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तिरुपति बालाजी की तर्ज पर होगा महोत्सव, वेंकटेश मंदिर में सात दिन तक होंगे धार्मिक आयोजन


इंदौर । इंदौर के छत्रीबाग स्थित श्रीलक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान में 10 से 16 जुलाई तक श्रीब्रह्मोत्सव एवं रथयात्रा महोत्सव का भव्य आयोजन किया जाएगा। सात दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक महोत्सव में भगवान वेंकटेश के विशेष पूजन, महाभिषेक, उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होगा। महोत्सव का मुख्य आकर्षण 16 जुलाई को निकलने वाली भगवान वेंकटेश की गौरवशाली रजत रथयात्रा रहेगी, जो नगर भ्रमण करते हुए श्रद्धालुओं को दर्शन देगी।

इस वर्ष महोत्सव का आयोजन तिरुपति बालाजी मंदिर की परंपरा और वैभव की तर्ज पर किया जा रहा है। मंदिर परिसर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाएगा, जहां शंख, चक्र और तिलक की भव्य सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगी। आयोजन की शुरुआत 9 जुलाई की शाम विश्वकसेन पूजन और सुंदरकांड पाठ से होगी। दोपहर में श्री वेंकटेश महिला मंडल की ओर से सुंदरकांड का आयोजन भी किया जाएगा।

10 जुलाई को ध्वजारोहण के साथ श्रीब्रह्मोत्सव का विधिवत शुभारंभ होगा। यह अनुष्ठान अनंतश्रीविभूषित श्रीमद् जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्री नागोरिया पीठाधीश्वर स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज के सान्निध्य में संपन्न होगा। इसके बाद प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक आयोजन किए जाएंगे।

11 जुलाई को भगवती श्रीमहालक्ष्मी का महाभिषेक होगा और 500 दंपति सामूहिक कुमकुम अर्चना में भाग लेंगे। 12 जुलाई को भगवान श्री वेंकटेश का 108 रजत कलशों से महाभिषेक किया जाएगा तथा रात्रि में छत्रीबाग क्षेत्र में छोटी रथयात्रा निकाली जाएगी।

13 जुलाई को वसंतोत्सव और तिरुपावड़ा उत्सव का आयोजन होगा। 14 जुलाई को भगवान वेंकटेश का कल्याण उत्सव और विवाहोत्सव मनाया जाएगा। इस अवसर पर बारात निकलेगी तथा विवाह की सभी पारंपरिक रस्में निभाई जाएंगी। रात्रि में परकाल स्वामी की लीला पर आधारित नाटिका का मंचन भी होगा।

15 जुलाई को भगवान के पुष्प बंगला दर्शन होंगे। वृंदावन और इंदौर के कलाकार सुगंधित फूलों और विशेष सजावटी सामग्री से मनोहारी पुष्प बंगला तैयार करेंगे, जिसमें भगवान वेंकटेश के विशेष दर्शन श्रद्धालुओं को प्राप्त होंगे।

महोत्सव का समापन 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा के साथ होगा। भगवान वेंकटेश वर्ष में एक बार निकलने वाले रजत रथ पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। रथयात्रा में दक्षिण भारतीय संस्कृति की झलक, पारंपरिक वाद्य यंत्र, धार्मिक झांकियां और भक्ति संगीत श्रद्धालुओं को आकर्षित करेंगे।

पूरे महोत्सव के दौरान भगवान का प्रतिदिन विशेष श्रृंगार किया जाएगा। भजन संध्या, धार्मिक प्रवचन और संतों का सान्निध्य भी श्रद्धालुओं को मिलेगा। आयोजन में स्वामी विष्णुप्रपन्नाचार्य महाराज, स्वामी विद्याभास्कर महाराज, स्वामी रंगनाथाचार्य महाराज, स्वामी अनंताचार्यजी महाराज, स्वामी वेंकटेशप्रपन्नाचार्य महाराज, स्वामी दामोदराचार्यजी महाराज, संत इन्द्रेश महाराज, युवराज स्वामी माधवप्रपन्नाचार्य महाराज, गोवत्स राधाकृष्ण महाराज और पुण्डरीकाक्षाचार्य महाराज सहित अनेक संत शामिल होंगे।

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