पुलिस के अनुसार यह घटना 27 अक्टूबर 2025 की है, जब आरोपी ने आपातकालीन सेवा को सूचना दी कि उसकी पत्नी बाथरूम में बंद है और दरवाजा नहीं खोल रही है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर महिला को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। प्रारंभिक जांच के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें मृत्यु का कारण गला घोंटने से दम घुटना बताया गया। इसके बाद मामले की जांच हत्या के एंगल से आगे बढ़ाई गई।
जांच अधिकारियों का कहना है कि घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों से यह संकेत मिला कि अपराध के बाद घटनास्थल की स्थिति बदलने की कोशिश की गई थी। पुलिस को ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि घटना के दौरान कोई बाहरी व्यक्ति अपार्टमेंट में दाखिल हुआ था। इसी आधार पर जांच का दायरा आरोपी की गतिविधियों और उसके बयानों पर केंद्रित किया गया।
जांच के दौरान अधिकारियों ने आरोपी के मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की। पुलिस के अनुसार, घटना वाले दिन आरोपी ने एक महिला से कई बार संपर्क किया था, जिसके साथ उसके कथित रूप से लंबे समय से व्यक्तिगत संबंध थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि डिजिटल साक्ष्यों में कुछ ऐसे तथ्य भी सामने आए हैं, जिन्हें अभियोजन पक्ष महत्वपूर्ण मान रहा है। हालांकि इन सभी साक्ष्यों की अंतिम वैधानिक पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।
जांच में यह भी सामने आया कि मृतका ने घटना से पहले अपने पति को भेजे गए कुछ संदेशों में पेय पदार्थ के असामान्य स्वाद की शिकायत की थी। पुलिस इन संदेशों सहित सभी डिजिटल रिकॉर्ड और फोरेंसिक रिपोर्ट का विश्लेषण कर रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सके। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक साक्ष्य का वैज्ञानिक परीक्षण किया जा रहा है और जांच कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप आगे बढ़ रही है।
मामले में आरोपी के खिलाफ प्रथम श्रेणी हत्या का आरोप लगाया गया है। अदालत में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और उसके लिए उच्च जमानत राशि निर्धारित की गई है। यदि अदालत में आरोप सिद्ध होते हैं तो उसे कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अमेरिकी न्याय व्यवस्था के अनुसार अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सभी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद ही दिया जाएगा।
यह मामला एक बार फिर दर्शाता है कि आधुनिक आपराधिक जांच में डिजिटल साक्ष्य, फोरेंसिक विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच जारी रखे हुए है और अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले सभी साक्ष्यों को व्यवस्थित रूप से संकलित किया जा रहा है। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक आरोपी को कानून के अनुसार दोषी सिद्ध नहीं माना जाएगा।