राज्य में तेंदूपत्ता संग्रहण लाखों ग्रामीण और वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। हर वर्ष संग्रहण सीजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग इस कार्य से जुड़ते हैं और इससे होने वाली आय उनके परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बोनस वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि पात्र संग्राहकों तक राशि शीघ्र पहुंचाई जा सके।
वन विभाग की योजना के अनुसार वर्ष 2026-27 के लिए 17.72 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभिन्न वन मंडलों में आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर प्रबंधन और संगठित व्यवस्था के माध्यम से संग्रहण कार्य को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा, जिससे संग्राहकों को भी अधिक लाभ मिल सके।
सरकार ने संग्रहण वर्ष 2026 के दौरान तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले 41 लाख संग्राहकों को कुल 708 करोड़ रुपये संग्रहण पारिश्रमिक के रूप में देने की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त संग्रहण वर्ष 2024 के लाभांश का 75 प्रतिशत हिस्सा, जो 139 करोड़ रुपये है, इस वर्ष बोनस के रूप में वितरित किया जाएगा। इससे लाखों परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बोनस वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पात्र हितग्राहियों की जानकारी का सत्यापन, भुगतान से जुड़ी औपचारिकताओं का समय पर निष्पादन और सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बोनस राशि बिना किसी अनावश्यक विलंब के लाभार्थियों तक पहुंच सके।
राज्य सरकार का मानना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण केवल वन उपज से जुड़ी गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है। इसलिए इस क्षेत्र में कार्यरत संग्राहकों को नियमित पारिश्रमिक और लाभांश उपलब्ध कराना उनकी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। सरकार भविष्य में भी लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, वनवासी परिवारों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य करती रहेगी। बोनस वितरण की इस पहल से प्रदेश के लाखों तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा और वन आधारित आजीविका को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।