जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनकल्याण योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से 10 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में शहरी अधोसंरचना, सिंचाई, कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से प्रदेश के विकास कार्यों को नई दिशा मिलेगी और विभिन्न वर्गों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा। बैठक में सबसे बड़ी स्वीकृति नगरीय क्षेत्रों के अधोसंरचना विकास के लिए दी गई। राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों के लिए 8 हजार 445 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। यह धनराशि नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, पेयजल, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी। साथ ही स्थानीय निकायों द्वारा विकास कार्यों के लिए लिए गए ऋणों के पुनर्भुगतान में भी इसका उपयोग किया जाएगा, जिससे शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी। मंत्रिपरिषद ने किसानों के हित में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। रबी वर्ष 2023-24 के दौरान लक्ष्य से अधिक खरीदी गई मूंग के भुगतान के लिए 1,587 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराने को मंजूरी दी गई। इस निर्णय के तहत विभिन्न बैंकों से ली गई साख सीमा के शेष दायित्वों के लिए सरकारी गारंटी प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और उपार्जन प्रक्रिया को वित्तीय रूप से सुचारु बनाए रखना है। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजगढ़ जिले की कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना के संचालन को वर्ष 2031 तक जारी रखने के लिए 245 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से राजगढ़ और आगर-मालवा जिलों के लगभग 1 लाख 39 हजार 600 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के जरिए सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। सरकार का मानना है कि इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। बैठक में महिला एवं बाल विकास से जुड़ा भी अहम निर्णय लिया गया। टेक-होम राशन के उत्पादन और वितरण की व्यवस्था को राज्य आजीविका फोरम से वापस लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया है। अंतरिम व्यवस्था के तहत स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही भविष्य में केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थायी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे पोषण योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके। मंत्रिपरिषद ने वाणिज्यिक कर विभाग की स्थापना योजनाओं के संचालन के लिए भी 521 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह राशि आगामी पांच वर्षों तक मुख्यालय, जिला और परिक्षेत्रीय कार्यालयों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, कार्यालय व्यय, व्यावसायिक सेवाओं तथा आवश्यक संसाधनों के रखरखाव पर खर्च की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन निर्णयों से प्रशासनिक व्यवस्था और सेवा वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार का कहना है कि शहरी विकास, कृषि, सिंचाई, पोषण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश के समग्र विकास को नई गति देना है। विभिन्न विभागों को मिली वित्तीय स्वीकृतियों के माध्यम से विकास परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, किसानों के हितों की सुरक्षा, शहरी सुविधाओं के विस्तार और जनकल्याण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।
मध्य प्रदेश के 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ी सौगात, राज्य सरकार इस वर्ष बांटेगी 139 करोड़ रुपये का बोनस, वन विभाग ने शुरू की तैयारियां

मध्य प्रदेश सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए इस वर्ष बड़ी आर्थिक राहत का ऐलान करते हुए 139 करोड़ रुपये के बोनस वितरण की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के लगभग 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को इस योजना का लाभ मिलेगा। वन विभाग के अंतर्गत कार्यरत राज्य लघु वनोपज संघ ने बोनस वितरण की पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है और इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी मुख्य सचिव अनुराग जैन के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। सरकार का उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। राज्य में तेंदूपत्ता संग्रहण लाखों ग्रामीण और वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। हर वर्ष संग्रहण सीजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग इस कार्य से जुड़ते हैं और इससे होने वाली आय उनके परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बोनस वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि पात्र संग्राहकों तक राशि शीघ्र पहुंचाई जा सके। वन विभाग की योजना के अनुसार वर्ष 2026-27 के लिए 17.72 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभिन्न वन मंडलों में आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर प्रबंधन और संगठित व्यवस्था के माध्यम से संग्रहण कार्य को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा, जिससे संग्राहकों को भी अधिक लाभ मिल सके। सरकार ने संग्रहण वर्ष 2026 के दौरान तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले 41 लाख संग्राहकों को कुल 708 करोड़ रुपये संग्रहण पारिश्रमिक के रूप में देने की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त संग्रहण वर्ष 2024 के लाभांश का 75 प्रतिशत हिस्सा, जो 139 करोड़ रुपये है, इस वर्ष बोनस के रूप में वितरित किया जाएगा। इससे लाखों परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बोनस वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पात्र हितग्राहियों की जानकारी का सत्यापन, भुगतान से जुड़ी औपचारिकताओं का समय पर निष्पादन और सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बोनस राशि बिना किसी अनावश्यक विलंब के लाभार्थियों तक पहुंच सके। राज्य सरकार का मानना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण केवल वन उपज से जुड़ी गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है। इसलिए इस क्षेत्र में कार्यरत संग्राहकों को नियमित पारिश्रमिक और लाभांश उपलब्ध कराना उनकी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। सरकार भविष्य में भी लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, वनवासी परिवारों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य करती रहेगी। बोनस वितरण की इस पहल से प्रदेश के लाखों तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा और वन आधारित आजीविका को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषित किए कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हजारों रोजगार देने वाली परियोजनाएं

मध्य प्रदेश ने तकनीकी और डिजिटल उद्योगों के क्षेत्र में अपनी विकास रणनीति को नई गति देते हुए एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आईटी अवसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का भरोसा जताया। कॉन्क्लेव में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे राज्य में 34 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 51 प्रमुख गतिविधियों का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य की तकनीकों को अपनाने और उद्योगों के लिए आधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में प्रदेश में सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा, जो कौशल विकास, अनुसंधान, उद्योगों के साथ सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना भी की जाएगी, जिससे एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिलेगा। राज्य सरकार ने आईटी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कई नई परियोजनाओं की भी घोषणा की है। भोपाल आईटी पार्क में नया आईटी टॉवर विकसित किया जाएगा, जहां जीसीसी, आईटी और डिजिटल सेवा कंपनियों के लिए आधुनिक प्लग-एंड-प्ले कार्यालय उपलब्ध होंगे। भोपाल के कोलार क्षेत्र में भी इसी सुविधा से युक्त नया आईटी पार्क बनाया जाएगा, ताकि नई तकनीकी कंपनियां कम समय में अपना संचालन शुरू कर सकें। वहीं इंदौर के सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में लगभग तीन लाख वर्ग फीट निर्मित क्षेत्र वाला अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा, जहां विश्वस्तरीय डिजिटल और आईटी कंपनियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार के सहयोग से मंथन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ग्लोबल स्किल्स पार्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों के माध्यम से नवाचार, अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग और आधुनिक तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश साइंस सिटी, डीप टेक पार्क, डेटा सेंटर और एआई आधारित परियोजनाओं के माध्यम से नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। सरकार के अनुसार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के बाद तकनीकी क्षेत्र में 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर काम शुरू हो चुका है। वहीं पिछले दो टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव के माध्यम से राज्य को 46 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आठ देशों की दस प्रमुख कंपनियों की 28 हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं वर्तमान में ग्राउंडब्रेकिंग चरण में हैं। इनमें एआई-रेडी डेटा सेंटर, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्यूटिकल्स और स्पेशियलिटी फिल्म्स जैसे क्षेत्रों की परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें स्पेन की कंपनी द्वारा भोपाल में बड़े एआई-रेडी डेटा सेंटर की स्थापना भी प्रस्तावित है। कॉन्क्लेव के दौरान आठ कंपनियों को भूमि आवंटन के आशय-पत्र भी सौंपे गए। इन परियोजनाओं में 203.58 करोड़ रुपये का निवेश और 1,242 नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है। यह निवेश इंदौर के सिंहासा आईटी पार्क और भोपाल के बड़वई आईटी पार्क में आईटी, आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आईटी अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। कार्यक्रम के दौरान गूगल प्ले के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्षमता विकास के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता भी किया गया। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से मध्य प्रदेश तकनीकी निवेश, नवाचार और डिजिटल उद्योगों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
अमेरिकी नाकाबंदी को मात देने की तैयारी में ईरान, ‘शैडो फ्लीट’ से तेल टैंकर निकालने की रणनीति

नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। सीजफायर समझौते के खत्म होने के बाद दोनों देशों के बीच टकराव तेज हो गया है। ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है, वहीं ईरान इस नाकाबंदी को चकमा देने के लिए अपने गुप्त जहाजी बेड़े यानी ‘शैडो फ्लीट’ का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य पर निगरानी और दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने उत्तरी अरब सागर में दो एयरक्राफ्ट कैरियर, 1,000 से ज्यादा नौसैनिकों और कम से कम 19 युद्धपोतों को तैनात किया है। इसके जवाब में ईरान से जुड़े कई तेल टैंकर अपनी पहचान छिपाकर समुद्री रास्तों से निकलने की कोशिश कर रहे हैं। 23 जहाजों का गुप्त नेटवर्क सक्रियसमुद्री गतिविधियों पर नजर रखने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान से जुड़े कम से कम 23 जहाज सक्रिय हैं। ये जहाज अपने ट्रैकिंग सिस्टम को बंद या उसमें बदलाव कर ‘डार्क फ्लीट’ या ‘शैडो फ्लीट’ की तरह काम कर रहे हैं। इन जहाजों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचते हुए तेल और अन्य सामान की आवाजाही के लिए किया जा रहा है। दूसरे देशों के झंडे और पहचान छिपाने की रणनीतिसमुद्री खुफिया कंपनी विंडवर्ड के मुताबिक, ईरान से जुड़े जहाज अमेरिकी नौसेना की निगरानी से बचने के लिए कई तरह के तरीके अपना रहे हैं। इनमें दूसरे देशों के झंडों का इस्तेमाल, ट्रांसपोंडर बंद करना और जहाज की वास्तविक पहचान छिपाने जैसी तकनीकें शामिल हैं। इस तरह ये जहाज अपनी गतिविधियों को छिपाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान पहले भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए ऐसे गुप्त जहाजी नेटवर्क का इस्तेमाल करता रहा है। प्रतिबंधों के बावजूद वह एक जटिल शिपिंग नेटवर्क के जरिए कच्चे तेल का निर्यात करता रहा है, जिसमें चीन उसका प्रमुख खरीदार रहा है। जून में 5 करोड़ बैरल तेल निर्यात का दावा‘टैंकरट्रैकर्स’ के आंकड़ों के मुताबिक, तमाम प्रतिबंधों और निगरानी के बावजूद ईरान ने जून महीने में करीब 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया। रिपोर्ट के अनुसार, 23 जहाजों में से 10 टैंकर इस समय कच्चे तेल या अन्य सामान से लदे हुए हैं, जबकि 13 जहाज नए माल की लोडिंग का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा सात प्रतिबंधित VLCC (बहुत बड़े कच्चे तेल के टैंकर) हिंद महासागर क्षेत्र में मौजूद हैं। ये टैंकर ईरानी तेल से भरे हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की तलाश में हैं। पहले भी नाकाबंदी के बावजूद जारी रहा तेल निर्यातविशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका पहले भी ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए कई कदम उठा चुका है। इन प्रयासों से ईरानी तेल निर्यात में गिरावट जरूर आई, लेकिन इसे पूरी तरह बंद नहीं किया जा सका। हालांकि, पिछली पाबंदियों का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा था। देश में महंगाई बढ़ी और आर्थिक दबाव भी काफी बढ़ गया था। अब नजर इस बात पर है कि अमेरिका की कड़ी निगरानी के बीच ईरान का शैडो फ्लीट अपनी रणनीति में कितना सफल हो पाता है। ईरान का दावा- तेल निर्यात सामान्यइस बीच ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने दावा किया है कि अमेरिका की ओर से 60 दिनों की प्रतिबंध छूट खत्म किए जाने के बाद भी देश का कच्चे तेल का निर्यात सामान्य रूप से जारी है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिबंधों को निष्प्रभावी करने के लिए पहले से ही मजबूत व्यवस्था तैयार कर रखी है। पाकनेजाद ने अमेरिकी फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वॉशिंगटन ने अपने वादों का उल्लंघन किया है। उन्होंने इसे इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) की धारा 10 के खिलाफ बताया, जिसमें 60 दिनों की छूट का प्रावधान शामिल था।
भारत-ब्रिटेन के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ लागू, स्कॉच व्हिस्की से लग्जरी कारों तक सस्ता होगा सामान

नई दिल्ली। भारत और ब्रिटेन के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) बुधवार, 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार पर लगने वाले कई आयात-निर्यात शुल्क में बड़ी कटौती होगी। इसका सीधा असर भारत में आने वाले ब्रिटिश उत्पादों की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे स्कॉच व्हिस्की, लग्जरी कारों और ब्यूटी प्रोडक्ट्स समेत कई सामान सस्ते हो सकते हैं। भारत और ब्रिटेन के बीच इस ऐतिहासिक व्यापार समझौते की घोषणा जून 2026 में की गई थी। अब इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के कारोबार को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीदभारत में अभी स्कॉच व्हिस्की पर करीब 150 फीसदी तक आयात शुल्क लगाया जाता है। लेकिन FTA लागू होने के बाद इस ड्यूटी को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 40 फीसदी तक लाया जाएगा। इसका मतलब है कि आने वाले समय में ब्रिटेन से आने वाली स्कॉच व्हिस्की की कीमतों में करीब 110 फीसदी तक की कमी देखने को मिल सकती है। इससे भारतीय बाजार में ब्रिटिश शराब ब्रांड्स की पहुंच बढ़ सकती है। लैंड रोवर, जगुआर और रोल्स रॉयस जैसी कारें होंगी सस्तीफ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत ब्रिटेन से आयात होने वाली लग्जरी कारों पर भी शुल्क में बड़ी कटौती की जाएगी। ऑटोमोबाइल सेक्टर में कोटा व्यवस्था के तहत आयात शुल्क को 100 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी तक करने का प्रावधान है। इससे ब्रिटेन की कंपनियों की कारें जैसे लैंड रोवर, जगुआर, रोल्स रॉयस, एस्टन मार्टिन और डिफेंडर भारतीय ग्राहकों के लिए पहले के मुकाबले सस्ती हो सकती हैं। नोटिफिकेशन के अनुसार, पहले साल 20,000 कारों को कम ड्यूटी पर आयात किया जा सकेगा। इनमें 3000cc से ज्यादा पेट्रोल इंजन और 2500cc से ज्यादा डीजल इंजन वाली 10,000 कारें शामिल होंगी। इन पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी 110 फीसदी से घटकर 30 फीसदी हो जाएगी। वहीं, 1500cc से 3000cc तक की 5,000 कारों के आयात पर ड्यूटी 66 फीसदी से घटाकर 50 फीसदी की जाएगी। इसके बाद इसे धीरे-धीरे कम किया जाएगा और 15 साल बाद कस्टम ड्यूटी को 10 फीसदी तक लाने का लक्ष्य रखा गया है। ब्यूटी प्रोडक्ट्स समेत कई सामानों पर कम होगा टैरिफFTA के तहत ब्यूटी और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स समेत कई अन्य ब्रिटिश उत्पादों पर लगने वाला 22 फीसदी तक का टैरिफ या तो तुरंत खत्म किया जाएगा या फिर अगले 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। इससे ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पाद भारतीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उपलब्ध हो सकते हैं। UK में भारतीय सामानों को मिलेगा बड़ा फायदाभारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते का फायदा सिर्फ ब्रिटिश उत्पादों तक सीमित नहीं रहेगा। इस डील के तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले कई सामानों पर भी शुल्क खत्म किया जाएगा। कपड़े, जूते और कुछ खाद्य उत्पादों समेत कई भारतीय वस्तुओं को ब्रिटेन में ड्यूटी फ्री या कम शुल्क के दायरे में लाया जाएगा। अभी ब्रिटेन में टेक्सटाइल गारमेंट पर 12 फीसदी, केमिकल्स पर 8 फीसदी और बेस मेटल्स पर 10 फीसदी तक ड्यूटी लगती है। FTA के बाद करीब 99 फीसदी भारतीय उत्पादों को शून्य शुल्क की सुविधा मिलने की बात कही गई है। दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावाब्रिटिश सरकार के अनुमान के मुताबिक, भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में करीब 4.8 अरब पाउंड का इजाफा हो सकता है। इसके अलावा वास्तविक वेतन में भी करीब 2.2 अरब पाउंड की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। ब्रिटेन इस समझौते को भारत के साथ अब तक का सबसे बड़ा व्यापक व्यापार समझौता बता रहा है। दोनों देशों को उम्मीद है कि यह डील निवेश, कारोबार और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देगी।
पिता के निधन के सदमे से टूटकर जब मुंबई छोड़ ऋषिकेश भागे थे अभिनेता संजय मिश्रा, ढाबे पर 150 रुपये में बर्तन धोने और ऑमलेट बनाने को हुए थे मजबूर

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बेमिसाल और सधे हुए अभिनय कला के दम पर ‘वध’, ‘भूल भुलैया’, ‘धमाल’ और ‘गोलमाल’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर तथा कल्ट फिल्मों को सुपरहिट बनाने वाले मशहूर अभिनेता संजय मिश्रा आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। वे पर्दे पर अपने हर एक किरदार में इस कदर जीवंतता भर देते हैं कि दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। वर्तमान समय में एक बेहद सफल, लोकप्रिय और करोड़ों की संपत्ति के मालिक होने के बावजूद संजय मिश्रा के जीवन में एक ऐसा अंधकारमय और हृदयविदारक दौर भी आया था, जब वे अपनी व्यक्तिगत समस्याओं से पूरी तरह टूट चुके थे। उस कठिन समय में उन्होंने मायानगरी मुंबई और अभिनय जगत को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया था और मानसिक शांति व सुकून की खोज में उत्तराखंड के ऋषिकेश चले गए थे। अपने जीवन के उस अत्यंत संवेदनशील और संघर्षपूर्ण अध्याय को साझा करते हुए अभिनेता ने बताया कि एक समय वे शारीरिक रूप से बेहद गंभीर बीमारी की चपेट में आ गए थे। उनकी स्वास्थ्य स्थिति इस कदर बिगड़ चुकी थी कि चिकित्सकों को आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया के तहत उनके पेट से लगभग 15 लीटर पस (मवाद) बाहर निकालना पड़ा था। उस दौरान उनकी स्थिति इतनी नाजुक थी कि डॉक्टरों ने उनके परिवार को स्पष्ट रूप से सचेत कर दिया था कि यदि यह जटिल ऑपरेशन सफल नहीं रहा, तो उनके जीवित बचने की संभावनाएं बेहद कम हैं। वे अस्पताल में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे थे और किसी तरह इस गंभीर सर्जरी से उबरने में सफल रहे। शारीरिक पीड़ा के इस दौर से बाहर निकलते ही अभिनेता के जीवन पर दुखों का एक और पहाड़ टूट पड़ा। जैसे ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली, उसके तुरंत बाद उनके पूजनीय पिता का अचानक देहांत हो गया। इस दोहरी मानसिक और शारीरिक त्रासदी ने उन्हें भीतर से पूरी तरह झकझोर कर रख दिया था। पिता को खोने का दुख इस कदर गहरा था कि वे मानसिक रूप से पूरी तरह असंतुलित महसूस कर रहे थे और उनका दिमाग काम करना बंद कर चुका था। जीवन से पूरी तरह से निराश और थका हुआ महसूस करने के कारण वे बिना किसी को बताए चुपचाप ऋषिकेश की ओर पलायन कर गए, जहां वे गंगा नदी के पावन तट पर एकांत में रहने लगे। ऋषिकेश में अपने प्रवास के दौरान उन्होंने अपनी पहचान पूरी तरह छुपाकर आजीविका चलाने के लिए गंगा किनारे स्थित एक साधारण से ढाबे पर कार्य करना प्रारंभ कर दिया। वहां वे ग्राहकों के लिए ऑमलेट बनाने का काम करने लगे। ढाबे के संचालक ने उनके सामने एक कठिन शर्त रखी थी कि उन्हें प्रतिदिन कम से कम 50 कप और बर्तन धोने होंगे, जिसके बदले में उन्हें पारिश्रमिक के रूप में मात्र 150 रुपये प्रतिदिन दिए जाएंगे। मानसिक अशांति से जूझ रहे संजय मिश्रा उस समय किसी भी प्रकार के शारीरिक श्रम के लिए सहर्ष तैयार हो गए क्योंकि वे अपने दिमाग को दुनिया भर की चिंताओं से मुक्त रखना चाहते थे। अपने पिता को याद करते हुए अभिनेता ने उनके साथ हुई अपनी अंतिम और भावुक बातचीत का भी स्मरण किया। उन्होंने बताया कि निधन से कुछ समय पूर्व उनके पिता ने उनसे कहा था कि वे तीन दिन पुराना चिकन क्यों खा रहे हैं, जिस पर उन्होंने अज्ञानतावश और झुंझलाहट में उत्तर दिया था कि उन्हें इस प्रकार की नसीहतों की कोई आवश्यकता नहीं है। पिता के साथ हुई यह अंतिम तीखी बहस आज भी उनके मन में एक मलाल की तरह कचोटती है। अभिनेता ने स्वीकार किया कि वे आज भी जब कभी अत्यधिक तनाव या मानसिक अशांति महसूस करते हैं, तो वे अचानक आध्यात्मिक शहरों की ओर निकल जाते हैं और सभी से संपर्क तोड़कर अपने मस्तिष्क को स्वतंत्र रखने का प्रयास करते हैं। वर्तमान समय की बात करें तो संजय मिश्रा अपने उस बुरे दौर को पीछे छोड़कर मनोरंजन जगत में एक बहुत बड़ा नाम बन चुके हैं। वे न केवल रूपहले पर्दे पर बल्कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर भी अपनी बेहतरीन अदाकारी का लोहा मनवा रहे हैं। आज वे एक बेहद आलीशान और लैविश लाइफस्टाइल जीते हैं तथा करोड़ों रुपये मूल्य के भव्य बंगले के स्वामी हैं। उनका यह जीवन वृत्त इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और आंतरिक शांति के बल पर मनुष्य जीवन के सबसे गहरे संकटों और दुखों से उबरकर पुनः सफलता के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त कर सकता है।
फिल्म 'वाराणसी' में स्लो-मोशन एक्शन और डांस का तड़का लगाएंगी प्रियंका चोपड़ा, एसएस राजामौली के भव्य निर्देशन की जमकर की तारीफ

नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकीं जानी-मानी अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा एक लंबे अंतराल के बाद भारतीय सिनेमा जगत में अपनी दमदार वापसी करने जा रही हैं। वे जल्द ही दिग्गज फिल्मकार एसएस राजामौली द्वारा निर्देशित बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘वाराणसी’ में मुख्य भूमिका निभाती हुई नजर आएंगी। इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर अभिनेत्री के भीतर भारी उत्साह देखने को मिल रहा है और हाल ही में उन्होंने अपने इस नए सिनेमाई सफर और राजामौली के भव्य निर्देशन कौशल की जमकर सराहना की है। यह पैन-इंडिया फिल्म अगले साल अप्रैल महीने में दुनियाभर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। अभिनेत्री ने एक लोकप्रिय अंतरराष्ट्रीय पॉडकास्ट ‘हे जोनास’ के दौरान राजामौली के साथ काम करने के अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। बातचीत के दौरान प्रियंका ने बताया कि वे इस महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट ‘वाराणसी’ पर पिछले लगभग 14 महीनों से निरंतर काम कर रही हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि एसएस राजामौली फिल्म निर्माण में अपने परफेक्शन और समय लेने के लिए जाने जाते हैं। अभिनेत्री ने कहा कि जब राजामौली ने उन्हें इस प्रोजेक्ट के लिए संपर्क किया, तो उन्हें महसूस हुआ कि यह फिल्म दुनिया भर के विभिन्न स्थानों और समय के साथ एक जबरदस्त एडवेंचर होने वाली है। उन्होंने खुलासा किया कि इस फिल्म में उन्होंने कई शानदार और चुनौतीपूर्ण स्लो-मोशन जंप सीक्वेंस भी किए हैं। एक अन्य अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘वैरायटी’ के साथ बातचीत में प्रियंका चोपड़ा ने फिल्म की भव्यता और निर्देशक की दूरदृष्टि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह फिल्म उनके अब तक के पूरे करियर में की गई सभी फिल्मों से बिल्कुल अलग और अनूठी है। फिल्म की शूटिंग के दौरान टीम ने अंटार्कटिका जैसे दुर्गम और खूबसूरत स्थानों की भी यात्रा की है। राजामौली की प्रशंसा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वे जिस तरह की सिनेमाई दुनिया का निर्माण करते हैं, वह अत्यंत भव्य और अविश्वसनीय होती है। अभिनेत्री का मानना है कि वर्तमान समय में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में राजामौली जैसा अनूठा विजन शायद ही किसी अन्य निर्देशक के पास हो। प्रियंका चोपड़ा ने फिल्म साइन करने के दौरान हुई एक दिलचस्प घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब वे भारतीय सिनेमा में अपनी वापसी को लेकर राजामौली से चर्चा कर रही थीं, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से एक विशेष शर्त रखी थी। अभिनेत्री ने निर्देशक से मजाकिया अंदाज में कहा था कि चूंकि वे लंबे समय बाद इंडियन फिल्मों में लौट रही हैं, इसलिए उन्हें एक शानदार डांस नंबर करना है। प्रियंका ने राजामौली से जोर देकर कहा था कि वे उनसे फिल्म में डांस जरूर करवाएं, क्योंकि भारतीय दर्शक उन्हें उस अवतार में देखना काफी पसंद करते हैं। फिल्म के निर्माण से जुड़े नवीनतम अपडेट साझा करते हुए निर्देशक एसएस राजामौली ने हाल ही में बताया है कि फिल्म के अधिकांश मुख्य एक्शन दृश्य पहले ही सफलतापूर्वक फिल्माए जा चुके हैं। वर्तमान योजना के अनुसार, इस साल के अक्तूबर महीने तक फिल्म की पूरी शूटिंग संपन्न होने की प्रबल उम्मीद है। इस भव्य फिल्म में प्रियंका चोपड़ा के साथ साउथ सिनेमा के सुपरस्टार महेश बाबू और प्रतिभाशाली अभिनेता पृथ्वीराज सुकुमारन भी अत्यंत महत्वपूर्ण किरदारों में नजर आने वाले हैं। यह फिल्म अप्रैल 2027 में बड़े पर्दे पर रिलीज होकर दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद भी कायम है 'कैप्टन कूल' का जादू, इंग्लैंड दौरे पर दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बने पूर्व कप्तान एमएस धोनी

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और विश्व प्रसिद्ध क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी एक बार फिर अपने सहज और सादगी भरे व्यवहार को लेकर देश-विदेश के प्रशंसकों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। भारत और इंग्लैंड के बीच बर्मिंघम के एजबेस्टन मैदान पर खेले गए पहले एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दौरान पूर्व कप्तान स्टैंड्स में बैठकर मैच का आनंद लेते हुए दिखाई दिए। इस मैच की लाइव कवरेज के दौरान एक नन्हे प्रशंसक के साथ उनका एक बेहद आत्मीय और भावनात्मक पल कैमरे में कैद हो गया, जो अब विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से वायरल हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूरी बनाने के कई वर्षों बाद भी उनकी यह लोकप्रियता खेल जगत में उनके ऊंचे कद को बयां करती है। प्राप्त विवरण के अनुसार, मुकाबले के दौरान जैसे ही ब्रॉडकास्टिंग कैमरों का रुख स्टैंड्स में बैठे महेंद्र सिंह धोनी की तरफ हुआ, पूरे एजबेस्टन स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शकों ने खड़े होकर और तालियां बजाकर अपने चहेते खिलाड़ी का जोरदार स्वागत किया। इसी बीच धोनी के ठीक पास बैठे एक छोटे बच्चे ने अत्यंत मासूमियत के साथ उन्हें अपने पास रखे पॉपकॉर्न खाने का आग्रह किया। पूर्व कप्तान ने बच्चे की इस निश्छल भावना और आदर का सम्मान करते हुए मुस्कुराकर उसकी दी हुई चीज को स्वीकार कर लिया और उससे कुछ पल बातचीत भी की। कुछ देर पश्चात जब उस नन्हे प्रशंसक ने पुनः उन्हें पॉपकॉर्न देने का प्रयास किया, तो धोनी ने मुस्कुराते हुए बेहद शालीनता से हाथ के इशारे से उसे मना कर दिया कि वे पहले ही खा चुके हैं। उनका यह सहज और जमीन से जुड़ा व्यवहार खेल प्रेमियों को अत्यधिक प्रभावित कर रहा है। महेंद्र सिंह धोनी इन दिनों इंग्लैंड के विभिन्न दौरों पर भारतीय टीम के मनोबल को बढ़ाने के लिए लगातार स्टेडियमों में उपस्थित हो रहे हैं। इससे पूर्व, मार्च के महीने में मुंबई के ऐतिहासिक वानखेड़े स्टेडियम में आयोजित भारत और इंग्लैंड के मध्य टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल मुकाबले में भी वे स्टैंड्स में मैच देखते हुए पाए गए थे। इसके पश्चात, वे अहमदाबाद में खेले गए विश्व कप के फाइनल मुकाबले में भी भारतीय टीम का समर्थन करने के लिए मौजूद थे, जहां भारत ने न्यूजीलैंड को पराजित कर लगातार दूसरी बार टी20 विश्व कप का ऐतिहासिक खिताब अपने नाम किया था। हाल ही में धोनी ने अपना 45वां जन्मदिवस भी इंग्लैंड के ट्रेंट ब्रिज मैदान पर भारत और इंग्लैंड के बीच आयोजित तीसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान मनाया था, जहां उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी थी। इस वैश्विक लोकप्रियता और सक्रियता के बीच महेंद्र सिंह धोनी के इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल के भविष्य को लेकर खेल समीक्षकों और प्रशंसकों के बीच सस्पेंस अभी भी पूरी तरह बरकरार है। वे आईपीएल 2026 के सत्र में चेन्नई सुपर किंग्स की पीली जर्सी में मैदान पर खेलते हुए नजर नहीं आए थे, जिसके कारण उनके आधिकारिक संन्यास को लेकर क्रिकेट जगत में अटकलों का बाजार गर्म हो गया था। हालांकि, यह सर्वविदित है कि ‘कैप्टन कूल’ अपने करियर, संन्यास अथवा मैदान पर वापसी से जुड़े बड़े और अप्रत्याशित फैसले स्वयं लेने के लिए जाने जाते हैं। आईपीएल 2027 के आगामी सत्र में वे एक खिलाड़ी के रूप में मैदान पर वापसी करेंगे अथवा नहीं, इस विषय पर अभी तक न तो धोनी की ओर से और न ही चेन्नई सुपर किंग्स फ्रैंचाइजी की ओर से कोई आधिकारिक वक्तव्य जारी किया गया है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने के लंबे समय बाद भी महेंद्र सिंह धोनी की ब्रांड वैल्यू और जनमानस में उनकी लोकप्रियता में तनिक भी गिरावट दर्ज नहीं की गई है। वे मैदान के भीतर खेल रहे हों या मैदान के बाहर एक आम दर्शक की भूमिका में मौजूद हों, उनका प्रत्येक अंदाज प्रशंसकों के लिए अत्यंत विशेष बन जाता है। बर्मिंघम के एजबेस्टन स्टेडियम में एक छोटे बच्चे के साथ हुई उनकी यह संक्षिप्त मुलाकात एक बार फिर यह प्रमाणित करती है कि धोनी केवल अपनी उत्कृष्ट खेल तकनीक और कप्तानी के कारण ही महान नहीं हैं, बल्कि अपने सहज, वि
‘हेरा फेरी 3’ के सस्पेंस के बीच ‘भागम भाग 2’ की तैयारी, निर्देशक राज शांडिल्य और परेश रावल ने सोशल मीडिया पर दिए बड़े संकेत

नई दिल्ली । भारतीय सिनेमा जगत में कल्ट क्लासिक का दर्जा हासिल कर चुकी अभिनेता अक्षय कुमार और परेश रावल की प्रसिद्ध कॉमेडी फिल्म ‘भागम भाग’ के सीक्वल को लेकर मनोरंजन उद्योग में हलचल तेज हो गई है। ‘हेरा फेरी 3’ के निर्माण को लेकर चल रहे विवादों और अनिश्चितताओं के बीच, प्रसिद्ध निर्देशक राज शांडिल्य ने इस सुपरहिट कॉमेडी फ्रेंचाइजी के दूसरे भाग का निर्माण करने का एक बड़ा परोक्ष संकेत दिया है। इस घोषणा के बाद से ही सिनेमा प्रेमियों और प्रशंसकों के बीच भारी उत्सुकता देखी जा रही है, जो लंबे समय से इस प्रसिद्ध जोड़ी को दोबारा पर्दे पर देखने का इंतजार कर रहे हैं। इस नए घटनाक्रम की शुरुआत उस समय हुई जब निर्देशक राज शांडिल्य ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक अत्यंत उत्सुकता बढ़ाने वाला संदेश साझा किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि प्रशंसकों को बस थोड़ा और इंतजार करने की आवश्यकता है, क्योंकि जल्द ही सारे ‘सिग्नल’ खुलने वाले हैं। उल्लेखनीय है कि ‘सिग्नल’ शब्द का प्रयोग वर्ष 2006 में आई मूल फिल्म ‘भागम भाग’ के एक अत्यंत लोकप्रिय और सुपरहिट गीत के संदर्भ में किया गया था। इस मूल गीत को प्रसिद्ध संगीतकार प्रीतम चक्रवर्ती ने तैयार किया था, जिसे रेमो फर्नांडीस और सुजैन डी’मेलो ने अपनी आवाज दी थी। इस पूरे मामले में प्रशंसकों की उत्सुकता और सिनेमाई गलियारों में चर्चा तब और अधिक बढ़ गई, जब फिल्म के मुख्य अभिनेता परेश रावल ने स्वयं इस पोस्ट पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने निर्देशक राज शांडिल्य के संदेश को रीपोस्ट करते हुए सकारात्मक लहजे में सहमति जताई। इस बात की पूरी संभावना व्यक्त की जा रही है कि इस बहुप्रतीक्षित सीक्वल में अक्षय कुमार मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। हालांकि, मूल फिल्म में उनके साथ सह-अभिनेता के रूप में धमाल मचाने वाले प्रसिद्ध अभिनेता गोविंदा इस नए प्रोजेक्ट का हिस्सा होंगे या नहीं, इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो प्रसिद्ध निर्देशक प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी मूल फिल्म ‘भागम भाग’ ने अपने बेहतरीन स्क्रीनप्ले और हास्य दृश्यों के दम पर दर्शकों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी है। इस फिल्म की मुख्य कहानी एक ड्रामा थिएटर ग्रुप के तीन कलाकारों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक नाटक के मंचन के सिलसिले में लंदन की यात्रा पर जाते हैं। वहां की यात्रा के दौरान वे अनजाने में एक बेहद पेचीदा और हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में फंस जाते हैं, जिसके बाद फिल्म में पैदा होने वाली परिस्थितियां दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देती हैं। व्यावसायिक स्तर पर इस फिल्म के दूसरे भाग यानी ‘भागम भाग 2’ को धरातल पर उतारने से पहले कुछ बेहद पेचीदा कानूनी और व्यावसायिक अड़चनों का सामना करना पड़ा था। वर्ष 2026 के मार्च महीने में जब राज शांडिल्य को आधिकारिक तौर पर इस फिल्म के निर्देशन की कमान सौंपी गई, तब एक बड़ा अनुबंधात्मक विवाद सामने आया। राज शांडिल्य ने पूर्व में प्रसिद्ध फिल्म निर्माता एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस के साथ तीन फिल्मों का एक विशेष अनुबंध साइन किया था, जबकि यह नई फिल्म उस बैनर के अंतर्गत नहीं बन रही थी। इस कारण निर्माता कंपनी की ओर से उन पर अनुबंध के उल्लंघन और अग्रिम राशि न लौटाने के आरोप लगाए गए थे, क्योंकि उन्होंने अन्य प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी प्राप्त नहीं किया था। हालांकि, फिल्म जगत के लिए राहत की बात यह रही कि मई 2026 में दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत के माध्यम से इस पूरे कानूनी विवाद को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझा लिया। दोनों फिल्मकारों ने सोशल मीडिया पर एक साथ तस्वीरें साझा कर इस विवाद के समाप्त होने की पुष्टि की थी, जिसके बाद अब इस कल्ट कॉमेडी फिल्म के निर्माण का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो गया है।
Morena Students Protest: स्कूल जाने का रास्ता बना मुसीबत, दलदल और पानी से परेशान छात्र पहुंचे कलेक्ट्रेट

Morena Students Protest: मध्यप्रदेश। मुरैना जिले के गुमानपुरा गांव के बच्चों ने मंगलवार को अपनी परेशानी प्रशासन के सामने रखी। गांव के 20 से 25 बच्चे अपने अभिभावकों के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर को आवेदन देकर स्कूल तक पक्की सड़क बनवाने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में हंगामा और मुख्य न्यायाधीश से अभद्रता करने वाले लॉ के दो छात्र गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी बारिश में स्कूल पहुंचना हो जाता है मुश्किल छात्रों का कहना है कि गांव से स्कूल जाने वाला रास्ता पूरी तरह खराब है। बारिश होते ही सड़क पर पानी भर जाता है और जगह-जगह दलदल बन जाती है। ऐसे में रोज स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। बच्चों का कहना है कि कई बार उन्हें बीच रास्ते से ही लौटना पड़ता है। इतना ही नहीं, खराब रास्ते की वजह से शिक्षक भी कई बार स्कूल नहीं पहुंच पाते, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है। खजुराहो एयरपोर्ट देशभर में टॉप पर, भोपाल का राजाभोज एयरपोर्ट तीसरे स्थान पर कई बार शिकायत, लेकिन नहीं हुआ समाधान ग्रामीणों का कहना है कि इस समस्या की शिकायत कई महीनों से सरपंच और सचिव से की जा रही है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं, जबकि बच्चों की पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है। कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड कलेक्ट्रेट पहुंचकर लगाई मदद की गुहार ग्रामीणों ने कहा कि सरकार गांव-गांव तक सड़क और विकास की बात करती है, लेकिन गुमानपुरा आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने जिला प्रशासन से जल्द सड़क निर्माण कराने की मांग की, ताकि बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी न हो।