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जबलपुर में बुलडोजर एक्शन पर ब्रेक हाईकोर्ट ने कलेक्टर और निगम कमिश्नर को नोटिस भेजा


जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में मदन महल पहाड़ी से विस्थापित किए जा रहे लोगों के पुनर्वास को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप करते हुए अंतरिम रोक लगा दी है इस फैसले के बाद प्रशासनिक कार्रवाई पर फिलहाल विराम लग गया है और पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है कोर्ट ने इस संबंध में जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि जिन स्थानों पर विस्थापितों को बसाया जा रहा है वहां मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से यह दलील दी गई कि प्रस्तावित पुनर्वास स्थल पर रहने के लिए आवश्यक सुविधाओं का अभाव है जिससे विस्थापितों को गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है

इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई संजीव सचदेवा और विनय सराफ की खंडपीठ में हुई जहां अदालत ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए संतोषजनक जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 अप्रैल को निर्धारित की गई है जिस पर सभी पक्षों की नजरें टिकी हुई हैं

दरअसल मदन महल पहाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई थी जिसे हटाने के लिए प्रशासन ने बड़े स्तर पर अभियान चलाया था यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत की जा रही है जिसका उद्देश्य पहाड़ी के प्राकृतिक स्वरूप को संरक्षित करना और अवैध कब्जों को हटाना है

जानकारी के अनुसार 7 मार्च 2026 से इस अभियान को दोबारा शुरू किया गया और प्रशासन ने पुरवा क्षेत्र में ICMR के सामने स्थित करीब 700 अवैध कब्जों को हटाने के लिए बुलडोजर कार्रवाई की इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों को हटाकर जबलपुर के तेवर क्षेत्र में पुनर्वासित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी

हालांकि विस्थापितों ने पुनर्वास स्थल की स्थिति को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं उनका कहना है कि वहां न तो पर्याप्त पानी की व्यवस्था है और न ही अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं ऐसे में बिना समुचित व्यवस्था के उन्हें वहां बसाना उनके जीवन स्तर को और अधिक कठिन बना सकता है

हाईकोर्ट का यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि विकास और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के साथ साथ मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता अदालत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पुनर्वास केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि उसमें विस्थापितों के सम्मानजनक जीवन के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए

फिलहाल प्रशासन इस मामले में अपना पक्ष तैयार करने में जुटा हुआ है और कोर्ट के निर्देशों के अनुसार आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने की तैयारी कर रहा है वहीं प्रभावित लोगों को भी उम्मीद है कि अदालत उनके हितों की रक्षा करेगी और उन्हें उचित सुविधाओं के साथ सुरक्षित पुनर्वास मिलेगा आने वाली सुनवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है

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