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सहमति से बने विवाहपूर्व संबंध चरित्र का पैमाना नहीं, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने दी महत्वपूर्ण संवैधानिक व्याख्या

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि दो अविवाहित वयस्कों के बीच आपसी सहमति से स्थापित शारीरिक संबंधों को किसी व्यक्ति के चरित्र, नैतिकता या योग्यता के खिलाफ प्रमाण के रूप में नहीं देखा जा सकता। अदालत ने कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में ऐसे संबंधों को केवल नैतिक दृष्टिकोण के आधार पर गलत ठहराना उचित नहीं है और इन्हें किसी व्यक्ति के आचरण पर नकारात्मक निष्कर्ष निकालने का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। यह टिप्पणी उस मामले की सुनवाई के दौरान सामने आई जिसमें तेलंगाना राज्य स्तरीय पुलिस भर्ती प्रक्रिया से जुड़े एक उम्मीदवार की नियुक्ति रद्द कर दी गई थी। भर्ती बोर्ड ने एक पुराने आपराधिक मामले को आधार बनाते हुए उम्मीदवार को नियुक्ति देने से इनकार किया था। मामला एक असफल प्रेम संबंध और उसके बाद दर्ज हुए विवाद से जुड़ा हुआ था। बाद में संबंधित प्रकरण समझौते के जरिए समाप्त हो गया था, लेकिन भर्ती प्रक्रिया के दौरान इसे उम्मीदवार के खिलाफ प्रतिकूल तथ्य के रूप में देखा गया। न्यायालय ने कहा कि किसी भी प्रेम संबंध का विवाह में बदलना अनिवार्य नहीं होता। दो वयस्कों के बीच बने संबंध विभिन्न परिस्थितियों में समाप्त हो सकते हैं और केवल संबंध के अंत को धोखा या छल का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी रिश्ते का विवाह तक न पहुंचना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि किसी एक पक्ष ने दूसरे के साथ गलत व्यवहार किया है। पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय कानून दो अविवाहित वयस्कों को आपसी सहमति से संबंध स्थापित करने से नहीं रोकता। ऐसे में केवल इस आधार पर किसी व्यक्ति के चरित्र पर प्रश्नचिह्न लगाना या उसे सार्वजनिक रोजगार के लिए अनुपयुक्त मानना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। अदालत के अनुसार व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वयस्कों की स्वायत्त पसंद का सम्मान संवैधानिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी कहा कि जब तक किसी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध नहीं हो जाते, तब तक उसे निर्दोष माना जाना चाहिए। केवल आरोप या समझौते के आधार पर किसी व्यक्ति के बारे में प्रतिकूल धारणा बनाना कानून के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। अदालत ने माना कि आरोप सिद्ध होने और मात्र आरोप लगाए जाने के बीच महत्वपूर्ण अंतर है, जिसे नियुक्ति देने वाले संस्थानों को समझना चाहिए। फैसले में शादी का वादा करके दुष्कर्म से जुड़े मामलों पर भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की गई। न्यायालय ने कहा कि यदि कोई आपराधिक मामला समझौते के माध्यम से समाप्त होता है तो इसे स्वतः अपराध स्वीकार करने के रूप में नहीं देखा जा सकता। जब तक यह साबित न हो कि समझौता किसी दबाव, धमकी या अनुचित प्रभाव के तहत कराया गया था, तब तक उसके आधार पर आरोपी के खिलाफ नकारात्मक निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अदालत ने आधुनिक सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि विवाहपूर्व संबंध आज के समय में पहले की तुलना में अधिक सामान्य होते जा रहे हैं। यदि दो वयस्क लंबे समय तक आपसी सहमति से संबंध में रहे हों, तो सामान्यतः यह माना जाएगा कि संबंध स्वेच्छा और समझदारी के साथ स्थापित किया गया था। ऐसे मामलों में नैतिक मान्यताओं के बजाय कानूनी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता, गरिमा और समान अवसर के अधिकार से जुड़े मामलों में भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ बन सकता है। अदालत की टिप्पणी यह संकेत देती है कि सार्वजनिक संस्थानों और नियोक्ताओं को किसी व्यक्ति का मूल्यांकन करते समय निजी जीवन से जुड़े ऐसे पहलुओं को सावधानी और संवैधानिक दृष्टिकोण से देखना होगा, न कि केवल सामाजिक धारणाओं के आधार पर। Google Photo Search Suggestion:

दिल्ली, यूपी और पंजाब में ईडी की ताबड़तोड़ कार्रवाई, संजीव अरोड़ा से जुड़े परिसरों की तलाशी से बढ़ी सियासी हलचल

नई दिल्ली । कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के तहत प्रवर्तन निदेशालय ने आम आदमी पार्टी के नेता संजीव अरोड़ा से जुड़े विभिन्न ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। मंगलवार सुबह शुरू हुई इस कार्रवाई के दौरान पंजाब, उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में स्थित कुल छह परिसरों को जांच के दायरे में लिया गया। एजेंसी की यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत जारी जांच का हिस्सा बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसी की टीमों ने पंजाब के लुधियाना और जालंधर, उत्तर प्रदेश के बरेली तथा दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के कई स्थानों पर एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जिन परिसरों की तलाशी ली जा रही है उनमें आवासीय संपत्तियों के साथ-साथ व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। अधिकारियों ने दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच की प्रक्रिया शुरू की है ताकि मामले से जुड़े तथ्यों की पुष्टि की जा सके। जांच का केंद्र कथित तौर पर हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड से जुड़े वित्तीय लेन-देन बताए जा रहे हैं। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विभिन्न कारोबारी गतिविधियों और वित्तीय लेन-देन में किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध धन के उपयोग के संकेत मौजूद हैं या नहीं। इसी उद्देश्य से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, बैंकिंग दस्तावेजों और अन्य कारोबारी अभिलेखों की भी पड़ताल की जा रही है। दिल्ली और नोएडा क्षेत्र में भी जांच एजेंसी की टीमें सक्रिय रहीं। यहां कई स्थानों पर दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की गई। हालांकि समाचार लिखे जाने तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से छापेमारी को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। ऐसे में जांच के दायरे, बरामद सामग्री अथवा आगे की कार्रवाई को लेकर एजेंसी की ओर से औपचारिक जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि पंजाब में व्यापारियों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने व्यापारिक समुदाय से घबराने की आवश्यकता न होने की बात कही और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है। इस बयान के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। संजीव अरोड़ा पहले भी केंद्रीय एजेंसियों की जांच के दायरे में आ चुके हैं। पिछले महीने उनके चंडीगढ़ स्थित आधिकारिक आवास पर लंबी तलाशी कार्रवाई के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। उस समय वह पंजाब सरकार में विद्युत, उद्योग और वाणिज्य विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। अरोड़ा की गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए उनके विभागों का पुनर्वितरण कर अन्य मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंप दी थी। अब ताजा छापेमारी ने एक बार फिर इस मामले को राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चाओं के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल जांच एजेंसी विभिन्न दस्तावेजों और रिकॉर्ड का विश्लेषण कर रही है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है। मामले में आगे की कार्रवाई और एजेंसी की आधिकारिक रिपोर्ट पर राजनीतिक दलों, कारोबारी जगत और आम जनता की नजर बनी हुई है।

जबलपुर में सनसनीखेज मामला, शक के चलते युवक पर चलाई थी गोली

मध्यप्रदेश । जबलपुर शहर में आपराधिक घटनाओं पर शिकंजा कसते हुए गढ़ा थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने युवक पर तीन राउंड फायरिंग करने वाले शातिर बदमाश करण विश्वकर्मा और उसकी गर्लफ्रेंड सोनानी बर्मन को गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के दौरान पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई पिस्टल भी बरामद कर ली है। यह पूरा मामला सोमवार रात करीब 10:30 बजे का है, जब आरोपी करण विश्वकर्मा अपनी गर्लफ्रेंड के साथ बाइक से लाल बिल्डिंग इलाके में पहुंचा था। वहीं उसकी मुलाकात अंकित लखेरा नामक युवक से हुई। दोनों के बीच किसी पुराने विवाद को लेकर कहासुनी शुरू हो गई, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गई। गुस्से में आकर करण विश्वकर्मा ने अपने पास रखी पिस्टल निकाल ली और एक के बाद एक तीन राउंड फायर कर दिए। अचानक हुई इस फायरिंग से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग जान बचाकर इधर-उधर भागने लगे और पूरा क्षेत्र दहशत में आ गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि गोली सीधे अंकित लखेरा को नहीं लगी। लेकिन फायरिंग से बचने के लिए भागते समय वह दीवार से टकरा गया, जिससे उसके सिर में गंभीर चोट आ गई। स्थानीय लोगों ने घायल युवक को तुरंत मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। घटना के बाद दोनों आरोपी मौके से फरार हो गए थे। सूचना मिलते ही गढ़ा थाना पुलिस सक्रिय हुई और इलाके में नाकाबंदी कर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी। लगातार चलाए गए सर्च ऑपरेशन के बाद पुलिस ने करण विश्वकर्मा और उसकी गर्लफ्रेंड सोनानी बर्मन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि करण विश्वकर्मा को अंकित लखेरा पर शक था कि वह उसकी गतिविधियों और लोकेशन की जानकारी उसके विरोधियों तक पहुंचाता है। इसी शक के चलते दोनों के बीच करीब एक महीने पहले भी विवाद हुआ था, जो बाद में रंजिश में बदल गया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस विवाद में हर्ष अहिरवार और आर्यन नामक अन्य लोगों की क्या भूमिका रही है। पुलिस के अनुसार, करण विश्वकर्मा का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से ही काफी लंबा है। उसके खिलाफ शहर के विभिन्न थानों में कई गंभीर मामले दर्ज हैं। यह भी सामने आया है कि वह पहले भी कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहा है। गढ़ा थाना प्रभारी प्रसन्न शर्मा ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ जारी है और पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल पिस्टल को जब्त कर लिया है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हथियार कहां से लाया गया था। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले को आपसी रंजिश और शक के आधार पर हुई हिंसक घटना मानकर जांच आगे बढ़ा रही है। साथ ही आरोपी महिला की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है कि घटना में उसकी कितनी और क्या भूमिका थी।

कटरा में घेराबंदी कर वाहन पकड़ा, ड्राइवर बोला- ठेकेदार की है शराब

मध्यप्रदेश । रीवा जिले में अवैध शराब के परिवहन और तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है। कटरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने घेराबंदी कर एक स्कॉर्पियो वाहन से भारी मात्रा में अवैध शराब जब्त की है। इस कार्रवाई में वाहन चालक को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि वाहन और शराब दोनों को कब्जे में लेकर आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस को यह कार्रवाई एक पुख्ता मुखबिर सूचना के आधार पर मिली। सूचना में बताया गया था कि एक संदिग्ध स्कॉर्पियो वाहन में बड़ी मात्रा में शराब लोड कर उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कटरा क्षेत्र में नाकाबंदी कर दी और संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू कर दी। कुछ समय बाद एक स्कॉर्पियो वाहन तेजी से गुजरता हुआ दिखाई दिया, जिसे पुलिस ने रोकने का प्रयास किया। वाहन को घेराबंदी कर जब रोका गया तो चालक शुरुआत में हड़बड़ाया, लेकिन तलाशी लेने पर पूरा मामला सामने आ गया। वाहन के अंदर 25 पेटी शराब रखी हुई मिली, जिसे अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा था। पुलिस ने मौके पर ही शराब को जब्त कर लिया और वाहन चालक को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की पहचान सिद्धार्थ सिंह के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि स्कॉर्पियो वाहन का नंबर MP 17 CC 8377 है। बरामद शराब की बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 1 लाख 12 हजार रुपये आंकी गई है। इस कार्रवाई के बाद इलाके में अवैध शराब के नेटवर्क को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्राथमिक पूछताछ में गिरफ्तार चालक ने दावा किया है कि यह शराब एक ठेकेदार की है और उसे केवल परिवहन के लिए वाहन उपलब्ध कराया गया था। हालांकि पुलिस इस बयान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर रही है और मामले की गहन जांच जारी है। एडिशनल एसपी संदीप मिश्रा ने बताया कि पुलिस इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से ले रही है। चालक के बयान के आधार पर शराब के स्रोत, आपूर्ति श्रृंखला और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की अनियमितता या अवैध कारोबार की पुष्टि होती है, तो संबंधित सभी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने यह भी बताया कि जिले में अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। समय-समय पर मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर ऐसे मामलों पर कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी सूरत में अवैध शराब के कारोबार को बढ़ने नहीं दिया जाएगा और इस तरह की गतिविधियों में शामिल लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल पुलिस जब्त वाहन और शराब को कब्जे में लेकर आगे की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह खेप कहां से लाई गई थी और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। पूरे नेटवर्क को खंगालने के लिए पुलिस टीम सक्रिय हो गई है।

TMC में बढ़ी कलह? भाजपा का दावा- 60 विधायक नाराज, ममता-अभिषेक से बना रहे दूरी..

नई दिल्ली ।  पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी All India Trinamool Congress के भीतर कथित असंतोष को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Shehzad Poonawalla ने दावा किया है कि पार्टी के भीतर बड़े स्तर पर नाराजगी बढ़ रही है और कई नेता वर्तमान नेतृत्व से दूरी बना रहे हैं। पूनावाला ने आरोप लगाया कि करीब 60 विधायक खुद को “असली टीएमसी” बता रहे हैं और Mamata Banerjee तथा Abhishek Banerjee के नेतृत्व से असहज हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी में परिवारवाद हावी हो गया है, जिससे संगठन के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। भाजपा प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि कुछ सांसद भी पार्टी नेतृत्व की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं और संगठन के भीतर मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं। उनके अनुसार यह स्थिति तृणमूल कांग्रेस के अंदर नेतृत्व संकट की ओर इशारा करती है। विवाद उस समय और बढ़ गया जब सोशल मीडिया पर एक कथित सूची वायरल हुई। इस सूची में दावा किया गया कि टीएमसी के 20 सांसदों का एक समूह केंद्र की एनडीए सरकार को समर्थन देने की तैयारी कर रहा है। सूची में पार्टी के कई वरिष्ठ और नए सांसदों के नाम होने की बात कही गई। हालांकि टीएमसी ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पार्टी नेता Kirti Azad ने वायरल सूची को फर्जी और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि सूची में शामिल कई सांसदों ने ऐसे किसी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार किया है। कीर्ति आजाद ने भाजपा पर “ऑपरेशन लोटस” के जरिए पार्टी में फूट डालने की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एकजुट है और विपक्षी दलों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम का कोई असर नहीं पड़ेगा। फिलहाल भाजपा के आरोपों और टीएमसी के खंडन के बीच पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। पार्टी के भीतर वास्तविक स्थिति को लेकर राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी है।

सिलपरा डैम हादसा: नहाते समय डूबे जवान गौरव द्विवेदी, NDRF ने 3 घंटे में निकाला शव

मध्यप्रदेश ।  रीवा जिले के चोरहटा डीसी (डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर) में 11 केवी बिजली लाइन पर काम कर रहे एक कर्मचारी के साथ गंभीर हादसा हो गया। ट्रांसफार्मर का काम करने के लिए खंभे पर चढ़े कर्मचारी कमलेश को अचानक लाइन चालू हो जाने से तेज करंट लग गया। करंट से उसके कपड़ों में आग लग गई और वह ऊंचाई से सीधे नीचे आ गिरा, जिससे उसके हाथ-पैर टूट गए हैं और वह बुरी तरह झुलस गया है। घायल कर्मचारी के परिजनों और सहकर्मियों ने बिजली विभाग पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कमलेश विधिवत लाइन बंद कराकर ही खंभे पर काम कर रहा था। इसी बीच किसी ने बिजली सप्लाई चालू कर दी। घटना मंगलवार सुबह की है। अस्पताल में चल रहा इलाज, हालत गंभीरहादसे के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोग मदद के लिए दौड़े। साथी कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की मदद से कमलेश को फौरन अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, करंट की चपेट में आने से वह काफी झुलस गया है और ऊंचाई से गिरने के कारण उसके दोनों हाथ और पैरों में मल्टीपल फ्रैक्चर आए हैं। फिलहाल उसे कड़ी चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। अधिकारियों को दी गई सूचना, जांच की मांगइस घटना की जानकारी तुरंत बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी गई है। हादसे के बाद से स्थानीय कर्मचारियों में रोष है। वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष विभागीय जांच कराने और लापरवाही बरतने वालों की जिम्मेदारी तय कर उन पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

रीवा में 6 दिन बाद मिला सेना के जवान का शव, नहर का पानी रोककर चला बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन

मध्यप्रदेश । रीवा जिले के सिलपरा डैम में डूबे 28 वर्षीय सेना के जवान गौरव द्विवेदी का शव आखिरकार मंगलवार सुबह बरामद कर लिया गया। यह खोज अभियान लगातार 6 दिनों तक चला, जिसमें NDRF, SDERF और स्थानीय प्रशासन की टीमें जुटी रहीं। जवान की मौत ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया है। जानकारी के मुताबिक, बघवार गांव निवासी गौरव द्विवेदी बीते बुधवार को अपने भाई-बहनों के साथ सिलपरा डैम घूमने गए थे। नहाते समय अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गहरे पानी में चले गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। लगातार कई दिनों तक गोताखोरों और बचाव दल ने डैम में सर्च अभियान चलाया, लेकिन पानी की गहराई और सीमित दृश्यता के कारण सफलता नहीं मिल पाई। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने मंगलवार को बड़ा फैसला लेते हुए नहर का पानी रोक दिया, जिससे डैम का जलस्तर करीब 40 फीट तक कम हो गया। सुबह 6 बजे से NDRF आगरा की स्पेशल टास्क फोर्स और SDERF की टीम ने फिर से संयुक्त अभियान शुरू किया। लगभग तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद सुबह 9 बजे जवान का शव पानी से बाहर निकाल लिया गया। शव मिलने की सूचना जैसे ही परिजनों तक पहुंची, वहां चीख-पुकार मच गई। पूरे गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है और आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने रेस्क्यू टीमों के प्रयासों की सराहना की है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों के बावजूद लगातार खोज अभियान जारी रखा।

TMC बगावत पर भड़कीं सागरिका घोष, बोलीं- अमित शाह का एक फोन आते ही खत्म हो जाती है नैतिकता

नई दिल्ली । तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच Sagarika Ghose ने पार्टी से बगावत करने वाले नेताओं और सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लंबा पोस्ट लिखकर दल-बदल की राजनीति को शर्मनाक बताते हुए इसकी नैतिकता पर सवाल खड़े किए। सागरिका घोष ने कहा कि वह राजनीति में इसलिए आईं क्योंकि उनका मानना है कि Narendra Modi के नेतृत्व वाली बीजेपी देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए विपक्ष की लड़ाई में उनका विश्वास है। टीएमसी सांसद ने Mamata Banerjee के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका भरोसा ममता बनर्जी पर पहले भी था और आगे भी रहेगा। उन्होंने ममता को साहस और मूल्य आधारित राजनीति का प्रतीक बताया। सागरिका घोष ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी की प्रतिबद्धता चुनाव परिणामों के साथ बदल जाती है, तो फिर उसकी प्रतिबद्धता कभी वास्तविक थी ही नहीं। उन्होंने कहा कि किसी नेता और पार्टी के नाम पर चुनाव जीतने के बाद मुश्किल समय में उनका साथ छोड़ देना समझ से परे है। अपने बयान में उन्होंने सीधे तौर पर Amit Shah पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या एक फोन कॉल आते ही सारी नैतिकता खत्म हो जाती है? उन्होंने इसे लोकतांत्रिक राजनीति के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में टीएमसी के कई नेताओं और सांसदों के अलग रुख अपनाने की खबरों ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। बागी खेमे के कुछ नेताओं ने दावा किया है कि कई सांसद एनडीए को समर्थन देने के पक्ष में हैं, जिससे राज्य की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

अश्लील वीडियो से ब्लैकमेल कर 2.77 करोड़ की उगाही का आरोप, यूथ कांग्रेस नेता समेत दो गिरफ्तार

नई दिल्ली । कर्नाटक के मंगलुरु में एक कारोबारी से करोड़ों रुपये की कथित जबरन वसूली के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। पुलिस ने एक व्यापारी को ब्लैकमेल कर लगभग 2.77 करोड़ रुपये वसूलने के आरोप में यूथ कांग्रेस के एक पदाधिकारी और उसके सहयोगी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार मामला केवल आर्थिक उगाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सुनियोजित धोखाधड़ी, मानसिक दबाव और फर्जी घटनाक्रम रचने जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों की पहचान यूथ कांग्रेस से जुड़े पदाधिकारी निजाम और उसके सहयोगी जितेश के रूप में हुई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर व्यापारी को पहले निजी और संवेदनशील सामग्री के आधार पर निशाना बनाया गया। आरोप है कि व्यापारी की अश्लील तस्वीरों और वीडियो का उपयोग कर उसे ब्लैकमेल किया गया तथा बदनामी का डर दिखाकर बड़ी रकम की मांग की गई। जांच अधिकारियों के अनुसार शुरुआत में व्यापारी से 35 लाख रुपये मांगे गए थे। आरोपियों ने कथित रूप से वीडियो सार्वजनिक करने और परिवार तक पहुंचाने की धमकी दी थी। सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक छवि को नुकसान पहुंचने की आशंका के चलते व्यापारी ने रकम का भुगतान कर दिया। हालांकि इसके बाद भी पैसों की मांग बंद नहीं हुई और कथित तौर पर लगातार दबाव बनाया जाता रहा। मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित ने सहायता के लिए निजाम से संपर्क किया। व्यापारी को उम्मीद थी कि वह विवाद सुलझाने में मदद करेगा, लेकिन पुलिस का दावा है कि निजाम भी कथित उगाही की पूरी योजना में शामिल था। जांच एजेंसियों का कहना है कि दोनों आरोपियों ने मिलकर व्यापारी पर दबाव बनाए रखने के लिए एक और साजिश रची। पुलिस के अनुसार मई 2024 में व्यापारी को यह विश्वास दिलाया गया कि जितेश ने आत्महत्या कर ली है। आरोपियों ने कथित तौर पर एक फर्जी सुसाइड नोट का हवाला दिया, जिसमें व्यापारी का नाम होने की बात कही गई। इसके साथ ही मौत और अंतिम संस्कार से जुड़ी तस्वीरें दिखाकर यह साबित करने का प्रयास किया गया कि घटना वास्तविक है। व्यापारी को यह भी बताया गया कि उसके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के भय से व्यापारी लगातार पैसे देता रहा। पुलिस का दावा है कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच विभिन्न माध्यमों से कुल 2.77 करोड़ रुपये की उगाही की गई। इस दौरान पीड़ित मानसिक दबाव और सामाजिक बदनामी की आशंका में आरोपियों की मांगें पूरी करता रहा। मामले का खुलासा तब हुआ जब जून 2026 में व्यापारी ने जितेश को मंगलुरु में जीवित देखा। जिस व्यक्ति को वह मृत समझ रहा था, उसे सामने देखकर उसे पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ। इसके बाद उसने उरवा पुलिस स्टेशन पहुंचकर विस्तृत शिकायत दर्ज कराई और पूरे मामले की जानकारी अधिकारियों को दी। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियां अब वित्तीय लेन-देन, कथित ब्लैकमेलिंग नेटवर्क और मामले से जुड़े अन्य संभावित पहलुओं की भी पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस कथित रैकेट में अन्य लोग भी शामिल थे। गिरफ्तारी के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। सोशल मीडिया पर विभिन्न राजनीतिक कार्यक्रमों और नेताओं के साथ आरोपी की तस्वीरें साझा की जा रही हैं। हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि फिलहाल पूरा ध्यान आरोपों की सत्यता, वित्तीय रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच पर केंद्रित है।

इंदौर में खजराना मंदिर पुजारियों को हटाने की मांग, दहेज प्रताड़ना के आरोपों से बढ़ा विवाद

मध्यप्रदेश । इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर से जुड़े पुजारी परिवार एक बार फिर विवादों में घिर गया है। पीड़िता डॉ. इंद्रा भट्ट ने आरोप लगाया है कि मई 2025 में पुजारी पुनित भट्ट से विवाह के बाद ससुराल पक्ष ने दहेज की मांग शुरू कर दी और मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना दी। इस मामले में महिला थाना इंदौर में पुजारी परिवार के कई सदस्यों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना, मारपीट और धमकी देने जैसी धाराओं में एफआईआर दर्ज है। साथ ही घरेलू हिंसा का मामला भी अदालत में विचाराधीन बताया जा रहा है। मंदिर से हटाने और गर्भगृह प्रवेश पर रोक की मांगपीड़िता ने अब कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचकर मांग की है कि जब तक मामले की जांच पूरी नहीं होती, संबंधित पुजारियों को मंदिर में पूजा कार्य और गर्भगृह में प्रवेश से रोका जाए। उनका कहना है कि खजराना गणेश मंदिर राज्य अधिनियम के तहत संचालित होता है, इसलिए जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें अस्थायी रूप से जिम्मेदारियों से हटाया जाना चाहिए। अनियमितताओं के भी लगाए आरोपशिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं द्वारा दी जाने वाली दक्षिणा के उपयोग में अनियमितताएं हुई हैं। पीड़िता ने दावा किया है कि उनके पास इसके समर्थन में वीडियो और दस्तावेज मौजूद हैं। कानूनी दांव-पेच और प्रशासनिक मांगपीड़िता के वकील का कहना है कि मंदिर अधिनियम के तहत प्रशासन को अधिकार है कि वह जांच लंबित रहने तक पुजारियों को सेवा से अलग कर सकता है। वहीं, दूसरे पक्ष की ओर से भी कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया जा रहा है। आगे बढ़ सकता है मामलापीड़िता ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो वह मुख्यमंत्री तक मामला लेकर जाएंगी। अब यह मामला केवल घरेलू विवाद न रहकर प्रशासनिक और धार्मिक संस्थान की भूमिका तक पहुंच गया है।