यह हादसा अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्र के पास हुआ जहां एक अर्टिगा कार में अचानक आग भड़क उठी। कार में सवार सभी लोग मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले के नागदा गांव के रहने वाले थे और वैष्णो देवी के दर्शन कर अपने घर लौट रहे थे। यात्रा का यह सफर खुशियों से भरा होना चाहिए था लेकिन कुछ ही पलों में यह मातम में बदल गया
बताया जा रहा है कि कार में आग इतनी तेजी से फैली कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। अंदर बैठे श्रद्धालु आग की लपटों में घिर गए और बुरी तरह झुलस गए। राहगीरों ने तत्काल मदद करने की कोशिश की और चालक को किसी तरह बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया लेकिन उसकी हालत बेहद गंभीर थी। बाद में उसे जयपुर रेफर किया गया जहां इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया
इस हादसे में जिन लोगों की जान गई उनमें चालक विनोद के अलावा संतोष आदिवासी उनकी पत्नी बबली दयावली उनकी सास पार्वती और दो मासूम बच्चियां रागनी और साक्षी शामिल हैं। एक ही परिवार के इतने लोगों की मौत ने गांव में सन्नाटा पसार दिया है। हर आंख नम है और हर चेहरा गम से भरा हुआ है
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कार में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी माना जा रहा है हालांकि पुलिस मामले की जांच में जुटी है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और परिजनों को सूचना दे दी गई है
यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा और वाहन मेंटेनेंस को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। लंबी यात्राओं के दौरान वाहनों की नियमित जांच और सावधानी बेहद जरूरी होती है ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। लेकिन जब हादसा अचानक होता है तो उसके परिणाम इतने भयावह हो सकते हैं कि पूरा परिवार ही खत्म हो जाता है
श्योपुर जिले के नागदा गांव में इस घटना के बाद मातम का माहौल है। जिन घरों में कुछ समय पहले दर्शन की खुशियां थीं वहां अब केवल आंसू और सन्नाटा है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि कई सपनों के एक साथ खत्म होने की कहानी बन गया है