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16 साल की लड़ाई के बाद न्याय: National Investigation Agency केस में आरोपी बने राजेंद्र चौधरी बरी, पहली बार में पास की थी PSC परीक्षा


नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के Depalpur निवासी राजेंद्र चौधरी की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं, लेकिन यह हकीकत है-दर्द, संघर्ष और आखिरकार न्याय की जीत की कहानी। 16 साल तक आतंकवाद के गंभीर मामलों में आरोपी रहे राजेंद्र को अदालत ने सभी आरोपों से बरी कर दिया। बुधवार को आए फैसले के बाद उन्होंने कहा, “मेरा सपना अधिकारी बनकर समाज सेवा करना था, लेकिन मुझे आरोपी बना दिया गया।”
पहले ही प्रयास में PSC क्लियर, फिर बदली जिंदगी की दिशा
राजेंद्र चौधरी ने बीकॉम की पढ़ाई के बाद MPPSC की प्रारंभिक परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली थी। वे प्रशासनिक सेवा में जाकर समाज के लिए काम करना चाहते थे। लेकिन दिसंबर 2012 की एक रात ने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल दिया।
रामायण पाठ के दौरान गिरफ्तारी, NIA ने घेरा
राजेंद्र के मुताबिक, 15 दिसंबर 2012 को वे गांव में रामायण का पाठ कर रहे थे, तभी National Investigation Agency (NIA) की टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेरकर गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर हरियाणा ले जाया गया और पंचकूला की विशेष अदालत में पेश किया गया। उन पर Mecca Masjid Blast, Samjhauta Express Blast और मालेगांव ब्लास्ट जैसे मामलों में शामिल होने के आरोप लगाए गए।
कस्टडी में टॉर्चर के आरोप, ‘अंधेरी कोठरी में रखा गया’
राजेंद्र ने दावा किया कि गिरफ्तारी के बाद उन्हें कस्टडी में मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उन्हें अंधेरी कोठरी में अकेले रखा जाता था, घंटों तक एक ही स्थिति में बैठने या खड़े रहने को मजबूर किया जाता था।
उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें सोने नहीं दिया जाता था, मारपीट की जाती थी और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया जाता था। यहां तक कि बिजली के झटके देने जैसी यातनाएं भी दी गईं।
फरारी, जेल और अदालत-संघर्ष के 16 साल
राजेंद्र के परिचितों के अनुसार, गिरफ्तारी से पहले वे करीब दो साल जम्मू-कश्मीर में फरारी काट चुके थे। इससे पहले उज्जैन के एक हत्याकांड में भी उन्हें आरोपी बनाया गया था, जिसमें वे 2014 में बरी हो गए थे। इन वर्षों में उन्हें अलग-अलग जेलों में रखा गया और कई मामलों में सुनवाई चली। इस दौरान उनका करियर, सामाजिक जीवन और परिवार सब प्रभावित हुआ।
अदालत से बरी, न्याय व्यवस्था पर जताया भरोसा
हाल ही में अदालत ने उन्हें सभी मामलों में बरी कर दिया। फैसले के बाद राजेंद्र ने कहा, “हमें शुरू से ही भारतीय न्याय व्यवस्था पर भरोसा था। आज उसी विश्वास की जीत हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि इतने सालों का नुकसान कोई वापस नहीं कर सकता, लेकिन न्याय मिलने से सुकून जरूर मिला है।
अब आगे क्या? राजनीति में एंट्री के संकेत
राजेंद्र चौधरी से जब पूछा गया कि क्या वे अब राजनीति में कदम रखेंगे, तो उन्होंने कहा कि यह फैसला समाज और उनके समर्थकों की राय पर निर्भर करेगा। फिलहाल उन्हें किसी राजनीतिक दल से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है, लेकिन वे भविष्य के लिए विकल्प खुले रखे हुए हैं।
सवालों के घेरे में जांच एजेंसियां
यह मामला एक बार फिर जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। 16 साल तक गंभीर आरोपों में फंसे रहने के बाद बरी होना इस बात की ओर इशारा करता है कि जांच और साक्ष्यों की प्रक्रिया में कहीं न कहीं खामियां रही होंगी।

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