्मत नहीं छोड़ी। किसी तरह अपने घर पहुंचे और पत्नी माया को आवाज लगाकर बताया कि वह आग में झुलस गए हैं। पति की हालत देखकर माया तुरंत उन्हें रिक्शे से नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचीं, लेकिन वहां बर्न यूनिट नहीं होने के कारण पहले अरविंदो अस्पताल और बाद में बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। फिलहाल उनकी दो सर्जरी हो चुकी हैं, जबकि तीसरी सर्जरी अभी बाकी है। माया पटेल का आरोप है कि हादसे के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से समय पर मदद नहीं मिली। उनका कहना है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद शुरुआती दो दिनों तक किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने सुध नहीं ली। विरोध दर्ज कराने के बाद तीसरे दिन उनके पति को बेहतर इलाज के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहत और मुआवजा प्रक्रिया में शुरुआत में उनके पति का नाम तक शामिल नहीं किया गया था। बाद में कानूनी मदद लेकर दस्तावेज पूरे किए गए, तब जाकर कार्रवाई आगे बढ़ सकी। डॉक्टरों के अनुसार विजय को पूरी तरह स्वस्थ होने में छह से सात महीने लग सकते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अब गंभीर संकट में है क्योंकि विजय ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। लंबे इलाज और काम करने में असमर्थता के कारण परिवार पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। माया ने राज्य सरकार से पति के इलाज का पूरा खर्च उठाने, उचित मुआवजा देने और परिवार के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस हादसे ने केवल उनके पति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को संकट में डाल दिया है। अब उन्हें सरकार से सिर्फ न्याय, सहारा और संवेदनशील सहयोग की उम्मीद है।

मानसून हुआ सुस्त, 22 जिलों में आज हल्की बारिश का अलर्ट, बंगाल की खाड़ी से आने वाला सिस्टम बदलेगा मौसम का मिजाज

मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल थम गई है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश का दौर रुक गया है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले पांच दिनों से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं हुई है। फिलहाल करीब 60 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल छंट चुके हैं, जिसके कारण प्रदेश में केवल हल्की बारिश और बूंदाबांदी का दौर बना हुआ है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 16 जुलाई से बंगाल की खाड़ी में बनने वाले नए मौसम तंत्र के सक्रिय होने के बाद एक बार फिर प्रदेश में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर समेत 22 जिलों में बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर सहित कई जिलों में दिनभर धूप और बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार फिलहाल मानसून को सक्रिय रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं या उनका प्रभाव मध्यप्रदेश से दूर चला गया है। इसी वजह से प्रदेश में लगातार रिमझिम बारिश तो हो रही है लेकिन कहीं भी जोरदार वर्षा देखने को नहीं मिल रही। अगले दो से तीन दिन तक यही स्थिति बनी रहने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण बनने के संकेत हैं। यदि यह सिस्टम निम्न दाब क्षेत्र में बदलता है तो इसका सीधा असर मध्यप्रदेश पर पड़ेगा और प्रदेश में फिर से व्यापक और तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा प्रशांत महासागर में बन रहे नए मौसम तंत्रों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है क्योंकि इनमें से किसी एक के बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने पर मानसून को नई ताकत मिल सकती है। बारिश की रफ्तार धीमी पड़ने का असर प्रदेश के मौसमी आंकड़ों पर भी दिखाई देने लगा है। कुछ दिन पहले तक सामान्य से करीब 30 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा रही थी, लेकिन अब यह बढ़त घटकर केवल एक प्रतिशत रह गई है। मौसम विभाग के अनुसार अब तक प्रदेश में 241.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि सामान्य औसत 239.8 मिलीमीटर है। यानी फिलहाल बारिश सामान्य से केवल एक प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में इस बार जून के मुकाबले जुलाई से ज्यादा उम्मीदें हैं क्योंकि सामान्य तौर पर मानसून की लगभग 40 प्रतिशत बारिश इसी महीने होती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में जुलाई सबसे अधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है। मौसम विभाग का मानना है कि यदि नया सिस्टम मजबूत हुआ तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में बारिश की कमी तेजी से पूरी हो सकती है। बारिश के आंकड़ों की बात करें तो देवास इस समय प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बना हुआ है, जहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, हरदा, सीहोर, उज्जैन और कई अन्य जिलों में भी अच्छी बारिश हुई है। दूसरी ओर अलीराजपुर, झाबुआ, धार और कुछ पूर्वी जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सक्रिय होने वाला नया सिस्टम इन क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश लेकर आएगा।

Gwalior collector Ruchika Chauhan: चबूतरे पर बैठीं कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान, ग्रामीणों की सुनीं समस्याएं; किसानों को दी नई खेती की सलाह

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Gwalior collector Ruchika Chauhan: ग्वालियर। जिले के ग्राम बरेठा में रविवार रात आयोजित रात्रि चौपाल में प्रशासन का अलग ही अंदाज देखने को मिला। कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान पंचायत भवन के सामने चबूतरे पर ग्रामीणों के बीच बैठीं और उनकी समस्याएं सीधे सुनीं। पूरे कार्यक्रम में औपचारिकता कम और संवाद ज्यादा देखने को मिला। चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने बेझिझक अपनी समस्याएं रखीं। विभिन्न विभागों से जुड़े 88 आवेदन मिले, जिनमें कई मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। बाकी मामलों के लिए अधिकारियों को तय समय-सीमा में कार्रवाई के निर्देश दिए गए। थार हटाने को कहा तो छीन ली लाइसेंसी रिवॉल्वर, भोपाल में किसान पर ताबड़तोड़ फायरिंग, तीन आरोपी गिरफ्तार किसानों को दी नई खेती अपनाने की सलाह बैठक में खरीफ सीजन और इस साल कम बारिश की संभावना पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने किसानों से धान की जगह तिल, टमाटर, मिर्च और मशरूम जैसी कम पानी में होने वाली नकदी फसलें अपनाने की अपील की। कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने इन फसलों से होने वाले उत्पादन और संभावित आय की भी जानकारी दी। अधिकारियों की सलाह से प्रभावित होकर 20 किसानों ने तिल, जबकि 10-10 किसानों ने टमाटर और मशरूम की खेती शुरू करने के लिए अपने नाम दर्ज कराए। प्रशासन ने उन्हें तकनीकी सहायता देने का भरोसा भी दिया। breaking news murena: मुरैना में दर्दनाक हादसा; ट्रैक्टर-ट्रॉली ने श्रद्धालुओं से भरे ऑटो को मारी टक्कर, 3 की मौत जरूरतमंद परिवारों को मिली राहत चौपाल में गांव की रहने वाली रेखा ने अपने लकवाग्रस्त पति और आर्थिक परेशानी की जानकारी दी। इस पर कलेक्टर ने श्रम विभाग को निर्देश देकर संबल योजना के तहत 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत कराने की प्रक्रिया शुरू कराई। रेखा ने कहा कि इस मदद से वह सिलाई मशीन खरीदकर अपने परिवार की आजीविका शुरू करेगी। महज 25 मिनट में लिख दिया गया था बॉलीवुड का यह अमर गीत, किशोर कुमार और लता की आवाज ने बना दिया सदाबहार इलाज और राजस्व मामलों पर भी हुई कार्रवाई चौपाल के दौरान आंखों की गंभीर समस्या से जूझ रहे किशोर इरफान के इलाज के लिए कलेक्टर ने तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए। वहीं सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे से जुड़े कई राजस्व मामलों में भी अधिकारियों को मौके पर ही कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इस रात्रि चौपाल में जिला पंचायत सीईओ सोजन सिंह रावत, जनपद पंचायत अध्यक्ष दिलराज सिंह किरार सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

एमपी बनेगा देश का अगला टेक हब, 40 हजार करोड़ के निवेश से 35 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार

मध्य प्रदेश। भोपाल में आयोजित एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के साथ मध्यप्रदेश ने खुद को देश के उभरते तकनीकी और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कॉन्क्लेव का शुभारंभ करते हुए प्रदेश के भविष्य का ऐसा विजन पेश किया जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की नई पहचान बनने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इस आयोजन के जरिए प्रदेश में करीब 40 हजार करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित होगा और लगभग 35 हजार नए रोजगार के अवसर तैयार होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। मध्यप्रदेश भी अब केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा बल्कि यहां ड्रोन, रक्षा उपकरण और मिसाइल जैसे अत्याधुनिक उत्पादों का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य भविष्य की तकनीकों को अपनाते हुए नई औद्योगिक क्रांति की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। कॉन्क्लेव के दौरान 51 विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा जिनका उद्देश्य निवेशकों को प्रदेश की संभावनाओं से जोड़ना और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण प्रस्तुत करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी बार्सिलोना यात्रा के बाद स्पेन, अमेरिका और कनाडा की कंपनियों ने मध्यप्रदेश में 228 करोड़ रुपए का निवेश किया। इसी यात्रा के दौरान एक गीगावाट क्षमता वाले एआई डेटा सेंटर के लिए समझौता हुआ था और अब संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि भोपाल पहुंच चुके हैं जिससे परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। राज्य सरकार ने आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की भी बड़ी घोषणा की। इंदौर के सुपर कॉरिडोर में आधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा जहां प्लग एंड प्ले सुविधा उपलब्ध होगी ताकि कंपनियां बिना अतिरिक्त निर्माण के तुरंत संचालन शुरू कर सकें। इसी तरह भोपाल आईटी पार्क का लगभग चार लाख वर्गफुट तक विस्तार किया जाएगा जबकि कोलार रोड पर पांच एकड़ भूमि में नया अत्याधुनिक आईटी पार्क बनाया जाएगा। इन परियोजनाओं से प्रदेश के युवाओं के लिए आईटी, इंजीनियरिंग और डिजिटल क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि तकनीकी निवेश केवल उद्योगों को नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और रोजगार व्यवस्था को भी नई दिशा देगा। कॉन्क्लेव में देश और विदेश की कई प्रतिष्ठित कंपनियां शामिल हुई हैं जिनमें CtrlS Datacenters, Kaynes Technologies, Fujiyama Power और Nyobolt Limited प्रमुख हैं। इसके अलावा आईआईएम इंदौर और आईआईएसईआर जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान भी भाग ले रहे हैं जो कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार को नई गति देंगे। कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण एमओयू और रणनीतिक साझेदारियों पर भी सहमति बनने की उम्मीद है जो राज्य के डिजिटल ढांचे को मजबूत करेंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव का तीसरा संस्करण निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास के मामले में नया रिकॉर्ड बनाएगा। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब के रूप में उभरने की पूरी क्षमता रखता है और सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रही है।