HIGHLIGHTS:
- सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को लगाई फटकार
- बिना नंबर वाहनों से हो रहा अवैध रेत परिवहन
- 6 महीने में CCTV लगाने के निर्देश
- अवैध खनन को बताया ऑर्गनाइज़्ड क्राइम
- NH-44 पुल और चंबल नदी पर निगरानी
SUPREME COURT ACTION: मुरैना। सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में हो रहे अवैध रेत खनन को लेकर मध्यप्रदेश सरकार को जमकर फटकार लगाई है। बता दें कि कोर्ट का कहना है कि बिना नंबर प्लेट और बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहन अभी भी खुलेआम रेत का परिवहन कर रहे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। मामले को लेकर कोर्ट ने 6 महीने के भीतर निगरानी बढ़ाने और हाई-रेजोल्यूशन CCTV कैमरे लगाने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि अवैध खनन अब केवल कानून उल्लंघन का मामला नहीं रहा, बल्कि यह संगठित अपराध यानि ऑर्गनाइज़्ड क्राइम का रूप ले चुका है। साथ ही कोर्ट ने टिप्पणी की है कि कई मामलों में कार्रवाई तभी शुरू हुई जब वरिष्ठ अधिकारियों की पेशी तय हुई। कोर्ट ने साफ कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कोर्ट के दबाव में होने वाली औपचारिकता नहीं हो सकती, यह राज्यों की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
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कोर्ट -जुर्माना लेकर वाहन न छोड़े
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस साल के शुरुआती पांच महीनों में करीब 250 से ज्यादा अवैध रजिस्ट्रेशन वाले वाहन पकड़े गए। लेकिन उन्हें केवल जुर्माना लेकर छोड़ दिया गया जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी नाराजगी जताई है और कहा है कि इससे अवैध रेत कानन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कोर्ट ने साफ निर्देश कि ऐसे वाहनों को तुरंत जब्त किया जाए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
अवैध खनन पर कोर्ट ने जताई चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने मुरैना-धौलपुर बॉर्डर पर NH-44 पुल के आसपास हो रहे अवैध उत्खनन पर भी गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि पुल के पिलरों के नीचे तक खुदाई हो रही है, जिससे पुल की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। कोर्ट ने NHAI को पुल के आसपास CCTV कैमरे लगाने और उनकी लाइव फीड पुलिस व वन विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चंबल नदी में कचरा फेंकने वालों पर भी सख्ती करने के आदेश दिए गए हैं।