गर्मी बढ़ने के साथ पानी की समस्या और गंभीर हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे पूरी तरह पीएचई विभाग के टैंकरों पर निर्भर हैं, जो भी दो से तीन दिन में एक बार ही पहुंचते हैं। ऐसे में पानी आने का इंतजार ही लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
जैसे ही पानी का टैंकर मोहल्ले में पहुंचता है, वहां अफरा-तफरी का माहौल बन जाता है। महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे अपने घरों से ड्रम, बाल्टी और पाइप लेकर दौड़ पड़ते हैं। कई लोग चलते हुए टैंकर से ही पाइप लगाकर पानी खींचने की कोशिश करते हैं, तो कुछ टैंकर के ऊपर चढ़कर पानी भरते नजर आते हैं। इस दौरान धक्का-मुक्की और बहस आम बात हो गई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पानी की कमी इतनी गंभीर है कि कई परिवारों को पीने के पानी के लिए दूर-दराज क्षेत्रों से इंतजाम करना पड़ता है। नहाने और घरेलू उपयोग के लिए अलग से व्यवस्था करनी पड़ती है। पड़ोसियों से भी मदद मिलना मुश्किल हो गया है क्योंकि हर घर में पानी की कमी है।
एक निवासी सीमा परमार ने बताया कि यह समस्या वर्षों पुरानी है और आज तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। उन्होंने कहा कि कई बार लोग कामकाज छोड़कर केवल पानी का इंतजार करते हैं, लेकिन टैंकर का कोई निश्चित समय नहीं होता।
वहीं रेखा नामक एक अन्य निवासी ने बताया कि टैंकर कभी शाम को आता है तो कभी देर रात, जिससे पूरी दिनचर्या प्रभावित हो जाती है। कई बार घंटों इंतजार के बाद भी पानी पर्याप्त नहीं मिल पाता, जिससे परिवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में स्थायी नल जल योजना लागू की जाए, ताकि हर घर तक नियमित और पर्याप्त पानी पहुंच सके। फिलहाल स्थिति यह है कि पानी की हर बूंद के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है, और रोजमर्रा की जिंदगी एक जंग जैसी बन गई है।