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जालंधर ब्लास्ट की जांच में नया मोड़, दूर से मोबाइल सिग्नल से ट्रिगर किया गया IED हमला

नई दिल्ली ।  जालंधर में बीएसएफ मुख्यालय के बाहर हुए धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले में अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क से जुड़े नए और गंभीर खुलासे सामने आ रहे हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिला है कि इस विस्फोट के पीछे पाकिस्तान में बैठे एक आतंकी हैंडलर का हाथ हो सकता है, जिसने मोबाइल सिम आधारित आधुनिक तकनीक के जरिए इस घटना को अंजाम देने की योजना बनाई। इस पूरे मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता को और बढ़ा दिया है, क्योंकि यह हमला पारंपरिक तरीकों से हटकर अत्याधुनिक रिमोट ट्रिगरिंग सिस्टम के इस्तेमाल की ओर इशारा करता है।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, विस्फोटक उपकरण को पहले से ही घटनास्थल के पास प्लांट किया गया था और उसमें एक सिम कार्ड को विशेष डिवाइस के साथ जोड़ा गया था। इसके बाद यह सिम नंबर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर को भेजा गया, जिसने कॉल या मैसेज के जरिए डिवाइस को सक्रिय किया। जैसे ही उस सिग्नल को सिस्टम ने रिसीव किया, एक इलेक्ट्रॉनिक रिले सर्किट सक्रिय हुआ और डेटोनेटर के जरिए विस्फोट हो गया। इस पूरी प्रक्रिया में किसी व्यक्ति की मौके पर मौजूदगी या किसी तार से कनेक्शन की आवश्यकता नहीं होती, जिससे इस तकनीक को बेहद खतरनाक माना जा रहा है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक आतंकवाद के नए डिजिटल स्वरूप को दर्शाती है, जिसमें साधारण मोबाइल नेटवर्क का उपयोग विस्फोटक को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है। इसमें जीएसएम मॉड्यूल, सिम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट का उपयोग कर हजारों किलोमीटर दूर बैठे व्यक्ति द्वारा भी विस्फोट को ट्रिगर किया जा सकता है। यह तरीका न केवल आसान है बल्कि इसे ट्रेस करना भी पारंपरिक तरीकों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होता है।

इस घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी है और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल नेटवर्क डेटा और कॉल रिकॉर्ड्स की गहन जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोटक सामग्री को मौके तक कैसे पहुंचाया गया और इसमें किन स्थानीय सहयोगियों की भूमिका रही।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस तरह की घटनाएं सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकी नेटवर्क की बदलती रणनीति को दर्शाती हैं, जहां अब तकनीक का इस्तेमाल हथियार के रूप में किया जा रहा है। यह हमला न केवल सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि आने वाले समय में आतंकवाद तकनीकी रूप से और अधिक उन्नत रूप ले सकता है।

फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में लगी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस हमले के पीछे और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

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