टॉस और शुरुआती झटकों के बाद भारत की पारी लड़खड़ा गई थी, जब कप्तानी कर रहीं स्मृति मंधाना पहली ही गेंद पर आउट हो गईं और शेफाली वर्मा भी सस्ते में पवेलियन लौट गईं। ऐसे मुश्किल समय में जेमिमा रोड्रिग्स और यास्तिका भाटिया ने पारी को संभालते हुए भारतीय पारी को मजबूती दी। दोनों बल्लेबाजों ने तीसरे विकेट के लिए 126 रनों की शानदार साझेदारी निभाई, जिसने मैच का रुख पूरी तरह भारत की ओर मोड़ दिया।
यास्तिका भाटिया ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 40 गेंदों में 54 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 1 छक्का शामिल रहा। वहीं जेमिमा रोड्रिग्स ने बेहतरीन संयम और तकनीक का प्रदर्शन करते हुए 40 गेंदों में 69 रनों की लाजवाब पारी खेली। इस साझेदारी ने भारतीय टीम को 189 रनों के मजबूत स्कोर तक पहुंचाया।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी इंग्लैंड की टीम की शुरुआत भी खराब रही। भारतीय गेंदबाजों ने शुरू से ही दबाव बनाए रखा। ऐलिस कैप्सी केवल 6 रन बनाकर आउट हुईं, जबकि सोफिया डंकले भी 16 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। हालांकि इसके बाद हीथर नाइट और एमी जोन्स ने 64 रनों की साझेदारी कर पारी को संभालने की कोशिश की, लेकिन भारतीय गेंदबाजों ने लगातार विकेट निकालकर इंग्लैंड को वापसी का मौका नहीं दिया।
एमी जोन्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 48 गेंदों में 67 रन बनाए, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। अंततः इंग्लैंड की पूरी टीम 20 ओवर में 8 विकेट खोकर केवल 150 रन ही बना सकी।
भारत की ओर से गेंदबाजी में नंदिनी शर्मा ने अपने डेब्यू मैच में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 विकेट झटके। उनके अलावा क्रांति गौड़ ने 2 विकेट हासिल किए, जबकि दीप्ति शर्मा और श्री चरणी को 1-1 सफलता मिली।
इस जीत के साथ भारतीय टीम ने न केवल सीरीज में बढ़त बनाई, बल्कि अपने ऑलराउंड प्रदर्शन से यह भी साबित किया कि वह विदेशी सरजमीं पर भी मजबूत दावेदारी रखती है।