आईपीमैट देश की सबसे कठिन मैनेजमेंट प्रवेश परीक्षाओं में गिनी जाती है। इस वर्ष करीब 28 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनमें से लगभग 830 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए चुना गया और अंततः केवल 150 विद्यार्थियों का चयन हुआ। चयनित छात्रों में इंदौर के आरव माले के अलावा अथर्व हार्डिया (एआईआर-8), अकमल बंगलोवाला (एआईआर-33), देवांश अग्रवाल (एआईआर-42), दिव्य लुणावत (एआईआर-51) सहित कुल छह छात्रों ने सफलता हासिल की।
ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त करने वाले आरव माले ने अपनी सफलता का श्रेय समयबद्ध तैयारी और लगातार अभ्यास को दिया। उन्होंने 11वीं कक्षा से ही आईपीमैट की तैयारी शुरू कर दी थी। बोर्ड परीक्षाओं के बाद उन्होंने रोजाना कई घंटे पढ़ाई की और 40 से अधिक मॉक टेस्ट देकर अपनी रणनीति को मजबूत बनाया। इंटरव्यू में बिजनेस स्टडीज और गणित से जुड़े सवाल पूछे गए, जिनका उन्होंने आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया। यही निरंतर अभ्यास उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह बना।
अथर्व हार्डिया ने भी बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी साथ-साथ की। उनका कहना है कि नियमित अभ्यास और मॉक इंटरव्यू ने आत्मविश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं अकमल बंगलोवाला पिछले दो वर्षों से आईपीमैट की तैयारी कर रहे थे। उनका लक्ष्य भविष्य में अपना खुद का व्यवसाय स्थापित करना है। देवांश अग्रवाल ने बुनियादी अवधारणाओं को मजबूत करने के साथ कई मॉक टेस्ट दिए और अब वे वित्तीय परामर्श के क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं।
दिव्य लुणावत ने भी लगातार दो वर्षों तक योजनाबद्ध तैयारी की। पढ़ाई के साथ उन्होंने समसामयिक घटनाओं पर विशेष ध्यान दिया और नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़कर सामान्य ज्ञान मजबूत किया। इंटरव्यू में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों से जुड़े सवालों का उन्होंने प्रभावी ढंग से जवाब दिया।
आईपीमैट विशेषज्ञ अजय बंसल और मन गोयल का कहना है कि अब इस परीक्षा में केवल कॉमर्स पृष्ठभूमि के छात्र ही नहीं, बल्कि साइंस और इंजीनियरिंग की तैयारी करने वाले विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। आईआईएम से सीधे पांच वर्षीय मैनेजमेंट प्रोग्राम में प्रवेश का अवसर युवाओं को आकर्षित कर रहा है। उनका मानना है कि जो छात्र 11वीं कक्षा से ही व्यवस्थित तैयारी शुरू करते हैं, नियमित मॉक टेस्ट देते हैं और इंटरव्यू की तैयारी पर बराबर ध्यान देते हैं, उनके चयन की संभावना काफी अधिक रहती है।
इंदौर के इन विद्यार्थियों की सफलता यह साबित करती है कि सही रणनीति, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के दम पर राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया जा सकता है। इन छात्रों की उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।