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जानें सुबह की सैर का सही तरीका, जो बीपी और शुगर दोनों को नियंत्रित रखे


नई दिल्ली: आज के समय में लगभग हर घर में हाई बीपी और शुगर के मरीज मिल जाते हैं। आयुर्वेद और विज्ञान दोनों ही सुबह की सैर को स्वास्थ्य का संजीवनी मानते हैं। नियमित सुबह की सैर इन रोगों को नियंत्रित रखने में दवा की तरह काम करती है।

कैसे होती है फायदा?
सुबह के वक्त शरीर ‘बायोकेमिकल’ प्रक्रिया से गुजरता है। ठंडी हवा में निकलने से शरीर प्राकृतिक इंसुलिन का निर्माण करता है। तेज़ कदमों से सैर करने पर मांसपेशियां रक्त में मौजूद ग्लूकोज को ऊर्जा में बदल देती हैं। यह प्रक्रिया शुगर नियंत्रण में दवा की तरह काम करती है।

सैर करने से धमनियों में रक्त का प्रवाह बढ़ता है और ‘नाइट्रिक ऑक्साइड’ बढ़ता है, जिससे हाई बीपी प्रभावित नहीं होता। शोध से पता चला है कि लगातार 3 महीने तक रोज़ाना 30 मिनट की सुबह की सैर शुगर लेवल कम कर सकती है।

सैर के अन्य लाभ:

गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और रक्त धमनियों पर दबाव कम होता है।

दिल की सेहत बेहतर होती है और हार्ट अटैक का खतरा घटता है।

रक्त संचार बेहतर होने से पूरे शरीर में ऊर्जा बढ़ती है।

सैर का सही तरीका:

सैर ब्रह्म मुहूर्त में करें, जब वायुमंडल में ऑक्सीजन भरपूर हो।

तेज़-तेज़ और लंबे कदमों से चलें, लेकिन हांफे नहीं।

शुरुआत में 30 मिनट से करें, धीरे-धीरे समय और रफ्तार बढ़ाएं।

रोजाना कम से कम 1 घंटे की सैर को लक्ष्य बनाएं।

सुबह की नियमित सैर न केवल बीपी और शुगर, बल्कि हृदय और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इसे जीवनशैली में शामिल करना दीर्घकालिक स्वास्थ्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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