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शनि देव को प्रसन्न करने का आसान उपाय: शनिवार का व्रत और पूजा विधि पूरी जानकारी


नई दिल्ली।क्या आप भी शनिवार का व्रत रखने का सोच रहे हैं? तो जानिए कब और कैसे शुरू करें
शनि देव को प्रसन्न करने के लिए रखना चाहिए शनिवार का व्रत, जानिए कब रखना चाहिए ये व्रत और कैसे करें शुरू इससे जुड़ी सारी जानकारी।

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए आज के दिन लोग उनकी पूजा अर्चन करते है। कई लोग आज के दिन व्रत भी रखते हैं ताकि उनकी कृपा पा सकें। अगर आप भी शनिवार का व्रत रखना चाहते हैं और ये समस्या आ रही हैं कि, इसकी शुरूआत कैसे करें। तो चलिए इस व्रत से जुड़ी सारी जानकारी आपको बताते हैं।

कब से शुरू करें व्रत
शनिवार का व्रत किसी भी शनिवार से शुरू किया जा सकता है, लेकिन शुक्ल पक्ष के पहले शनिवार से आरंभ करना अधिक शुभ माना जाता है। व्रत शुरू करने से पहले मन में संकल्प लेना चाहिए कि आप कितने शनिवार तक व्रत रखेंगे आमतौर पर 11, 21 या 51 शनिवार का व्रत रखा जाता है।

व्रत के दिन की पूजा विधि
व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे काले या नीले रंग के वस्त्र पहनें। इसके बाद शनि देव की पूजा करें। पूजा के दौरान शनि देव की प्रतिमा या चित्र के सामने सरसों का तेल चढ़ाएं, काले तिल अर्पित करें और दीपक जलाएं। इसके साथ ही “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना बेहद फलदायी माना जाता है।शनिवार के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का भी विशेष महत्व है। पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करने से शनि देव की कृपा प्राप्त होती है।

व्रत का महत्त्व
शनिवार का व्रत नियमित रूप से करने से जीवन में आ रही बाधाएं दूर होती हैं, आर्थिक स्थिति में सुधार होता है और मानसिक शांति मिलती है। शनि देव की कृपा से व्यक्ति को न्याय, सफलता और स्थिरता प्राप्त होती है। इसलिए श्रद्धा और नियम से यह व्रत करने से अच्छे फल मिलते हैं।

शनि देव की आरती
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

जय जय श्री शनिदेव…॥

श्याम अंग वक्र दृष्टि चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

जय जय श्री शनिदेव…॥

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है ललाट।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहाट॥

जय जय श्री शनिदेव…॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

जय जय श्री शनिदेव…॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥

जय जय श्री शनिदेव…॥

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