DDoS अटैक के जरिए किया गया हमला
विशेषज्ञों के अनुसार यह हमला डिनायल-ऑफ-सेवा (DDoS) श्रेणी का था, जिसमें एक साथ भारी मात्रा में ट्रैफिक भेजकर किसी वेबसाइट को ठप करने की कोशिश की जाती है। CBSE के अनुसार, पोर्टल शुरू होने के कुछ ही मिनटों में लाखों रिक्वेस्ट आईं, जिनमें बड़ी संख्या अनधिकृत लॉगिन प्रयासों की थी। सिस्टम ने इन सभी को पहचानकर तुरंत ब्लॉक कर दिया।
मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था ने रोका नुकसान
बोर्ड ने बताया कि पोर्टल लॉन्च से पहले व्यापक सुरक्षा परीक्षण किए गए थे, जिनमें पेनिट्रेशन टेस्टिंग, वल्नरेबिलिटी असेसमेंट और लोड टेस्टिंग शामिल थीं। पोर्टल को आधुनिक सुरक्षा तकनीकों जैसे वेब एप्लिकेशन फायरवॉल (WAF), DDoS सुरक्षा प्रणाली, ऑडिट लॉगिंग और 24×7 मॉनिटरिंग से सुरक्षित किया गया था। इसी वजह से यह हमला सफल नहीं हो सका।
रिजल्ट के बाद बढ़ा ट्रैफिक, हजारों आवेदन दर्ज
रिजल्ट के बाद छात्रों की ओर से पुनर्मूल्यांकन और सत्यापन के लिए बड़ी संख्या में आवेदन भी आए हैं। बोर्ड को अब तक हजारों आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और अंकों के सत्यापन की मांग शामिल है।
शुरुआती मिनटों में ही भारी दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, पोर्टल लाइव होने के मात्र दो मिनट के भीतर लगभग 15 लाख एक्सेस रिक्वेस्ट दर्ज की गईं। सिस्टम ने तुरंत सक्रिय होकर 1 लाख से अधिक संदिग्ध प्रयासों को ब्लॉक कर दिया।
यह घटना दिखाती है कि डिजिटल सिस्टम पर साइबर हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है, लेकिन मजबूत सुरक्षा ढांचे के चलते बड़े संस्थान भी ऐसे हमलों से सुरक्षित रह सकते हैं।