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अमेरिकी नाकाबंदी को मात देने की तैयारी में ईरान, ‘शैडो फ्लीट’ से तेल टैंकर निकालने की रणनीति


नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। सीजफायर समझौते के खत्म होने के बाद दोनों देशों के बीच टकराव तेज हो गया है। ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी है, वहीं ईरान इस नाकाबंदी को चकमा देने के लिए अपने गुप्त जहाजी बेड़े यानी ‘शैडो फ्लीट’ का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य पर निगरानी और दबाव बढ़ाने के लिए अमेरिका ने उत्तरी अरब सागर में दो एयरक्राफ्ट कैरियर, 1,000 से ज्यादा नौसैनिकों और कम से कम 19 युद्धपोतों को तैनात किया है। इसके जवाब में ईरान से जुड़े कई तेल टैंकर अपनी पहचान छिपाकर समुद्री रास्तों से निकलने की कोशिश कर रहे हैं।

23 जहाजों का गुप्त नेटवर्क सक्रिय
समुद्री गतिविधियों पर नजर रखने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान से जुड़े कम से कम 23 जहाज सक्रिय हैं। ये जहाज अपने ट्रैकिंग सिस्टम को बंद या उसमें बदलाव कर ‘डार्क फ्लीट’ या ‘शैडो फ्लीट’ की तरह काम कर रहे हैं। इन जहाजों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय निगरानी से बचते हुए तेल और अन्य सामान की आवाजाही के लिए किया जा रहा है।

दूसरे देशों के झंडे और पहचान छिपाने की रणनीति
समुद्री खुफिया कंपनी विंडवर्ड के मुताबिक, ईरान से जुड़े जहाज अमेरिकी नौसेना की निगरानी से बचने के लिए कई तरह के तरीके अपना रहे हैं। इनमें दूसरे देशों के झंडों का इस्तेमाल, ट्रांसपोंडर बंद करना और जहाज की वास्तविक पहचान छिपाने जैसी तकनीकें शामिल हैं। इस तरह ये जहाज अपनी गतिविधियों को छिपाकर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।

ईरान पहले भी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने के लिए ऐसे गुप्त जहाजी नेटवर्क का इस्तेमाल करता रहा है। प्रतिबंधों के बावजूद वह एक जटिल शिपिंग नेटवर्क के जरिए कच्चे तेल का निर्यात करता रहा है, जिसमें चीन उसका प्रमुख खरीदार रहा है।

जून में 5 करोड़ बैरल तेल निर्यात का दावा
‘टैंकरट्रैकर्स’ के आंकड़ों के मुताबिक, तमाम प्रतिबंधों और निगरानी के बावजूद ईरान ने जून महीने में करीब 5 करोड़ बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया।

रिपोर्ट के अनुसार, 23 जहाजों में से 10 टैंकर इस समय कच्चे तेल या अन्य सामान से लदे हुए हैं, जबकि 13 जहाज नए माल की लोडिंग का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा सात प्रतिबंधित VLCC (बहुत बड़े कच्चे तेल के टैंकर) हिंद महासागर क्षेत्र में मौजूद हैं। ये टैंकर ईरानी तेल से भरे हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की तलाश में हैं।

पहले भी नाकाबंदी के बावजूद जारी रहा तेल निर्यात
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका पहले भी ईरान के तेल निर्यात को रोकने के लिए कई कदम उठा चुका है। इन प्रयासों से ईरानी तेल निर्यात में गिरावट जरूर आई, लेकिन इसे पूरी तरह बंद नहीं किया जा सका। हालांकि, पिछली पाबंदियों का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा था। देश में महंगाई बढ़ी और आर्थिक दबाव भी काफी बढ़ गया था। अब नजर इस बात पर है कि अमेरिका की कड़ी निगरानी के बीच ईरान का शैडो फ्लीट अपनी रणनीति में कितना सफल हो पाता है।

ईरान का दावा- तेल निर्यात सामान्य
इस बीच ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने दावा किया है कि अमेरिका की ओर से 60 दिनों की प्रतिबंध छूट खत्म किए जाने के बाद भी देश का कच्चे तेल का निर्यात सामान्य रूप से जारी है। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिबंधों को निष्प्रभावी करने के लिए पहले से ही मजबूत व्यवस्था तैयार कर रखी है।

पाकनेजाद ने अमेरिकी फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वॉशिंगटन ने अपने वादों का उल्लंघन किया है। उन्होंने इसे इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (MoU) की धारा 10 के खिलाफ बताया, जिसमें 60 दिनों की छूट का प्रावधान शामिल था।

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