– प्रद्युम्न शर्मामध्य प्रदेश में इस साल मनाए जा रहे किसान कल्याण वर्ष की पहली कृषि कैबिनेट जनजातीय बहुल जिले बड़वानी में होना और उसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में अनेक किसानों के हित में निर्णय लेने की दिशा में आगे बढ़ना आज बता रहा है कि राज्य विकास के धरातल पर अपनी किन प्राथमिकताओं को लेकर चल रहा है। इस दृष्टि से मध्य प्रदेश सरकार का वर्ष 2026-27 का बजट राज्य के विकास मॉडल को नए ढंग से परिभाषित करता नजर आता है।
कहना होगा कि हाल ही में सामने आए मप्र के बजट में जहां एक ओर दीर्घकालीन योजनाओं के लिए वित्तीय प्रबंधन की रणनीति दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने का स्पष्ट प्रयास भी झलकता है। “समावेशी बजट, सशक्त नागरिक” के नारे के साथ पेश किए गए इस बजट की थीम “तेरा तुझको अर्पण” रखी गई है, जो यह संकेत देती है कि विकास का लाभ सीधे जनता तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीण रोजगार और अर्थव्यवस्था पर विशेष फोकस
बजट का सबसे बड़ा फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन पर दिखाई देता है। इसी दिशा में भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए “विकसित भारत – रोजगार की गारंटी और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” के लिए 10,428 करोड़ रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की गई है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभा सकती है। राज्य सरकार का मानना है कि इस मिशन के माध्यम से ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और पलायन की समस्या में भी कमी आएगी।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास को मिला बड़ा बजट
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को इस बजट में विशेष प्राथमिकता दी गई है। वर्ष 2026-27 में इस विभाग के लिए कुल 40,103 करोड़ रुपये का व्यय अनुमानित किया गया है। यह राशि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, सामाजिक योजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए उपयोग की जाएगी। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार विभाग को अधिक बजट आवंटित किया गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार ग्रामीण विकास को अपने एजेंडे के केंद्र में रख रही है।
ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करने की पहल
ग्रामीण सड़कों के निर्माण और उन्नयन के लिए 2,968 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क संपर्क बेहतर होने से कृषि उत्पादों के बाजार तक पहुंच आसान होगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सड़कों के नवीनीकरण और उन्नयन के लिए 1,285 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे पहले से बनी सड़कों की गुणवत्ता में सुधार होगा और परिवहन व्यवस्था अधिक सुगम बनेगी।
तीन वर्षीय रोलिंग बजट की नई व्यवस्था
इस बजट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक तीन वर्षीय रोलिंग बजट व्यवस्था है। इस प्रणाली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विकास योजनाएं केवल एक वर्ष की सीमा में न सिमटें, बल्कि उन्हें दीर्घकालीन लक्ष्य और वित्तीय स्थिरता के साथ लागू किया जा सके। इस तरह की व्यवस्था से सरकार को बड़े विकासात्मक प्रोजेक्ट्स के लिए बेहतर योजना बनाने और संसाधनों का संतुलित उपयोग करने में मदद मिलेगी।
बहुआयामी गरीबी सूचकांक आधारित बजटिंग का प्रयोग
इस बजट की एक और विशेषता यह है कि इसमें मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स आधारित बजटिंग को संस्थागत रूप देने का प्रयास किया गया है। यह अपनी तरह का पहला प्रयास माना जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि विकास योजनाओं का लाभ उन क्षेत्रों तक प्राथमिकता से पहुंचे जो पहले से ही अभावग्रस्त और पिछड़े के रूप में चिन्हित किए गए हैं। इस व्यवस्था से सरकारी खर्च को परिणाम आधारित बनाया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि संसाधनों का उपयोग वास्तव में गरीबी कम करने और जीवन स्तर सुधारने में हो।
खनिज राजस्व से स्थानीय विकास को बल
खनिज संपदा से मिलने वाले राजस्व का भी स्थानीय विकास में उपयोग सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है। जिला खनिज निधि के लिए 1,400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि गौण खनिज राजस्व से पंचायतों को 934 करोड़ रुपये अंतरित किए जाएंगे। इससे खनन प्रभावित क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं और सामाजिक विकास योजनाओं को मजबूती मिल सकेगी।
पोषण और कनेक्टिविटी योजनाओं को प्राथमिकता
पोषण और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं को भी बजट में पर्याप्त प्राथमिकता दी गई है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के लिए 1,100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं, जिसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करना और विद्यालयों में पोषण स्तर सुधारना है। इसके अलावा मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना के लिए 793 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे छोटे-छोटे गांवों और बस्तियों को मुख्य सड़कों से जोड़ा जा सकेगा।
प्रमुख योजनाओं के लिए बढ़ा बजट प्रावधान
सरकार ने कई महत्वपूर्ण योजनाओं के लिए भी पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में अधिक राशि स्वीकृत की है। इनमें ग्राम स्वराज अभियान, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना, यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना, क्षतिग्रस्त पुलों का पुनर्निर्माण, मुख्यमंत्री मजरा टोला सड़क योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, रेडी टू ईट टेक होम राशन, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मुख्यमंत्री आवास मिशन, वाटरशेड विकास और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी योजनाएं शामिल हैं।
ग्रामीण जीवन स्तर सुधारने की दिशा में प्रयास
इन योजनाओं का सीधा संबंध ग्रामीण जीवन स्तर को बेहतर बनाने से है। उदाहरण के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और मुख्यमंत्री आवास मिशन के माध्यम से गरीब परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। वहीं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को मजबूत कर महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
समावेशी विकास की व्यापक रणनीति
अत: कहना होगा कि मध्य प्रदेश का यह बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेजीकण न होकर विकास की एक व्यापक रणनीति का संकेत देता है। इसमें ग्रामीण बुनियादी ढांचे, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और गरीबी उन्मूलन को एक साथ जोड़कर विकास की समावेशी अवधारणा को आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो यह बजट राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
राज्य सरकार के इस बजट से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि आने वाले वर्षों में राज्य का विकास मॉडल ग्रामीण सशक्तिकरण, रोजगार सृजन और सामाजिक समावेशन के आधार पर आगे बढ़ने वाला है। यही वजह है कि इसे राज्य के आर्थिक भविष्य की दिशा तय करने वाला बजट भी माना जा रहा है। वहीं समझनेवाली बात यह भी है कि इस दिशा में प्रभावी कदम किसान कल्याण वर्ष की पहली कृषि कैबिनेट जनजातीय बहुल जिले बड़वानी में कर डॉ. मोहन सरकार की ओर से अब ये संकेत भी दे दिया गया है कि उसकी प्राथमिकताएं क्या हैं!
(लेखक राज्य प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी एवं स्तम्भकार हैं)