नई दिल्ली । बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी माहौल के बीच जन सुराज पार्टी को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उसके कई वरिष्ठ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस घटनाक्रम को बांकीपुर उपचुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी के कई प्रभावशाली चेहरे चुनाव से ठीक पहले संगठन छोड़कर भाजपा के साथ जुड़ गए हैं। इससे आगामी चुनाव में राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की मौजूदगी में जन सुराज के वरिष्ठ नेता के.सी. सिन्हा और रितेश रंजन उर्फ बिट्टू सिंह सहित कई नेताओं ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ली। के.सी. सिन्हा पिछले विधानसभा चुनाव में कुम्हरार सीट से जन सुराज के उम्मीदवार रहे थे, जबकि रितेश रंजन सिंह ने दीघा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। दोनों नेताओं की अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय राजनीतिक पहचान मानी जाती है, इसलिए उनका भाजपा में शामिल होना जन सुराज के लिए अहम राजनीतिक नुकसान के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा की सदस्यता लेने वाले नेताओं में गोपाल सिंह, विनीता बिट्टू सिंह, डॉ. किशोर कुमार, ब्रज किशोर सिन्हा, ब्रह्मदेव मांझी, सुनील यादव, राजू यादव, रंजीत सिंह, राम बाबू यादव, शुभम सिंह, मंटू राय और साधु जी सहित कई अन्य नेता भी शामिल रहे। इनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इससे भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी मजबूती बढ़ाने का दावा किया है।
इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियों और विकास कार्यों से प्रभावित होकर विभिन्न दलों के नेता लगातार भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उनके अनुसार प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। उन्होंने पार्टी में शामिल हुए सभी नेताओं का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि नए सदस्य संगठन को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
दूसरी ओर, जन सुराज के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर स्वयं बांकीपुर उपचुनाव में चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले संगठन के कई प्रमुख नेताओं का पार्टी छोड़ना जन सुराज की रणनीति और चुनावी तैयारी के लिए चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले नेताओं के दल बदलने से मतदाताओं की प्राथमिकताओं और चुनावी समीकरणों पर कुछ हद तक प्रभाव पड़ सकता है।
बांकीपुर विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव नितिन नवीन के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद कराया जा रहा है। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। वे लगातार चार बार बांकीपुर से विधायक रहे हैं। अब इस सीट पर होने वाला उपचुनाव सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक दल अपने-अपने संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने में जुटे हुए हैं। ऐसे में नेताओं के दल बदलने की यह घटना चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बनाने वाली मानी जा रही है।