सुबह सात बजे से ही महावीर जिनालय परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी जहां भक्तों ने भक्ति भाव के साथ पूजा अर्चना में भाग लिया विधि विधान से ध्वजारोहण के बाद भव्य वरघोड़ा यानी शोभायात्रा का आयोजन किया गया जिसने पूरे शहर को धार्मिक रंग में रंग दिया
शोभायात्रा में सबसे आगे हाथी घोड़े और बैंड बाजों की धुन ने माहौल को और अधिक भव्य बना दिया वहीं चांदी और स्वर्ण जड़ित रथ में भगवान महावीर स्वामी विराजमान थे जिनके दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला रथ के साथ दो दीक्षार्थी जोड़े सुसज्जित बग्गी में सवार होकर आगे बढ़ रहे थे जिन्हें देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी
वरघोड़े के दौरान समाजजनों ने जगह जगह दीक्षार्थियों का अक्षत और पुष्प वर्षा कर स्वागत किया महिलाओं और युवाओं ने ढोल धमाकों की थाप पर नृत्य करते हुए शोभायात्रा में भाग लिया जिससे पूरा वातावरण भक्ति और आनंद से भर गया शोभायात्रा विकास नगर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई ग्वालटोली स्थित नवनिर्मित दादाबाड़ी धाम तक पहुंची जहां इसका समापन हुआ
पूरे मार्ग में गुरुदेव के जयकारे और दीक्षार्थियों का संयम अमर रहे जैसे धार्मिक नारे गूंजते रहे जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया इस अवसर पर बड़ी संख्या में जैन संत और महासतीजी भी उपस्थित रहे जिनके सानिध्य में समाजजनों ने धर्म लाभ प्राप्त किया
नवनिर्मित आदिनाथ जिनालय की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर पूरे जैन समाज में विशेष उत्साह देखा जा रहा है और यह आठ दिवसीय महोत्सव लगातार धार्मिक गतिविधियों से सराबोर है प्रतिदिन विभिन्न अनुष्ठान और पूजा कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना हुआ है बल्कि समाज में एकता और संस्कारों की परंपरा को भी मजबूत कर रहा है और पूरे नीमच शहर में इस समय भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत माहौल देखने को मिल रहा है