HIGHLIGHTS:
- .85 लाख रुपये के राशन घोटाले में आरोपियों को बरी
- जांच में लापरवाही पर एसडीएम और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश
- मामला 2021 में कोरोना काल के दौरान दर्ज हुआ
- पीओएस रिकॉर्ड और गवाह समर्थन नहीं मिला
- अदालत ने एफआईआर बिना ठोस जांच के दर्ज करने पर कड़ी टिप्पणी की
ASHOKNAGAR RATION SCAM: ग्वालियर। अशोकनगर में 2.85 लाख रुपये के राशन घोटाले के मामले में सत्र न्यायाधीश सतीशचंद्र शर्मा की अदालत ने दोनों आरोपियों को सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया है। अदालत ने टिप्पणी की कि बिना पुख्ता साक्ष्यों यह मामला न्यायालय के समय की बर्बादी साबित हुआ है।
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जांच और प्रशासन पर सख्त टिप्पणी
अदालत ने तत्कालीन एसडीएम रवि मालवीय की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच में लापरवाही बरती गई। मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को उनके खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए पत्र लिखने के निर्देश दिए गए। साथ ही जांच में दोषी पाए गए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हेतु डीजीपी भोपाल को फैसले की प्रति भेजने को कहा गया।
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मामला 2021 में दर्ज
यह प्रकरण 2021 में थाना कचनार में दर्ज हुआ था। आरोप था कि 1 अप्रैल से 1 जून 2021 के बीच कोरोना काल में खेजराकला की शासकीय उचित मूल्य दुकान के प्रबंधक ग्याप्रसाद खरे और विक्रेता संजीव रघुवंशी ने हितग्राहियों को पूरा राशन नहीं दिया। शिकायत में कुल 2,85,685 रुपये के राशन के गबन का आरोप था।
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सुनवाई में नहीं मिले ठोस सबूत
सुनवाई के दौरान कथित हितग्राहियों ने कम राशन मिलने से इनकार किया। कई गवाहों ने भी जब्ती की कार्रवाई का समर्थन नहीं किया। पीओएस मशीन का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड भी पेश नहीं किया गया। अदालत ने नोट किया कि एफआईआर बिना प्राथमिक जांच और पर्याप्त दस्तावेजों के दर्ज कराई गई थी, जो गंभीर लापरवाही दर्शाता है।
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आरोपी दोषमुक्त
साक्ष्यों की कमी के चलते प्रबंधक ग्याप्रसाद खरे और विक्रेता संजीव रघुवंशी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया। इस फैसले के बाद प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जांच की गंभीरता पर सवाल खड़े हो गए हैं।