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राज्यसभा नामांकन विवाद पर भाजपा का कांग्रेस पर हमला, ‘नारी सम्मान’ पर उठाए सवाल

मध्य प्रदेश। मध्यप्रदेश के मंदसौर में राज्यसभा नामांकन विवाद को लेकर राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उसके ‘नारी सम्मान’ के दावे को केवल नारा बताया और उस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाया। जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित और जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गा पाटीदार ने कांग्रेस पर कई गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि कांग्रेस महिला सम्मान की बात तो करती है, लेकिन उसके व्यवहार में यह दिखाई नहीं देता। भाजपा नेताओं ने कहा कि राज्यसभा नामांकन विवाद के बाद कांग्रेस द्वारा मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने को महिला सम्मान का मुद्दा बनाया जा रहा है, जबकि वास्तविक मामला नामांकन पत्र में तथ्यों को छिपाने का है। प्रेस वार्ता में यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस नेतृत्व ने एक महिला कार्यकर्ता से जुड़े मामले में गंभीर शिकायतों को अनदेखा किया। भाजपा ने दावा किया कि संबंधित प्रकरण में कांग्रेस नेता कुंभम शिवकुमार रेड्डी पर गंभीर आरोप लगे थे और उस समय तत्कालीन तेलंगाना प्रभारी के रूप में मीनाक्षी नटराजन की भूमिका पर भी सवाल उठे थे। भाजपा का कहना है कि नामांकन पत्र में न्यायिक कार्यवाही और संबंधित तथ्यों का उल्लेख नहीं किया गया, जो कि नामांकन निरस्त होने का प्रमुख कारण बना। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस ने आरोपी नेता को संरक्षण दिया और पीड़ित महिला की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से कई सवाल पूछते हुए कहा कि यदि न्यायिक कार्यवाही की जानकारी थी तो उसे शपथ पत्र में क्यों नहीं बताया गया और महिला शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। प्रेस वार्ता में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया गया, जिसमें मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप की सीमाओं का हवाला देते हुए कहा था कि ऐसे मामलों में चुनाव परिणाम के बाद ही कानूनी चुनौती दी जा सकती है। भाजपा नेताओं ने कहा कि कांग्रेस को महिला सम्मान के मुद्दे पर बयानबाजी करने से पहले अपने संगठनात्मक व्यवहार की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में महिलाओं से जुड़े मामलों में कई बार शिकायतों को अनदेखा किया जाता है। अंत में भाजपा ने कहा कि यह मामला केवल एक चुनावी विवाद नहीं है, बल्कि कांग्रेस की जवाबदेही और महिला सम्मान के प्रति उसके वास्तविक दृष्टिकोण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

मंडी शुल्क वृद्धि पर बवाल: कांग्रेस का विरोध तेज, सरकार से फैसला वापस लेने की मांग

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में कृषि उपज मंडियों में मंडी शुल्क को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.50 प्रतिशत किए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ विरोध तेज हो गया है। इस फैसले को लेकर मंदसौर जिले के पिपलियामंडी में कांग्रेस नेताओं, किसानों और व्यापारियों ने मिलकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा और इसे तत्काल वापस लेने की मांग की। यह ज्ञापन ब्लॉक कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अनिल शर्मा और जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष रामचंद्र करुण के नेतृत्व में मंडी सचिव जगदीशचंद्र भाभड़ को सौंपा गया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और व्यापारी भी मौजूद रहे।  किसानों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझपूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष अनिल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा मंडी शुल्क में 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी किसानों और व्यापारियों दोनों के लिए नुकसानदायक है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही अपनी उपज का उचित मूल्य पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, ऐसे में यह अतिरिक्त शुल्क उन पर और आर्थिक दबाव बढ़ाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि देश के कई कृषि उत्पादक राज्यों में मंडी शुल्क 1 प्रतिशत या उससे भी कम है। ऐसे में मध्य प्रदेश में बढ़ा हुआ शुल्क व्यापारियों को अन्य राज्यों के मुकाबले प्रतिस्पर्धा में पीछे कर सकता है।  किसानों और व्यापारियों में नाराजगीकिसान बंशीलाल पाटीदार ने इस फैसले को किसान विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि खेती पहले से ही घाटे का सौदा बनती जा रही है और इन परिस्थितियों में शुल्क वृद्धि किसानों की समस्याओं को और बढ़ाएगी। जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष रामचंद्र करुण ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह निर्णय किसान और व्यापारी वर्ग के हितों के खिलाफ है। उन्होंने इसे “शोषणकारी” कदम बताया और तत्काल वापस लेने की मांग की। आंदोलन की चेतावनीकांग्रेस नेता बाबूखा मेवाती ने मंडी शुल्क वृद्धि को अन्यायपूर्ण बताते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो कांग्रेस आंदोलन करने के लिए मजबूर होगी।  व्यापक समर्थनइस मौके पर कई स्थानीय नेता, किसान और व्यापारी उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में मंडी शुल्क वृद्धि का विरोध किया और सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। किसानों और व्यापारियों का कहना है कि यदि यह बढ़ोतरी लागू रहती है तो इसका सीधा असर उनकी आमदनी और व्यापार पर पड़ेगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

देश की राजनीति में खास मुकाम हासिल करने की कहानी.

प्रो. मनोज कुमारकुछ बात तो है उनमें, कोइ यूँ ही नरेन्द्र मोदी नहीं कहलाता. वैसे भी भारतीय राजनीति में अलग-अलग समय में अलग-अलग मानक गढ़े जाते हैं और वह ऐतिहासिक हो जाता है. एक और राजनीतिक मानक गढ़ा है प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने. लगातार 12 वर्ष प्रधानमंत्री बने रहने का उनका यह नया कीर्तिमान है. आप चाहें जितना विरोध कर लें, आप चाहें जितनी आलोचना कर लें लेकिन कुछ बात तो उनमें है कि कई बार विरोधी भी कायल हो जाते हैं. 12 वर्ष पूर्व उनका अभिनंदन, स्वागत और उम्मीदों का साल था. जैसा होता है समय के साथ इस भाव में कहीं कमी दिखी तो चाहने वाले वैसे ही बने रहे. उनकी पहचान वैश्विक नेता के रूप में अपवाद स्वरूप बनी रही तो लगातार और बार-बार राज्यों के चुनावों में उनके नाम पर जीत इस बात की आश्वस्ति दिलाती रही कि ‘मोदी मैजिक’ कायम है. साथ ही अन्य दलों से टूटकर भी आने वाले जनप्रतिनिधियों ने उनके प्रति अपना भरोसा जताया, यह एक अलग किस्म का भारतीय राजनीति को अनुभव हुआ. इसके पहले भी दल-बदल होता रहा है लेकिन इसे दल-बदल के साथ ‘दिल’ बदल के रूप में देखा जाना चाहिए. आम आदमी पार्टी और हालिया तृणमूल कांग्रेस के सांसदों का उनके साथ चले जाना, यह परिघटना के रूप में परिभाषित होगा. हालांकि विरोधियों का कहना है कि उनका ‘डर से दिल’ बदला है. डर या विश्वास, दिल से दल बदल रहा है और 12 वर्षों में इस बदलाव को रेखांकित किया जाएगा. यह भी अजीब सा लगता है कि बार-बार कहा जा रहा है कि मोदी ने नेहरु के रिकार्ड को तोड़ दिया. अरे नहीं, भाई मोदी ने रिकार्ड बनाया है. भारतीय राजनीति में 12 वर्ष का समय बहुत होता है और जब चौतरफा हमले हो रहे हैं तब सत्ता में बने रहना सच में अर्थपूर्ण है. विरोध विरोधियों से हो तो सामान्य सी बात है लेकिन विरोध खुद के घर से हो तो यह चुनौती बन जाता है. विरोधियों के कुछ जायज हमले हैं तो कुछ नाजायज. कुछ हमले तो व्यक्तिगत हो रहे हैं, जिसे सही नहीं कहा जा सकता है. नीति-नियमों के आधार पर तार्किक विरोध का हर मंच पर स्वागत होता है लेकिन पूर्वाग्रहों से भरे विरोध कोई मायने नहीं रखता है. खैर, वैश्विक संकट का असर भारत में दिखने लगा. अनेक स्तरों पर भारत भी इस संकट से जूझ रहा है और इसका परिणाम यह हुआ कि 12 साल पहले किए गए वायदों को पूरा करने में खरोंच लगी. महंगाई, बेरोजगारी का ग्राफ बढ़ता गया. युद्ध के चलते भारत की आर्थिक हालत पर भी घाव लगा और देखते ही देखते महंंगाई का ग्राफ तेजी से बढऩे लगा. आखिरकार मोदी को आम आदमी के सामने आकर सहयोग का आह्वान करना पड़ा. कुछ बातें ऐसी थी जिसे एक आम भारतीय नहीं मानता है जैसे सोना ना खरीदने की बात लेकिन अर्थशास्त्र के जानकार बताएंगे ऐसा क्यों? हम मोटामोटी तौर पर सहज और सरल जिंदगी चाहते हैं और सरकार को अलादीन का चिराग मानकर उसे हर मुराद पूरी करने की जिद् भी कर बैठते हैं और जब जिद् पूरी नहीं होती है तब सरकार खराब हो जाती है. इस समय सरकार का मतलब समझा दिया गया है मोदी और मोदी को खराब साबित करने के लिए हर स्तर पर कोशिश जारी है. यह भी सच है कि 12 वर्ष पहले युवाओं को जो उम्मीदों के पंख लगे थे, वह टूटकर बिखरने लगे. उम्मीद टूटी लेकिन नाउम्मीद नहीं हुए और वे अपने एक ‘वोट’ से अपने नायक मोदी को मजबूत करते रहे, यह भी एक बड़ा सच है. स्मरण कीजिए कि लोकपाल की माँग को लेकर यही नौजवान सडक़ पर उतरे तो कांग्रेस की सरकार पलट दी तो क्या यह नाराजगी मोदी को चुनौती नहीं दे सकती है? जरूर दे सकती है लेकिन तब जब युवा नाउम्मीद हो जाए. इन 12 वर्षों में ऐसे चाहे-अनचाहे बात-बयान हुआ और उनकी इमेज को सोशल मीडिया के जरिए तोडऩे की कोशिश की गई. अतिरेक में विरोधियों के साथ भी ऐसा ही हुआ और इसका दुष्परिणाम यह निकला कि सत्ता और प्रतिपक्ष में जो समन्वय होना चाहिए था, उसमें दरार पड़ गई. प्रतिपक्ष की प्रकृत्ति प्रतिरोध की रही है लेकिन विरोधी व्यवहार कई नीतिगत मुश्किलें उत्पन्न करता है और ऐसा हुआ भी. समय एक सा नहीं रहता है और यह सबके साथ होता है, मोदी कोइ अपवाद नहीं लेकिन 12 वर्षों तक मोदी करिश्मा अपवाद है. इस अपवाद का सबसे बड़ा गुण है एक कुशल जनसंचार के रूप में स्वयं को स्थापित करना. ‘मन की बात’ के माध्यम से वे देश के करोड़ों लोगों तक पहुँच गए. माटी से खादी तक चर्चा कर हुनरमंद लोगोंं को उनके घेरे से बाहर लाकर मुख्यधारा से जोडक़र एक नया मुकाम दिया. प्रधानमंत्री मोदी तारीफ करें तो उनके हुनर को पंख लग जाना स्वाभाविक है. ‘मन की बात’ की हर ऐपिसोड में समाज के अंतिम छोर पर बैठे हुनरमंद को तलाश कर ले आते हैं. वे जनता की नब्ज भी जानते हैं और समझते हैं. और ऐसे में वे कभी खेल के मैदान में उतर जाते हैं तो कभी गाँव की चौपाल में खाट में बैठकर अपनापन का भाव जताते हैं. जैसा कि उन्होंने खुद ही अपील कर कहा कि मोदीजी नहीं, मोदी कहा जाए. वे जानते हैं कि एक ‘जी’ अपनों से पराया बना देती है. उनका यही हुनर उन्हें एक कुशल संचारक के रूप में स्थापित करता है. संचार की अवधारणा कहती है कि संदेश देने वाले की कामयाबी इस बात में नहीं है कि वह संदेश क्या देता है बल्कि कामयाबी इस बात में है कि संदेश ग्रहण करने वाला उसे कैसे ग्रहण करता है. बातें और भी बहुत सी है और यही बातें उन्हें दूसरों से जुदा करती है. एक बात स्मरण में हो आता है कि एक कामयाब व्यक्ति से पूछा गया कि आपका मुकाबला किससे है? तो उनका जवाब था-मेरा अपने आप से. मोदीजी के बारे में भी यही बात लागू होती है

फाइलों में अटके 8 मेगा प्रोजेक्ट्स, 33 मौतें और 1800 करोड़ का अतिरिक्त बोझ: मध्य प्रदेश में अफसरशाही पर उठे गंभीर सवाल

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के चार प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में चल रहे जल आपूर्ति और सीवरेज से जुड़े 8 बड़े प्रोजेक्ट्स प्रशासनिक सुस्ती और अफसरशाही की देरी के चलते अधर में लटके हुए हैं। केंद्र सरकार की अमृत 2.0 योजना के तहत शुरू हुए ये प्रोजेक्ट्स करीब साढ़े चार साल बाद भी पूरे नहीं हो सके हैं। देरी का सीधा असर न केवल विकास कार्यों पर पड़ा है, बल्कि इसका भारी वित्तीय बोझ भी सरकार पर पड़ा है। अब तक इन परियोजनाओं की लागत में करीब 1800 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस लापरवाही की कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी है। इंदौर की त्रासदी: 33 मौतों ने खोली लापरवाही की पोलप्रशासनिक ढिलाई का सबसे दर्दनाक उदाहरण इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में सामने आया, जहां दूषित पानी पीने से जनवरी-फरवरी 2026 के बीच 33 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए। बताया जाता है कि क्षेत्र में 30 साल पुरानी नर्मदा पाइपलाइन को बदलने की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन संबंधित फाइलें महीनों तक अफसरों के पास अटकी रहीं। करीब 550 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के टेंडर जारी करने में भी आठ महीने की देरी हुई। जब तक काम शुरू हुआ, तब तक स्थिति बिगड़ चुकी थी और लोगों की जान जा चुकी थी। उज्जैन में प्रोजेक्ट ठप, फर्जी बैंक गारंटी का मामलाउज्जैन में जल आपूर्ति और सीवरेज प्रोजेक्ट भी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। यहां एक कंपनी की बैंक गारंटी जांच में फर्जी पाई गई, जिसके बाद उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। इससे परियोजना पूरी तरह ठप हो गई और हजारों कनेक्शन व सीवरेज लाइन का काम अटक गया।  डिजाइन और डीपीआर की खामियां बनी बड़ी वजहसूत्रों के अनुसार कई प्रोजेक्ट्स की डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) समय पर तैयार नहीं हो सकी। डिजाइन और ड्रॉइंग में खामियों के चलते टेंडर और काम दोनों में देरी हुई। अब सरकार ने ऐसे सलाहकारों और ठेकेदारों की समीक्षा कर ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी शुरू कर दी है।  बढ़ता वित्तीय बोझ: हर शहर पर करोड़ों का अतिरिक्त दबावदेरी के कारण चारों शहरों में परियोजनाओं का बजट लगातार बढ़ रहा है-* इंदौर: ₹800 करोड़ से बढ़कर ₹1073 करोड़* भोपाल: ₹735 करोड़ में केवल 6% खर्च* ग्वालियर: ₹932 करोड़ की परियोजना में वित्तीय अंतर* जबलपुर: बढ़ी हुई लागत का बोझ नगर निगम पर  समाधान की कोशिश: ग्रीन बॉन्ड का सहारानगर निगम अब वित्तीय संकट से निपटने के लिए ग्रीन बॉन्ड और अन्य नगर निगम बॉन्ड जारी करने की योजना बना रहे हैं। इनका उपयोग जल, पर्यावरण और सीवरेज परियोजनाओं में किया जाएगा।  प्रशासनिक सख्ती की तैयारीमुख्य सचिव स्तर पर हुई नाराजगी के बाद अब लापरवाह अफसरों और सलाहकारों पर कार्रवाई की तैयारी है। 13 जून को भोपाल में होने वाली बड़ी समीक्षा बैठक में सभी परियोजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाएगा और जिम्मेदारी तय की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर निगरानी और निर्णय लिए जाते, तो न केवल वित्तीय नुकसान रोका जा सकता था, बल्कि कई जिंदगियां भी बचाई जा सकती थीं।

आयुध निर्माणी खमरिया ने जबलपुर पुलिस को दिए 2 बोलेरो और 8 एक्टिवा, CSR फंड से बढ़ेगा पेट्रोलिंग बेड़ा

मध्य प्रदेश। जबलपुर में कानून-व्यवस्था और पुलिस पेट्रोलिंग को मजबूत करने के लिए आयुध निर्माणी खमरिया ने बड़ा सहयोग दिया है। संस्थान ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) फंड के तहत पुलिस विभाग को दो बोलेरो और आठ एक्टिवा वाहन प्रदान किए हैं। ये वाहन जिले के अलग-अलग थानों में तैनात किए जाएंगे, जिससे पेट्रोलिंग और त्वरित कार्रवाई की क्षमता बढ़ाई जा सकेगी। आयुध निर्माणी खमरिया के मुख्य महाप्रबंधक शैलेश वगेरवाल ने जबलपुर पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय को इन वाहनों की चाबी औपचारिक रूप से सौंपी। इस मौके पर पुलिस और फैक्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्य महाप्रबंधक शैलेश वगेरवाल ने कहा कि आयुध निर्माणी खमरिया केवल रक्षा उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि समाजहित से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाती है। उन्होंने बताया कि सीएसआर फंड 2025-26 के तहत म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड, पुणे की इकाई द्वारा यह सहयोग दिया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य पुलिस विभाग की कार्यक्षमता बढ़ाना और अपराध नियंत्रण को अधिक प्रभावी बनाना है। खासतौर पर महिलाओं की सुरक्षा और शहर में गश्त व्यवस्था को मजबूत करने में यह वाहन अहम भूमिका निभाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थान समाज और जनसुरक्षा से जुड़े कार्यों में निरंतर सहयोग देता रहेगा। पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय ने इस सहयोग के लिए आयुध निर्माणी खमरिया का आभार जताया। उन्होंने कहा कि इन वाहनों का उपयोग मुख्य रूप से पेट्रोलिंग, महिला सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं में किया जाएगा। इससे पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होगा। पुलिस प्रशासन के अनुसार, इन वाहनों को अलग-अलग थाना क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार तैनात किया जाएगा, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में गश्त व्यवस्था और मजबूत हो सके। इस अवसर पर आयुध निर्माणी खमरिया के जनरल मैनेजर अशोक कुमार मीना, सीनियर मैनेजर अविनाश शंकर सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। वहीं पुलिस विभाग की ओर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण सूर्यकांत शर्मा, सीएसपी रांझी सतीश साहू, सीएसपी कैंट उदयभान बागरी, डीएसपी मुख्यालय बीएस गोठरिया, डीएसपी यातायात संतोष शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

31 संगीन मामलों के आरोपी छोटू चौबे की गिरफ्तारी पर थाने में हंगामा, परिजनों ने उठाए पुलिस कार्रवाई पर सवाल

मध्य प्रदेश। जबलपुर के मदनमहल थाना परिसर में गुरुवार रात उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब कुख्यात बदमाश सुयश चौबे उर्फ छोटू चौबे की गिरफ्तारी के विरोध में उसके परिजन और समर्थक बड़ी संख्या में थाने पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गिरफ्तारी के बाद परिवार को यह नहीं बताया गया कि आरोपी को कहां रखा गया है। स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाना पड़ा, जिसके बाद हालात नियंत्रित किए गए। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने सुयश चौबे को बुधवार शाम हिरासत में लिया था, लेकिन उसके बाद परिवार को उसकी स्थिति और लोकेशन की कोई जानकारी नहीं दी गई। थाने पहुंचे आयुष शिवहरे ने दावा किया कि परिवार और वकील होने के नाते उन्हें आरोपी के बारे में जानकारी पाने का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से इस संबंध में पारदर्शिता नहीं बरती गई। छोटू चौबे की मां और पूर्व पार्षद रीता शेखर चौबे ने भी पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि उनके बेटे को गिरफ्तार किया गया है तो कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे न्यायालय में पेश किया जाना चाहिए और परिवार को इसकी जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने परिवार को किसी प्रकार की आधिकारिक सूचना नहीं दी। वहीं पुलिस का पक्ष इससे अलग है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार सुयश चौबे उर्फ छोटू चौबे जिले का एक हिस्ट्रीशीटर और कुख्यात अपराधी है, जिसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, रंगदारी, बलवा, आर्म्स एक्ट, घर में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ जैसे कुल 31 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी लंबे समय से विभिन्न मामलों में फरार चल रहा था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। पुलिस के अनुसार बुधवार रात उसे गिरफ्तार किया गया। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक पिस्टल, छह जिंदा कारतूस और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी पर पहले से इनाम भी घोषित था और उसके खिलाफ कई गंभीर मामलों की जांच चल रही है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक सुयश चौबे ‘2222 गैंग’ नाम से एक गिरोह संचालित करता है। अधिकारियों का दावा है कि वह अपनी गाड़ियों और मोबाइल नंबरों में भी 2222 अंक का उपयोग करता रहा है। वर्ष 2021 में उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत भी कार्रवाई की जा चुकी है। छोटू चौबे का नाम चर्चित गैंगस्टर अनिराज नायडू उर्फ अन्ना हत्याकांड में भी सामने आ चुका है। पुलिस जांच के अनुसार वह इस मामले में भी आरोपी रहा है। हालांकि संबंधित प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा किया जाना है। सीएसपी रितेश कुमार शिव ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि फरार आरोपी मदनमहल क्षेत्र के स्नेह नगर स्थित एक किराए के मकान में छिपा हुआ है। इसके बाद घमापुर थाना पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ और तलाशी के दौरान कमरे से हथियार और कारतूस बरामद किए गए। फिलहाल पुलिस आरोपी से जुड़े नेटवर्क, उसके सहयोगियों और अन्य आपराधिक गतिविधियों की जांच कर रही है। वहीं थाने में हुए हंगामे के बाद पुलिस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।

पूर्व मंत्री हरेंद्रजीत सिंह बब्बू को फिर मिली जान से मारने की धमकी, बोले- पुलिस नहीं कर रही प्रभावी कार्रवाई

मध्य प्रदेश। जबलपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता, पूर्व विधायक और पूर्व राज्य मंत्री हरेंद्रजीत सिंह बब्बू ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि उन्हें पिछले तीन माह के भीतर दो बार जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं। उनका आरोप है कि शिकायतों के बावजूद पुलिस अब तक कोई प्रभावी और संतोषजनक कार्रवाई नहीं कर सकी है। पूर्व मंत्री ने कहा कि यदि स्थिति इसी तरह बनी रही तो उन्हें न्याय और सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री हेल्पलाइन का सहारा लेना पड़ सकता है। 68 वर्षीय हरेंद्रजीत सिंह बब्बू जबलपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक रह चुके हैं और प्रदेश सरकार में मंत्री पद की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। उन्होंने बताया कि पहली बार 11 मार्च 2026 को उनके मोबाइल फोन पर एक अज्ञात नंबर से लगातार कॉल आए थे। उनका दावा है कि फोन उठाने पर सामने वाले व्यक्ति ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। इसके बाद उन्होंने गोरखपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। पूर्व मंत्री का आरोप है कि शिकायत के बाद पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को हिरासत में लिया था, लेकिन बाद में उसे बिना उनकी जानकारी के छोड़ दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर पहले ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र लिखकर चिंता व्यक्त की थी। उनके अनुसार, सुरक्षा संबंधी पत्र देने के कुछ दिन बाद ही उन्हें पहली धमकी मिली थी। हरेंद्रजीत सिंह बब्बू ने बताया कि 10 जून की शाम को उन्हें एक बार फिर धमकी भरा फोन आया। उनके मुताबिक, वह उस समय कार से कटंगा चौक की ओर जा रहे थे। इसी दौरान एक मोबाइल नंबर से कॉल आया। उनका दावा है कि कॉल रिसीव करते ही सामने वाले व्यक्ति ने अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें जान से मारने की धमकी दी। उन्होंने तत्काल फोन काट दिया और सीधे गोरखपुर थाने पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी। पूर्व मंत्री के अनुसार, थाना प्रभारी ने भी संबंधित नंबर पर संपर्क किया। उनका दावा है कि कॉल करने वाले व्यक्ति ने पुलिस अधिकारी से भी अभद्र व्यवहार किया और धमकी देने की बात स्वीकार की। हालांकि पुलिस का कहना है कि कॉल करने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ या विक्षिप्त हो सकता है। वहीं हरेंद्रजीत सिंह बब्बू इस दावे से सहमत नहीं हैं और उनका आरोप है कि यह पूरा मामला एक सुनियोजित राजनीतिक षड़यंत्र का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार पहले भी हिंसा और हमलों का सामना कर चुका है। उन्होंने 1984 के दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान उनके पिता और चाचा की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा वर्ष 2013 में उन पर बम से हमला भी हुआ था, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ऐसे में लगातार मिल रही धमकियों ने उनके परिवार की चिंता बढ़ा दी है। पूर्व मंत्री ने यह भी कहा कि अब तक न तो प्रशासन की ओर से कोई विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है और न ही संगठन स्तर पर किसी बड़े नेता ने उनसे संपर्क किया है। हालांकि घटना की जानकारी मिलने के बाद उनके कुछ समर्थक और करीबी नेता उनसे मिलने पहुंचे और चिंता व्यक्त की। उधर भाजपा नेता समीर दीक्षित ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि यदि एक पूर्व मंत्री और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी व्यक्ति या व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

जबलपुर में देर रात घर पर बमबाजी से दहशत, होटल विवाद के बाद बदला लेने पहुंचे युवक; CCTV में कैद हुई वारदात

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर में गुरुवार देर रात हुई बमबाजी की एक घटना ने स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। रांझी थाना क्षेत्र के रिछाई स्थित अंजलि कॉलोनी में कुछ युवकों ने एक घर को निशाना बनाकर कथित रूप से बम फेंके। हालांकि घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन तेज धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा। पुलिस के अनुसार मामले की जांच जारी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, घटना की पृष्ठभूमि एक होटल में हुए विवाद से जुड़ी बताई जा रही है। शिकायत के अनुसार, गुरुवार शाम सिविल लाइन क्षेत्र स्थित एक होटल में कुछ युवक ठहरे हुए थे। आरोप है कि वे नशे की हालत में हंगामा कर रहे थे और अभद्र व्यवहार कर रहे थे। होटल कर्मचारी मट्टू समद ने जब उन्हें शांत रहने के लिए कहा, तो उसके साथ मारपीट की गई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि होटल कर्मचारियों ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित करते हुए संबंधित युवकों को होटल से बाहर निकाला। होटल प्रबंधन के अनुसार, विवाद के दौरान कर्मचारी को कथित रूप से धमकियां भी दी गईं। इसके बाद मामले की शिकायत सिविल लाइन थाने में दर्ज कराई गई। पुलिस इस विवाद के पहलुओं की भी जांच कर रही है। बताया जा रहा है कि रात करीब साढ़े 11 बजे कर्मचारी मट्टू समद अपने घर पहुंचा था। कुछ समय बाद सफेद रंग की एक स्कूटी पर सवार चार युवक अंजलि कॉलोनी पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने घर के बाहर एक के बाद एक कई बम फेंके। हालांकि बम कर्मचारी के घर पर नहीं लगे और पास में रहने वाले अधिवक्ता संतोष भारती के मकान परिसर में जाकर गिरे। धमाकों की आवाज सुनकर आसपास के लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। क्षेत्र में कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया और सड़क पर धुआं फैल गया। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। जांच के दौरान कुछ संदिग्ध युवक कैमरों में दिखाई दिए। पुलिस का कहना है कि फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों की पहचान करने की प्रक्रिया चल रही है। रांझी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, घटना में शामिल बताए जा रहे युवकों की तलाश के लिए टीमों का गठन किया गया है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि रिहायशी इलाकों में इस तरह की घटनाएं कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। वहीं पुलिस ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल प्रशासन को देने की अपील की है।

शिवपुरी में ज्वेलर्स की दुकान पर अनोखी चोरी, सोने की बाली ले गए शातिर, जगह पर रख गए पीतल की बाली

मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के शिवपुरी शहर में सराफा बाजार स्थित एक ज्वेलर्स की दुकान पर बेहद शातिराना अंदाज में चोरी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राहक बनकर आए दो युवकों ने दुकानदार को बातचीत में उलझाकर सोने की बाली चुरा ली और उसकी जगह पीतल की बाली रख दी। हैरानी की बात यह रही कि इस चोरी की भनक दुकानदार को करीब 11 दिन तक नहीं लगी। बाद में जब बालियों की जांच की गई और सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तब पूरी घटना का खुलासा हुआ। जानकारी के अनुसार, सराफा बाजार स्थित कनक ज्वेलर्स के संचालक विष्णु सोनी ने कोतवाली थाना पुलिस को शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि 1 जून को दो युवक उनकी दुकान पर पहुंचे थे। दोनों ने ग्राहक होने का परिचय देते हुए सोने की बालियां देखने की इच्छा जताई। सामान्य प्रक्रिया के तहत दुकानदार ने उनके सामने बालियों की ट्रे रख दी और विभिन्न डिजाइनों की जानकारी देने लगे। दुकानदार के अनुसार, इसी दौरान दोनों युवकों ने अपनी योजना को अंजाम दिया। आरोप है कि एक युवक लगातार दुकानदार को बातचीत में उलझाए रहा, जबकि दूसरा युवक मौका मिलते ही ट्रे में रखी सोने की बाली निकालने में सफल हो गया। आरोपियों ने चोरी को छिपाने के लिए पहले से साथ लाई गई पीतल की बाली ट्रे में उसी स्थान पर रख दी, जिससे किसी को तत्काल संदेह न हो। इसके बाद दोनों युवक बिना किसी शक के दुकान से निकल गए। घटना का खुलासा तब हुआ जब गुरुवार को एक अन्य ग्राहक को बालियां दिखाने के लिए वही ट्रे निकाली गई। ट्रे में रखी एक बाली दुकानदार को संदिग्ध लगी। जांच करने पर पता चला कि वह सोने की नहीं बल्कि पीतल की है। इसके बाद दुकान संचालक ने पिछले दिनों के सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू की। फुटेज देखने पर कथित चोरी की पूरी घटना सामने आ गई। सीसीटीवी में दिखाई दे रहा है कि एक युवक दुकानदार का ध्यान दूसरी ओर लगाए रखता है, जबकि दूसरा युवक ट्रे से सोने की बाली निकालकर उसकी जगह पीतल की बाली रख देता है। फुटेज मिलने के बाद दुकानदार ने पुलिस को इसकी जानकारी दी और कार्रवाई की मांग की। पुलिस के अनुसार, शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर संदिग्ध युवकों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फुटेज में दिखाई दे रहे व्यक्तियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना सराफा कारोबारियों के लिए भी चेतावनी मानी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि ग्राहकों के रूप में आने वाले शातिर अपराधी नई-नई तरकीबों से चोरी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं, ऐसे में दुकानदारों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।

गुजरात के होटल में प्रेमिका की हत्या का आरोप, शिवपुरी ला रही पुलिस टीम के सामने हुई सनसनीखेज वारदात

मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से जुड़े एक मामले में गुजरात के गांधी नगर जिले में ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पुलिस और आम लोगों को हैरान कर दिया है। पुलिस के अनुसार, शिवपुरी से फरार हुए एक प्रेमी जोड़े को गुजरात से बरामद कर वापस लाया जा रहा था। इसी दौरान होटल में ठहरने के समय युवती की मौत हो गई, जबकि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार युवक पर युवती की हत्या करने और बाद में खुद को घायल करने का आरोप है। मामले की विस्तृत जांच जारी है। जानकारी के मुताबिक, शिवपुरी जिले के देहात थाना क्षेत्र के पिपरसमा गांव निवासी 21 वर्षीय रजनी धाकड़ और 25 वर्षीय संतोष जाटव 7 जून को घर से चले गए थे। परिजनों द्वारा गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन के आधार पर उनकी तलाश शुरू की। पुलिस टीम युवती के भाई को साथ लेकर गुजरात पहुंची और 11 जून को दोनों को राजकोट जिले के सांपर क्षेत्र से बरामद कर लिया। इसके बाद पुलिस टीम दोनों को लेकर शिवपुरी लौट रही थी। लंबी यात्रा के चलते टीम ने गांधी नगर से आगे उदयपुर हाईवे पर स्थित एक होटल में रात के समय विश्राम करने का निर्णय लिया। पुलिस के अनुसार, होटल के कमरे में पुलिसकर्मी, दोनों युवक-युवती और युवती का भाई समेत कुल छह लोग मौजूद थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार, देर रात करीब दो से ढाई बजे के बीच कमरे में अचानक हलचल और चीख-पुकार की आवाज सुनाई दी। मौजूद लोगों के जागने पर युवती गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली, जबकि युवक भी घायल था। पुलिसकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और दोनों को अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने युवती को मृत घोषित कर दिया, जबकि युवक को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया है। घटना के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि युवक की तलाशी ली गई थी और उसके पास कोई धारदार वस्तु नहीं मिली थी। हालांकि, महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं होने के कारण युवती की तलाशी नहीं ली गई थी। ऐसे में घटना में प्रयुक्त धारदार हथियार कहां से आया, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है। चूंकि घटना गुजरात के गांधी नगर जिले के अंतर्गत हुई है, इसलिए स्थानीय चिलोड़ा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिवपुरी पुलिस के अधिकारियों ने भी घटना की पुष्टि की है और बताया है कि अब पूरे मामले की जांच गुजरात पुलिस के अधिकार क्षेत्र में की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। होटल स्टाफ, प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस टीम के सदस्यों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही होटल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। फिलहाल युवक अस्पताल में उपचाराधीन है और मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।