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कर्नाटक में रोहित वेमुला विधेयक को मंजूरी, जातिगत भेदभाव पर छात्रों को मुआवजा और सजा का प्रावधान

बंगलूरू। कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को कैबिनेट बैठक में ‘कर्नाटक रोहित वेमुला (बहिष्कार या अन्याय की रोकथाम) (शिक्षा का अधिकार और गरिमा) विधेयक’ को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही राज्य सरकार ने बंगलूरू में कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और प्रशासनिक प्रस्तावों को भी हरी झंडी दी। यह जानकारी कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने दी।

मंत्री ने बताया कि इस विधेयक को पहले स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अब इसे कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है। प्रस्तावित कानून के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव का शिकार होने वाले छात्रों को अधिकतम एक लाख रुपये तक मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है। वहीं दोषी पाए जाने पर एक साल तक की सजा और 10 हजार रुपये तक जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।

इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले साल अप्रैल में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर ‘रोहित वेमुला अधिनियम’ लागू करने की मांग की थी, ताकि शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव पर रोक लगाई जा सके। रोहित वेमुला एक दलित छात्र थे, जिनकी 2016 में हैदराबाद में कथित भेदभाव के चलते आत्महत्या से मौत हो गई थी।

कैबिनेट बैठक में बंगलूरू के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए भी कई अहम फैसले लिए गए। इनमें आईओसी जंक्शन पर एलिवेटेड फ्लाईओवर और बयप्पनहल्ली रेलवे क्रॉसिंग पर दो-लेन रेल ओवरब्रिज के निर्माण को मंजूरी शामिल है। इन परियोजनाओं के लिए करीब 436.44 करोड़ रुपये की लागत तय की गई है और प्रशासनिक स्वीकृति भी प्रदान कर दी गई है।

इसके अलावा, सरकार ने 13,262 करोड़ रुपये की लागत से 11 एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं को भी मंजूरी दी है। ये कॉरिडोर करीब 75.6 किलोमीटर लंबे होंगे और इन्हें ग्रेटर बंगलूरू प्राधिकरण के तहत विकसित किया जाएगा। साथ ही सरकार ने 2023 की इंटरमीडिएट रिंग रोड योजना को रद्द करते हुए 2007 की योजना को मामूली संशोधनों के साथ लागू करने का निर्णय लिया है।

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