फसल खराब हुई तो अब मिलेगा ज्यादा मुआवजा, सरकार ने बढ़ाई बीमित राशि; 31 जुलाई तक करा सकते हैं बीमा

मध्य प्रदेश। खरीफ सीजन में खेती करने वाले किसानों के लिए राहत भरी खबर है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य सरकार ने इस बार प्रमुख खरीफ फसलों की बीमित राशि बढ़ा दी है। इसका सीधा फायदा उन किसानों को मिलेगा जिनकी फसल प्राकृतिक आपदा, अतिवृष्टि, सूखा या अन्य कारणों से खराब होती है। नई व्यवस्था के तहत धान, मक्का और सोयाबीन की फसल पर मिलने वाले बीमा क्लेम में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी, जिससे नुकसान की भरपाई पहले की तुलना में बेहतर तरीके से हो सकेगी। सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार धान की बीमित राशि में प्रति हेक्टेयर 4100 रुपए, मक्का में 2350 रुपए और सोयाबीन में 3910 रुपए तक की बढ़ोतरी की गई है। इसका असर सीधे क्लेम राशि पर पड़ेगा। अनुमान है कि धान उत्पादक किसानों को लगभग 10 प्रतिशत, मक्का किसानों को करीब 7 प्रतिशत और सोयाबीन उत्पादकों को लगभग 5 प्रतिशत तक अधिक क्लेम मिल सकेगा। हालांकि बीमित राशि बढ़ने के साथ बीमा प्रीमियम में भी मामूली वृद्धि होगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों के लिए कहीं अधिक लाभदायक साबित होगा। फसल को नुकसान होने की स्थिति में अतिरिक्त क्लेम किसानों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद करेगा और अगली फसल की तैयारी के लिए भी सहारा देगा। सरकार ने फसल बीमा का लाभ समझाने के लिए उदाहरण भी दिया है। आगर-मालवा जिले में मक्का की थ्रेशोल्ड उपज 40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर निर्धारित है। यदि किसी किसान की उपज केवल 30 क्विंटल रहती है तो वर्ष 2025 में 34,650 रुपए की बीमित राशि के आधार पर उसे 8,663 रुपए का क्लेम मिलता था। इस वर्ष बीमित राशि बढ़कर 37 हजार रुपए होने से समान नुकसान की स्थिति में किसान को लगभग 9,250 रुपए का क्लेम मिलेगा। इसी तरह सागर जिले में असिंचित धान की बीमित राशि बढ़ने से प्रति हेक्टेयर मिलने वाला क्लेम लगभग 322 रुपए तक बढ़ जाएगा। पहले जहां नुकसान की स्थिति में 6,238 रुपए मिलते थे, अब वही राशि बढ़कर करीब 6,560 रुपए हो जाएगी। दतिया जिले में सोयाबीन किसानों को भी राहत मिलेगी, जहां बीमित राशि बढ़ने के कारण क्लेम में लगभग 467 रुपए प्रति हेक्टेयर की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत ऋण लेने वाले किसानों के लिए बीमा सामान्यतः अनिवार्य रहता है। यदि कोई ऋणी किसान बीमा नहीं कराना चाहता है तो उसे संबंधित बैंक में निर्धारित समय सीमा के भीतर लिखित रूप से इसकी सूचना देनी होगी। वहीं गैर-ऋणी किसानों के लिए बीमा पूरी तरह स्वैच्छिक है और वे अपनी इच्छा से योजना का लाभ ले सकते हैं। राज्य सरकार ने खरीफ फसलों के बीमा के लिए 31 जुलाई अंतिम तिथि निर्धारित की है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि समय रहते बीमा कराकर अपनी फसल को प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान के खिलाफ सुरक्षित करें, ताकि विपरीत परिस्थितियों में उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके।
5 दिन की राहत के बाद फिर बदलेगा मौसम, 16 जुलाई से एक्टिव होगा नया सिस्टम, मध्यप्रदेश में तेज बारिश की संभावना

मध्य प्रदेश। इंदौर के सुमन नगर इलाके में 23 जून को हुए गैस पाइपलाइन विस्फोट की भयावहता अब भी लोगों के जेहन में ताजा है। इस हादसे में गंभीर रूप से झुलसे 38 वर्षीय विजय पटेल उर्फ लल्ला पिछले 20 दिनों से अस्पताल के आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। उनका पूरा शरीर आग की लपटों में घिर गया था, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। जलती हुई हालत में करीब 200 मीटर तक दौड़ने और सड़क पर लेट-लेटकर आग बुझाने के बाद किसी तरह अपनी जान बचाई। अब उनका परिवार इलाज, मुआवजे और सरकारी मदद की उम्मीद लगाए बैठा है। 23 जून की दोपहर सुमन नगर जैन मंदिर के पास अवंतिका गैस पाइपलाइन में अचानक विस्फोट हुआ। धमाके के साथ आग का विशाल गुबार उठा और कुछ ही सेकेंड में आसपास का इलाका उसकी चपेट में आ गया। विजय पटेल उस समय बाइक से ड्यूटी पर जा रहे थे और सीधे आग की लपटों में घिर गए। कुछ ही पलों में उनका पूरा शरीर जलने लगा। आसपास मौजूद लोग हादसा देखते रहे, लेकिन कोई उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। अपनी जान बचाने के लिए विजय ने जलती हुई बाइक छोड़ दी और दौड़ना शुरू कर दिया। करीब 200 मीटर तक भागने के बाद भी जब कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने सड़क पर बार-बार लेटकर शरीर में लगी आग बुझाने की कोशिश की। काफी मशक्कत के बाद आग तो बुझ गई, लेकिन तब तक उनका शरीर करीब 40 प्रतिशत तक झुलस चुका था। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विजय ने हिम्मत नहीं छोड़ी। किसी तरह अपने घर पहुंचे और पत्नी माया को आवाज लगाकर बताया कि वह आग में झुलस गए हैं। पति की हालत देखकर माया तुरंत उन्हें रिक्शे से नजदीकी अस्पताल लेकर पहुंचीं, लेकिन वहां बर्न यूनिट नहीं होने के कारण पहले अरविंदो अस्पताल और बाद में बॉम्बे हॉस्पिटल रेफर किया गया। फिलहाल उनकी दो सर्जरी हो चुकी हैं, जबकि तीसरी सर्जरी अभी बाकी है। माया पटेल का आरोप है कि हादसे के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से समय पर मदद नहीं मिली। उनका कहना है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद शुरुआती दो दिनों तक किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने सुध नहीं ली। विरोध दर्ज कराने के बाद तीसरे दिन उनके पति को बेहतर इलाज के लिए बॉम्बे हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि राहत और मुआवजा प्रक्रिया में शुरुआत में उनके पति का नाम तक शामिल नहीं किया गया था। बाद में कानूनी मदद लेकर दस्तावेज पूरे किए गए, तब जाकर कार्रवाई आगे बढ़ सकी। डॉक्टरों के अनुसार विजय को पूरी तरह स्वस्थ होने में छह से सात महीने लग सकते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अब गंभीर संकट में है क्योंकि विजय ही घर के एकमात्र कमाने वाले सदस्य हैं। लंबे इलाज और काम करने में असमर्थता के कारण परिवार पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। माया ने राज्य सरकार से पति के इलाज का पूरा खर्च उठाने, उचित मुआवजा देने और परिवार के भरण-पोषण के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस हादसे ने केवल उनके पति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य को संकट में डाल दिया है। अब उन्हें सरकार से सिर्फ न्याय, सहारा और संवेदनशील सहयोग की उम्मीद है।
मानसून हुआ सुस्त, 22 जिलों में आज हल्की बारिश का अलर्ट, बंगाल की खाड़ी से आने वाला सिस्टम बदलेगा मौसम का मिजाज

मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश में मानसून की रफ्तार फिलहाल थम गई है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज बारिश का दौर रुक गया है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले पांच दिनों से कहीं भी भारी या अति भारी बारिश दर्ज नहीं हुई है। फिलहाल करीब 60 प्रतिशत हिस्से से मानसूनी बादल छंट चुके हैं, जिसके कारण प्रदेश में केवल हल्की बारिश और बूंदाबांदी का दौर बना हुआ है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 16 जुलाई से बंगाल की खाड़ी में बनने वाले नए मौसम तंत्र के सक्रिय होने के बाद एक बार फिर प्रदेश में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। सोमवार को सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, धार और अलीराजपुर समेत 22 जिलों में बादल छाने और हल्की बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर सहित कई जिलों में दिनभर धूप और बादलों की आवाजाही बनी रह सकती है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार फिलहाल मानसून को सक्रिय रखने वाली प्रमुख मौसम प्रणालियां कमजोर पड़ गई हैं या उनका प्रभाव मध्यप्रदेश से दूर चला गया है। इसी वजह से प्रदेश में लगातार रिमझिम बारिश तो हो रही है लेकिन कहीं भी जोरदार वर्षा देखने को नहीं मिल रही। अगले दो से तीन दिन तक यही स्थिति बनी रहने की संभावना है। मौसम विभाग का कहना है कि 13 से 19 जुलाई के बीच उत्तर बंगाल की खाड़ी में ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण बनने के संकेत हैं। यदि यह सिस्टम निम्न दाब क्षेत्र में बदलता है तो इसका सीधा असर मध्यप्रदेश पर पड़ेगा और प्रदेश में फिर से व्यापक और तेज बारिश का दौर शुरू हो सकता है। इसके अलावा प्रशांत महासागर में बन रहे नए मौसम तंत्रों पर भी लगातार नजर रखी जा रही है क्योंकि इनमें से किसी एक के बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने पर मानसून को नई ताकत मिल सकती है। बारिश की रफ्तार धीमी पड़ने का असर प्रदेश के मौसमी आंकड़ों पर भी दिखाई देने लगा है। कुछ दिन पहले तक सामान्य से करीब 30 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की जा रही थी, लेकिन अब यह बढ़त घटकर केवल एक प्रतिशत रह गई है। मौसम विभाग के अनुसार अब तक प्रदेश में 241.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है, जबकि सामान्य औसत 239.8 मिलीमीटर है। यानी फिलहाल बारिश सामान्य से केवल एक प्रतिशत अधिक है। प्रदेश में इस बार जून के मुकाबले जुलाई से ज्यादा उम्मीदें हैं क्योंकि सामान्य तौर पर मानसून की लगभग 40 प्रतिशत बारिश इसी महीने होती है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में जुलाई सबसे अधिक वर्षा वाला महीना माना जाता है। मौसम विभाग का मानना है कि यदि नया सिस्टम मजबूत हुआ तो जुलाई के दूसरे पखवाड़े में बारिश की कमी तेजी से पूरी हो सकती है। बारिश के आंकड़ों की बात करें तो देवास इस समय प्रदेश का सबसे अधिक बारिश वाला जिला बना हुआ है, जहां सामान्य से 102 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, हरदा, सीहोर, उज्जैन और कई अन्य जिलों में भी अच्छी बारिश हुई है। दूसरी ओर अलीराजपुर, झाबुआ, धार और कुछ पूर्वी जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है। मौसम विभाग को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में सक्रिय होने वाला नया सिस्टम इन क्षेत्रों में भी अच्छी बारिश लेकर आएगा।
Gwalior collector Ruchika Chauhan: चबूतरे पर बैठीं कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान, ग्रामीणों की सुनीं समस्याएं; किसानों को दी नई खेती की सलाह

Gwalior collector Ruchika Chauhan: ग्वालियर। जिले के ग्राम बरेठा में रविवार रात आयोजित रात्रि चौपाल में प्रशासन का अलग ही अंदाज देखने को मिला। कलेक्टर रुचिका सिंह चौहान पंचायत भवन के सामने चबूतरे पर ग्रामीणों के बीच बैठीं और उनकी समस्याएं सीधे सुनीं। पूरे कार्यक्रम में औपचारिकता कम और संवाद ज्यादा देखने को मिला। चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने बेझिझक अपनी समस्याएं रखीं। विभिन्न विभागों से जुड़े 88 आवेदन मिले, जिनमें कई मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। बाकी मामलों के लिए अधिकारियों को तय समय-सीमा में कार्रवाई के निर्देश दिए गए। थार हटाने को कहा तो छीन ली लाइसेंसी रिवॉल्वर, भोपाल में किसान पर ताबड़तोड़ फायरिंग, तीन आरोपी गिरफ्तार किसानों को दी नई खेती अपनाने की सलाह बैठक में खरीफ सीजन और इस साल कम बारिश की संभावना पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने किसानों से धान की जगह तिल, टमाटर, मिर्च और मशरूम जैसी कम पानी में होने वाली नकदी फसलें अपनाने की अपील की। कृषि और उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों ने इन फसलों से होने वाले उत्पादन और संभावित आय की भी जानकारी दी। अधिकारियों की सलाह से प्रभावित होकर 20 किसानों ने तिल, जबकि 10-10 किसानों ने टमाटर और मशरूम की खेती शुरू करने के लिए अपने नाम दर्ज कराए। प्रशासन ने उन्हें तकनीकी सहायता देने का भरोसा भी दिया। breaking news murena: मुरैना में दर्दनाक हादसा; ट्रैक्टर-ट्रॉली ने श्रद्धालुओं से भरे ऑटो को मारी टक्कर, 3 की मौत जरूरतमंद परिवारों को मिली राहत चौपाल में गांव की रहने वाली रेखा ने अपने लकवाग्रस्त पति और आर्थिक परेशानी की जानकारी दी। इस पर कलेक्टर ने श्रम विभाग को निर्देश देकर संबल योजना के तहत 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत कराने की प्रक्रिया शुरू कराई। रेखा ने कहा कि इस मदद से वह सिलाई मशीन खरीदकर अपने परिवार की आजीविका शुरू करेगी। महज 25 मिनट में लिख दिया गया था बॉलीवुड का यह अमर गीत, किशोर कुमार और लता की आवाज ने बना दिया सदाबहार इलाज और राजस्व मामलों पर भी हुई कार्रवाई चौपाल के दौरान आंखों की गंभीर समस्या से जूझ रहे किशोर इरफान के इलाज के लिए कलेक्टर ने तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए। वहीं सीमांकन, नामांतरण और बंटवारे से जुड़े कई राजस्व मामलों में भी अधिकारियों को मौके पर ही कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। इस रात्रि चौपाल में जिला पंचायत सीईओ सोजन सिंह रावत, जनपद पंचायत अध्यक्ष दिलराज सिंह किरार सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
एमपी बनेगा देश का अगला टेक हब, 40 हजार करोड़ के निवेश से 35 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार

मध्य प्रदेश। भोपाल में आयोजित एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के साथ मध्यप्रदेश ने खुद को देश के उभरते तकनीकी और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कॉन्क्लेव का शुभारंभ करते हुए प्रदेश के भविष्य का ऐसा विजन पेश किया जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की नई पहचान बनने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इस आयोजन के जरिए प्रदेश में करीब 40 हजार करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित होगा और लगभग 35 हजार नए रोजगार के अवसर तैयार होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। मध्यप्रदेश भी अब केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा बल्कि यहां ड्रोन, रक्षा उपकरण और मिसाइल जैसे अत्याधुनिक उत्पादों का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य भविष्य की तकनीकों को अपनाते हुए नई औद्योगिक क्रांति की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। कॉन्क्लेव के दौरान 51 विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा जिनका उद्देश्य निवेशकों को प्रदेश की संभावनाओं से जोड़ना और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण प्रस्तुत करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी बार्सिलोना यात्रा के बाद स्पेन, अमेरिका और कनाडा की कंपनियों ने मध्यप्रदेश में 228 करोड़ रुपए का निवेश किया। इसी यात्रा के दौरान एक गीगावाट क्षमता वाले एआई डेटा सेंटर के लिए समझौता हुआ था और अब संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि भोपाल पहुंच चुके हैं जिससे परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा। राज्य सरकार ने आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की भी बड़ी घोषणा की। इंदौर के सुपर कॉरिडोर में आधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा जहां प्लग एंड प्ले सुविधा उपलब्ध होगी ताकि कंपनियां बिना अतिरिक्त निर्माण के तुरंत संचालन शुरू कर सकें। इसी तरह भोपाल आईटी पार्क का लगभग चार लाख वर्गफुट तक विस्तार किया जाएगा जबकि कोलार रोड पर पांच एकड़ भूमि में नया अत्याधुनिक आईटी पार्क बनाया जाएगा। इन परियोजनाओं से प्रदेश के युवाओं के लिए आईटी, इंजीनियरिंग और डिजिटल क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि तकनीकी निवेश केवल उद्योगों को नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और रोजगार व्यवस्था को भी नई दिशा देगा। कॉन्क्लेव में देश और विदेश की कई प्रतिष्ठित कंपनियां शामिल हुई हैं जिनमें CtrlS Datacenters, Kaynes Technologies, Fujiyama Power और Nyobolt Limited प्रमुख हैं। इसके अलावा आईआईएम इंदौर और आईआईएसईआर जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान भी भाग ले रहे हैं जो कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार को नई गति देंगे। कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण एमओयू और रणनीतिक साझेदारियों पर भी सहमति बनने की उम्मीद है जो राज्य के डिजिटल ढांचे को मजबूत करेंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव का तीसरा संस्करण निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास के मामले में नया रिकॉर्ड बनाएगा। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब के रूप में उभरने की पूरी क्षमता रखता है और सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रही है।
मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड पर घमासान तेज, गैर-मुस्लिम नियुक्तियों के खिलाफ शिया समुदाय की भी खुली नाराजगी

मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। अब तक सुन्नी उलेमा और मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद पहली बार शिया समुदाय ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। भोपाल के करोंद स्थित आल-ए-मोहम्मद शिया जामा मस्जिद के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैयद अज़हर हुसैन रिजवी ने साफ कहा कि वक्फ की जमीनें और संपत्तियां मुस्लिम समाज की अमानत हैं, इसलिए इनके संचालन और प्रबंधन में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता। मौलाना रिजवी का कहना है कि वक्फ की संपत्तियां वर्षों पहले नवाबों, राजाओं और समाज के संपन्न लोगों ने गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों की शिक्षा, आवास तथा सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से दान की थीं। ऐसे में इन संपत्तियों से जुड़े फैसले भी मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के हाथों में ही होने चाहिए। उनके मुताबिक वक्फ केवल संपत्ति का मामला नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें बाहरी दखल उचित नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नए वक्फ बोर्ड में शिया समुदाय के किसी भी प्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि प्रदेश के मुस्लिम समाज में शिया समुदाय भी महत्वपूर्ण हिस्सा है और बोर्ड में कम से कम एक शिया आलिम या प्रतिनिधि को शामिल किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं होने से समाज के एक बड़े वर्ग में निराशा है। मौलाना रिजवी ने उन लोगों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए जिन्होंने नए वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के स्वागत का समर्थन किया। उनका कहना है कि यदि कोई धार्मिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसे फैसलों का समर्थन करता है तो यह मुस्लिम समाज की भावनाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि धार्मिक मामलों में समाज की भावनाओं और विश्वास का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। दरअसल हाल ही में शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम द्वारा वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत के बाद मुस्लिम समाज के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिली थी। इस मुद्दे पर पहले भी कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। जुमे की नमाज के दौरान लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था, जबकि कुछ धार्मिक पदाधिकारियों ने भी इस फैसले पर असहमति जताई थी। मौलाना रिजवी ने मुस्लिम समाज से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों की एक बड़ी वजह आपसी एकता की कमी भी है। यदि समाज संगठित रहता तो ऐसे विवादों की स्थिति नहीं बनती। उन्होंने सभी मतभेद भुलाकर समाजहित में एक साथ खड़े होने की आवश्यकता बताई। इधर यह मामला अब कानूनी दिशा भी पकड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने जबलपुर हाईकोर्ट में केविएट दायर कर दी है। बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल का कहना है कि यदि इस मामले में कोई याचिका दायर होती है तो अदालत किसी भी आदेश से पहले बोर्ड का पक्ष भी अवश्य सुने। ऐसे में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सामाजिक और कानूनी दोनों स्तरों पर लगातार गहराता दिखाई दे रहा है। Tags (English):Waqf Board, Madhya Pradesh, Shia Community, Bhopal News, Waqf Controversy मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब नया मोड़ ले चुका है। अब तक सुन्नी उलेमा और मुस्लिम संगठनों के विरोध के बाद पहली बार शिया समुदाय ने भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। भोपाल के करोंद स्थित आल-ए-मोहम्मद शिया जामा मस्जिद के इमाम-ए-जुमा मौलाना सैयद अज़हर हुसैन रिजवी ने साफ कहा कि वक्फ की जमीनें और संपत्तियां मुस्लिम समाज की अमानत हैं, इसलिए इनके संचालन और प्रबंधन में गैर-मुस्लिमों को शामिल करना उचित नहीं माना जा सकता। मौलाना रिजवी का कहना है कि वक्फ की संपत्तियां वर्षों पहले नवाबों, राजाओं और समाज के संपन्न लोगों ने गरीब और जरूरतमंद मुसलमानों की शिक्षा, आवास तथा सामाजिक कल्याण के उद्देश्य से दान की थीं। ऐसे में इन संपत्तियों से जुड़े फैसले भी मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के हाथों में ही होने चाहिए। उनके मुताबिक वक्फ केवल संपत्ति का मामला नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा विषय है, इसलिए इसमें बाहरी दखल उचित नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी नाराजगी जताई कि नए वक्फ बोर्ड में शिया समुदाय के किसी भी प्रतिनिधि को स्थान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि प्रदेश के मुस्लिम समाज में शिया समुदाय भी महत्वपूर्ण हिस्सा है और बोर्ड में कम से कम एक शिया आलिम या प्रतिनिधि को शामिल किया जाना चाहिए था। ऐसा नहीं होने से समाज के एक बड़े वर्ग में निराशा है। मौलाना रिजवी ने उन लोगों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए जिन्होंने नए वक्फ बोर्ड अध्यक्ष के स्वागत का समर्थन किया। उनका कहना है कि यदि कोई धार्मिक पद पर बैठा व्यक्ति ऐसे फैसलों का समर्थन करता है तो यह मुस्लिम समाज की भावनाओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता। उनका मानना है कि धार्मिक मामलों में समाज की भावनाओं और विश्वास का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। दरअसल हाल ही में शहर काजी मुश्ताक अली नदवी और शहर मुफ्ती अब्दुल कलाम द्वारा वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत के बाद मुस्लिम समाज के एक वर्ग में नाराजगी देखने को मिली थी। इस मुद्दे पर पहले भी कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध दर्ज कराया था। जुमे की नमाज के दौरान लोगों ने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था, जबकि कुछ धार्मिक पदाधिकारियों ने भी इस फैसले पर असहमति जताई थी। मौलाना रिजवी ने मुस्लिम समाज से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि वर्तमान परिस्थितियों की एक बड़ी वजह आपसी एकता की कमी भी है। यदि समाज संगठित रहता तो ऐसे विवादों की स्थिति नहीं बनती। उन्होंने सभी मतभेद भुलाकर समाजहित में एक साथ खड़े होने की आवश्यकता बताई। इधर यह मामला अब कानूनी दिशा भी पकड़ता नजर आ रहा है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा के बाद मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड ने जबलपुर हाईकोर्ट में केविएट दायर कर दी है। बोर्ड अध्यक्ष सनव्वर पटेल का कहना
इंदौर से भोपाल तक साइकिल यात्रा पर कांग्रेस, जीतू पटवारी दो दिन में तय करेंगे 200 किमी का सफर

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, बेरोजगारी और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदेश कांग्रेस अब सड़क पर उतरने जा रही है। कांग्रेस ने 14 जुलाई से इंदौर से भोपाल तक करीब 200 किलोमीटर लंबी साइक्लोथॉन आयोजित करने का फैसला किया है। इस दो दिवसीय यात्रा का नेतृत्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वयं साइकिल चलाकर करेंगे। पार्टी का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य छात्रों और युवाओं की आवाज को प्रदेश सरकार तक पहुंचाना तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग को मजबूती देना है। साइक्लोथॉन की शुरुआत 14 जुलाई की सुबह करीब 8 बजे इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के समीप आरएनटी मार्ग से होगी। यह क्षेत्र शहर का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र माना जाता है। कांग्रेस यहां से छात्रों के बीच संवाद करते हुए यात्रा की शुरुआत करेगी और नीट यूजी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों, पेपर लीक तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। यात्रा इंदौर से देवास, सीहोर होते हुए भोपाल पहुंचेगी। कांग्रेस के अनुसार रास्ते में पड़ने वाले प्रत्येक जिले से लगभग 500 साइकिल यात्री इस अभियान से जुड़ेंगे। इंदौर, देवास, सीहोर और भोपाल को मिलाकर करीब दो हजार से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा इंदौर से भोपाल तक लगातार साथ चलने वाले स्थायी साइकिल यात्रियों की अलग सूची तैयार की जा रही है जिसमें साइकिल रेसिंग ग्रुप और फिटनेस क्लब के सदस्य भी शामिल होंगे। पहले दिन की यात्रा सीहोर जिले के आष्टा स्थित गोकुलधाम मैरिज गार्डन में रात्रि विश्राम के साथ समाप्त होगी। इसके बाद 15 जुलाई की सुबह कोठरी कस्बे से दोबारा यात्रा शुरू होगी और भोपाल पहुंचकर इसका समापन किया जाएगा। हालांकि समापन स्थल को लेकर प्रशासन और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बन पाई है। कांग्रेस व्यापमं चौराहा या अन्य प्रमुख स्थानों पर कार्यक्रम करना चाहती है जबकि प्रशासन ने मोतिया तालाब क्षेत्र की अनुमति दी है। पार्टी का कहना है कि वहां अस्पताल होने के कारण यातायात और मरीजों को परेशानी हो सकती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि देश की आजादी के 80 वर्ष बाद अब ऐसा मॉडल विकसित होना चाहिए जिसमें प्रत्येक बच्चे को केजी से पीजी तक मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले। उनका कहना है कि शिक्षा केवल सुविधा नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रोफेशनल परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित होनी चाहिए और नीट जैसी परीक्षाओं में सामने आने वाली अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगनी चाहिए। पटवारी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी पेपर लीक या भ्रष्टाचार के मामले सामने आते हैं तब सत्ता पक्ष के लोगों के नाम चर्चा में आते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को इन सवालों का जवाब देना चाहिए और युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि छात्रों, अभिभावकों और युवाओं की चिंताओं को सामने लाने के लिए निकाली जा रही है। अपने भाई को हिरासत में लिए जाने के सवाल पर पटवारी ने कहा कि विपक्ष की राजनीति आसान नहीं होती और सरकार यदि अपनी ताकत का दुरुपयोग करती है तो भी कांग्रेस जनता के मुद्दों पर संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रदेश की जनता सब देख रही है और कानून पर उसका विश्वास कायम है।
थार हटाने को कहा तो छीन ली लाइसेंसी रिवॉल्वर, भोपाल में किसान पर ताबड़तोड़ फायरिंग, तीन आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली । भोपाल के मिसरोद इलाके में मामूली विवाद ने उस समय खूनी रूप ले लिया जब रास्ते में खड़ी थार हटाने के लिए हॉर्न बजाने पर तीन युवकों ने एक किसान पर हमला कर दिया। आरोपियों ने पहले किसान के साथ बेरहमी से मारपीट की और फिर उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर छीनकर उसी से दो गोलियां चला दीं। एक गोली किसान के पैर को चीरते हुए निकल गई जबकि दूसरी निशाने से चूक गई। पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई जिसके आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। घटना शनिवार देर रात मिसरोद थाना क्षेत्र स्थित सागर रॉयल होम्स सोसाइटी की है। घायल किसान की पहचान 33 वर्षीय हरीश कुमार राय के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार हरीश देर रात अपने घर लौट रहे थे। जब वह सोसाइटी के मुख्य गेट पर पहुंचे तो वहां एक थार वाहन खड़ा मिला जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था। उन्होंने वाहन हटाने के लिए कई बार हॉर्न बजाया लेकिन थार में बैठे युवकों ने रास्ता खाली नहीं किया। इसके बाद हरीश दूसरे गेट से अंदर जाकर अपनी गाड़ी पार्क करने लगे। कुछ ही देर बाद थार में सवार तीनों युवक भी पार्किंग में पहुंच गए और वाहन हटाने की बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने किसान के साथ मारपीट शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार युवकों ने डंडों से हमला किया और इसी दौरान हरीश की लाइसेंसी रिवॉल्वर छीन ली। इसके बाद आरोपियों ने उसी रिवॉल्वर से दो फायर किए। एक गोली हरीश के बाएं पैर में घुटने के नीचे लगी जिससे पैर में फ्रैक्चर हो गया जबकि दूसरी गोली किसी को नहीं लगी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान घटनास्थल से दो खाली कारतूस बरामद किए गए। सीसीटीवी फुटेज में पूरी वारदात स्पष्ट रूप से दिखाई देने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने हर्षित पटेल 21 वर्ष अनुभव चौबे 19 वर्ष और लोकेश रघुवंशी 24 वर्ष के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं घायल किसान का अस्पताल में उपचार जारी है और डॉक्टरों की निगरानी में उसकी हालत पर नजर रखी जा रही है। यह घटना एक बार फिर सड़क पर होने वाले छोटे विवादों के खतरनाक रूप लेने की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। महज रास्ता खाली कराने के लिए हॉर्न बजाने जैसी सामान्य बात पर हिंसा और फायरिंग तक पहुंच जाना चिंता का विषय है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रोमांस से लेकर क्राइम और हॉरर तक सब कुछ, इस सप्ताह OTT पर मिलेगा मनोरंजन का फुल डोज

नई दिल्ली । ओटीटी दर्शकों के लिए 13 से 19 जुलाई का सप्ताह मनोरंजन से भरपूर रहने वाला है। इस पूरे सप्ताह नेटफ्लिक्स जियो हॉटस्टार और प्राइम वीडियो जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म पर कुल 13 नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज होने जा रही हैं। खास बात यह है कि इस बार कंटेंट की विविधता दर्शकों को हर तरह का मनोरंजन देने वाली है। रोमांटिक ड्रामा से लेकर क्राइम डॉक्यूसीरीज एक्शन एडवेंचर कॉमेडी हॉरर और साइकोलॉजिकल थ्रिलर तक लगभग हर जॉनर की नई पेशकश इस सप्ताह ओटीटी पर दस्तक देगी। इस सप्ताह सबसे ज्यादा हलचल नेटफ्लिक्स पर देखने को मिलेगी जहां अकेले आठ नई फिल्में और सीरीज रिलीज होंगी। इनमें जापानी एक्शन फिल्म गोल्डन कामुय अबाशिरी प्रिजन रेड साइकोलॉजिकल एडवेंचर ड्रामा सकर पंच जर्मन फिल्म 23000 लाइव्स इंडोनेशियन ड्रामा मी बिफोर मी और लोकप्रिय हॉलीवुड सीरीज यंग शेल्डन का छठा सीजन प्रमुख आकर्षण हैं। इसके अलावा क्वारंटाइन 2 टर्मिनल डिजायर और द मैप ऑफ लॉन्गिंग भी दर्शकों के लिए नई कहानी और अलग अनुभव लेकर आएंगी। जियो हॉटस्टार भी इस सप्ताह दो बड़ी रिलीज के साथ दर्शकों को आकर्षित करेगा। रोमांटिक पीरियड ड्रामा वुथरिंग हाइट्स क्लासिक उपन्यास पर आधारित एक भव्य प्रस्तुति है जिसमें भावनाओं और रिश्तों की गहराई देखने को मिलेगी। वहीं तमिल रियलिटी डेटिंग शो सेकेंड लव आधुनिक रिश्तों की नई कहानी लेकर आएगा जिसमें पुराने रिश्तों को पीछे छोड़ नए जीवनसाथी की तलाश दिखाई जाएगी। इसके अलावा रेडी ऑर नॉट 2 हेयर आई कम भी कॉमेडी और हॉरर का शानदार मिश्रण पेश करेगी। प्राइम वीडियो पर भी इस सप्ताह दो अलग तरह की कहानियां रिलीज होंगी। मर्डर 101 एक ऐसी डॉक्यूसीरीज है जो वर्षों पुराने हत्या के रहस्य की जांच को नए नजरिए से सामने लाती है। वहीं राइड एंड डाई एक्शन और कॉमेडी से भरपूर कहानी है जिसमें दो दोस्तों की जिंदगी एक खतरनाक मिशन के बाद पूरी तरह बदल जाती है और उनके सामने कई अप्रत्याशित चुनौतियां आ खड़ी होती हैं। इस सप्ताह की खास बात यह है कि अलग अलग देशों की फिल्में और सीरीज भी भारतीय दर्शकों के लिए उपलब्ध होंगी। जापान जर्मनी अमेरिका और इंडोनेशिया की कहानियां अब हिंदी सहित कई भाषाओं में देखने को मिलेंगी जिससे वैश्विक कंटेंट का दायरा और भी बड़ा हो जाएगा। यही वजह है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म अब सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि दुनिया भर की कहानियों को एक साथ देखने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुके हैं। यदि आप रोमांस पसंद करते हैं तो वुथरिंग हाइट्स और डिजायर आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। एक्शन प्रेमियों के लिए गोल्डन कामुय और रेडी ऑर नॉट 2 खास रहेंगे। वहीं सस्पेंस और क्राइम पसंद करने वाले दर्शकों के लिए मर्डर 101 और क्वारंटाइन 2 बेहतरीन विकल्प साबित हो सकते हैं। कुल मिलाकर यह सप्ताह ओटीटी दर्शकों के लिए नई कहानियों नए किरदारों और भरपूर मनोरंजन का शानदार पैकेज लेकर आया है। घर बैठे अलग अलग जॉनर का आनंद लेने वालों के लिए यह पूरा सप्ताह किसी फिल्मी उत्सव से कम नहीं होगा।
महज 25 मिनट में लिख दिया गया था बॉलीवुड का यह अमर गीत, किशोर कुमार और लता की आवाज ने बना दिया सदाबहार

नई दिल्ली । बॉलीवुड के स्वर्णिम दौर में कई ऐसे गीत बने जिन्होंने समय की सीमाओं को पार करते हुए पीढ़ियों के दिलों में अपनी जगह बनाई। इन्हीं अमर गीतों में शामिल है फिल्म आन मिलो सजना का लोकप्रिय गीत अच्छा तो हम चलते हैं। यह गीत सिर्फ अपनी मधुर धुन और भावपूर्ण शब्दों की वजह से ही नहीं बल्कि इसके बनने की अनोखी कहानी के कारण भी आज तक याद किया जाता है। कहा जाता है कि इस गीत की शुरुआत महज चार साधारण शब्दों से हुई और पूरा गीत केवल 25 मिनट में तैयार हो गया। साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म आन मिलो सजना में राजेश खन्ना और आशा पारेख की जोड़ी ने दर्शकों का दिल जीत लिया था। फिल्म के इस गीत को महान गायक किशोर कुमार और सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी जबकि इसके बोल प्रसिद्ध गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे और संगीत लक्ष्मीकांत प्यारेलाल की मशहूर जोड़ी ने तैयार किया। गीत में प्रेम और बिछड़ने की भावनाओं को बेहद सहज और खूबसूरत अंदाज में पिरोया गया है जिसकी वजह से यह आज भी लोगों की पसंदीदा प्लेलिस्ट का हिस्सा बना हुआ है। इस गीत के निर्माण से जुड़ा किस्सा भी कम रोचक नहीं है। बताया जाता है कि आनंद बख्शी और संगीतकार लक्ष्मीकांत प्यारेलाल पूरे दिन इस बात पर विचार करते रहे कि फिल्म की धुन पर कौन से शब्द सबसे उपयुक्त बैठेंगे। घंटों की मेहनत के बावजूद कोई संतोषजनक पंक्तियां नहीं बन सकीं। जैसे ही शाम होने लगी तो लक्ष्मीकांत ने बातचीत के दौरान सहज अंदाज में कहा अच्छा तो हम चलते हैं। इस पर आनंद बख्शी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया फिर कब मिलोगे। सामने से उत्तर आया जब तुम कहोगे। बस यही साधारण बातचीत गीत की पहली पंक्तियां बन गई। कहा जाता है कि इन चार शब्दों ने आनंद बख्शी की रचनात्मकता को नई दिशा दी और उन्होंने तुरंत लक्ष्मीकांत को रुकने के लिए कहा। इसके बाद महज 25 मिनट के भीतर पूरा गीत तैयार हो गया। यही वजह है कि यह गीत आज भी इस बात का उदाहरण माना जाता है कि कई बार सबसे यादगार रचनाएं अचानक और सहज रूप से जन्म लेती हैं। जब यह गीत रिकॉर्ड हुआ तो किशोर कुमार और लता मंगेशकर की जादुई आवाज ने इसमें ऐसी मिठास घोल दी कि यह रिलीज होते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया। राजेश खन्ना और आशा पारेख पर फिल्माया गया यह गीत प्रेम और विदाई के भावों को बेहद खूबसूरती से प्रस्तुत करता है। इसकी धुन सरल है लेकिन दिल को छू लेने वाली है और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बन गई। आज भी शादी समारोहों से लेकर रेडियो और संगीत कार्यक्रमों तक यह गीत उतने ही उत्साह के साथ सुना जाता है जितना पांच दशक पहले सुना जाता था। यह कहानी इस बात का प्रमाण है कि महान संगीत केवल लंबे समय की योजना से नहीं बल्कि रचनात्मक सोच और सही पल में जन्मे विचारों से भी तैयार हो सकता है। अच्छा तो हम चलते हैं सिर्फ एक गीत नहीं बल्कि हिंदी सिनेमा की उस सुनहरी विरासत का हिस्सा है जिसे समय कभी पुराना नहीं कर सकता।