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ऑफिस मार्केट में तेजी का नया दौर, भारत में लीजिंग गतिविधियों ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

नई दिल्ली। भारत का कमर्शियल रियल एस्टेट सेक्टर 2026 की पहली तिमाही में एक मजबूत और रिकॉर्ड-तोड़ प्रदर्शन के साथ सामने आया है। देशभर में ऑफिस स्पेस की मांग लगातार बढ़ती हुई दिखाई दी और यह आंकड़ा 21.5 मिलियन स्क्वायर फीट तक पहुंच गया, जो अब तक के हालिया वर्षों में सबसे ऊंचे स्तरों में से एक माना जा रहा है।

इस तेज वृद्धि के पीछे मुख्य कारण ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटर्स की बढ़ती भागीदारी रही है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत को केवल सपोर्ट सेंटर के तौर पर नहीं देख रही हैं, बल्कि इसे अपने इनोवेशन, रिसर्च और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट का महत्वपूर्ण केंद्र बना रही हैं।

ऑफिस लीजिंग में हुई इस बढ़ोतरी से यह साफ संकेत मिलता है कि भारत वैश्विक कंपनियों के लिए एक पसंदीदा निवेश और ऑपरेशन डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। जीसीसी की भूमिका इस बदलाव में सबसे अहम रही है, जिन्होंने अपने विस्तार को तेज गति से आगे बढ़ाया है और कुल लीजिंग गतिविधियों में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की है।

इन सेंटर्स में अब पारंपरिक बैक-ऑफिस कार्यों से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, प्रोडक्ट डिजाइन और इंजीनियरिंग जैसे हाई-वैल्यू काम किए जा रहे हैं। इससे भारत के टैलेंट मार्केट को भी बड़ा फायदा मिल रहा है।

इसके साथ ही फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की मांग भी तेजी से बढ़ी है। कंपनियां अब हाइब्रिड और रिमोट वर्क मॉडल को ध्यान में रखते हुए अधिक लचीले ऑफिस स्पेस की ओर बढ़ रही हैं, जिससे इस सेगमेंट में भी अच्छी ग्रोथ देखने को मिली है।

देश के प्रमुख शहरों में इस वृद्धि का असर साफ दिखाई दिया है। बेंगलुरु ने ऑफिस लीजिंग में सबसे आगे रहकर अपनी स्थिति मजबूत की है, जबकि मुंबई और हैदराबाद ने भी अच्छा प्रदर्शन किया है। पुणे और दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरों ने भी स्थिर और मजबूत योगदान दिया है।

बेंगलुरु में जीसीसी की हिस्सेदारी विशेष रूप से काफी अधिक रही, जिससे यह शहर टेक्नोलॉजी और ग्लोबल इनोवेशन के सबसे बड़े केंद्रों में से एक बनता जा रहा है।

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