रोमिंग डेटा से अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने का दावा, ईरान की कथित साइबर रणनीति ने बढ़ाई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मोबाइल नेटवर्क सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान या उससे जुड़े तत्वों ने क्षेत्र के पुराने दूरसंचार नेटवर्क की तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर अमेरिकी सैनिकों, सरकारी कर्मचारियों और रक्षा ठेकेदारों के मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि हमलों में लोकेशन डेटा की निर्णायक भूमिका साबित नहीं हुई है। इसके बावजूद इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा और मोबाइल संचार की विश्वसनीयता पर नई चर्चा शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि मोबाइल सर्विलांस पर काम करने वाले एक स्वतंत्र शोध समूह ने मध्य पूर्व के कई दूरसंचार नेटवर्क पर असामान्य गतिविधियां दर्ज कीं। शोधकर्ताओं के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसी तकनीकी रिक्वेस्ट भेजी गईं जिनका उद्देश्य रोमिंग पर मौजूद विशेष मोबाइल फोनों की स्थिति और नेटवर्क की जानकारी प्राप्त करना था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियां सामान्य उपभोक्ता सेवाओं से अलग होती हैं और किसी विशेष लक्ष्य की पहचान करने के उद्देश्य से इस्तेमाल की जा सकती हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा एसएस7 प्रोटोकॉल को लेकर हो रही है। यह दूरसंचार नेटवर्क का एक पुराना सिग्नलिंग सिस्टम है, जिसका उपयोग विभिन्न देशों के मोबाइल नेटवर्क के बीच कॉल, संदेश और रोमिंग सेवाओं के समन्वय के लिए किया जाता है। वर्षों से सुरक्षा विशेषज्ञ इस प्रणाली की कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं। यदि किसी नेटवर्क तक अनुचित पहुंच मिल जाए तो कुछ परिस्थितियों में इसका दुरुपयोग कर किसी मोबाइल डिवाइस की स्थिति संबंधी सीमित जानकारी जुटाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी व्यक्ति की लगातार और सटीक वास्तविक समय की निगरानी केवल इसी तकनीक के आधार पर हमेशा संभव नहीं होती। रिपोर्टों के अनुसार बहरीन सहित खाड़ी क्षेत्र के कुछ दूरसंचार नेटवर्क पर ऐसे एसएस7 अनुरोधों में अचानक वृद्धि देखी गई। इसी आधार पर कुछ विश्लेषकों ने आशंका जताई कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों या ठेकेदारों से जुड़े मोबाइल नंबरों की पहचान करने का प्रयास किया गया हो सकता है। हालांकि इस संबंध में किसी सरकारी एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से ठोस तकनीकी प्रमाण जारी नहीं किए हैं। दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया है कि युद्ध क्षेत्रों में वाणिज्यिक लोकेशन डेटा और डिजिटल ट्रैकिंग से जुड़े संभावित खतरों को गंभीरता से लिया जा रहा है। सेना का कहना है कि कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त एहतियाती उपाय लागू किए गए हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि हालिया हमलों में लोकेशन डेटा की अहम भूमिका होने के दावों का समर्थन उपलब्ध तथ्यों से नहीं होता। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आधुनिक युद्ध में डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। आज मोबाइल फोन केवल संचार का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे संवेदनशील सूचनाओं का स्रोत भी बन सकते हैं। इसलिए सैन्य, सरकारी और रणनीतिक संस्थानों के साथ-साथ आम उपयोगकर्ताओं के लिए भी सुरक्षित नेटवर्क, अद्यतन सुरक्षा उपाय और डिजिटल सतर्कता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यही कारण है कि दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा और पुराने प्रोटोकॉल के आधुनिकीकरण पर अब वैश्विक स्तर पर तेजी से ध्यान दिया जा रहा है।
'सेल बोस्टन 2026' में भारत की दमदार मौजूदगी, आईएनएस सुदर्शिनी ने समुद्री विरासत और सांस्कृतिक पहचान का किया भव्य प्रदर्शन

नई दिल्ली । अमेरिका के ऐतिहासिक शहर बोस्टन में आयोजित प्रतिष्ठित ‘सेल बोस्टन 2026’ समारोह के दौरान भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री परंपरा, अनुशासन और सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। भारतीय नौसेना के पाल पोत आईएनएस सुदर्शिनी के चालक दल और प्रशिक्षुओं ने शहर की प्रमुख सड़कों पर आयोजित क्रू एवं कैडेट सिटी परेड में हिस्सा लिया। उनकी अनुशासित कदमताल और तिरंगे के साथ प्रस्तुत मार्च ने स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ विभिन्न देशों से आए प्रतिभागियों का भी ध्यान आकर्षित किया। ‘सेल बोस्टन 2026’ दुनिया के प्रमुख समुद्री आयोजनों में से एक माना जाता है, जिसमें 20 से अधिक देशों के 60 से ज्यादा पारंपरिक और विशाल नौकायन पोत भाग ले रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा आईएनएस सुदर्शिनी अपनी विशिष्ट पहचान और ऐतिहासिक महत्व के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। परेड के दौरान भारतीय दल ने अनुशासन, पेशेवर दक्षता और सांस्कृतिक विविधता का ऐसा परिचय दिया, जिसकी व्यापक सराहना की गई। भारतीय नौसेना के इस अभियान का उद्देश्य केवल समुद्री उपस्थिति दर्ज कराना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध नौवहन परंपराओं, समुद्री इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना भी है। आईएनएस सुदर्शिनी के माध्यम से भारत दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि उसकी समुद्री परंपरा हजारों वर्षों पुरानी होने के साथ आज भी उतनी ही प्रासंगिक और जीवंत है। परेड में भारतीय तिरंगे की मौजूदगी और नौसैनिकों का आत्मविश्वासपूर्ण प्रदर्शन भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत करता नजर आया। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय समुद्री आयोजनों में भागीदारी से भारत और अमेरिका के बीच समुद्री सहयोग को नई मजबूती मिलती है। साथ ही यह भी संदेश जाता है कि समुद्र केवल व्यापार, परिवहन और सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद और मित्रता का भी महत्वपूर्ण सेतु है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नौसेनाओं के बीच सहयोग, अनुभवों का आदान-प्रदान और पारस्परिक विश्वास भी बढ़ता है। बोस्टन पहुंचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने न्यूयॉर्क में आयोजित ‘सेल फोर्थ 250’ समारोह में भी भाग लिया था, जहां भारतीय दल ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके बाद पोत बोस्टन पहुंचा और यहां भी भारत की समुद्री परंपरा तथा सांस्कृतिक पहचान का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया। विभिन्न देशों के पारंपरिक नौकायन पोतों के बीच भारतीय पोत की मौजूदगी ने वैश्विक मंच पर भारत की ऐतिहासिक समुद्री विरासत को नई पहचान दिलाई। आईएनएस सुदर्शिनी वर्तमान में ‘लोकायन 2026’ वैश्विक समुद्री अभियान के तहत विभिन्न देशों के बंदरगाहों का दौरा कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भारत की समुद्री विरासत, नौवहन परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के संदेश को विश्व समुदाय तक पहुंचाना है। भारतीय नौसेना का यह ऐतिहासिक पाल पोत प्रशिक्षण, समुद्री जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बोस्टन में इसकी भागीदारी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत अपनी समृद्ध समुद्री विरासत, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक साझेदारी की भावना के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
भारत-यूके एफटीए लागू होते ही खुलेंगे व्यापार और निवेश के नए द्वार, शून्य शुल्क के साथ भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा वैश्विक बाजार, 'विकसित भारत' अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली । भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुआ व्यापक आर्थिक एवं मुक्त व्यापार समझौता देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात, निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देगा। इसके साथ ही ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। समझौते के प्रभाव से भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा, जबकि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का दायरा भी पहले की तुलना में अधिक व्यापक होगा। भारत की सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े संगठनों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे डिजिटल व्यापार, नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। विशेष रूप से आईटी और डिजिटल सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल समाधान जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा। इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। नई व्यवस्था के तहत ब्रिटेन में सीमित अवधि के लिए कार्य करने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा नहीं करना होगा। वे निर्धारित अवधि तक भारत में ही अपना योगदान जारी रख सकेंगे। इससे भारतीय कंपनियों और उनके कर्मचारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा तथा अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियों को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाया जा सकेगा। उद्योग जगत का मानना है कि यह व्यवस्था भारतीय प्रतिभाओं की वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा देगी। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्थापित संस्थागत मंच भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन मंचों के माध्यम से सरकार, उद्योग और नवाचार से जुड़े संगठनों के बीच समन्वय बढ़ेगा। साथ ही डिजिटल व्यापार, प्रौद्योगिकी सुरक्षा, अनुसंधान और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को गति मिलेगी। इससे नई तकनीकों के विकास और उनके व्यावसायिक उपयोग के लिए बेहतर वातावरण तैयार होने की संभावना है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां पहले से ही ब्रिटेन में बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं और हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है जो राजधानी से बाहर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, कौशल विकास और नई तकनीकों के विस्तार को भी प्रोत्साहन मिला है। आने वाले वर्षों में यह सहयोग और अधिक व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का कहना है कि इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के अधिकांश निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी तथा निर्यातकों को नए अवसर प्राप्त होंगे। उद्योग संगठनों का मानना है कि यह समझौता विनिर्माण, सेवाओं, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देगा। साथ ही भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका और मजबूत होगी। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। बेहतर बाजार पहुंच, निवेश में वृद्धि, तकनीकी सहयोग, प्रतिभा के आदान-प्रदान और उद्योगों के विस्तार से भारत की आर्थिक विकास यात्रा को नई गति मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि उद्योग जगत इस समझौते को भारत की वैश्विक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहा है।
बांकीपुर उपचुनाव से पहले जन सुराज को बड़ा झटका, कई वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा का दामन थामा, चुनावी मुकाबले के समीकरण बदले

नई दिल्ली । बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी माहौल के बीच जन सुराज पार्टी को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उसके कई वरिष्ठ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस घटनाक्रम को बांकीपुर उपचुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी के कई प्रभावशाली चेहरे चुनाव से ठीक पहले संगठन छोड़कर भाजपा के साथ जुड़ गए हैं। इससे आगामी चुनाव में राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की मौजूदगी में जन सुराज के वरिष्ठ नेता के.सी. सिन्हा और रितेश रंजन उर्फ बिट्टू सिंह सहित कई नेताओं ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ली। के.सी. सिन्हा पिछले विधानसभा चुनाव में कुम्हरार सीट से जन सुराज के उम्मीदवार रहे थे, जबकि रितेश रंजन सिंह ने दीघा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। दोनों नेताओं की अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय राजनीतिक पहचान मानी जाती है, इसलिए उनका भाजपा में शामिल होना जन सुराज के लिए अहम राजनीतिक नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा की सदस्यता लेने वाले नेताओं में गोपाल सिंह, विनीता बिट्टू सिंह, डॉ. किशोर कुमार, ब्रज किशोर सिन्हा, ब्रह्मदेव मांझी, सुनील यादव, राजू यादव, रंजीत सिंह, राम बाबू यादव, शुभम सिंह, मंटू राय और साधु जी सहित कई अन्य नेता भी शामिल रहे। इनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इससे भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी मजबूती बढ़ाने का दावा किया है। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियों और विकास कार्यों से प्रभावित होकर विभिन्न दलों के नेता लगातार भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उनके अनुसार प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। उन्होंने पार्टी में शामिल हुए सभी नेताओं का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि नए सदस्य संगठन को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। दूसरी ओर, जन सुराज के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर स्वयं बांकीपुर उपचुनाव में चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले संगठन के कई प्रमुख नेताओं का पार्टी छोड़ना जन सुराज की रणनीति और चुनावी तैयारी के लिए चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले नेताओं के दल बदलने से मतदाताओं की प्राथमिकताओं और चुनावी समीकरणों पर कुछ हद तक प्रभाव पड़ सकता है। बांकीपुर विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव नितिन नवीन के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद कराया जा रहा है। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। वे लगातार चार बार बांकीपुर से विधायक रहे हैं। अब इस सीट पर होने वाला उपचुनाव सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक दल अपने-अपने संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने में जुटे हुए हैं। ऐसे में नेताओं के दल बदलने की यह घटना चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बनाने वाली मानी जा रही है।
भारत-यूके सीईटीए लागू, भारतीय उद्योग के लिए खुले नए अवसर; फिक्की ने बताया व्यापार और निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) लागू होने के बाद भारतीय उद्योग जगत ने इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) का मानना है कि यह समझौता भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए बाजारों के द्वार खोलेगा तथा निर्यात, निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति देगा। संगठन ने इसे भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने समझौते के लागू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि भारत-यूके सीईटीए से वस्तुओं और सेवाओं दोनों क्षेत्रों में कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे। उनके अनुसार, नवाचार, प्रौद्योगिकी सहयोग और प्रतिभा के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर देगा और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भूमिका को और सशक्त बनाएगा। फिक्की का कहना है कि यह समझौता भारत की मुक्त व्यापार समझौता नीति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। संगठन के अनुसार, इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे तथा उद्योगों को नई तकनीकों, निवेश और वैश्विक सहयोग का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच नवाचार आधारित विकास को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति मिल सकती है। फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली आर्थिक साझेदारियां भारत के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उनके अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक क्षमता बढ़ाने, वैश्विक निवेश आकर्षित करने और भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक सक्षम बनाने में भी सहायक होगा। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे समझौते इस यात्रा को और मजबूत करेंगे। उद्योग संगठन का मानना है कि सीईटीए आर्थिक सहयोग के प्रति दीर्घकालिक और दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। इससे व्यापार, निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है। साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने और विदेशी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने का बेहतर अवसर मिलेगा। इससे घरेलू उद्योगों की उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता में भी सुधार आने की उम्मीद जताई गई है। भारत-यूके व्यापार समझौता बुधवार से प्रभावी हो गया है। इसके तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच उपलब्ध होगी, जिससे द्विपक्षीय व्यापार के लगभग पूरे मूल्य को लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से वस्त्र, इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद, सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं सहित कई क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन, सेवाओं और रोजगार की मांग बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
जबलपुर में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल, पुलिस जांच पर छात्र संगठन ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में एक आदिवासी युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसओ) ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाते हुए पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि यदि मामले में शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई तो मृतक के परिजनों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार डुमना चौकी क्षेत्र के महंगवा गांव निवासी नितिन बैगा 8 जून की शाम घर से निकला था, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी थी। बाद में उसका शव महंगवा स्थित खाटू श्याम मंदिर के पास जंगल में बरामद हुआ। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिला उपाध्यक्ष राहुल पाण्डेय ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि युवक की गुमशुदगी की सूचना मिलने के बाद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। संगठन का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर गंभीरता से प्रयास किए जाते तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। संगठन ने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन का यह भी कहना है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि मृतक के परिवार को न्याय मिल सके। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन मृतक के परिजनों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। संगठन ने प्रशासन से मामले की हर पहलू से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच नियमानुसार जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार युवक की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई थी और बाद में उसका शव बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी लगने की पुष्टि हुई है। साथ ही रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और सभी परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस का यह भी कहना है कि परिजनों द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, जिसे गंभीरता से लिया गया है। जांच के दौरान सभी तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब जांच के महत्वपूर्ण चरण में है और पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। दूसरी ओर छात्र संगठन और परिजन निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।
सरकारी वकीलों की भर्ती पर हाई कोर्ट का सख्त रुख, पांचवीं बार भी जवाब नहीं देने पर महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश

मध्य प्रदेश में सरकारी वकीलों की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। लॉ ऑफिसर्स की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार की ओर से बार-बार जवाब प्रस्तुत नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई। लगातार कई अवसर दिए जाने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं होने पर हाई कोर्ट ने महाधिवक्ता को अगली सुनवाई में स्वयं उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मामला हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव योगेश सोनी द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में महाधिवक्ता कार्यालय के अंतर्गत 157 सरकारी लॉ ऑफिसर्स की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि चयन प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और नियुक्तियों में मनमानी, पक्षपात तथा पात्रता संबंधी मानकों की अनदेखी की गई। याचिकाकर्ता ने पूरी भर्ती प्रक्रिया की न्यायिक जांच की मांग भी की है। याचिका में कहा गया है कि सरकारी लॉ ऑफिसर नियुक्त किए जाने के लिए निर्धारित नियमों के अनुसार कम से कम दस वर्ष का अधिवक्ता अनुभव होना आवश्यक है। आरोप है कि नियुक्त किए गए कुछ लोगों के पास निर्धारित अनुभव उपलब्ध नहीं था, फिर भी उन्हें सरकारी वकील नियुक्त कर दिया गया। इन आरोपों के आधार पर याचिकाकर्ता ने नियुक्तियों की वैधता पर प्रश्न उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की है। सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी सामने आया कि पूर्व में जारी न्यायालय के नोटिस संबंधित पक्षों तक पहुंचाने में भी कठिनाई आई। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कुछ अवसरों पर नोटिस स्वीकार नहीं किए गए। अदालत ने इस तथ्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की गंभीरता पर चिंता व्यक्त की। इसके बाद राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कई अवसर दिए गए, लेकिन निर्धारित समय में जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका। लगातार देरी पर असंतोष जताते हुए हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब मामले में और विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। अदालत ने महाधिवक्ता को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया है कि अब तक जवाब क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया और नियुक्तियों से जुड़े आरोपों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष क्या है। अदालत का यह रुख इस मामले को गंभीरता से लिए जाने का संकेत माना जा रहा है। मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को निर्धारित की गई है। इस दौरान महाधिवक्ता की व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ राज्य सरकार से विस्तृत जवाब अपेक्षित रहेगा। अदालत में प्रस्तुत होने वाले उत्तर के आधार पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल इस मामले में किसी भी पक्ष के आरोपों पर न्यायालय ने अंतिम टिप्पणी नहीं की है और विवाद विचाराधीन है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सरकारी लॉ ऑफिसर्स राज्य सरकार की ओर से विभिन्न न्यायालयों में महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी करते हैं। ऐसे में उनकी नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता, पात्रता और नियमों के पालन को लेकर उठे प्रश्नों पर न्यायिक परीक्षण की प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी। अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष प्रस्तुत होने वाले जवाब पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
MP news: मोहन सरकार का बड़ा फैसला, मंत्री लखन पटेल से वापस लिया पशुपालन विभाग

MP news: भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के बिच एक बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। जहां राज्य मंत्री लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग को वापस ले लिया गया है। अब यह विभाग खुद मुख्यमंत्री के पास रहेगा। इसके बाद लखन पटेल के पास केवल आनंद विभाग की जिम्मेदारी रह गई है। अब मुख्यमंत्री के पास हैं 11 विभाग इस फैसले के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास कुल 11 विभाग हो गए हैं। इनमें सामान्य प्रशासन, गृह, जेल, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, जनसंपर्क, नर्मदा घाटी विकास, विमानन, खनिज, लोक सेवा प्रबंधन, प्रवासी भारतीय और अब पशुपालन एवं डेयरी विभाग भी शामिल हैं। कम सीटों के बावजूद संसद में सरकार को घेरने की तैयारी, INDIA गठबंधन ने बनाई आक्रामक रणनीति क्यों लिया गया विभाग? वजह अभी साफ नहीं सरकार की ओर से अभी तक यह नहीं बताया गया है कि लखन पटेल से पशुपालन एवं डेयरी विभाग वापस लेने का फैसला क्यों लिया गया। किसी तरह की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आने से राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कौन हैं लखन पटेल? लखन पटेल मध्य प्रदेश के दमोह जिले की पथरिया विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद उन्हें मोहन सरकार में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया था और पशुपालन एवं डेयरी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषित किए कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हजारों रोजगार देने वाली परियोजनाएं विभाग वापस लेने पर क्या बोले लखन पटेल? इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए लखन पटेल ने कहा कि विभाग देना या वापस लेना मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने पशुपालन विभाग अपने पास रखने का फैसला किया है और वे सरकार के निर्णय का सम्मान करते हैं। क्या मंत्रिमंडल में हो सकता है बदलाव? पशुपालन विभाग मुख्यमंत्री के पास आने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में मंत्रिमंडल या विभागों के प्रभार में कुछ और बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, सरकार की ओर से फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है।
प्रेम, लालच और विश्वासघात की खौफनाक साजिश, गोद ली हुई 8 साल की बेटी की गवाही से खुला नर्स हत्याकांड का राज, तीनों आरोपियों को मिली उम्रकैद

मध्य प्रदेश के खंडवा में वर्ष 2013 में सामने आए चर्चित नर्स ट्रेजा पारे हत्याकांड ने एक बार फिर यह साबित किया कि किसी भी सुनियोजित अपराध के पीछे छिपा सच अंततः सामने आ ही जाता है। शुरुआत में इस घटना को सड़क हादसे का रूप देने की कोशिश की गई थी, लेकिन आठ वर्ष की गोद ली हुई बेटी की गवाही, वैज्ञानिक साक्ष्यों और पुलिस जांच ने पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश कर दिया। बाद में अदालत ने इस मामले में तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। पुलिस जांच के दौरान सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब बच्ची ने बताया कि घटना के समय कार में मौजूद व्यक्ति वही नहीं था, जिसका पहले संदेह जताया जा रहा था। उसकी जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया और तीसरे आरोपी तक पहुंचने में सफलता हासिल की। इसके बाद कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की गई, जिससे आरोपियों के बीच लगातार संपर्क होने की पुष्टि हुई। जांच में सामने आया कि पूरी वारदात एक पूर्व नियोजित साजिश थी। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि ट्रेजा पारे और एक पत्रकार के बीच लंबे समय से निजी संबंध थे। आरोप है कि इस दौरान ट्रेजा ने उस पर आर्थिक रूप से भी भरोसा किया और कई बार बड़ी रकम देने के साथ उसके लिए कार और बुलेट मोटरसाइकिल तक खरीदी। समय के साथ दोनों के रिश्तों में तनाव बढ़ा और विवाद गहराता चला गया। जांच में यह भी सामने आया कि निजी जीवन से जुड़ी कुछ जानकारियां सामने आने के बाद दोनों के बीच विश्वास पूरी तरह टूट गया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विवाद बढ़ने पर ट्रेजा ने आरोपी के खिलाफ शिकायत तैयार कर थाने में जमा कराने के लिए अपने ड्राइवर को दी थी। आरोप है कि शिकायत पुलिस तक पहुंचाने के बजाय ड्राइवर ने इसकी जानकारी आरोपी को दे दी। इसके बाद कथित रूप से शिकायत को रोकने और कानूनी कार्रवाई से बचने के उद्देश्य से हत्या की साजिश रची गई। जांच में यह आरोप भी सामने आया कि वारदात को अंजाम देने के लिए सुपारी दी गई थी। घटना वाले दिन आरोपियों ने ट्रेजा और उनकी बेटी को इलाज के बहाने अपने साथ ले जाकर सुनसान इलाके में पहुंचाया। वहीं कथित रूप से ट्रेजा की हत्या कर दी गई और पूरे मामले को सड़क दुर्घटना जैसा दिखाने का प्रयास किया गया। बच्ची भी हमले की शिकार हुई, लेकिन वह जीवित बच गई। बाद में उसी की गवाही ने पूरे मामले की दिशा बदल दी और पुलिस को वास्तविक घटनाक्रम तक पहुंचने में मदद मिली। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने प्रत्यक्ष गवाही, तकनीकी साक्ष्य और परिस्थितिजन्य प्रमाण अदालत के सामने प्रस्तुत किए। अदालत ने पाया कि उपलब्ध साक्ष्य आरोपियों की भूमिका को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त हैं। इसके आधार पर वर्ष 2016 में खंडवा जिला न्यायालय ने तीनों आरोपियों को ट्रेजा पारे की हत्या और बच्ची की हत्या के प्रयास का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। यह मामला इस बात का भी उदाहरण माना गया कि किसी अपराध की जांच में प्रत्यक्षदर्शी गवाही, वैज्ञानिक साक्ष्य और निष्पक्ष विवेचना कितनी महत्वपूर्ण होती है। एक मासूम बच्ची के साहस और पुलिस की विस्तृत जांच ने उस साजिश का खुलासा किया, जिसे दुर्घटना का रूप देकर हमेशा के लिए छिपाने की कोशिश की गई थी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- विश्व स्तरीय विज्ञान कृतियां नई पीढ़ी को देंगी नवाचार की नई उड़ान

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विज्ञान शिक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आंचलिक विज्ञान केंद्र में अत्याधुनिक अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा का लोकार्पण किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने गैलरी का अवलोकन किया और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े आधुनिक प्रदर्शों को करीब से देखा। कार्यक्रम में विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल और तकनीकी प्रदर्शनियों की भी सराहना की गई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि कम लागत में तैयार की गई इस गैलरी में अधिकतम वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। यहां स्थापित विभिन्न वैज्ञानिक कृतियां विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करने के साथ उन्हें विज्ञान और नवाचार की ओर प्रेरित करेंगी। उन्होंने कहा कि विज्ञान से जुड़ी ये प्रस्तुतियां विश्व स्तरीय हैं और प्रदेश की वैज्ञानिक पहचान को नई मजबूती देंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर अनुसंधान और नवाचार तक नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। ऐसे समय में भोपाल में अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा की स्थापना विद्यार्थियों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक पहल साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह गैलरी भविष्य की वैज्ञानिक पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मध्य प्रदेश देश के विकास और सांस्कृतिक विरासत दोनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि यह नई दीर्घा विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान के नवीनतम ज्ञान, शोध और तकनीकों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल राज्य की स्पेस पॉलिसी को मजबूती देने के साथ वैज्ञानिक सोच और नवाचार की संस्कृति को भी बढ़ावा देगी। नई शिक्षा नीति में भी स्पेस टेक्नोलॉजी को विशेष महत्व दिया गया है और यह गैलरी उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है। आंचलिक विज्ञान केंद्र में विकसित ‘हॉल ऑफ स्पेस एक्सप्लोरेशन’ को अत्याधुनिक और अनुभवात्मक विज्ञान गैलरियों में शामिल किया गया है। इसे राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद और भोपाल जिला प्रशासन के सहयोग से विकसित किया गया है। गैलरी में आगंतुकों को ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों तक की वैज्ञानिक यात्रा को आकर्षक और इंटरैक्टिव तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। यहां प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। गैलरी में 30 से अधिक इंटरैक्टिव और इमर्सिव प्रदर्श स्थापित किए गए हैं। इनमें स्पेस फ्लाइट सिम्युलेटर, स्पेस वॉक, तीन-आयामी खगोलीय पिंडों का अवलोकन, अंतरिक्ष अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, स्पेस टूरिज्म, रॉकेट और अंतरिक्ष यान की कार्यप्रणाली, कक्षीय यांत्रिकी तथा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसी अवधारणाओं को सरल और रोचक तरीके से प्रदर्शित किया गया है। साथ ही भारत की अंतरिक्ष यात्रा को भी विस्तार से दर्शाया गया है, जिसमें आर्यभट्ट, चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य-एल1 और आगामी गगनयान मिशन जैसी उपलब्धियों को प्रमुखता से शामिल किया गया है। राज्य सरकार का मानना है कि यह अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, नवाचार और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। साथ ही यह मध्य प्रदेश की स्पेस पॉलिसी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।