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MP Nasha Mukti Abhiyan: नशा मुक्त MP के लिए सरकार का मिशन शुरू, CM ने जारी की जीरो टॉलरेंस नीति

cm mohan yadav

MP Nasha Mukti Abhiyan: भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने नशे के खिलाफ बड़ा एक्शन लेते हुए नशा मुक्ति अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ कहा है कि प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को ऐसे लोगों और गिरोहों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने भोपाल के रवींद्र भवन में ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान की शुरुआत की। यह अभियान पूरे प्रदेश में 15 जुलाई से 30 जुलाई तक चलाया जाएगा। MP news: मोहन सरकार का बड़ा फैसला, मंत्री लखन पटेल से वापस लिया पशुपालन विभाग ‘नशा मुक्त मध्य प्रदेश’ बनाने का लक्ष्य इस दौरान सीएम ने कहा कि सरकार नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। जिस तरह प्रदेश से नक्सलवाद का सफाया हुआ है उसी तरह नशे को भी नियंत्रित किया जायेगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के 19 धार्मिक स्थलों के आसपास शराब और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाई गई है। इसके साथ ही धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं को भी नशा मुक्ति अभियान से जोड़ा जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जागरूकता पहुंच सके। UP: सावन में कांवड़ियों का होगा खास स्वागत, रूट पर नॉनवेज-अंडे की बिक्री पर रोक, प्रसाद में मिलेंगे पौधे नशे की लत से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास पर भी जोर सरकार का कहना है कि अभियान का उद्देश्य सिर्फ नशे के खिलाफ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों को इसके नुकसान के प्रति जागरूक करना और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास में भी मदद करना है। कार्यक्रम में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा समेत कई वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

भारत-यूके सीईटीए लागू होने के साथ आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती, पीएम मोदी बोले- किसानों, एमएसएमई और पेशेवरों के लिए खुलेंगे व्यापक अवसर

नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के लागू होने के साथ दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत-यूके साझेदारी का महत्वपूर्ण और भविष्य उन्मुख कदम बताते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, तकनीकी सहयोग और नवाचार को नई गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता केवल आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों, उद्योगों और पेशेवरों के लिए भी दीर्घकालिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि सीईटीए और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट मिलकर भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच भरोसे पर आधारित संबंधों को और मजबूत बनाएंगे। उनके अनुसार इन समझौतों का उद्देश्य साझा विकास की सोच को वास्तविक परिणामों में बदलना है। इससे व्यापारिक सहयोग के साथ-साथ निवेश, अनुसंधान, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी व्यापक विस्तार देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि दोनों लोकतांत्रिक देशों की यह साझेदारी भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है और इससे आर्थिक सहयोग का दायरा लगातार बढ़ेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विशेष रूप से किसानों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए इस समझौते को लाभकारी बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों को यूनाइटेड किंगडम के बाजार में बेहतर पहुंच मिलने से निर्यात में वृद्धि होगी और घरेलू उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती मिलेगी। इससे देश के विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के अवसरों का विस्तार होगा। उनका मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात आधारित विकास मॉडल को भी नई दिशा देगा। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि तकनीकी सहयोग और पेशेवर सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच साझेदारी पहले की तुलना में अधिक मजबूत होगी। भारतीय आईटी, इंजीनियरिंग, वित्तीय सेवाओं और अन्य पेशेवर क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों के लिए नए अवसर उपलब्ध होंगे। सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट के लागू होने से सीमित अवधि के लिए यूनाइटेड किंगडम में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को विशेष लाभ मिलेगा। इससे भारतीय कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी मजबूत होगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी भागीदारी बढ़ेगी। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी इस समझौते को भारत-यूके संबंधों का मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा कि सीईटीए के तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को यूनाइटेड किंगडम में जीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगा, जिससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत होगी। उनके अनुसार कपड़ा, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग उत्पाद, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्रोसेस्ड फूड सहित अनेक क्षेत्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही एमएसएमई, किसानों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े उद्यमों के लिए भी नए निर्यात अवसर तैयार होंगे। सरकार का मानना है कि यह समझौता केवल व्यापारिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई दिशा देगा। निवेश, तकनीकी आदान-प्रदान, नवाचार, कौशल विकास और पेशेवर सेवाओं में बढ़ता सहयोग दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी साझा समृद्धि, सतत विकास और वैश्विक आर्थिक सहयोग के नए मानक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

जून में ऑटो सेक्टर ने पकड़ी तेज रफ्तार, यात्री वाहनों की थोक बिक्री 24.1 प्रतिशत उछली; दोपहिया, तिपहिया और निर्यात में भी दर्ज हुई मजबूत बढ़त

नई दिल्ली । जून महीने में भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग ने मजबूत वृद्धि दर्ज करते हुए घरेलू बाजार में मांग के लगातार बढ़ने के संकेत दिए हैं। यात्री वाहनों की थोक बिक्री में उल्लेखनीय बढ़ोतरी के साथ दोपहिया, तिपहिया और वाहन निर्यात के आंकड़ों में भी प्रभावशाली सुधार देखने को मिला है। उद्योग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि वाहन निर्माताओं द्वारा डीलरों को भेजे जाने वाले वाहनों की संख्या पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक रही, जिससे बाजार में उपभोक्ता मांग और उत्पादन गतिविधियों में तेजी का संकेत मिलता है। जून के दौरान यात्री वाहनों की थोक बिक्री 24.1 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 3,88,144 यूनिट्स तक पहुंच गई। पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 3,12,851 यूनिट्स था। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि देश में निजी वाहनों की मांग लगातार मजबूत बनी हुई है। बेहतर आर्थिक गतिविधियों, उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास और नए मॉडलों की उपलब्धता ने इस प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यात्री वाहन श्रेणी में सबसे बड़ा योगदान यूटिलिटी व्हीकल सेगमेंट का रहा। इस वर्ग की बिक्री में 19.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और कुल 2,17,228 यूनिट्स डीलरों तक भेजी गईं। वहीं, यात्री कारों की बिक्री भी 15.7 प्रतिशत बढ़कर 98,610 यूनिट्स पर पहुंच गई। वैन श्रेणी ने भी सकारात्मक प्रदर्शन करते हुए 9.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की और इसकी बिक्री 10,230 यूनिट्स रही। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विभिन्न श्रेणियों में उपभोक्ताओं की मांग संतुलित रूप से बढ़ रही है। दोपहिया वाहन बाजार ने भी जून में शानदार प्रदर्शन किया। इस श्रेणी में कुल 18,51,400 यूनिट्स की थोक बिक्री दर्ज की गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 18.6 प्रतिशत अधिक है। विशेष रूप से स्कूटर सेगमेंट सबसे तेजी से बढ़ने वाला वर्ग रहा, जहां बिक्री में 39.1 प्रतिशत का उछाल दर्ज हुआ और कुल 7,44,823 यूनिट्स डीलरों तक पहुंचीं। दूसरी ओर मोटरसाइकिलों की बिक्री 6.4 प्रतिशत बढ़कर 10,56,422 यूनिट्स रही, जबकि मोपेड श्रेणी में कम आधार के कारण 50.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और बिक्री 50,155 यूनिट्स तक पहुंच गई। तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी मजबूत विस्तार देखने को मिला। जून के दौरान इस श्रेणी की थोक बिक्री 26.1 प्रतिशत बढ़कर 77,951 यूनिट्स रही। पैसेंजर कैरियर वाहनों की बिक्री में 25 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि गुड्स कैरियर वाहनों की बिक्री 29.4 प्रतिशत बढ़ी। इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की मांग भी लगातार मजबूत बनी रही और ई-रिक्शा की बिक्री में 52.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो स्वच्छ और किफायती परिवहन विकल्पों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाती है। घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारतीय वाहन उद्योग का प्रदर्शन उत्साहजनक रहा। जून के दौरान कुल वाहन निर्यात 34 प्रतिशत बढ़कर 6,73,105 यूनिट्स पर पहुंच गया। इसमें दोपहिया वाहनों का निर्यात सबसे अधिक रहा, जिसमें 40.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 5,43,684 यूनिट्स विदेश भेजी गईं। तिपहिया वाहनों का निर्यात भी 39.7 प्रतिशत बढ़कर 51,950 यूनिट्स तक पहुंच गया, जबकि यात्री वाहनों का निर्यात लगभग स्थिर रहते हुए 76,601 यूनिट्स दर्ज किया गया। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू मांग में मजबूती, निर्यात बाजारों में बेहतर अवसर और विभिन्न वाहन श्रेणियों में लगातार बढ़ती बिक्री आने वाले महीनों में भी भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग की विकास गति को मजबूत बनाए रख सकती है।

भारत के बाद अब नेपाल भी इथेनॉल मिश्रित ईंधन की राह पर, E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी तेज, उत्पादन से लेकर गुणवत्ता और कीमत तक बने सख्त नियम

नई दिल्ली । भारत में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दिए जाने के बाद अब पड़ोसी देश नेपाल भी इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। नेपाल सरकार ने पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण यानी E10 पेट्रोल लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए संबंधित मानकों का विस्तृत मसौदा जारी किया गया है, जिसमें इथेनॉल के उत्पादन, गुणवत्ता, भंडारण, परिवहन, लेबलिंग और मूल्य निर्धारण तक के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने के साथ-साथ आयातित पेट्रोल पर निर्भरता कम करना और घरेलू संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। प्रस्तावित मानकों के अनुसार नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को पेट्रोल में अधिकतम 10 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाने की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि भविष्य में आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुसार कैबिनेट के निर्णय से इथेनॉल मिश्रण का अनुपात बदला जा सकेगा। इससे ऊर्जा नीति को समय-समय पर बदलती जरूरतों के अनुरूप लचीला बनाए रखने की कोशिश की गई है। मसौदे में इथेनॉल उत्पादन के स्रोतों और तकनीकों को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है। साथ ही इसके सुरक्षित भंडारण और गुणवत्ता नियंत्रण पर विशेष जोर दिया गया है। चूंकि इथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील होता है, इसलिए इसे केवल सुरक्षित, सूखे और पूरी तरह लीक-प्रूफ टैंक या ड्रम में रखने का प्रावधान किया गया है। परिवहन और भंडारण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य होगा ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना या पर्यावरणीय जोखिम से बचा जा सके। सरकार ने उत्पाद की पारदर्शिता और ट्रेसबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक कंटेनर पर विस्तृत जानकारी देना भी अनिवार्य किया है। इसमें निर्माता का नाम, बैच नंबर, उत्पादन की मात्रा और उत्पादन तकनीक का उल्लेख करना होगा। इसके अलावा इथेनॉल पूरी तरह स्वच्छ और पारदर्शी होना चाहिए तथा उसमें किसी प्रकार के ठोस कण नहीं होने चाहिए। मसौदे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि पेट्रोल में मिलाए जाने वाले इथेनॉल की शुद्धता कम से कम 99.5 प्रतिशत होनी आवश्यक होगी। प्रस्तावित नियमों में वाहन सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। इसी कारण मेथनॉल, तारपीन, कीटोन और टार जैसे ऐसे पदार्थों के उपयोग पर रोक लगाने का प्रस्ताव रखा गया है, जो इंजन, रबर पाइप और ईंधन प्रणाली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सरकार का मानना है कि उच्च गुणवत्ता वाले इथेनॉल के उपयोग से वाहनों की कार्यक्षमता बेहतर बनी रहेगी और ईंधन प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव कम होगा। नेपाल सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य घरेलू स्तर पर इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना, नए रोजगार के अवसर सृजित करना और पेट्रोल आयात पर निर्भरता को धीरे-धीरे कम करना है। साथ ही सरकार इस बात को लेकर भी सतर्क है कि इथेनॉल उत्पादन के कारण खाद्यान्न की उपलब्धता प्रभावित न हो। इसी वजह से खाद्य उपयोग वाले अनाज को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का प्रस्ताव किया गया है। इसके स्थान पर चीनी उद्योग से निकलने वाले शीरे, नेपियर घास, कृषि एवं वन अपशिष्ट, धान के पुआल, मक्के के डंठल, गेहूं की भूसी, खराब एवं अनुपयोगी अनाज, कसावा तथा अन्य जैविक स्रोतों का उपयोग करने पर जोर दिया गया है। सरकार ने पर्यावरण अनुकूल उत्पादन प्रक्रिया अपनाने की भी शर्त रखी है। तैयार इथेनॉल केवल नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन को बेचा जा सकेगा, जबकि इसकी कीमत हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले सरकार की सिफारिश समिति तय करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह नीति प्रभावी ढंग से लागू होती है तो नेपाल की ऊर्जा सुरक्षा, जैव ईंधन उत्पादन और हरित अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकती है।

रोमिंग डेटा से अमेरिकी ठिकानों तक पहुंचने का दावा, ईरान की कथित साइबर रणनीति ने बढ़ाई वैश्विक सुरक्षा एजेंसियों की चिंता

नई दिल्ली । मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मोबाइल नेटवर्क सुरक्षा को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान या उससे जुड़े तत्वों ने क्षेत्र के पुराने दूरसंचार नेटवर्क की तकनीकी कमजोरियों का उपयोग कर अमेरिकी सैनिकों, सरकारी कर्मचारियों और रक्षा ठेकेदारों के मोबाइल फोन की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि हमलों में लोकेशन डेटा की निर्णायक भूमिका साबित नहीं हुई है। इसके बावजूद इस घटनाक्रम ने वैश्विक स्तर पर साइबर सुरक्षा और मोबाइल संचार की विश्वसनीयता पर नई चर्चा शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि मोबाइल सर्विलांस पर काम करने वाले एक स्वतंत्र शोध समूह ने मध्य पूर्व के कई दूरसंचार नेटवर्क पर असामान्य गतिविधियां दर्ज कीं। शोधकर्ताओं के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसी तकनीकी रिक्वेस्ट भेजी गईं जिनका उद्देश्य रोमिंग पर मौजूद विशेष मोबाइल फोनों की स्थिति और नेटवर्क की जानकारी प्राप्त करना था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की गतिविधियां सामान्य उपभोक्ता सेवाओं से अलग होती हैं और किसी विशेष लक्ष्य की पहचान करने के उद्देश्य से इस्तेमाल की जा सकती हैं। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा एसएस7 प्रोटोकॉल को लेकर हो रही है। यह दूरसंचार नेटवर्क का एक पुराना सिग्नलिंग सिस्टम है, जिसका उपयोग विभिन्न देशों के मोबाइल नेटवर्क के बीच कॉल, संदेश और रोमिंग सेवाओं के समन्वय के लिए किया जाता है। वर्षों से सुरक्षा विशेषज्ञ इस प्रणाली की कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाते रहे हैं। यदि किसी नेटवर्क तक अनुचित पहुंच मिल जाए तो कुछ परिस्थितियों में इसका दुरुपयोग कर किसी मोबाइल डिवाइस की स्थिति संबंधी सीमित जानकारी जुटाने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि किसी व्यक्ति की लगातार और सटीक वास्तविक समय की निगरानी केवल इसी तकनीक के आधार पर हमेशा संभव नहीं होती। रिपोर्टों के अनुसार बहरीन सहित खाड़ी क्षेत्र के कुछ दूरसंचार नेटवर्क पर ऐसे एसएस7 अनुरोधों में अचानक वृद्धि देखी गई। इसी आधार पर कुछ विश्लेषकों ने आशंका जताई कि अमेरिकी सैन्य कर्मियों या ठेकेदारों से जुड़े मोबाइल नंबरों की पहचान करने का प्रयास किया गया हो सकता है। हालांकि इस संबंध में किसी सरकारी एजेंसी ने सार्वजनिक रूप से ठोस तकनीकी प्रमाण जारी नहीं किए हैं। दूसरी ओर अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने स्वीकार किया है कि युद्ध क्षेत्रों में वाणिज्यिक लोकेशन डेटा और डिजिटल ट्रैकिंग से जुड़े संभावित खतरों को गंभीरता से लिया जा रहा है। सेना का कहना है कि कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त एहतियाती उपाय लागू किए गए हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा सकती। वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी कहा है कि हालिया हमलों में लोकेशन डेटा की अहम भूमिका होने के दावों का समर्थन उपलब्ध तथ्यों से नहीं होता। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आधुनिक युद्ध में डिजिटल तकनीकों की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। आज मोबाइल फोन केवल संचार का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि वे संवेदनशील सूचनाओं का स्रोत भी बन सकते हैं। इसलिए सैन्य, सरकारी और रणनीतिक संस्थानों के साथ-साथ आम उपयोगकर्ताओं के लिए भी सुरक्षित नेटवर्क, अद्यतन सुरक्षा उपाय और डिजिटल सतर्कता पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। यही कारण है कि दूरसंचार नेटवर्क की सुरक्षा और पुराने प्रोटोकॉल के आधुनिकीकरण पर अब वैश्विक स्तर पर तेजी से ध्यान दिया जा रहा है।

'सेल बोस्टन 2026' में भारत की दमदार मौजूदगी, आईएनएस सुदर्शिनी ने समुद्री विरासत और सांस्कृतिक पहचान का किया भव्य प्रदर्शन

नई दिल्ली । अमेरिका के ऐतिहासिक शहर बोस्टन में आयोजित प्रतिष्ठित ‘सेल बोस्टन 2026’ समारोह के दौरान भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री परंपरा, अनुशासन और सांस्कृतिक विरासत का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। भारतीय नौसेना के पाल पोत आईएनएस सुदर्शिनी के चालक दल और प्रशिक्षुओं ने शहर की प्रमुख सड़कों पर आयोजित क्रू एवं कैडेट सिटी परेड में हिस्सा लिया। उनकी अनुशासित कदमताल और तिरंगे के साथ प्रस्तुत मार्च ने स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ विभिन्न देशों से आए प्रतिभागियों का भी ध्यान आकर्षित किया। ‘सेल बोस्टन 2026’ दुनिया के प्रमुख समुद्री आयोजनों में से एक माना जाता है, जिसमें 20 से अधिक देशों के 60 से ज्यादा पारंपरिक और विशाल नौकायन पोत भाग ले रहे हैं। इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहा आईएनएस सुदर्शिनी अपनी विशिष्ट पहचान और ऐतिहासिक महत्व के कारण विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। परेड के दौरान भारतीय दल ने अनुशासन, पेशेवर दक्षता और सांस्कृतिक विविधता का ऐसा परिचय दिया, जिसकी व्यापक सराहना की गई। भारतीय नौसेना के इस अभियान का उद्देश्य केवल समुद्री उपस्थिति दर्ज कराना नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध नौवहन परंपराओं, समुद्री इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करना भी है। आईएनएस सुदर्शिनी के माध्यम से भारत दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि उसकी समुद्री परंपरा हजारों वर्षों पुरानी होने के साथ आज भी उतनी ही प्रासंगिक और जीवंत है। परेड में भारतीय तिरंगे की मौजूदगी और नौसैनिकों का आत्मविश्वासपूर्ण प्रदर्शन भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत करता नजर आया। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय समुद्री आयोजनों में भागीदारी से भारत और अमेरिका के बीच समुद्री सहयोग को नई मजबूती मिलती है। साथ ही यह भी संदेश जाता है कि समुद्र केवल व्यापार, परिवहन और सुरक्षा का माध्यम नहीं, बल्कि विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद और मित्रता का भी महत्वपूर्ण सेतु है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नौसेनाओं के बीच सहयोग, अनुभवों का आदान-प्रदान और पारस्परिक विश्वास भी बढ़ता है। बोस्टन पहुंचने से पहले आईएनएस सुदर्शिनी ने न्यूयॉर्क में आयोजित ‘सेल फोर्थ 250’ समारोह में भी भाग लिया था, जहां भारतीय दल ने अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके बाद पोत बोस्टन पहुंचा और यहां भी भारत की समुद्री परंपरा तथा सांस्कृतिक पहचान का सफलतापूर्वक प्रतिनिधित्व किया। विभिन्न देशों के पारंपरिक नौकायन पोतों के बीच भारतीय पोत की मौजूदगी ने वैश्विक मंच पर भारत की ऐतिहासिक समुद्री विरासत को नई पहचान दिलाई। आईएनएस सुदर्शिनी वर्तमान में ‘लोकायन 2026’ वैश्विक समुद्री अभियान के तहत विभिन्न देशों के बंदरगाहों का दौरा कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य भारत की समुद्री विरासत, नौवहन परंपराओं और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के संदेश को विश्व समुदाय तक पहुंचाना है। भारतीय नौसेना का यह ऐतिहासिक पाल पोत प्रशिक्षण, समुद्री जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय सद्भावना को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बोस्टन में इसकी भागीदारी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत अपनी समृद्ध समुद्री विरासत, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक साझेदारी की भावना के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर लगातार मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

भारत-यूके एफटीए लागू होते ही खुलेंगे व्यापार और निवेश के नए द्वार, शून्य शुल्क के साथ भारतीय निर्यात को मिलेगा बड़ा वैश्विक बाजार, 'विकसित भारत' अभियान को मिलेगी नई रफ्तार

नई दिल्ली । भारत और ब्रिटेन के बीच लागू हुआ व्यापक आर्थिक एवं मुक्त व्यापार समझौता देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। उद्योग जगत का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात, निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और वैश्विक व्यापारिक संबंधों को नई दिशा देगा। इसके साथ ही ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में भी यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। समझौते के प्रभाव से भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनने का अवसर मिलेगा, जबकि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग का दायरा भी पहले की तुलना में अधिक व्यापक होगा। भारत की सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े संगठनों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे डिजिटल व्यापार, नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी सहयोग के नए रास्ते खुलेंगे। विशेष रूप से आईटी और डिजिटल सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी मजबूत होने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, क्लाउड सेवाओं और डिजिटल समाधान जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अवसर मिलेगा। इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पक्ष सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा है। नई व्यवस्था के तहत ब्रिटेन में सीमित अवधि के लिए कार्य करने वाले भारतीय पेशेवरों को वहां सामाजिक सुरक्षा अंशदान जमा नहीं करना होगा। वे निर्धारित अवधि तक भारत में ही अपना योगदान जारी रख सकेंगे। इससे भारतीय कंपनियों और उनके कर्मचारियों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ कम होगा तथा अंतरराष्ट्रीय नियुक्तियों को अधिक सरल और व्यावहारिक बनाया जा सकेगा। उद्योग जगत का मानना है कि यह व्यवस्था भारतीय प्रतिभाओं की वैश्विक भागीदारी को बढ़ावा देगी। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्थापित संस्थागत मंच भी आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इन मंचों के माध्यम से सरकार, उद्योग और नवाचार से जुड़े संगठनों के बीच समन्वय बढ़ेगा। साथ ही डिजिटल व्यापार, प्रौद्योगिकी सुरक्षा, अनुसंधान और दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को गति मिलेगी। इससे नई तकनीकों के विकास और उनके व्यावसायिक उपयोग के लिए बेहतर वातावरण तैयार होने की संभावना है। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियां पहले से ही ब्रिटेन में बड़े स्तर पर निवेश कर रही हैं और हजारों लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रही हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है जो राजधानी से बाहर विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था, कौशल विकास और नई तकनीकों के विस्तार को भी प्रोत्साहन मिला है। आने वाले वर्षों में यह सहयोग और अधिक व्यापक होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार का कहना है कि इस समझौते के लागू होने के बाद भारत के अधिकांश निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शून्य शुल्क के साथ प्रवेश मिलेगा। इससे वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी तथा निर्यातकों को नए अवसर प्राप्त होंगे। उद्योग संगठनों का मानना है कि यह समझौता विनिर्माण, सेवाओं, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, टेक्नोलॉजी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देगा। साथ ही भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भूमिका और मजबूत होगी। आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौता केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी को भी नई मजबूती प्रदान करेगा। बेहतर बाजार पहुंच, निवेश में वृद्धि, तकनीकी सहयोग, प्रतिभा के आदान-प्रदान और उद्योगों के विस्तार से भारत की आर्थिक विकास यात्रा को नई गति मिलने की उम्मीद है। यही कारण है कि उद्योग जगत इस समझौते को भारत की वैश्विक आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहा है।

बांकीपुर उपचुनाव से पहले जन सुराज को बड़ा झटका, कई वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा का दामन थामा, चुनावी मुकाबले के समीकरण बदले

नई दिल्ली । बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। चुनावी माहौल के बीच जन सुराज पार्टी को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उसके कई वरिष्ठ नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। इस घटनाक्रम को बांकीपुर उपचुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पार्टी के कई प्रभावशाली चेहरे चुनाव से ठीक पहले संगठन छोड़कर भाजपा के साथ जुड़ गए हैं। इससे आगामी चुनाव में राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की मौजूदगी में जन सुराज के वरिष्ठ नेता के.सी. सिन्हा और रितेश रंजन उर्फ बिट्टू सिंह सहित कई नेताओं ने औपचारिक रूप से भाजपा की सदस्यता ली। के.सी. सिन्हा पिछले विधानसभा चुनाव में कुम्हरार सीट से जन सुराज के उम्मीदवार रहे थे, जबकि रितेश रंजन सिंह ने दीघा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। दोनों नेताओं की अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय राजनीतिक पहचान मानी जाती है, इसलिए उनका भाजपा में शामिल होना जन सुराज के लिए अहम राजनीतिक नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा की सदस्यता लेने वाले नेताओं में गोपाल सिंह, विनीता बिट्टू सिंह, डॉ. किशोर कुमार, ब्रज किशोर सिन्हा, ब्रह्मदेव मांझी, सुनील यादव, राजू यादव, रंजीत सिंह, राम बाबू यादव, शुभम सिंह, मंटू राय और साधु जी सहित कई अन्य नेता भी शामिल रहे। इनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। इससे भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर अपनी मजबूती बढ़ाने का दावा किया है। इस अवसर पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की नीतियों और विकास कार्यों से प्रभावित होकर विभिन्न दलों के नेता लगातार भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उनके अनुसार प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के कई हिस्सों में विपक्षी दलों के जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भाजपा के साथ जुड़ रहे हैं। उन्होंने पार्टी में शामिल हुए सभी नेताओं का स्वागत करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि नए सदस्य संगठन को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। दूसरी ओर, जन सुराज के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर स्वयं बांकीपुर उपचुनाव में चुनावी मैदान में हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले संगठन के कई प्रमुख नेताओं का पार्टी छोड़ना जन सुराज की रणनीति और चुनावी तैयारी के लिए चुनौती माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले नेताओं के दल बदलने से मतदाताओं की प्राथमिकताओं और चुनावी समीकरणों पर कुछ हद तक प्रभाव पड़ सकता है। बांकीपुर विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव नितिन नवीन के विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद कराया जा रहा है। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी थी। वे लगातार चार बार बांकीपुर से विधायक रहे हैं। अब इस सीट पर होने वाला उपचुनाव सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। 30 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक दल अपने-अपने संगठन को मजबूत करने और मतदाताओं तक पहुंच बढ़ाने में जुटे हुए हैं। ऐसे में नेताओं के दल बदलने की यह घटना चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बनाने वाली मानी जा रही है।

भारत-यूके सीईटीए लागू, भारतीय उद्योग के लिए खुले नए अवसर; फिक्की ने बताया व्यापार और निवेश को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

नई दिल्ली । भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) लागू होने के बाद भारतीय उद्योग जगत ने इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। उद्योग संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) का मानना है कि यह समझौता भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए नए बाजारों के द्वार खोलेगा तथा निर्यात, निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति देगा। संगठन ने इसे भारत की वैश्विक आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने समझौते के लागू होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि भारत-यूके सीईटीए से वस्तुओं और सेवाओं दोनों क्षेत्रों में कारोबार के नए अवसर पैदा होंगे। उनके अनुसार, नवाचार, प्रौद्योगिकी सहयोग और प्रतिभा के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में बढ़ती साझेदारी भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करेगी। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का अवसर देगा और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत की भूमिका को और सशक्त बनाएगा। फिक्की का कहना है कि यह समझौता भारत की मुक्त व्यापार समझौता नीति का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। संगठन के अनुसार, इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे तथा उद्योगों को नई तकनीकों, निवेश और वैश्विक सहयोग का लाभ मिलेगा। इसके साथ ही भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच नवाचार आधारित विकास को भी प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक विकास को गति मिल सकती है। फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाली आर्थिक साझेदारियां भारत के ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। उनके अनुसार, यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि औद्योगिक क्षमता बढ़ाने, वैश्विक निवेश आकर्षित करने और भारतीय उद्योगों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए अधिक सक्षम बनाने में भी सहायक होगा। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से विकसित अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे समझौते इस यात्रा को और मजबूत करेंगे। उद्योग संगठन का मानना है कि सीईटीए आर्थिक सहयोग के प्रति दीर्घकालिक और दूरदर्शी सोच को दर्शाता है। इससे व्यापार, निवेश, नवाचार और रोजगार के नए अवसर विकसित होने की संभावना है। साथ ही भारतीय कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनने और विदेशी बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने का बेहतर अवसर मिलेगा। इससे घरेलू उद्योगों की उत्पादन क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मक दक्षता में भी सुधार आने की उम्मीद जताई गई है। भारत-यूके व्यापार समझौता बुधवार से प्रभावी हो गया है। इसके तहत भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच उपलब्ध होगी, जिससे द्विपक्षीय व्यापार के लगभग पूरे मूल्य को लाभ मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से वस्त्र, इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पाद, सूचना प्रौद्योगिकी और पेशेवर सेवाओं सहित कई क्षेत्रों को प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर उत्पादन, सेवाओं और रोजगार की मांग बढ़ने की भी संभावना जताई जा रही है, जिससे भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

जबलपुर में आदिवासी युवक की संदिग्ध मौत पर उठे सवाल, पुलिस जांच पर छात्र संगठन ने जताई आपत्ति, निष्पक्ष कार्रवाई की मांग

मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले में एक आदिवासी युवक की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसओ) ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग उठाते हुए पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि यदि मामले में शीघ्र और पारदर्शी कार्रवाई नहीं की गई तो मृतक के परिजनों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर भी गंभीर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार डुमना चौकी क्षेत्र के महंगवा गांव निवासी नितिन बैगा 8 जून की शाम घर से निकला था, जिसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की सूचना पुलिस को दी थी। बाद में उसका शव महंगवा स्थित खाटू श्याम मंदिर के पास जंगल में बरामद हुआ। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के जिला उपाध्यक्ष राहुल पाण्डेय ने थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि युवक की गुमशुदगी की सूचना मिलने के बाद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। संगठन का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर गंभीरता से प्रयास किए जाते तो परिस्थितियां अलग हो सकती थीं। संगठन ने पुलिस से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक करने की मांग की है। संगठन का यह भी कहना है कि मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए ताकि मृतक के परिवार को न्याय मिल सके। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द उचित कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन मृतक के परिजनों के साथ मिलकर बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। संगठन ने प्रशासन से मामले की हर पहलू से जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है। वहीं पुलिस का कहना है कि मामले की जांच नियमानुसार जारी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार युवक की गुमशुदगी की शिकायत दर्ज होने के बाद जांच शुरू की गई थी और बाद में उसका शव बरामद हुआ। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी लगने की पुष्टि हुई है। साथ ही रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों और सभी परिस्थितियों की विस्तृत जांच की जा रही है। पुलिस का यह भी कहना है कि परिजनों द्वारा निष्पक्ष जांच की मांग की गई है, जिसे गंभीरता से लिया गया है। जांच के दौरान सभी तथ्यों, परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है। अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब जांच के महत्वपूर्ण चरण में है और पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। दूसरी ओर छात्र संगठन और परिजन निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।