नई दिल्ली । सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर अदनान शेख की एक टिप्पणी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। एक पॉडकास्ट के दौरान विधवा और तलाकशुदा महिलाओं पर दिए गए उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। कई लोगों ने उनकी भाषा और शब्दों के चयन पर आपत्ति जताई, जबकि अभिनेत्री और सोशल मीडिया हस्ती उर्फी जावेद ने भी इस मामले में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। इसके बाद यह मुद्दा इंटरनेट पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया।
विवाद उस समय शुरू हुआ जब एक बातचीत के दौरान अदनान शेख से इस्लाम में चार शादियों से जुड़े विषय पर सवाल पूछा गया। जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति विधवा या तलाकशुदा महिला से विवाह करना चाहता है तो समाज को इसका विरोध नहीं करना चाहिए। हालांकि अपनी बात समझाने के दौरान उन्होंने महिलाओं के लिए एक ऐसा शब्द इस्तेमाल किया, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने अपमानजनक और असंवेदनशील माना। बयान सामने आने के बाद उसका वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होने के बाद अभिनेत्री उर्फी जावेद ने भी इस पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया कि इस तरह की भाषा बोलने की अनुमति ऐसे लोगों को क्यों मिलनी चाहिए। उर्फी ने महिलाओं के सम्मान और गरिमा का मुद्दा उठाते हुए बयान की आलोचना की। उनकी प्रतिक्रिया के बाद यह विवाद और अधिक चर्चा में आ गया तथा सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी राय व्यक्त की।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई उपयोगकर्ताओं ने भी अदनान शेख के बयान पर आपत्ति दर्ज कराई। लोगों का कहना है कि किसी भी महिला के लिए अपमानजनक शब्दों का प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता। कई प्रतिक्रियाओं में यह भी कहा गया कि यदि उनका उद्देश्य विधवा और तलाकशुदा महिलाओं के पुनर्विवाह का समर्थन करना था, तब भी अपनी बात सम्मानजनक और संवेदनशील भाषा में रखी जानी चाहिए थी। वहीं कुछ लोगों ने सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदारी के साथ बयान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सोशल मीडिया पर सार्वजनिक व्यक्तियों के बयानों को लेकर जवाबदेही और संवेदनशीलता पर लगातार चर्चा होती रही है। किसी भी टिप्पणी का प्रभाव लाखों लोगों तक पहुंचता है, इसलिए शब्दों के चयन को लेकर अधिक सतर्क रहने की अपेक्षा की जाती है। विशेष रूप से महिलाओं से जुड़े सामाजिक मुद्दों पर दिए गए बयान व्यापक सामाजिक प्रतिक्रिया का कारण बन सकते हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले में अदनान शेख की ओर से विवाद को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। दूसरी ओर, सोशल मीडिया पर यह बहस जारी है कि सार्वजनिक मंचों पर व्यक्त किए जाने वाले विचारों में भाषा की मर्यादा और सामाजिक संवेदनशीलता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रभावशाली व्यक्तियों के सार्वजनिक बयान समाज में किस तरह का संदेश छोड़ते हैं और उनकी जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण होती है।