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अस्पताल के बिस्तर पर एसडी बर्मन ने सुनी थी किशोर कुमार की आखिरी आवाज, 'बड़ी सूनी सूनी है जिंदगी' गाने के निर्माण की भावुक दास्तां

.नई दिल्ली ।भारतीय सिनेमा जगत में वर्ष 1975 में प्रदर्शित हुई अभिनेता अमिताभ बच्चन और अभिनेत्री जया बच्चन की प्रसिद्ध फिल्म ‘मिली’ को न केवल उसकी उत्कृष्ट कहानी बल्कि उसके सदाबहार संगीत के लिए भी याद किया जाता है। इस फिल्म की पटकथा एक ऐसी युवती के इर्द-गिर्द घूमती है जो एक लाइलाज बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद जीवन को जिंदादिली से जीती है। इस फिल्म में कई मनोरंजक और चुलबुले गीत शामिल थे, परंतु इसका एक गीत ऐसा भी है जिसने न केवल दर्शकों को भावुक किया बल्कि उसके निर्माण की पृष्ठभूमि भी गहरे दुखों और आंसुओं से भरी हुई है। यह गीत था ‘बड़ी सूनी सूनी है जिंदगी’, जिसकी रिकॉर्डिंग के दौरान भारतीय संगीत जगत के एक महान अध्याय का अंत होने की शुरुआत हो चुकी थी। इस कालजयी गीत के संगीत निर्देशन की जिम्मेदारी महान संगीतकार सचिन देव बर्मन संभाल रहे थे, जिन्हें फिल्मी दुनिया में लोग आदर से सचिन दा या एसडी बर्मन कहकर पुकारते थे। जब इस विशिष्ट गीत की रिहर्सल उनके निवास स्थान पर चल रही थी, तब फिल्म के मुख्य गायक किशोर कुमार वहां गीत की बारीकियों को समझने में व्यस्त थे। इसी अभ्यास सत्र के दौरान अचानक सचिन देव बर्मन को पैरालिसिस अर्थात लकवे का एक गंभीर अटैक आया। वहां उपस्थित परिजनों और सहयोगियों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें तुरंत चिकित्सालय ले जाने का आग्रह किया, परंतु अपने काम के प्रति अत्यधिक समर्पित सचिन दा ने जाने से साफ मना कर दिया। उनका तर्क था कि वे एक बेहद महत्वपूर्ण गीत पर काम कर रहे हैं जिसकी रिकॉर्डिंग अगले ही दिन निर्धारित है। ऐसी नाजुक परिस्थिति में जब सचिन दा किसी भी कीमत पर चिकित्सालय जाने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे, तब गायक किशोर कुमार ने स्थिति को संभालने के लिए एक संवेदनशील झूठ का सहारा लिया। उन्होंने सचिन दा के समक्ष जाकर अत्यंत सहजता से कहा कि वर्तमान में उनका गला खराब है और वे आज गायन करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने संगीतकार से आग्रह किया कि जब तक वे चिकित्सालय से प्राथमिक उपचार कराकर लौटेंगे, तब तक उनका गला भी पूरी तरह से ठीक हो चुका होगा। किशोर कुमार की इस आत्मीय बात को मानकर सचिन दा अंततः चिकित्सालय जाने के लिए राजी हो गए और उन्हें तुरंत भर्ती कराया गया। अगले दिन जब स्टूडियो में इस गीत की रिकॉर्डिंग शुरू हुई, तब किशोर कुमार अपने मार्गदर्शक और पिता समान संगीतकार के बिना पूरी तरह से अकेले थे। अपने गुरु के अस्वस्थ होने के कारण वे अत्यधिक मानसिक तनाव और व्यक्तिगत दुख से गुजर रहे थे। जब उन्होंने माइक के सामने खड़े होकर ‘बड़ी सूनी सूनी है जिंदगी’ गाना शुरू किया, तो उनके भीतर का सारा व्यक्तिगत दर्द और व्याकुलता अनायास ही उनकी आवाज के माध्यम से बाहर आ गई। स्टूडियो के भीतर उपस्थित सभी सह-कलाकार और तकनीशियन किशोर कुमार के इस अत्यंत भावुक और जीवंत गायन को सुनकर स्तब्ध रह गए थे, क्योंकि उस आवाज में अभिनय नहीं बल्कि वास्तविक पीड़ा साफ महसूस हो रही थी। गीत की रिकॉर्डिंग सफलतापूर्वक संपन्न होने के अगले दिन सचिन देव बर्मन के सुपुत्र और प्रसिद्ध संगीतकार राहुल देव बर्मन उस रिकॉर्डेड गीत का टेप लेकर सीधे चिकित्सालय पहुंचे। चिकित्सालय के बिस्तर पर गंभीर अवस्था में लेटे हुए सचिन दा को वह गीत सुनाया गया। किशोर कुमार की मर्मस्पर्शी आवाज को सुनकर सचिन दा के चेहरे पर एक आत्मसंतोष की मुस्कान तैर गई। उन्होंने बेहद धीमे शब्दों में अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि किशोर कुमार ने इस रचना को बिल्कुल उसी रूप और भावना के साथ गाया है जैसा वे स्वयं चाहते थे। यह गीत आगे चलकर भारतीय संगीत इतिहास के सबसे सफल और लोकप्रिय गीतों में शुमार हुआ। चिकित्सालय के बिस्तर पर सुना गया यह गीत दुर्भाग्य से सचिन देव बर्मन के जीवन का अंतिम गीत साबित हुआ। इसके तुरंत बाद उनकी स्थिति और अधिक बिगड़ती चली गई और वे गहरे कोमा में चले गए। चिकित्सा विशेषज्ञों के तमाम प्रयासों के बावजूद वे कभी भी उस बिस्तर से उठ नहीं सके और कुछ समय पश्चात उनका निधन हो गया। किशोर कुमार द्वारा गाया गया यह दर्दभरा गीत आज भी जब गूंजता है, तो श्रोताओं को संगीत के प्रति दो महान विभूतियों के समर्पण और एक अमर गुरु-शिष्य परंपरा की याद दिला जाता है।

विज्ञान के लिए आज भी अनसुलझी पहेली है भगवान जगन्नाथ का धड़कता हुआ 'ब्रह्म पदार्थ', जानिए सदियों पुरानी नवकलेवर परंपरा का सत्य

नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सर्वोच्च पूजनीय और चार धामों में से एक ओडिशा के पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर को साक्षात धरती का बैकुंठ माना गया है। प्रतिवर्ष आषाढ़ मास में आयोजित होने वाली भगवान जगन्नाथ की ऐतिहासिक रथ यात्रा वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है, जो इस वर्ष 16 जुलाई से प्रारंभ होने जा रही है। इस प्राचीन मंदिर और इसकी रथ यात्रा से अनेक ऐसे अलौकिक चमत्कार जुड़े हुए हैं, जिनका तार्किक उत्तर आज के आधुनिक विज्ञान, उन्नत तकनीक और शोधकर्ताओं के पास भी उपलब्ध नहीं है। इन सभी चमत्कारों में सबसे गहन और विस्मयकारी रहस्य भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित मूर्ति के भीतर स्थापित ‘ब्रह्म पदार्थ’ को माना जाता है, जिसमें आज भी एक जीवंत धड़कन महसूस होती है। धार्मिक मान्यताओं और स्थापित परंपराओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की मुख्य प्रतिमा के भीतर स्थित इस दिव्य पदार्थ को छूने अथवा इसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया इतनी संवेदनशील है कि मंदिर के मुख्य सेवादारों के मन में भी एक अनजाना भय व्याप्त हो जाता है। सदियों से चली आ रही इस रहस्यमयी प्रक्रिया को प्रत्येक 12 वर्ष की अवधि में एक बार निष्पादित किया जाता है, जिसे सनातन परंपरा में ‘नवकलेवर’ अनुष्ठान के नाम से जाना जाता है। इस विशिष्ट धार्मिक अनुष्ठान के अंतर्गत भगवान जगन्नाथ, भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा की प्राचीन काष्ठ मूर्तियों के स्थान पर नई मूर्तियों को पूर्ण विधि-विधान के साथ गर्भगृह में स्थापित किया जाता है। इस गुप्त अनुष्ठान को अत्यंत गोपनीयता के साथ संपन्न करने के लिए निर्धारित रात्रि को संपूर्ण पुरी शहर की विद्युत आपूर्ति पूरी तरह से बंद कर दी जाती है। पूरे मंदिर परिसर को गहन अंधकार में डुबो दिया जाता है और सुरक्षा के कड़े प्रबंध करते हुए मंदिर के चारों ओर सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया जाता है, जिससे कोई भी बाहरी व्यक्ति इस प्रक्रिया का साक्षी न बन सके। गर्भगृह के भीतर केवल उन्हीं चुनिंदा पुजारियों को प्रवेश की अनुमति होती है, जो इस मूर्ति परिवर्तन की प्राचीन और गुप्त प्रक्रिया को संपन्न करने के लिए अधिकृत होते हैं। नवकलेवर अनुष्ठान को संपन्न करने वाले पुजारियों के लिए बनाए गए नियम अत्यंत कठोर और अपरिवर्तनीय हैं। गर्भगृह में प्रवेश करने से पूर्व पुजारियों की आंखों पर रेशमी कपड़े की मोटी पट्टी बांध दी जाती है और उनके हाथों में मोटे दस्ताने पहना दिए जाते हैं। धार्मिक नियमों के अनुसार, कोई भी मनुष्य इस ब्रह्म पदार्थ को न तो अपनी नंगी आंखों से प्रत्यक्ष देख सकता है और न ही बिना आवरण के स्पर्श कर सकता है। ऐसी मान्यताएं प्रचलित हैं कि यदि कोई व्यक्ति अनजाने में भी इस अलौकिक पदार्थ को देख लेता है, तो उसे गंभीर शारीरिक क्षति पहुंच सकती है। इस गुप्त प्रक्रिया के दौरान जब पुरानी मूर्ति के वक्षस्थल से इस ब्रह्म पदार्थ को निकालकर नई निर्मित मूर्ति में स्थापित किया जाता है, तो उस समय का अनुभव अत्यंत विस्मयकारी होता है। इस कार्य को संपन्न करने वाले मुख्य पुजारियों के संस्मरणों के अनुसार, हाथों में मोटे दस्ताने होने के पश्चात भी जब वे उस दिव्य पदार्थ को स्पर्श करते हैं, तो उसमें एक स्पष्ट स्पंदन और जीवंतता का आभास होता है। वह पदार्थ किसी जीवित पिंड की भांति गतिशील और इंसानी हृदय की तरह निरंतर धड़कता हुआ प्रतीत होता है, मानो साक्षात नारायण का हृदय वहां स्पंदित हो रहा हो। इस धड़कते हुए ब्रह्म पदार्थ की वास्तविक संरचना और इसके मूल स्वरूप को लेकर सामाजिक और धार्मिक स्तर पर अनेक कथाएं एवं अनुसंधान प्रचलित हैं। एक प्रमुख पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह साक्षात भगवान श्रीकृष्ण का वह पवित्र हृदय है, जो महाभारत काल के बाद उनकी अंत्येष्टि के समय भी अग्नि में भस्म नहीं हुआ था और आज भी उसी अवस्था में सुरक्षित है। इसके विपरीत, कुछ विद्वान इसे कोई अत्यंत शक्तिशाली दिव्य धातु या चमत्कारिक मणि मानते हैं। कारण चाहे जो भी हो, परंतु वर्तमान वैज्ञानिक युग में भी यह धड़कता हुआ ब्रह्म पदार्थ अध्यात्म और आस्था का एक ऐसा अटूट स्तंभ बना हुआ है, जिसके रहस्य को भेद पाना आधुनिक चेतना के लिए अब तक असंभव सिद्ध हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम में हंगामा और मुख्य न्यायाधीश से अभद्रता करने वाले लॉ के दो छात्र गिरफ्तार, दिल्ली पुलिस ने दर्ज की प्राथमिकी

नई दिल्ली । देश की सर्वोच्च अदालत के भीतर एक बेहद चौंकाने वाली घटना में न्यायिक कार्यवाही को बाधित करने, फाइलों को हवा में उछालने और देश के मुख्य न्यायाधीश के प्रति अत्यंत अभद्र व असंसदीय भाषा का प्रयोग करने वाले कानून के दो छात्रों को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सुरक्षाकर्मियों के साथ हाथापाई और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में इन छात्रों के खिलाफ राष्ट्रीय राजधानी के तिलक मार्ग थाने में एक आपराधिक प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर आगे की वैधानिक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान लखनऊ विश्वविद्यालय में विधि संकाय के छात्रों के रूप में की गई है। इनमें से एक आरोपी का नाम प्रबल प्रताप सिंह है, जो कानून के तीसरे वर्ष का छात्र है और मूल रूप से उत्तर प्रदेश के इटावा का निवासी है। वहीं, दूसरे आरोपी की पहचान चंद्र भान के रूप में हुई है, जो इसी विश्वविद्यालय में विधि द्वितीय वर्ष का छात्र है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि यह पूरी कानूनी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट परिसर की सुरक्षा में तैनात सुरक्षा स्टाफ के लिखित बयान और शिकायत के आधार पर अमल में लाई गई है। यह अभूतपूर्व घटना सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर 13 के भीतर घटित हुई, जब अदालत में एक विशेष अनुमति याचिका पर नियमित सुनवाई चल रही थी। अदालत के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, इस याचिका का शीर्षक ‘प्रबल प्रताप व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार’ था। इस संवेदनशील मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी प्रबल प्रताप सिंह किसी अधिवक्ता के माध्यम से पेश होने के बजाय खुद ही याचिकाकर्ता-इन-पर्सन के रूप में न्यायाधीशों के समक्ष उपस्थित होकर अपनी दलीलें रख रहा था। दर्ज की गई प्राथमिकी के विवरण के मुताबिक, न्यायिक कार्यवाही के दौरान दलीलें खारिज होने या किसी अन्य कारण से आरोपी प्रबल प्रताप सिंह अचानक उग्र हो गया और उसने पूरी तरह से सोची-समझी रणनीति के तहत अदालत की गरिमा को ठेस पहुंचाना शुरू कर दिया। उसने जजों के सामने बेहद अमर्यादित, अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। अपना आपा खोते हुए उसने कोर्ट रूम के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण अदालती कागजात और कानूनी फाइलों को हवा में उछाल दिया, जिससे वे पूरे कोर्ट रूम में बिखर गईं। इस हिंसक आचरण से अदालत कक्ष के भीतर पूरी तरह से अव्यवस्था और अशांति का माहौल पैदा हो गया। घटना के वक्त कोर्ट रूम में मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और सुरक्षाकर्मियों के अनुसार, आरोपी छात्र यहीं नहीं रुका, बल्कि उसने देश के मुख्य न्यायाधीश के प्रति भी सीधे तौर पर अमर्यादित शब्दों और गालियों का प्रयोग किया। जब कोर्ट रूम की सुरक्षा में तैनात ऑन-ड्यूटी सुरक्षाकर्मियों और प्रशासनिक स्टाफ ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए उसे पकड़ने तथा शांत करने का प्रयास किया, तो दोनों आरोपी छात्र और अधिक हिंसक हो गए। उन्होंने सुरक्षा स्टाफ के साथ धक्का-मुक्की और हाथापाई शुरू कर दी, जिससे ऑन-ड्यूटी कर्मचारियों को अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने में गंभीर बाधा का सामना करना पड़ा। न्यायालय परिसर के भीतर इस प्रकार के अप्रत्याशित हंगामे को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल को तुरंत मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों उपद्रवी छात्रों को काबू में किया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट प्रशासन की लिखित शिकायत पर तिलक मार्ग थाना पुलिस ने विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने देश की सबसे बड़ी अदालत की सुरक्षा व्यवस्था और कोर्ट रूम के भीतर वकीलों व याचिकाकर्ताओं के आचरण को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है, जिस पर आने वाले दिनों में और सख्त रुख अपनाए जाने की संभावना है।

Morena house encroachment: तीन पीढ़ियां यहीं रहीं, अब कहां जाएं? 100 साल पुराने घर से किया बेदखल

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Morena house encroachment: मध्यप्रदेश। मुरैना के मुड़ियाखेड़ा गांव में मंगलवार को एक परिवार का दर्द उस वक्त सबके सामने आ गया, जब कोर्ट के आदेश पर उन्हें अपना घर खाली करना पड़ा। बेदखली की कार्रवाई के बाद परिवार ने गुस्से और बेबसी में अपना पूरा सामान सड़क पर रख दिया और चक्काजाम कर दिया। देखते ही देखते मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड कोर्ट के आदेश पर कराया खाली जानकारी के मुताबिक, स्टेशन रोड थाना क्षेत्र के मुड़ियाखेड़ा गांव में रहने वाली लक्ष्मी अपने परिवार के साथ कई सालों से इस मकान में रह रही थीं। परिवार का कहना है कि उनके दादा-परदादा भी इसी घर में रहे और करीब 100 साल से उनका परिवार यहीं रह रहा था। कुछ समय पहले पड़ोसी परिवार के साथ जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ। मामला कोर्ट तक पहुंचा और कोर्ट के फैसले के बाद मंगलवार को पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद परिवार से मकान खाली कराया गया। पोलैंड के उप विदेश मंत्री ने की PM मोदी की तारीफ…. बोले- रूसी राष्ट्रपति मानते हैं उनकी बात सामान सड़क पर रख कर किया विरोध घर खाली होने के बाद परिवार खुद को संभाल नहीं पाया। उन्होंने पलंग, बर्तन, संदूक और घर का बाकी सामान सड़क पर रख दिया। इसके बाद सभी लोग वहीं बैठ गए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। सड़क पर सामान रखे होने की वजह से कुछ देर के लिए रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाकर जाम खुलवाया। Morena Kidnapping Case: मुरैना में 3 साल के बच्चे का अपहरण, पिता ही बना किडनेपिंग का मास्टरमाइंड ‘हमारी तीन पीढ़ियां इसी घर में रहीं’ परिवार की सदस्य लक्ष्मी का कहना है कि उनकी तीन पीढ़ियां इसी घर में रही हैं। अब अचानक उन्हें घर से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों और पूरे सामान के साथ आखिर वे कहां जाएं। लक्ष्मी ने प्रशासन से मदद की मांग करते हुए कहा कि उन्हें रहने की व्यवस्था और न्याय मिलना चाहिए। फिलहाल पूरे मामले को लेकर इलाके में चर्चा बनी हुई है।

US: ट्रंप को बड़ा झटका…. यौन शोषण मामले में जीन कैरोल को मिले 5.63 मिलियन डॉलर

वाशिंगटन। अमेरिकी लेखिका ई. जीन कैरोल (American writer E. Jean Carroll) को डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) से करीब 56 लाख 30 हजार डॉलर (लगभग 5.63 मिलियन डॉलर) मिल गए हैं. यह पैसा उन्हें 2023 में एक जूरी के फैसले के बाद मिला है, जिसमें ट्रंप को कैरोल का यौन उत्पीड़न करने और उन्हें बदनाम करने का दोषी ठहराया गया था। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक यह रकम सोमवार को कैरोल की लॉ फर्म को भेज दी गई. यह फैसला ट्रंप की आपत्तियों के बावजूद लिया गया. जज लुईस कैप्लान (Judge Lewis Kaplan) ने पांच दिन पहले ही इस भुगतान को मंजूरी दी थी। यह रकम मूल रूप से 5 मिलियन डॉलर के सिविल वर्डिक्ट और उस पर लगे ब्याज को मिलाकर बनी है. यह पहली बार है जब ट्रंप को कैरोल को कोई भुगतान करने पर मजबूर होना पड़ा है। पिछले सात साल में कैरोल कुल 88.3 मिलियन डॉलर के सिविल फैसले ट्रंप के खिलाफ जीत चुकी हैं. यह मामला 1996 के आसपास न्यूयॉर्क के बर्गडॉर्फ गुडमैन डिपार्टमेंट स्टोर की एक ड्रेसिंग रूम में हुई कथित घटना से जुड़ा है, जिसे ट्रंप ने हमेशा नकारा है। राष्ट्रपति ट्रंप कैरोल के आरोपों को झूठा बताते रहे हैं. उनका कहना है कि वे कैरोल को जानते तक नहीं और कैरोल ने अपनी किताब बेचने के लिए यह कहानी गढ़ी है. पिछले महीने अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने भी ट्रंप की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने 5 मिलियन डॉलर के फैसले को चुनौती दी थी. ट्रंप की कानूनी टीम ने मंगलवार को फिर कहा कि यह पूरा मामला राजनीति से प्रेरित है। इससे पहले ट्रंप के वकील ने अदालत से भुगतान रोकने की मांग की थी. वकील का कहना था कि अगर कैरोल यह पैसा दान कर देती हैं, जैसा उन्होंने पहले कहा था, तो यह रकम वापस मिलनी मुश्किल हो जाएगी. हालांकि कैरोल ने बाद में भरोसा दिलाया कि वे इस पैसे को अपने रिटायरमेंट के लिए एक ब्याज वाले खाते में रखेंगी।

शुक्र देव कल करेंगे नक्षत्र परिवर्तन… इन चार राशि वालों के लिए खुलेंगे धन के द्वार

नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में सुख, समृद्धि, धन और वैभव के दाता माने जाने वाले शुक्र देव (Lord Shukra) 16 जुलाई 2026 को अपना नक्षत्र परिवर्तन (Shukra Nakshatra Gochar 2026) करने जा रहे हैं. शुक्र देव (Lord Shukra) इस दिन सिंह राशि (Leo) में रहते हुए मघा नक्षत्र (Magha Nakshatra) से निकलकर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र (Purva Phalguni Nakshatra) में प्रवेश करेंगे। सबसे खास बात यह है कि पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी खुद शुक्र देव ही हैं. जब भी कोई ग्रह अपने ही स्वामित्व वाले नक्षत्र में आता है, तो उसकी शक्तियां दोगुनी हो जाती हैं और वह अत्यंत शुभ फल देता है. शुक्र का यह स्व-नक्षत्र गोचर 4 भाग्यशाली राशियों के लिए धन के द्वार खोलने वाला और तिजोरी भरने वाला साबित होगा. आइए जानते हैं उन 4 भाग्यशाली राशियों के बारे में जिन्हें इस दौरान बंपर लाभ मिलने जा रहा है। मेष राशि (Aries) मेष राशि के जातकों के लिए शुक्र का यह नक्षत्र परिवर्तन बेहद अनुकूल रहने वाला है. यदि आपका पैसा कहीं लंबे समय से अटका हुआ था, तो वह इस दौरान वापस मिल सकता है. आय के नए स्रोत बनेंगे. नौकरीपेशा लोगों को कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां या प्रमोशन मिल सकता है. व्यापारियों के लिए यह समय तगड़ा मुनाफा लेकर आ रहा है. मानसिक तनाव कम होगा, प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी और संतान पक्ष से शुभ समाचार मिल सकता है। सिंह राशि (Leo) शुक्र देव अभी आपकी ही राशि में गोचर कर रहे हैं, इसलिए इस नक्षत्र परिवर्तन का सबसे बड़ा और सीधा लाभ आपको मिलेगा. यदि आप पार्टनरशिप में कोई बिजनेस कर रहे हैं, तो बड़ा आर्थिक लाभ होने की पूरी संभावना है. भौतिक सुख-सुविधाओं जैसे वाहन, आभूषण या इलेक्ट्रॉनिक्स पर खर्च करेंगे. आपके व्यक्तित्व और आकर्षण में जबरदस्त निखार आएगा. समाज और कार्यक्षेत्र में आपकी लोकप्रियता और मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी. लोग आपकी बातों और फैसलों से प्रभावित होंगे। तुला राशि (Libra)तुला राशि के स्वामी खुद शुक्र देव ही हैं, इसलिए अपने ही नक्षत्र में शुक्र का आना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है. आर्थिक मामलों में लंबे समय से चल रही तंगी दूर होगी. आकस्मिक धन लाभ (अचानक पैसा मिलना) और निवेश से जुड़े मामलों में बड़ा मुनाफा होने के योग हैं. जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं या इंक्रीमेंट का इंतजार कर रहे हैं, उन्हें 16 जुलाई के बाद कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है. दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी और परिवार के सहयोग से बिगड़े काम बन जाएंगे। धनु राशि (Sagittarius)धनु राशि के जातकों के लिए भी शुक्र का यह गोचर भाग्य के सितारे बुलंद करने वाला है. आपके जो काम पिछले कई महीनों से लटके हुए थे, वे अब तेजी से पूरे होने लगेंगे. भाग्य का पूरा साथ मिलेगा. नौकरीपेशा लोगों को अपनी मेहनत का शानदार फल मिलेगा. वहीं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को इस अवधि में बड़ी सफलता मिल सकती है. काम के सिलसिले में की गई यात्राएं आपके लिए आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित होंगी।

खजुराहो एयरपोर्ट देशभर में टॉप पर, भोपाल का राजाभोज एयरपोर्ट तीसरे स्थान पर

भोपाल। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के खजुराहो एयरपोर्ट (Khajuraho Airport) ने एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के इस साल के नेशनल कस्टमर सैटिस्फैक्शन रैंकिंग (National Customer Satisfaction Survey Ranking) में देशभर में पहला स्थान हासिल किया है. वहीं, भोपाल स्थित राजा भोज एयरपोर्ट (Raja Bhoj Airport) ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है. यात्री सुविधाओं, साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था और सेवा गुणवत्ता के मामले में दोनों एयरपोर्ट का शीर्ष स्थानों पर पहुंचना मध्य प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि है। खजुराहो एयरपोर्ट के डायरेक्टर संतोष सिंह ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह पूरी टीम की कड़ी मेहनत, यात्रियों के भरोसे और बेहतर सेवाएं देने की निरंतर प्रतिबद्धता का परिणाम है. उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट मैनेजमेंट का उद्देश्य यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराना और भविष्य में सेवा की गुणवत्ता को लगातार बेहतर बनाना है. उनका कहना था कि यात्रियों का सकारात्मक अनुभव ही किसी भी एयरपोर्ट की सबसे बड़ी सफलता का पैमाना होता है। यात्रियों के फीडबैक के आधार पर बनी रैंकिंगएयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के मुताबिक, यह रैंकिंग देशभर के विभिन्न हवाई अड्डों पर यात्रियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर तैयार की गई है. सर्वे के दौरान यात्रियों से एयरपोर्ट पर मिलने वाली सुविधाओं और सेवाओं के बारे में विस्तृत प्रतिक्रिया ली गई. इसके बाद विभिन्न मानकों पर एयरपोर्ट का मूल्यांकन कर अंतिम रैंकिंग जारी की गई. इस सर्वे में चेक-इन प्रक्रिया, सुरक्षा जांच, टर्मिनल की साफ-सफाई, कर्मचारियों का व्यवहार, प्रतीक्षा समय, खानपान की सुविधाएं, सूचना प्रणाली और यात्रियों के समग्र अनुभव जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया। इन सभी मानकों पर खजुराहो एयरपोर्ट ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया. संतोष सिंह ने कहा कि यह उपलब्धि केवल एयरपोर्ट प्रबंधन के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि विश्व प्रसिद्ध खजुराहो के मंदिर, जो यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं, हर साल बड़ी संख्या में देशी और विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं. ऐसे में बेहतर हवाई संपर्क, आधुनिक सुविधाएं और उत्कृष्ट यात्री अनुभव क्षेत्र में पर्यटन को और बढ़ावा देंगे। वहीं, भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट का देश में तीसरे स्थान पर आना भी इस बात का संकेत है कि मध्य प्रदेश के हवाई अड्डों पर यात्री सुविधाओं और सेवा गुणवत्ता में लगातार सुधार हो रहा है. अधिकारियों का मानना है कि इस उपलब्धि से राज्य की सकारात्मक छवि मजबूत होगी और भविष्य में अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

कल से शुरू होगी जगन्नाथ रथ यात्रा…. सोने की झाड़ू से होती है यात्रा मार्ग की सफाई, जानें इसकी वजह

पुरी। ‘जगन्नाथ रथ यात्रा 2026’ (Jagannath Rath Yatra 2026) का शुभारंभ 16 जुलाई से होने जा रहा है. हिंदू धर्म (Hinduism) में भगवान जगन्नाथ (Lord Jagannath) की रथ यात्रा सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक आयोजनों में गिनी जाती है. इस रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं. इस रथ यात्रा में एक बड़ी ही अनोखी और विशेष परंपरा निभाई जाती है, जो वहां मौजूद हर एक शख्स का ध्यान खींचती है। रथ यात्रा के दौरान गजपति महाराज या उनके राजवंश के उत्तराधिकारी झाड़ू लेकर रथ के मार्ग की सफाई करते हैं. ये झाड़ू बहुत ही खास होती है, जिसमें सोने का हत्था लगा होता है. इसी से रथ मार्ग की सफाई की जाती है. इसके बाद वैदिक मंत्रों और जयघोष के बीच रथ यात्रा का शुभारंभ होता है. आइए जानते हैं कि रथ यात्रा के मार्ग को साफ करने के लिए सोने की झाड़ू का प्रयोग क्यों किया जाता है। 1. जगन्नाथ रथ यात्रा में सोने की झाड़ू से मार्ग की सफाई केवल एक औपचारिक रस्म नहीं, बल्कि गहरी आध्यात्मिक भावना का प्रतीक मानी जाती है. हिंदू परंपरा में सोने को शुद्धता, पवित्रता और दिव्यता का प्रतीक माना गया है. इसलिए भगवान के रथ के मार्ग को सोने के हत्थे वाली झाड़ू से साफ करना उनके स्वागत और सम्मान का विशेष तरीका माना जाता है। 3. यह परंपरा यह संदेश भी देती है कि ईश्वर की दृष्टि में हर व्यक्ति समान है. क्या राजा और क्या प्रजा. गजपति महाराज स्वयं झाड़ू लगाकर यह दर्शाते हैं कि ईश्वर के सामने राजा और सामान्य व्यक्ति में कोई भेद नहीं होता है. यह विनम्रता, सेवा और समर्पण की सर्वोच्च प्रतीक है। 3. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोना सौभाग्य, समृद्धि और शुभता का भी प्रतीक है. इसलिए इस पवित्र अनुष्ठान को सकारात्मक ऊर्जा और मंगलमय वातावरण का माध्यम माना जाता है. श्रद्धालु ऐसा मानते हैं कि इस परंपरा के दर्शन और सहभागिता से भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है. यह परंपरा कई पीढ़ियों से निरंतर निभाई जा रही है और आज भी रथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

मानसून सत्र में परिसीमन बिल पास कराने की तैयारी… इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाले दलों से समर्थन पर बातचीत जारी

नई दिल्ली। मानसून सत्र (Monsoon-Session) में परिसीमन (Delimitation) व महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक (Constitution Amendment-Bill) को पारित कराने के लिए मोदी सरकार (Modi Government) ने अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसके लिए जरूरी दो तिहाई संख्या बल हासिल करने के लिए सरकार ने विपक्षी दलों की तीन श्रेणियां बनाई हैं। हाल ही में इंडिया गठबंधन से नाता तोड़ने वाली द्रमुक के अलावा एनसीपी (एसपी), जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस से विधेयक को प्रत्यक्ष समर्थन करने पर, जबकि दूसरे कई अन्य गैर कांग्रेसी दलों से परोक्ष समर्थन पर बातचीत का दौर जारी है। सूत्रों के अनुसार, विपक्षी दलों की तीन श्रेणियों में पहली श्रेणी ऐसे दलों की है, जो विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे। दूसरी श्रेणी समर्थन की संभावना वाले दलों की है। तीसरी श्रेणी मतदान से दूरी बनाने की संभावना वाले दलों की है। सूत्रों की माने तो प्रत्यक्ष समर्थन के लिए द्रमुक, वाईएसआर कांग्रेस की कुछ मांगों पर विचार किया जा रहा है। इसी श्रेणी में शरद पवार की एनसीपी भी शामिल है। सदन में अगर पुरानी स्थिति रही तो सरकार को दो तिहाई बहुमत के लिए अतिरिक्त 54 तो वर्तमान स्थिति के हिसाब से 60 मतों का जुगाड़ करना होगा। संसद में कैसे सधेगा नंबर गेम?इस बीच तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल होने के बाद सरकार को पुरानी स्थिति में 28 मतों और वर्तमान स्थिति में 36 अतिरिक्त मतों का जुगाड़ करना होगा। अगर द्रमुक के 22, एनसीपी (एसपी) के 8 और वाईएसआर कांग्रेस के 4 सांसदों ने विधेयक का समर्थन किया तो सरकार की परेशानी दूर हो जाएगी। मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के वॉयस ऑफ पीपुल्स, यूपीपीएल और जेडपीएम (4 सांसद) को पहले ही साध लिया है। दूसरी स्थिति के लिए भी रणनीतिद्रमुक, एनसीपी (एसपी) और वाईएसआर कांग्रेस में से एक या दो दल अगर समर्थन के लिए राजी नहीं हुए तो इन्हें मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि तृणमूल के कम से कम दो सांसद इस प्रस्ताव को स्वीकार कर सकते हैं। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल, निर्दलीय सांसदों को भी समर्थन न देने की स्थिति में मतदान से दूर रहने के लिए मनाया जाएगा। फिर सरकार की विपक्षी दलों के उन सांसदों पर भी नजर है जो नेतृत्व से नाराज चल रहे हैं। सत्र के दौरान बनेगी अंतिम रणनीतिसरकार की योजना विपक्षी दलों से लगातार बातचीत जारी रखते हुए सत्र के दौरान अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने की है। सरकार के सूत्रों ने बताया कि विधेयक को अगले महीने के पहले सप्ताह में पेश करने की है। ऐसे में सत्र के दौरान विपक्षी दलों से मंथन का नया दौर शुरू होगा।

कनाड़ा में भीषण गर्मी ने लोग बेहाल…. टोरंटो में तापमान ने तोड़ा 31 साल का रिकॉर्ड

टोरंटो। कनाडा (Canada) के कई हिस्सों में इस समय भीषण गर्मी (Scorching heat) का दौर जारी है, तेज गर्मी और उमस ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. टोरंटो (Toronto) समेत दक्षिणी ओंटारियो (Southern Ontario) के कई शहरों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड (Old Records) तोड़ दिए. टोरंटो के डाउनटाउन इलाके में मंगलवार को तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो जुलाई के इस समय के लिए 31 साल पुराने रिकॉर्ड से भी ज्यादा रहा। एनवायरनमेंट कनाडा के मुताबिक, इससे पहले 14 जुलाई को टोरंटो पियर्सन एयरपोर्ट पर सबसे ज्यादा तापमान 1995 में दर्ज किया गया था, जब पारा 36.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था. इस बार तापमान उस स्तर को पार कर गया. हालांकि, तेज उमस के कारण लोगों को गर्मी 40 से 45 डिग्री सेल्सियस जैसी महसूस हुई। कई प्रांतों में हीट वॉर्निंग जारीभीषण गर्मी के चलते ओंटारियो के ज्यादातर हिस्सों में हीट वॉर्निंग जारी की गई. इसके अलावा मैनिटोबा, सस्केचेवान, अल्बर्टा और नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज के कई इलाकों में भी गर्मी और खराब हवा की गुणवत्ता को लेकर अलर्ट जारी किए गए. मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में बने एक बड़े हाई प्रेशर सिस्टम की वजह से कनाडा के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंचा है. इस सिस्टम ने अमेरिका के ऊपरी मैदानी इलाकों से लेकर ग्रेट लेक्स क्षेत्र और क्यूबेक तक गर्म हवा का प्रभाव बढ़ाया है. हीटवेव के साथ एयर क्वालिटी की चिंतागर्मी के बीच पश्चिमी कनाडा में जंगलों की आग का धुआं भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. थंडर बे के आसपास के क्षेत्रों में जंगलों की आग से उठने वाला धुआं हवा के साथ पहुंच रहा है, जिससे कुछ जगहों पर एयर क्वालिटी खराब दर्ज की गई. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गर्मी और प्रदूषित हवा का एक साथ असर स्वास्थ्य के लिए ज्यादा खतरनाक हो सकता है. खासतौर पर बुजुर्गों, बच्चों और सांस संबंधी समस्याओं वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है. नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज के डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि वे नियमित रूप से एयर क्वालिटी इंडेक्स चेक करें. धुएं वाले दिनों में N95 मास्क पहनने की सलाह दी गई है, क्योंकि यह हवा में मौजूद बारीक कणों को रोकने में ज्यादा प्रभावी होता है. क्यूबेक में तूफान और टॉरनेडो का अलर्टजहां एक ओर देश का बड़ा हिस्सा गर्मी से जूझ रहा है, वहीं पूर्वी कनाडा में मौसम का अलग रूप देखने को मिला. क्यूबेक और न्यू ब्रंसविक में तेज तूफान की चेतावनी जारी की गई. मॉन्ट्रियल से क्यूबेक सिटी के बीच के इलाकों में कुछ समय के लिए टॉरनेडो वॉच भी जारी की गई थी. कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक सुविधाएं शुरूगर्मी से राहत देने के लिए ओटावा समेत कई शहरों ने कूलिंग सेंटर और सार्वजनिक पूल खोल दिए हैं. कुछ व्यवसायों ने भी कर्मचारियों की सुरक्षा को देखते हुए अस्थायी रूप से काम बंद करने का फैसला किया है. मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी कई इलाकों में गर्मी और उमस का असर बना रह सकता है. लोगों को मौसम के अलर्ट पर नजर रखने और तेज गर्मी के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।