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‘हर युग में हुआ विरोध’: हर्षा बोलीं-मेरा मार्ग राम ने तय किया, विवाद पर दिया जवाब


नई दिल्ली । उज्जैन में संन्यास को लेकर छिड़े विवाद के बीच Swami Harshanand Giri ने एक वीडियो जारी कर संत समाज के आरोपों का जवाब दिया है। उन्होंने साफ कहा कि उनका संन्यास कोई आवेश में लिया गया फैसला नहीं, बल्कि आस्था और कर्म का मार्ग है-और अगर भगवान राम ने उनके जीवन में यह लिखा है, तो इसे कोई रोक नहीं सकता।

‘डेढ़ साल से सह रही हूं अपमान, अब हो गई मजबूत’

वीडियो में Swami Harshanand Giri ने कहा कि वे पिछले डेढ़ साल से लगातार आलोचना और अपमान झेल रही हैं, लेकिन इस दौरान उन्होंने खुद को मानसिक रूप से मजबूत किया है। उन्होंने इसे अपनी “अग्नि परीक्षा” बताते हुए कहा कि अब वे किसी भी तरह के विरोध का सामना करने के लिए तैयार हैं। गौरतलब है कि महाकुंभ 2024 के दौरान चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया ने हाल ही में संन्यास ग्रहण किया और अब वे स्वामी हर्षानंद गिरि के नाम से जानी जाती हैं। उज्जैन के मौनी तीर्थ आश्रम में Mahant Sumananand Ji Maharaj ने उन्हें दीक्षा दी थी। हालांकि, उनके इस कदम पर Anilanand Maharaj सहित कुछ संतों ने आपत्ति जताई है।

मीरा, बुद्ध और सीता का उदाहरण देकर जवाब

अपने बयान में उन्होंने इतिहास और धर्मग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि जब-जब किसी ने सत्य और धर्म का मार्ग चुना, उसे विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने Meera Bai, Gautama Buddha, Jesus Christ, भगवान राम और सीता का उदाहरण देते हुए कहा कि हर युग में सच्चाई के रास्ते पर चलने वालों की परीक्षा ली जाती रही है और महिलाओं को अक्सर ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ती है।

‘परिवर्तन कभी भी संभव, वाल्मीकि इसका उदाहरण’

संन्यास की उम्र और परंपरा पर उठे सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में परिवर्तन का सिद्धांत हमेशा से रहा है। उन्होंने Valmiki का उदाहरण देते हुए कहा कि जीवन में किसी भी समय बदलाव संभव है। अगर ऐसा नहीं होता, तो ऐसे उदाहरण धर्मग्रंथों में क्यों मिलते?

‘प्रचार के लिए मुझे बनाया गया निशाना’

Swami Harshanand Giri ने आरोप लगाया कि कुछ लोग सिर्फ प्रसिद्धि पाने के लिए उन्हें निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि “आपको वायरल होने के लिए एक मुद्दा चाहिए था, और आपने मुझे चुन लिया। साथ ही उन्होंने संतों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर भी आपत्ति जताई और कहा कि एक महिला के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग संत परंपरा के खिलाफ है।

युवाओं को धर्म से जोड़ने की अपील

वीडियो के अंत में उन्होंने संत समाज से अपील की कि वे विवाद बढ़ाने के बजाय युवाओं को धर्म से जोड़ने का प्रयास करें। उनका कहना था कि इस तरह के विवाद युवाओं को आस्था से दूर कर सकते हैं।

उन्होंने अपनी बात “होइहि सोइ जो राम रचि राखा” के साथ खत्म करते हुए कहा कि उनका मार्ग ईश्वर ने तय किया है और उन्हें किसी की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है।

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