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डॉक्टर-कर्मचारियों की उपस्थिति पर रहेगी नजर, रात में भी होंगे निरीक्षण


मध्य प्रदेश । भोपाल में सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नया निगरानी तंत्र लागू किया है। अब प्रत्येक अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र के लिए अलग नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो स्टाफ की उपस्थिति, दवाओं की उपलब्धता, रात्रिकालीन सेवाओं और फायर सेफ्टी तक पर नजर रखेंगे।

भोपाल जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और मरीजों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनीष शर्मा द्वारा जारी आदेश के तहत जिले के विभिन्न सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के लिए अलग-अलग नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इन अधिकारियों को संबंधित अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर लगातार नजर रखने और व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि अस्पतालों में नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय होने से स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और मरीजों को समय पर बेहतर उपचार मिल सकेगा। नोडल अधिकारियों को अस्पतालों में स्टाफ की उपस्थिति की निगरानी करने, कर्मचारियों की समयबद्ध कार्यप्रणाली सुनिश्चित करने और रात्रिकालीन सेवाओं का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से रात के समय अस्पतालों में उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया जाएगा ताकि किसी भी प्रकार की लापरवाही को रोका जा सके।

नई व्यवस्था के तहत अस्पतालों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। नोडल अधिकारी दवाओं के स्टॉक और ईडीएल (एसेंशियल ड्रग लिस्ट) के अनुसार जरूरी दवाओं की उपलब्धता की नियमित समीक्षा करेंगे। इसके अलावा बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित निपटान की व्यवस्था और फायर सेफ्टी ऑडिट की निगरानी भी उनकी जिम्मेदारी होगी। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों में सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़े मानकों का पालन सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।

कर्मचारियों की उपस्थिति की जांच ‘सार्थक एप’ के माध्यम से की जाएगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि अस्पतालों में तैनात डॉक्टर, नर्स और अन्य कर्मचारी निर्धारित समय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं या नहीं। विभाग का मानना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था से अनुशासन और जवाबदेही दोनों में सुधार होगा।

आदेश के अनुसार डॉ. केएनके चिकित्सालय की जिम्मेदारी जिला परिवार कल्याण अधिकारी (द्वितीय) को सौंपी गई है। सिविल अस्पताल बैरसिया की निगरानी जिला टीकाकरण अधिकारी करेंगे, जबकि सिविल अस्पताल गोविंदपुरा के लिए जिला कार्यक्रम प्रबंधक को नोडल अधिकारी बनाया गया है। सीएचसी बैरसिया की जिम्मेदारी जिला क्षय अधिकारी, सीएचसी गांधीनगर की जिम्मेदारी जिला परिवार कल्याण अधिकारी (द्वितीय) और सीएचसी कोलार की जिम्मेदारी जिला परिवार कल्याण अधिकारी (प्रथम) को दी गई है। वहीं बैरसिया ब्लॉक के पीएचसी की निगरानी मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी बैरसिया तथा फंदा ब्लॉक के पीएचसी की निगरानी मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी फंदा-गांधीनगर करेंगे।

स्वास्थ्य विभाग ने इस आदेश की प्रतिलिपि लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और जिला स्वास्थ्य समिति को भी भेज दी है। विभाग को उम्मीद है कि नई निगरानी व्यवस्था के जरिए अस्पतालों में सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित एवं जवाबदेह स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

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