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पार्षद को धमकी मामला: 7 साल पुराने भुगतान विवाद में बंडा नगर परिषद में हंगामा, FIR दर्ज


नई दिल्ली। सागर जिले के बंडा नगर परिषद में वार्ड क्रमांक-2 के पार्षद प्रभुदयाल राठौर और नगर परिषद प्रशासन के बीच पुराना भुगतान विवाद अब गंभीर कानूनी और आपराधिक मोड़ पर पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि पार्षद का एक टेंडर कार्य का भुगतान पिछले लगभग 7 वर्षों से लंबित था। इसी भुगतान को लेकर उन्होंने हाल ही में नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) को लीगल नोटिस भेजा था।

घटना 2 अप्रैल की दोपहर करीब 12:30 बजे की है, जब पार्षद नगर परिषद कार्यालय पहुंचे और उपयंत्री कक्ष में नाली निर्माण कार्य की जानकारी लेने के बाद CMO कक्ष में जाकर नोटिस सौंपा।

 नोटिस पढ़ते ही बढ़ा विवाद, गाली-गलौज और हाथापाई के आरोप

पार्षद प्रभुदयाल राठौर के अनुसार, जैसे ही CMO ने लीगल नोटिस पढ़ा, वे कथित रूप से आवेश में आ गए। उन्होंने नोटिस पर टिप्पणी लिखकर पार्षद के सामने रख दिया और तेज आवाज में बहस करने लगे।

स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब पार्षद ने मोबाइल से पूरे घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग शुरू की। आरोप है कि इसके बाद CMO ने चैंबर से बाहर आकर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और हाथापाई की। इस धक्का-मुक्की में पार्षद का मोबाइल भी जमीन पर गिर गया। इस पूरे घटनाक्रम ने नगर परिषद कार्यालय के माहौल को तनावपूर्ण बना दिया।

थाने से लौटने के बाद फिर बढ़ा विवाद, दी गई जान से मारने की धमकी

घटना यहीं नहीं रुकी। शिकायत के अनुसार, उसी दिन दोपहर करीब 3:30 बजे CMO थाने से लौटकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचे। उनके साथ कुछ अन्य लोग भी मौजूद थे।

आरोप है कि इसी दौरान उनके साथ आए एक व्यक्ति, जिसने खुद को CMO का रिश्तेदार बताया, ने पार्षद के साथ गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इससे पूरे मामले ने गंभीर रूप ले लिया।

एक महीने बाद पुलिस ने दर्ज की FIR, जांच शुरू

घटना की शिकायत बंडा थाने में पार्षद द्वारा दर्ज कराई गई थी। पुलिस ने मामले की जांच लगभग एक महीने तक की और साक्ष्यों के आधार पर अब कार्रवाई करते हुए आरोपी अजितराज उर्फ राजा मसीह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 296(बी) और 351(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने बताया कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं।

 प्रशासनिक कामकाज पर उठे सवाल, माहौल तनावपूर्ण

इस घटना के बाद नगर परिषद बंडा में प्रशासनिक कार्यशैली और भुगतान लंबित मामलों को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। वहीं राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर इस विवाद ने माहौल को और गर्म कर दिया है। पुलिस जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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