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फिर आंदोलन की राह पर अन्ना हजारे RTI नियमों के विरोध में 5 जुलाई से भूख हड़ताल की चेतावनी


नई दिल्ली ।सूचना के अधिकार को लेकर एक बार फिर देश के चर्चित समाजसेवी अन्ना हजारे आंदोलन की राह पर दिखाई दे रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार द्वारा सूचना के अधिकार से जुड़े नियमों में किए गए बदलावों के विरोध में अन्ना हजारे ने 5 जुलाई से भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि राज्य सरकार नए नियमों को वापस नहीं लेती है तो वे जनहित में आंदोलन शुरू करेंगे।

अन्ना हजारे ने इस संबंध में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उन्होंने कहा कि हाल ही में लागू किए गए महाराष्ट्र सूचना का अधिकार नियम 2026, सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की मूल भावना के अनुरूप नहीं हैं। उनके अनुसार नए नियम नागरिकों की सूचना तक पहुंच को कठिन बना सकते हैं और शासन व्यवस्था में पारदर्शिता को प्रभावित कर सकते हैं।

अपने पत्र में अन्ना हजारे ने विशेष रूप से आवेदन शुल्क में वृद्धि पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि शुल्क बढ़ाने के पीछे कोई ठोस आर्थिक विश्लेषण या स्पष्ट कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि सूचना का अधिकार कोई राजस्व जुटाने वाला कानून नहीं है बल्कि नागरिकों को शासन से जुड़े तथ्यों और सूचनाओं तक पहुंच प्रदान करने का एक लोकतांत्रिक माध्यम है।

अन्ना हजारे ने यह भी कहा कि यदि लगभग दो दशक बाद आवेदन शुल्क बढ़ाया जा रहा है तो सूचना देने में अनावश्यक देरी करने या जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले अधिकारियों पर लगने वाले दंड में भी समान रूप से वृद्धि होनी चाहिए। उनका मानना है कि जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों पक्षों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए।

उन्होंने नए नियमों में पहचान पत्र को अनिवार्य किए जाने का भी विरोध किया है। अन्ना का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(2) के अनुसार किसी भी आवेदक को सूचना मांगने के कारण या व्यक्तिगत विवरण बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे में पहचान संबंधी अतिरिक्त शर्तें व्हिसलब्लोअर, सामाजिक कार्यकर्ताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं।

इसके अलावा उन्होंने एक विषय पर एक आवेदन की व्यवस्था को भी अनावश्यक और जटिल बताया है। उनके अनुसार यह नियम आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डालेगा और कई मामलों में जानकारी प्राप्त करने की प्रक्रिया को कठिन बना सकता है। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि बार-बार आवेदन आने पर उन्हें बंद करने की व्यवस्था से लोगों को पूर्ण और अद्यतन जानकारी प्राप्त करने में परेशानी हो सकती है।

अन्ना हजारे का कहना है कि यदि सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया अत्यधिक तकनीकी, महंगी और प्रशासनिक नियंत्रण वाली बना दी जाएगी तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कमजोर होगी। उन्होंने सरकार से आग्रह किया है कि नए नियमों की समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए ताकि सूचना के अधिकार की मूल भावना सुरक्षित रह सके।

अब सबकी नजर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि सरकार और अन्ना हजारे के बीच सहमति नहीं बनती है तो आने वाले दिनों में महाराष्ट्र में सूचना के अधिकार को लेकर एक बड़ा जन आंदोलन देखने को मिल सकता है।

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