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जमीन कब्जे से परेशान किसान ने खाया जहर, सुसाइड नोट में पांच लोगों पर लगाए आरोप


कटनी। कटनी जिले के बड़वारा क्षेत्र में जमीन विवाद और कथित दबंगों की प्रताड़ना से परेशान एक किसान द्वारा जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किए जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में किसान को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें एक निजी अस्पताल रेफर किया गया है। फिलहाल उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।

पीड़ित किसान की पहचान चंद्रभान महोबिया के रूप में हुई है। उन्होंने आत्मघाती कदम उठाने से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें पांच लोगों को अपनी हालत के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने सुसाइड नोट जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

सुसाइड नोट में किसान ने भानपुरा निवासी भूरा, जगमोहन, कल्लू, जग्गू और अर्जुन के नाम लिखते हुए आरोप लगाया कि ये लोग लंबे समय से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। नोट में उन्होंने लिखा कि वह अपनी इच्छा से आत्महत्या कर रहे हैं और उनके परिवार को किसी प्रकार से परेशान न किया जाए।

किसान के बेटे चंद्रकांत महोबिया ने आरोप लगाया कि जिन लोगों के नाम सुसाइड नोट में लिखे गए हैं, वे दबंग प्रवृत्ति के हैं और उनकी पैतृक जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहे थे। परिवार का कहना है कि इस मामले को लेकर पिछले छह महीनों से लगातार प्रशासन और पुलिस के चक्कर लगाए जा रहे थे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

परिजनों के मुताबिक बड़वारा तहसील, थाना और एसपी कार्यालय में कई बार लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। आरोप है कि पुलिस और राजस्व विभाग की टालमटोल नीति के कारण आरोपी बेखौफ बने रहे और किसान पर लगातार दबाव बनाते रहे। इसी मानसिक तनाव और प्रशासनिक उदासीनता से परेशान होकर किसान ने यह कदम उठाया।

घटना के बाद इलाके में लोगों में आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते शिकायतों पर कार्रवाई की जाती तो शायद किसान को इतना बड़ा कदम उठाने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।

मामले को लेकर संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि शिकायत मिलने पर संबंधित थाने को पहले ही जांच के निर्देश दिए जा चुके थे। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की गंभीरता से जांच की जा रही है और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है और किसान का इलाज जारी है। वहीं इस घटना ने एक बार फिर जमीन विवादों और प्रशासनिक कार्रवाई में देरी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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