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कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका, दो विधायकों की क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस की पांचवीं सीट की राह आसान


नई दिल्ली । कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए जारी चुनावी प्रक्रिया के बीच भारतीय जनता पार्टी को एक अप्रत्याशित राजनीतिक झटका लगा है। मतदान के दौरान भाजपा से निष्कासित दो विधायकों द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किए जाने की खबर ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण बढ़त और भाजपा के लिए रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

विधान परिषद की सात सीटों के लिए हो रहे चुनाव में कुल आठ उम्मीदवार मैदान में हैं। सामान्य परिस्थितियों में विधानसभा में मौजूद दलों की संख्या के आधार पर कांग्रेस चार और भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती थी। हालांकि सातवीं सीट को लेकर पहले से ही कड़ा मुकाबला माना जा रहा था। अब क्रॉस वोटिंग की खबरों ने इस मुकाबले को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है।

राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा उन दो विधायकों को लेकर हो रही है जिन्होंने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। दोनों नेताओं को पहले भाजपा से निष्कासित किया जा चुका है, लेकिन उनके वोटों का असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। मतदान के दौरान उनकी मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ मौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत माना है।

कर्नाटक में हाल ही में नेतृत्व परिवर्तन के बाद डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद संभाला है। ऐसे में विधान परिषद का यह चुनाव उनके नेतृत्व की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। कांग्रेस की कोशिश है कि उपलब्ध संख्या बल के अलावा निर्दलीय और अन्य समर्थन जुटाकर परिषद में अपनी स्थिति और मजबूत बनाई जाए। दूसरी ओर भाजपा इस चुनाव को अपनी संगठनात्मक मजबूती और विपक्षी भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है।

निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को जीत सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम 28 वोटों की आवश्यकता है। विधानसभा में कांग्रेस के पास सबसे अधिक विधायक हैं, जबकि भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) भी अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं। सातवीं सीट के लिए आवश्यक अतिरिक्त समर्थन जुटाने की चुनौती दोनों प्रमुख दलों के सामने रही है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की घटना चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर केवल परिषद चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। यह भविष्य में राज्य की राजनीतिक दिशा और दलों के भीतर अनुशासन संबंधी सवालों को भी प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से भाजपा के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि पार्टी से अलग हो चुके नेताओं का प्रभाव अभी भी कुछ क्षेत्रों में बना हुआ है।

चुनाव मैदान में कांग्रेस, भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला जारी है। कांग्रेस ने पांच उम्मीदवार उतारे हैं जबकि भाजपा के दो और जेडीएस का एक प्रत्याशी मैदान में है। इस कारण अंतिम सीट को लेकर राजनीतिक रणनीतियां लगातार बदलती रही हैं।

मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना के साथ ही तस्वीर साफ होगी कि क्रॉस वोटिंग का वास्तविक प्रभाव कितना पड़ा। हालांकि मतदान के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक की राजनीति में अंदरूनी खींचतान और राजनीतिक पुनर्संरेखण की प्रक्रिया अभी भी जारी है।

विधान परिषद चुनाव के नतीजे न केवल दलों की वर्तमान ताकत को दर्शाएंगे, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों की दिशा भी तय कर सकते हैं। इसी कारण सभी दलों की नजर अब मतगणना और अंतिम परिणामों पर टिकी हुई है।

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