उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखते हुए कहा कि यदि उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे दो दिन बाद आत्मदाह करने को मजबूर होंगे। इस बयान से जनसुनवाई में मौजूद अधिकारी भी गंभीर हो गए।
15 साल से लंबित नामांतरण, राजस्व विभाग पर आरोप
व्यापारी जगदीश प्रसाद अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उनकी पत्नी रानी अग्रवाल के नाम पर वर्ष 2009 में खरीदी गई भूमि का विधिवत विक्रय पत्र होने के बावजूद 15 वर्षों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी नामांतरण नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज और कब्जा होने के बावजूद राजस्व न्यायालय में उनकी फाइल को अनावश्यक रूप से लंबित रखा जा रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है और वे भूमि का आगे विक्रय भी नहीं कर पा रहे हैं।
रिश्वत लेकर अन्य मामलों में नामांतरण का आरोप
अग्रवाल ने यह भी गंभीर आरोप लगाया कि उसी सर्वे नंबर से जुड़े अन्य मामलों में कथित रूप से रिश्वत लेकर नामांतरण कर दिया गया है, जबकि उनके मामले में जानबूझकर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं।
उन्होंने एक अन्य भूमि रिकॉर्ड में त्रुटिपूर्ण प्रविष्टि किए जाने का भी आरोप लगाया और कहा कि पटवारी से कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया।
प्रशासन से तत्काल समाधान की मां
जनसुनवाई के दौरान व्यापारी ने अधिकारियों से मांग की कि उनकी समस्या का शीघ्र निराकरण किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं होती है तो वे इसके लिए प्रशासन को जिम्मेदार मानेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग से रिपोर्ट तलब करने की बात कही है।