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60 की उम्र में मिला सच्चा प्यार: फेसबुक पर हुई मुलाकात, 75 दिनों में शादी कर सुहासिनी मुले ने सबको चौंकाया

नई दिल्ली । बॉलीवुड और फिल्म जगत में अक्सर सितारों की प्रेम कहानियां चर्चा का विषय बनती हैं, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं जो उम्र, परंपराओं और सामाजिक धारणाओं को पीछे छोड़कर लोगों के लिए प्रेरणा बन जाती हैं। ऐसी ही एक दिलचस्प और प्रेरणादायक प्रेम कहानी है मशहूर अभिनेत्री सुहासिनी मुले की, जिन्होंने 60 साल की उम्र में शादी कर यह साबित कर दिया कि प्यार और रिश्तों के लिए कोई तय उम्र नहीं होती। ‘लगान’, ‘दिल चाहता है’, ‘जोधा अकबर’ और कई चर्चित फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकीं सुहासिनी मुले इन दिनों अपनी निजी जिंदगी को लेकर फिर चर्चा में हैं। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपनी अनोखी प्रेम कहानी का जिक्र किया, जिसने एक बार फिर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। सुहासिनी मुले को उनका जीवनसाथी किसी पार्टी, शूटिंग सेट या पारिवारिक परिचय से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिए मिला। दिलचस्प बात यह है कि जिस शख्स से उन्हें प्यार हुआ, वह मनोरंजन जगत से नहीं बल्कि विज्ञान की दुनिया से जुड़े एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक थे। उनके पति अतुल गुर्टू विश्व प्रसिद्ध भौतिक वैज्ञानिक हैं और उस समय स्विट्जरलैंड में दुनिया के सबसे बड़े वैज्ञानिक प्रयोग ‘लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर’ (LHC) प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। सुहासिनी ने बताया कि वह अपने एक सहकर्मी की सलाह पर फेसबुक से जुड़ी थीं। एक दिन फेसबुक पर ‘पीपुल यू मे नो’ सेक्शन में उन्हें अतुल गुर्टू की प्रोफाइल दिखाई दी। विज्ञान में रुचि रखने वाली सुहासिनी को यह जानकर हैरानी हुई कि इतने बड़े वैज्ञानिक भी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं। उत्सुकतावश उन्होंने अतुल को एक संदेश भेजा और LHC के बारे में जानकारी मांगी। यहीं से दोनों के बीच बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ। धीरे-धीरे मैसेज, ईमेल और नियमित संवाद के माध्यम से दोनों एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझने लगे। दोस्ती का यह रिश्ता जल्द ही गहरे भावनात्मक जुड़ाव में बदल गया। बातचीत बढ़ने के साथ दोनों को एहसास हुआ कि उनके विचार और जीवन को देखने का नजरिया काफी हद तक मेल खाता है। कुछ समय बाद अतुल गुर्टू ने सुहासिनी के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। सुहासिनी भी उन्हें पसंद करने लगी थीं, इसलिए उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के इस रिश्ते के लिए हामी भर दी। इसके बाद घटनाक्रम इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि पहली मुलाकात से लेकर शादी तक का सफर केवल 75 दिनों में पूरा हो गया। 16 जनवरी 2011 को दोनों ने आर्य समाज मंदिर में सादगीपूर्ण तरीके से विवाह किया। यह सुहासिनी मुले की पहली शादी थी, जबकि अतुल गुर्टू की यह दूसरी शादी थी। उनकी पहली पत्नी का कैंसर के कारण निधन हो चुका था। एक इंटरव्यू में सुहासिनी ने कहा कि उन्हें जीवन में सही साथी मिलने में समय लगा, लेकिन जब सही इंसान मिला तो उन्होंने बिना देर किए फैसला कर लिया। उनकी यह प्रेम कहानी आज भी इस बात का उदाहरण मानी जाती है कि सच्चा प्यार उम्र का मोहताज नहीं होता और जीवन में खुशियां किसी भी मोड़ पर दस्तक दे सकती हैं।

कांग्रेस मुक्त’ से आगे बढ़ी भाजपा की राजनीति? क्षेत्रीय दलों में बढ़ती बगावत के बीच ‘विपक्ष मुक्त भारत’ की चर्चा तेज

नई दिल्ली । देश की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलावों की आहट सुनाई दे रही है। लंबे समय तक ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ के नारे के साथ आगे बढ़ने वाली भारतीय जनता पार्टी को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में एक नई चर्चा शुरू हो गई है। विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों के भीतर बढ़ती बगावत, नेताओं और सांसदों के अलग गुट बनाने की कोशिशें तथा सत्ता समीकरणों में लगातार हो रहे बदलावों ने इस बहस को और तेज कर दिया है कि क्या देश की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। हाल के महीनों में पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और पंजाब जैसे राज्यों में कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने विपक्षी दलों की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई क्षेत्रीय दल अपने ही नेताओं और जनप्रतिनिधियों के असंतोष से जूझते दिखाई दे रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन घटनाओं का प्रभाव केवल राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर राष्ट्रीय राजनीति और भविष्य के गठबंधन समीकरणों पर भी पड़ सकता है। सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर हो रही है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद विपक्षी खेमे के भीतर असंतोष की खबरों ने राजनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कई सांसदों और नेताओं द्वारा अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने की चर्चाओं ने राज्य की राजनीति को नई दिशा देने का संकेत दिया है। हालांकि इन घटनाओं पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की अपनी-अपनी व्याख्या है, लेकिन इससे यह जरूर स्पष्ट हुआ है कि क्षेत्रीय दलों के सामने संगठनात्मक एकता बनाए रखना बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। महाराष्ट्र में भी राजनीतिक अस्थिरता का दौर थमता नजर नहीं आ रहा। शिवसेना के विभिन्न गुटों के बीच जारी खींचतान के बीच कई सांसदों और नेताओं के रुख ने राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना दिया है। पार्टी अनुशासन, व्हिप के पालन और संगठनात्मक नियंत्रण को लेकर उठे सवालों ने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले समय में इन घटनाओं का प्रभाव राज्य और राष्ट्रीय दोनों स्तरों पर दिखाई दे सकता है। इसी बीच कुछ राजनीतिक वर्ग यह तर्क दे रहे हैं कि विपक्षी दलों के भीतर बढ़ती टूट-फूट और पुनर्संरेखण की प्रक्रिया भाजपा को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचा सकती है। हालांकि भाजपा नेतृत्व लगातार इस बात से इनकार करता रहा है कि उसका कोई ‘विपक्ष मुक्त भारत’ अभियान चल रहा है। पार्टी का कहना है कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष की अपनी भूमिका होती है और चुनावी सफलता जनता के समर्थन के आधार पर तय होती है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिदृश्य केवल दल-बदल या बगावत तक सीमित नहीं है। इसके पीछे क्षेत्रीय नेतृत्व, राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं, संगठनात्मक असंतोष और बदलते जनादेश जैसे कई कारण काम कर रहे हैं। यही वजह है कि कई राज्यों में पुराने राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल देश की राजनीति ऐसे दौर से गुजर रही है जहां क्षेत्रीय दलों की आंतरिक चुनौतियां राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बन चुकी हैं। आने वाले महीनों में यदि यह सिलसिला जारी रहता है तो विपक्षी राजनीति के स्वरूप, गठबंधन की रणनीतियों और सत्ता संतुलन पर इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। राजनीतिक दलों की अगली चाल और नेताओं के फैसले इस बहस की दिशा तय करेंगे।

जंग लगे चाकू और ब्लेड के इस्तेमाल पर एफएसएसएआई सख्त, खाद्य कारोबारियों को जारी किए नए निर्देश

नई दिल्ली । देशभर में खाद्य सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत बनाने के लिए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य कारोबारियों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि अब खाद्य पदार्थों की तैयारी, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और अन्य संबंधित कार्यों में केवल फूड-ग्रेड तथा जंग-रोधी चाकू, ब्लेड और अन्य कटिंग उपकरणों का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। जंग लगे, टूटे-फूटे या क्षतिग्रस्त उपकरणों के उपयोग को खाद्य सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसे तत्काल बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। एफएसएसएआई के अनुसार हाल के दिनों में ऐसी कई रिपोर्टें सामने आई थीं, जिनमें कुछ खाद्य कारोबारी जंग लगे, खराब, टूटे हुए, पेंट किए गए या अनुपयोगी हो चुके कटिंग टूल्स का उपयोग करते पाए गए। इन उपकरणों के इस्तेमाल से खाद्य पदार्थों में भौतिक, रासायनिक और सूक्ष्मजीव संबंधी दूषण (कंटैमिनेशन) का खतरा बढ़ जाता है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। प्राधिकरण ने कहा कि खाद्य व्यवसायों में उपयोग होने वाले सभी उपकरण, बर्तन और खाद्य संपर्क सतहें फूड-ग्रेड, विषमुक्त और जंग-रोधी सामग्री से निर्मित होना अनिवार्य है। यह व्यवस्था न केवल खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए आवश्यक है, बल्कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। एफएसएसएआई ने अपने निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया है कि सभी चाकू, ब्लेड और अन्य कटिंग उपकरणों की नियमित जांच की जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि उनमें जंग, दरार, टूट-फूट, पेंट उखड़ना या किसी प्रकार की क्षति न हो। यदि किसी उपकरण में ऐसी कोई खराबी पाई जाती है, जिससे खाद्य पदार्थ दूषित होने की आशंका हो, तो उसे तुरंत उपयोग से हटाया जाए और उसकी जगह नया उपकरण लगाया जाए। खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत उपकरणों की नियमित सफाई, सैनिटाइजेशन और आवश्यकता पड़ने पर स्टरलाइजेशन भी अनिवार्य बताया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि खाद्य उद्योग में स्वच्छ उपकरणों का उपयोग खाद्य जनित बीमारियों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए यह केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। एफएसएसएआई ने यह भी कहा कि यह निर्देश ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (लाइसेंसिंग एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ फूड बिजनेस) रेगुलेशंस, 2011’ के तहत निर्धारित स्वच्छता और हाइजीन मानकों के अनुरूप हैं। इन नियमों का पालन सभी खाद्य कारोबारियों के लिए अनिवार्य है। प्राधिकरण ने कारोबारियों को चेतावनी दी है कि यदि किसी प्रतिष्ठान में जंग लगे या अनुपयुक्त उपकरणों का उपयोग पाया जाता है तो उसके खिलाफ ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006’ के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इसमें जुर्माना सहित अन्य कानूनी प्रावधान भी लागू किए जा सकते हैं। एफएसएसएआई का मानना है कि इन निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से खाद्य सुरक्षा के स्तर में सुधार होगा और उपभोक्ताओं को अधिक सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य उत्पाद उपलब्ध हो सकेंगे।

‘एनिमल वाले किरदार से बाहर निकाला’, तृप्ति डिमरी पर बोले रवि किशन – ‘मां-बहन’ फिल्म को लेकर दिया बयान

नई दिल्ली। नेटफ्लिक्स पर हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘मां-बहन’ एक बार फिर चर्चा में आ गई है, लेकिन इस बार वजह फिल्म की कहानी नहीं बल्कि अभिनेता रवि किशन का बयान है। फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे रवि किशन ने अपनी को-स्टार तृप्ति डिमरी की खुलकर तारीफ की है और उनके करियर को लेकर एक दिलचस्प टिप्पणी की है। एक इंटरव्यू के दौरान रवि किशन ने कहा कि भगवान का शुक्र है कि तृप्ति डिमरी के जीवन में ‘मां-बहन’ जैसी फिल्म आई, जिसने उन्हें उनके ‘एनिमल’ वाले किरदार की छवि से बाहर निकलने का अवसर दिया। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। रवि किशन ने आगे कहा कि इस फिल्म ने तृप्ति डिमरी को एक नई पहचान देने में मदद की है। उनके अनुसार, एक कलाकार के लिए यह जरूरी होता है कि वह एक ही तरह के किरदारों में सीमित न रह जाए, बल्कि अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए खुद को साबित करे। ‘मां-बहन’ जैसी फिल्में कलाकार को एक अलग दिशा देने का काम करती हैं। गौरतलब है कि तृप्ति डिमरी को 2023 में रिलीज हुई फिल्म ‘एनिमल’ से काफी लोकप्रियता मिली थी। इस फिल्म में उन्होंने ‘जोया’ का किरदार निभाया था, जो कहानी में एक अहम मोड़ लेकर आता है। इस भूमिका के बाद तृप्ति को दर्शकों के बीच बड़ी पहचान मिली और सोशल मीडिया पर उन्हें काफी चर्चा मिली। हालांकि ‘एनिमल’ के बाद तृप्ति के किरदार को लेकर दर्शकों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली थी। कुछ लोगों ने उनके अभिनय की सराहना की, जबकि कुछ ने किरदार को लेकर आलोचना भी की। इसके बावजूद उनकी लोकप्रियता में लगातार इजाफा हुआ और उन्हें एक नई पहचान मिली। अब ‘मां-बहन’ फिल्म में तृप्ति डिमरी, माधुरी दीक्षित और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर धारणा दुर्गा के साथ नजर आ रही हैं। फिल्म की कहानी एक ऐसी मां और उसकी दो बेटियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके जीवन में पिता की अनुपस्थिति और समाज की सोच कई तरह की चुनौतियां पैदा करती है। फिल्म में रवि किशन विलेन की भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं। फिल्म को दर्शकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है, जबकि इसकी आईएमडीबी रेटिंग 5.5 बताई जा रही है। निर्देशक सुरेश त्रिवेणी द्वारा बनाई गई यह फिल्म सामाजिक विषयों को लेकर चर्चा में बनी हुई है। रवि किशन का यह बयान अब फिल्म से आगे बढ़कर इंडस्ट्री में कलाकारों की छवि और टाइपकास्टिंग पर भी बहस छेड़ रहा है।

मंदसौर में मुहर्रम की पारंपरिक चौकी निकली, इमाम हुसैन की शहादत को किया याद

मध्यप्रदेश । मंदसौर शहर में मुहर्रम के पावन अवसर पर बुधवार रात पारंपरिक चौकी श्रद्धा, अनुशासन और अकीदत के साथ निकाली गई। इस धार्मिक आयोजन में हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए और हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की। पूरे मार्ग पर धार्मिक वातावरण देखने को मिला, जहां लोगों ने शांति, भाईचारे और इंसानियत के संदेश को आत्मसात किया। इस्लामिक कैलेंडर का पहला महीना मुहर्रम विशेष महत्व रखता है। यह महीना कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जिसमें हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सत्य, न्याय और मानवता की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उनकी शहादत आज भी त्याग, सब्र, साहस और इंसानियत की मिसाल मानी जाती है। इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मुहर्रम के दौरान विभिन्न धार्मिक आयोजन किए जाते हैं। मंदसौर में भी वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार ताजियों के आयोजन से पहले चौकी निकाली जाती है। बुधवार रात यह चौकी शेखा चौक क्षेत्र से प्रारंभ हुई। धार्मिक जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरता हुआ बोराबाखल, सम्राट मार्केट और घंटाघर क्षेत्र पहुंचा। देर रात लगभग 12:30 बजे मंडी गेट पर चौकी का समापन हुआ। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं का उत्साह और अनुशासन देखने लायक था। चौकी के दौरान अखाड़ों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक करतब लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहे। युवाओं ने अपनी कला, संतुलन और शारीरिक दक्षता का शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न प्रकार के पारंपरिक खेल और युद्धक कलाओं से जुड़े करतबों को देखने के लिए मार्ग के दोनों ओर बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए। दर्शकों ने इन प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस विभाग के अधिकारी और जवान पूरे मार्ग पर तैनात रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी की और यातायात सहित अन्य व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखा। सुरक्षा व्यवस्था के चलते पूरा आयोजन बिना किसी व्यवधान के संपन्न हुआ। मुस्लिम समाज की ओर से भी स्वयंसेवकों की विशेष टीम तैनात की गई थी। इन स्वयंसेवकों ने भीड़ प्रबंधन, श्रद्धालुओं के मार्गदर्शन और अन्य व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि मुहर्रम केवल शोक का पर्व नहीं, बल्कि त्याग, सत्य और इंसानियत के मूल्यों को याद करने का अवसर भी है। चौकी के सफल आयोजन के साथ शहर में धार्मिक सौहार्द और भाईचारे का संदेश भी देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने इमाम हुसैन की शिक्षाओं को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया और समाज में शांति, एकता तथा मानवता के मूल्यों को मजबूत करने की अपील की।

कर्नाटक विधान परिषद चुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका, दो विधायकों की क्रॉस वोटिंग से कांग्रेस की पांचवीं सीट की राह आसान

नई दिल्ली । कर्नाटक विधान परिषद की सात सीटों के लिए जारी चुनावी प्रक्रिया के बीच भारतीय जनता पार्टी को एक अप्रत्याशित राजनीतिक झटका लगा है। मतदान के दौरान भाजपा से निष्कासित दो विधायकों द्वारा कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किए जाने की खबर ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। इस घटनाक्रम को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण बढ़त और भाजपा के लिए रणनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। विधान परिषद की सात सीटों के लिए हो रहे चुनाव में कुल आठ उम्मीदवार मैदान में हैं। सामान्य परिस्थितियों में विधानसभा में मौजूद दलों की संख्या के आधार पर कांग्रेस चार और भाजपा दो सीटें आसानी से जीत सकती थी। हालांकि सातवीं सीट को लेकर पहले से ही कड़ा मुकाबला माना जा रहा था। अब क्रॉस वोटिंग की खबरों ने इस मुकाबले को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। राजनीतिक हलकों में सबसे अधिक चर्चा उन दो विधायकों को लेकर हो रही है जिन्होंने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया। दोनों नेताओं को पहले भाजपा से निष्कासित किया जा चुका है, लेकिन उनके वोटों का असर चुनावी परिणामों पर पड़ सकता है। मतदान के दौरान उनकी मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ मौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया। विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत माना है। कर्नाटक में हाल ही में नेतृत्व परिवर्तन के बाद डी.के. शिवकुमार ने मुख्यमंत्री पद संभाला है। ऐसे में विधान परिषद का यह चुनाव उनके नेतृत्व की पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। कांग्रेस की कोशिश है कि उपलब्ध संख्या बल के अलावा निर्दलीय और अन्य समर्थन जुटाकर परिषद में अपनी स्थिति और मजबूत बनाई जाए। दूसरी ओर भाजपा इस चुनाव को अपनी संगठनात्मक मजबूती और विपक्षी भूमिका के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को जीत सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम 28 वोटों की आवश्यकता है। विधानसभा में कांग्रेस के पास सबसे अधिक विधायक हैं, जबकि भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) भी अपनी राजनीतिक उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं। सातवीं सीट के लिए आवश्यक अतिरिक्त समर्थन जुटाने की चुनौती दोनों प्रमुख दलों के सामने रही है। ऐसे में क्रॉस वोटिंग की घटना चुनावी गणित को प्रभावित कर सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर केवल परिषद चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। यह भविष्य में राज्य की राजनीतिक दिशा और दलों के भीतर अनुशासन संबंधी सवालों को भी प्रभावित कर सकता है। विशेष रूप से भाजपा के लिए यह संकेत महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि पार्टी से अलग हो चुके नेताओं का प्रभाव अभी भी कुछ क्षेत्रों में बना हुआ है। चुनाव मैदान में कांग्रेस, भाजपा और जनता दल (सेक्युलर) के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला जारी है। कांग्रेस ने पांच उम्मीदवार उतारे हैं जबकि भाजपा के दो और जेडीएस का एक प्रत्याशी मैदान में है। इस कारण अंतिम सीट को लेकर राजनीतिक रणनीतियां लगातार बदलती रही हैं। मतदान समाप्त होने के बाद मतगणना के साथ ही तस्वीर साफ होगी कि क्रॉस वोटिंग का वास्तविक प्रभाव कितना पड़ा। हालांकि मतदान के दौरान सामने आए घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कर्नाटक की राजनीति में अंदरूनी खींचतान और राजनीतिक पुनर्संरेखण की प्रक्रिया अभी भी जारी है। विधान परिषद चुनाव के नतीजे न केवल दलों की वर्तमान ताकत को दर्शाएंगे, बल्कि आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक रणनीतियों और गठबंधनों की दिशा भी तय कर सकते हैं। इसी कारण सभी दलों की नजर अब मतगणना और अंतिम परिणामों पर टिकी हुई है।

मंदसौर में नीट परीक्षा की तैयारियां पूरी, 4 केंद्रों पर जैमर-सीसीटीवी और बायोमेट्रिक व्यवस्था रहेगी अनिवार्य

मध्यप्रदेश । मंदसौर जिले में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के सफल और पारदर्शी आयोजन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। गुरुवार को कलेक्टर अदिति गर्ग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से परीक्षा केंद्रों के एग्जाम कोऑर्डिनेटर और संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए कि परीक्षा का आयोजन पूरी सतर्कता, पारदर्शिता और सुगमता के साथ किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। जिले में इस वर्ष नीट परीक्षा चार प्रमुख केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इनमें लाल बहादुर शास्त्री उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय और राजीव गांधी शासकीय महाविद्यालय शामिल हैं। इन केंद्रों पर कुल 1,240 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल होंगे। प्रशासन ने सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं समय रहते पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने बताया कि विद्यार्थियों का प्रवेश सुबह 11 बजे से शुरू होगा, जबकि परीक्षा दोपहर 2 बजे से आयोजित होगी। परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्रों पर सुचारू प्रवेश व्यवस्था, बैठने की व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अभिभावकों के लिए भी अलग वेटिंग एरिया तैयार किया जाएगा, ताकि परीक्षा केंद्रों के बाहर अनावश्यक भीड़ न हो। परीक्षा की सुरक्षा और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए प्रशासन ने कड़े कदम उठाए हैं। सभी परीक्षा कक्षों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से संचालित रहेंगे और कंट्रोल रूम से उनकी लगातार निगरानी की जाएगी। इसके अलावा प्रत्येक केंद्र पर बायोमेट्रिक ई-मशीनों के माध्यम से अभ्यर्थियों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी। किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी या नकल की संभावना को रोकने के लिए सभी केंद्रों पर जैमर लगाए जाएंगे और उनकी कार्यशीलता की पूर्व जांच भी की जाएगी। बैठक में यह भी तय किया गया कि परीक्षा केंद्रों के 100 मीटर के दायरे में अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। वाहन पार्किंग की व्यवस्था भी निर्धारित स्थानों पर ही की जाएगी। दोपहर 1 बजे के बाद किसी भी बाहरी व्यक्ति को परीक्षा केंद्र परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग दल भी तैनात रहेगा, जो लगातार केंद्रों के आसपास निगरानी करेगा। स्वास्थ्य विभाग को प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर मेडिकल स्टाफ और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा विद्युत विभाग को निर्बाध बिजली आपूर्ति और पावर बैकअप सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, ताकि परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी बाधा उत्पन्न न हो। कलेक्टर अदिति गर्ग ने सभी सेंटर कोऑर्डिनेटर और अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि किसी भी केंद्र पर संसाधनों या व्यवस्थाओं की कमी दिखाई दे तो उसकी जानकारी तत्काल जिला प्रशासन को दी जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा और परीक्षा की निष्पक्षता सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराना है।

रास्ते के विवाद ने लिया हिंसक रूप, बुजुर्ग महिला को घसीटा; लाठी-डंडों से हुई मारपीट का वीडियो वायरल

मध्यप्रदेश । सीहोर शहर में गणेश मंदिर के पास रास्ते और जमीन के अधिकार को लेकर हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। दो पक्षों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते मारपीट तक पहुंच गया, जिसमें लाठी-डंडे, लात-घूंसे और धक्का-मुक्की का दौर चला। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने इलाके में सनसनी फैला दी है। जानकारी के अनुसार, विवाद एक छोटे से जमीन के टुकड़े और उससे जुड़े रास्ते के उपयोग को लेकर शुरू हुआ था। दोनों पक्षों के बीच पहले कहासुनी हुई, लेकिन कुछ ही देर में मामला इतना बढ़ गया कि लोग एक-दूसरे पर हमला करने लगे। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि विवाद के दौरान किसी ने भी संयम नहीं बरता और देखते ही देखते पूरा क्षेत्र रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे पर लाठी-डंडों और लात-घूंसों से हमला कर रहे हैं। मारपीट के दौरान महिलाओं और बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया। वीडियो में एक बुजुर्ग महिला को घसीटते हुए देखा जा सकता है, जबकि कुछ लोग उन्हें बचाने का प्रयास करते नजर आते हैं। इस दौरान महिलाओं की चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल साफ दिखाई देता है। घटना के दौरान कई लोगों को चोटें आई हैं। वीडियो में एक युवक जमीन पर बेसुध अवस्था में पड़ा दिखाई देता है, जबकि आसपास मौजूद लोग हंगामे को देखते रहते हैं। कुछ लोगों ने बीच-बचाव की कोशिश की, लेकिन स्थिति इतनी तनावपूर्ण थी कि विवाद को तुरंत शांत नहीं कराया जा सका। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर मौजूद होने के बावजूद झगड़ा रोकने के बजाय अपने मोबाइल फोन से वीडियो बनाते रहे। इससे मारपीट का सिलसिला और लंबा चलता रहा। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, विवाद काफी समय से चल रहा था और दोनों पक्षों के बीच पहले भी तनातनी की स्थिति बन चुकी थी। हालांकि इस बार मामला पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो गया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस को जानकारी दी गई, जिसके बाद मामले की जांच शुरू की गई। पुलिस अब वायरल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोगों की पहचान की जा रही है और जांच के आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे विवादों को समय रहते सुलझाने की आवश्यकता है, ताकि छोटी-छोटी बातों पर हिंसा की नौबत न आए। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन घटना के बाद इलाके में तनाव और चर्चा का माहौल बना हुआ है। पुलिस मामले पर नजर बनाए हुए है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।

G7 से लौटते ही अमित शाह से मिले अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर, आतंकवाद, सीमा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर हुई अहम चर्चा

नई दिल्ली । फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन से लौटने के तुरंत बाद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई मुलाकात ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। दोनों नेताओं के बीच हुई यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां, सीमा पार अपराध, आतंकवाद और आर्थिक साझेदारी जैसे मुद्दे दोनों देशों के एजेंडे में प्रमुख स्थान रखते हैं। बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच सुरक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति, सीमा सुरक्षा को प्रभावी बनाने और संगठित अपराधों पर कार्रवाई जैसे विषय बातचीत के केंद्र में रहे। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में लोकतांत्रिक देशों के बीच सुरक्षा सहयोग और खुफिया समन्वय को और मजबूत करने की आवश्यकता है। चर्चा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नशीले पदार्थों की तस्करी और उससे जुड़ी अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों पर भी केंद्रित रहा। दोनों देशों ने ड्रग्स नेटवर्क के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की जरूरत पर बल दिया। हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती मादक पदार्थों की तस्करी को देखते हुए भारत और अमेरिका दोनों इस मुद्दे को गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रहे हैं। इसी संदर्भ में सीमा प्रबंधन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में अपराधियों के प्रत्यर्पण और कानूनी सहयोग से जुड़े विषय भी शामिल रहे। दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि सीमा पार अपराधों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए न्यायिक और जांच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है। इससे दोनों देशों में कानून के शासन को मजबूत करने और अपराधियों को न्याय के दायरे में लाने में मदद मिलेगी। इस मुलाकात का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह G7 शिखर सम्मेलन के तुरंत बाद हुई है, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई थी। उस बैठक में व्यापार, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि सर्जियो गोर और अमित शाह की बैठक उसी व्यापक संवाद की निरंतरता का हिस्सा है। भारत लौटने के बाद सर्जियो गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी तस्वीर साझा करते हुए दोनों देशों के संबंधों को लेकर सकारात्मक संदेश दिया। उन्होंने संकेत दिया कि हालिया उच्चस्तरीय वार्ताओं से कई महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं और दोनों देश भविष्य में भी विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के संबंध अब केवल व्यापार या कूटनीति तक सीमित नहीं रह गए हैं। रक्षा, प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की स्थिरता जैसे विषय दोनों देशों की साझेदारी के प्रमुख आधार बन चुके हैं। ऐसे में उच्चस्तरीय बैठकों और लगातार संवाद को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक मुद्दों पर भी नई प्रगति देखने को मिल सकती है। इसी दिशा में आगे की वार्ताओं को गति देने के लिए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों के भारत दौरे की संभावना भी जताई जा रही है। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि सुरक्षा सहयोग के साथ-साथ आर्थिक साझेदारी भी दोनों देशों के संबंधों का महत्वपूर्ण स्तंभ बनी हुई है। भारत और अमेरिका के बीच लगातार बढ़ते संवाद और सहयोग को देखते हुए यह बैठक द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। दोनों देशों की प्राथमिकताओं में समानता और साझा रणनीतिक हित भविष्य में इस साझेदारी को और मजबूत बना सकते हैं।

भाजपा कार्यकर्ता सचिन राजपूत हत्याकांड का खुलासा, मुंहबोले जीजा ने चरित्र शंका में मारी गोली

मध्यप्रदेश । नर्मदापुरम जिले के सोहागपुर में भाजपा कार्यकर्ता और ढाबा संचालक सचिन राजपूत की हत्या के मामले का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड का आरोपी कोई बाहरी व्यक्ति नहीं, बल्कि सचिन का मुंहबोला जीजा विवेक गुर्जर निकला, जिसने चरित्र शंका के चलते इस वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से हत्या में इस्तेमाल की गई अवैध पिस्टल, बाइक, मोबाइल फोन और वारदात के समय पहने गए कपड़े बरामद कर लिए हैं। जानकारी के अनुसार, सचिन राजपूत पिपरिया रोड स्थित महुआ गांव के पास राजपूत ढाबा संचालित करता था। 17 जून की रात वह घर नहीं पहुंचा तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की और बाद में पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मोबाइल लोकेशन की मदद से जांच शुरू की। सचिन के मोबाइल की अंतिम लोकेशन स्टेट हाईवे से करीब एक किलोमीटर दूर रानी पिपरिया नहर क्षेत्र में मिली। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और रात करीब तीन बजे नहर की पुलिया के पास सचिन का खून से लथपथ शव बरामद किया। उसके सिर में गोली लगने का निशान था। शुरुआत में यह मामला अंधे कत्ल जैसा नजर आ रहा था, लेकिन पुलिस ने ढाबे और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो जांच की दिशा बदल गई। फुटेज में आरोपी विवेक गुर्जर दिखाई दिया, जो करीब 80 किलोमीटर दूर सीहोर जिले से बाइक पर सचिन के ढाबे पर पहुंचा था। फुटेज में यह भी देखा गया कि ढाबे पर पहुंचने के बाद सचिन ने सम्मान स्वरूप अपने मुंहबोले जीजा के पैर छुए और दोनों के बीच सामान्य बातचीत हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी पहले से ही हत्या की योजना बनाकर आया था। बातचीत के बाद वह सचिन को अपने साथ बाइक पर बैठाकर सुनसान रानी पिपरिया नहर की पुलिया तक ले गया। वहां पहुंचकर उसने सचिन के सिर में गोली मार दी और मौके से फरार हो गया। बाद में पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में विवेक गुर्जर ने स्वीकार किया कि उसे अपनी पत्नी और सचिन के बीच संबंधों को लेकर लंबे समय से संदेह था। इसी शक ने उसके मन में नफरत और बदले की भावना पैदा कर दी। उसने सुनियोजित तरीके से सचिन को रास्ते से हटाने का फैसला किया और हत्या की साजिश रच डाली। हत्याकांड की खबर फैलते ही सोहागपुर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर चक्काजाम किया और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। मौके पर पहुंचे पुलिस अधीक्षक साईं कृष्णा थोटा ने निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया, जिसके बाद प्रदर्शन समाप्त हुआ। सचिन राजपूत क्षेत्र में भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता और सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने वाले युवा के रूप में पहचान रखते थे। वह स्थानीय विधायक विजयपाल सिंह के करीबी समर्थक माने जाते थे और हर वर्ष विधायक ट्रॉफी क्रिकेट प्रतियोगिता का आयोजन भी करते थे। उनकी हत्या से क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है।