किन लोगों को होता है टीबी का सबसे ज्यादा खतरा? समय रहते जांच कराना क्यों है जरूरी, जानिए

नई दिल्ली । तपेदिक यानी टीबी (ट्यूबरकुलोसिस) आज भी भारत सहित दुनिया के कई देशों के लिए एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बनी हुई है। यह एक संक्रामक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन समय पर इलाज न मिलने पर शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी का इलाज पूरी तरह संभव है, लेकिन इसके लिए बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर उपचार बेहद जरूरी है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अनुसार, कुछ विशेष वर्गों के लोगों में टीबी संक्रमण का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में काफी अधिक होता है। ऐसे लोगों को अपनी सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतने और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराने की सलाह दी जाती है। सबसे अधिक जोखिम उन लोगों को होता है जो किसी टीबी मरीज के संपर्क में रहते हैं। यदि परिवार, घर या आसपास किसी व्यक्ति को सक्रिय टीबी है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे मामलों में नियमित स्क्रीनिंग और चिकित्सकीय सलाह बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कुपोषण से पीड़ित लोग भी टीबी की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता संक्रमण के खिलाफ लड़ने की ताकत को कम कर देती है। यही कारण है कि कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में टीबी का खतरा अधिक पाया जाता है। जो लोग पिछले पांच वर्षों में टीबी से ठीक हो चुके हैं, उन्हें भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मामलों में संक्रमण दोबारा सक्रिय हो सकता है। इसलिए ऐसे लोगों को नियमित जांच और डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए। एचआईवी से संक्रमित व्यक्तियों में भी टीबी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। एचआईवी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है, जिससे टीबी का संक्रमण तेजी से फैल सकता है और गंभीर रूप ले सकता है। मधुमेह यानी डायबिटीज के मरीज भी इस बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील माने जाते हैं। यदि ब्लड शुगर लंबे समय तक नियंत्रित नहीं रहता, तो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में भी उम्र बढ़ने के साथ इम्युनिटी कमजोर होने लगती है, जिससे टीबी का जोखिम बढ़ जाता है। लंबे समय से धूम्रपान या शराब का सेवन करने वाले लोगों को भी विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। धूम्रपान फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, जबकि अत्यधिक शराब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देती है। इससे टीबी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों, झुग्गी बस्तियों, जेलों, अनाथालयों और वृद्धाश्रमों में रहने वाले लोगों में भी टीबी तेजी से फैल सकती है। खराब स्वच्छता, सीमित संसाधन और नजदीकी संपर्क संक्रमण के प्रसार को आसान बना देते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, रात में ज्यादा पसीना आना, भूख कम लगना या लगातार थकान महसूस हो रही है, तो उसे तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक आहार, स्वच्छता, धूम्रपान और शराब से दूरी तथा समय पर उपचार ही टीबी से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। टीबी एक गंभीर बीमारी जरूर है, लेकिन जागरूकता, समय पर जांच और सही इलाज से इसे पूरी तरह हराया जा सकता है। इसलिए जोखिम वाले वर्गों को अपनी सेहत के प्रति लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए और नियमित जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।
MP में कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों की बल्ले-बल्ले….. मोहन यादव सरकार ने बढ़ाया वेतन

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने कॉन्ट्रैक्ट (Contract.) पर काम करने वाले लगभग 1.25 लाख कर्मचारियों अधिकारियों को सौगात दी है। मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav Govt) ने इन कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों अधिकारियों के सालाना वेतन में 4.46 फीसदी की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों अधिकारियों (Contract Employees and Officers) की सेलरी में यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी। फैसला राज्य की 2023 की कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी के तहत कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर लिया गया है। 1.25 लाख कर्मचारियों को फायदामध्य प्रदेश के वित्त विभाग के अनुसार, मोहन यादव सरकार ने सोमवार को कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन में 4.46 फीसदी की सालाना बढ़ोतरी को मंजूरी दी। यह बढ़ोतरी इसी साल 1 अप्रैल से लागू कर दी जाएगी। इससे लगभग 1.25 लाख कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों अधिकारियों को फायदा होगा। यह बढ़ोतरी राज्य की कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी के तहत की गई है। इस नीति को 22 जुलाई 2023 को अमल में लाया गया था। कितनी होगी बढ़ोतरी?बता दें कि कॉन्ट्रैक्ट एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर सालाना वेतनमान में बदलाव का प्रावधान किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले पर एमपी कॉन्ट्रैक्टुअल ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश राठौर ने सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि इस बदलाव से कर्मचारियों के वेतन में पे स्केल के आधार पर लगभग 1,000 रुपये से 2,500 रुपये प्रति माह की बढ़ोतरी हो जाएगी। एक जैसे कॉन्ट्रैक्ट पदों के लिए समान वेतनमध्य प्रदेश के वित्त विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार, इस बार कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों की सेलरी में पिछली बार से अधिक बढ़ोतरी की गई है। इस साल 1 अप्रैल से सालाना बढ़ोतरी की दर 4.46 प्रतिशत तय की गई है जबकि पिछले साल यह 2.94 फीसदी थी। बता दें कि 2023 की पॉलिसी से पहले अलग-अलग विभागों में एक जैसे कॉन्ट्रैक्ट पदों के लिए अलग-अलग वेतन मिलता था। इस पॉलिसी से अलग-अलग विभागों में एक जैसे कॉन्ट्रैक्ट पदों के लिए समान वेतन तय है। कर्मचारी संघ ने की है यह मांगबता दें कि नई नीति के तहत कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों का वेतन चपरासी पद के लिए 21,800 रुपये से लेकर असिस्टेंट इंजीनियर और असिस्टेंट मैनेजर के लिए 70,000 रुपये प्रति माह तक रखा गया है। कर्मचारी संघ की मांग है कि जिन विभागों में 2023 की पॉलिसी लागू नहीं हुई है वे भी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को बढ़ी हुई सेलरी जारी करें।
इंडिया गठबंधन में कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं…. इंडिया गठबंधन में सहयोगियों दलों ने खोला मोर्चा

नई दिल्ली। हाल ही में तमिलनाडु (Tamil Nadu), केरल (Kerala) और पश्चिम बंगाल (West Bengal) के विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) के बाद ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन में दरारें गहरी होती जा रही हैं। सोमवार को नई दिल्ली में हुई विपक्षी दलों की अहम बैठक में वीसीके (VCK) और वामपंथी दलों ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति को लेकर जोरदार हमला बोला है। तमिलनाडु की सत्ता से बाहर हुई डीएमके की नाराजगी इस कदर बढ़ गई है कि उसने गठबंधन में कांग्रेस के मौजूद रहने पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। डीएमके की दो टूक- ‘कांग्रेस रहेगी तो हम नहीं’डीएमके के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी अब इंडिया गठबंधन का हिस्सा तभी बनेगी, जब कांग्रेस इस गुट का हिस्सा नहीं होगी। डीएमके के एक वरिष्ठ नेता ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “हम चुनाव प्रणाली ‘SIR’ के मुद्दे पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को भेजे जाने वाले पत्र पर भी हस्ताक्षर नहीं करेंगे।” नई दिल्ली में हुई इस बैठक में कांग्रेस द्वारा डीएमके से नाता तोड़ने का मुद्दा पूरी तरह छाया रहा और सहयोगियों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। राहुल गांधी पर वामदलों का सीधा हमलाकेरल में कांग्रेस और वामदलों के बीच की तल्खी बैठक के दौरान खुलकर सामने आ गई। सीपीएम नेता जॉन ब्रिटास, सीपीआई के संतोष कुमार और डी. राजा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने केरल चुनाव के दौरान लेफ्ट को ‘बीजेपी की बी-टीम’ बताया था। वामपंथी नेताओं ने डीएमके के गठबंधन से अलग होने के लिए कांग्रेस को ही जिम्मेदार ठहराया और कई आरोप लगाए। जैसे- कांग्रेस ने तमिलनाडु चुनाव खत्म होने के ठीक बाद अचानक टीवीके (TVK) के पाले में जाकर द्रविड़ पार्टी (डीएमके) को उकसाने का काम किया है। कांग्रेस के इसी रवैये के कारण डीएमके ने गठबंधन छोड़ने जैसा बड़ा कदम उठाया। कांग्रेस की रणनीति से बिखर रहा है विपक्ष: वीसीकेबैठक के दौरान वीसीके (VCK) के प्रमुख तोल थिरुमावलवन ने कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पार्टी के हालिया फैसलों ने कई सहयोगी दलों के भीतर गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। उन्होंने गठबंधन के भविष्य पर चिंता जताते हुए कुछ अहम बिंदु रखे: जैसे- केरल, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में कांग्रेस की जो रणनीति रही है, उसने गठबंधन के उन प्रमुख स्तंभों को कमजोर किया है जो अब तक मजबूती से खड़े थे। कांग्रेस के इस रवैये से मुख्य रूप से डीएमके, टीएमसी (TMC) और सीपीएम (CPM) जैसी अहम पार्टियों को नुकसान पहुंचा है। वीसीके प्रमुख ने स्पष्ट किया कि विपक्षी एकजुटता के बड़े लक्ष्य को देखते हुए कांग्रेस की यह रणनीति न तो वांछनीय है और न ही किसी भी तरह से फायदेमंद। सूत्रों ने बताया कि बैठक में शामिल माकपा के राज्यसभा सदस्य ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों का विषय उठाया। भाकपा महासचिव डी राजा ने भी इसको लेकर नाराजगी जताई कि राष्ट्रीय स्तर पर एक व्यापक गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद कांग्रेस द्वारा केरल में वाम नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की नीति के तहत पार्टी की ओर से चुनाव में एक विषय उठाया गया था। विपक्ष के कुछ अन्य नेताओं ने भी कहा कि अब इन बातों को भूलकर आगे बढ़ना है और मिलकर भाजपा का मुकाबला करना है। सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने कहा कि गठबंधन के घटक दलों को एक दूसरे की आलोचना से बचना चाहिए। क्या रहा बैठक का नतीजा?विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की बैठक में शामिल कई नेताओं ने पुराने गिले-शिकवे भूलकर, बड़ा दिल दिखाते हुए और एकजुट होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा मोदी सरकार को चुनौती देने का सुझाव दिया। सूत्रों ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने इस बात की जोरदार पैरवी की कि गठबंधन में शामिल दलों को एक दूसरे की आलोचना करने से बचना चाहिए। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस गठबंधन को लेकर उनके रुख में बड़ा बदलाव आया है। बैठक में ममता और कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के बीच गर्मजोशी भरी मुलाकात भी हुई। सूत्रों ने बताया कि बैठक औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले ममता ने सोनिया गांधी से करीब 10 मिनट लंबी बातचीत की। कांग्रेस ने दोनों नेताओं की एक-दूसरे को गले लगाते हुए तस्वीर भी अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा की।
केन्द्र सरकार ने Ujjwala Yojna में किया बड़ा बदलाव…. अब साल में मिलेंगे सिर्फ 4 सिलेंडर

नई दिल्ली। देश में हाल ही में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (Domestic LPG Cylinder Prices) में तेल वितरण कंपनियों ने 29 रुपये की बढ़ोतरी कर महंगाई का बम फोड़ा था. ये तीन महीने में 14.2 किलोग्राम वाले LPG Cylinder की कीमत में दूसरी बढ़ोतरी थी. सिलेंडर महंगा होने के बाद अब सरकार (Government) ने उज्ज्वला योजना (Ujjwala Yojna) के लाभार्थियों को बड़ा झटका दिया है. इस सरकारी स्कीम के तहत मिलने वाले रियायती सिलेंडरों की संख्या में बड़ी कटौती की गई है। इसके साथ ही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, PMUY के लाभार्थियों को पहले चार रिफिल पर प्रति सिलेंडर 300 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) मिलेगा. उज्ज्वला योजना वाले एक आम परिवार में औसतन साल भर में लगभग चार रिफिल की खपत होती है, पहले PMUY लाभार्थियों को साल में 9 रिफिल पर DBT मिलता था। 9 नहीं, अब सिर्फ 4 सिलेंडरप्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत अब तक लाभार्थियों के लिए रियायती एलपीजी सिलेंडरों की संख्या 9 थी, जिसे कम करते हुए सरकार ने सिर्फ 4 कर दिया है. केंद्र सरकार के इस बड़े फैसले को लेकर अधिकारियों ने बताया कि ये कदम वित्तीय सहायता को वास्तविक औसत घरेलू खपत के स्तर के अनुरूप बनाता है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण मल खानूजा ने इस संबंध में कहा कि संशोधित पात्रता उज्ज्वला परिवारों की औसत सालाना गैस खपत को ध्यान में रखकर तय की गई है. 2016 में शुरुआत, अब तक ऐसे घटी संख्यामोदी सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत मई 2016 में की थी और इसका उद्देश्य वंचित परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना था. योजना की शुरुआत में इसके लाभार्थियों को सालाना 12 रियायती 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर दिए जाते थे. लेकिन फिर सरकार ने इस वार्षिक कोटे को कम करते 9 कर दिया था और अब इसे घटाकर सिर्फ चार करने का फैसला लिया गया है. उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाले सिलेंडर पर सरकार सब्सिडी (LPG Cylinder Subsidy) भी देती है. इन्हें किफायती बनाए रखने के लिए सरकार ने मई 2022 में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर 200 रुपये की सब्सिडी शुरू की, जिसे अगले साल यानी अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 300 रुपये प्रति सिलेंडर कर दिया गया था. सरकार की ओर से दी जाने वाली ये एलपीजी सब्सिडी हर रिफिल खरीद के बाद लाभार्थियों के बैंक खातों में सीधे जमा की जाती है। उज्ज्वला योजना के तहत सिलेंडर का दामबता दें कि 7 जून को घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी, जिसके बाद दिल्ली में 14.2 किलोग्राम एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 942 रुपये हो गई. इससे पहले 7 मार्च को तेल वितरण कंपनियों ने 60 रुपये की बढ़ोतरी की थी. इस हिसाब से 300 रुपये की सब्सिडी के साथ उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अपने पहले चार सिलेंडरों के लिए प्रति रिफिल 642 रुपये का भुगतान करना होगा. पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों को देखें, तो सरकार ने 2022 से अब तक एलपीजी सब्सिडी के रूप में 52,000 करोड़ रुपये दिए हैं. हाल ही में घरेलू खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, सरकारी तेल विपणन कंपनियां बेचे गए प्रत्येक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का घाटा उठा रही हैं।
बैंक खाते में बड़ी रकम डालते ही आ सकता है IT नोटिस…. जानिए क्या है नियम

नई दिल्ली। बैंक खाते (Bank Accounts) में बड़ी नकद रकम जमा होते ही आयकर विभाग (Income Tax Department) की नजर उस पर पड़ सकती है। खासकर नोटबंदी (Demonetization) के बाद से नकद जमा, कैश बिक्री और कारोबार की नकदी को लेकर जांच का दायरा बढ़ा है। आयकर अपीलीय अधिकरण (Income Tax Appellate Tribunal) यानी आईटीएटी के हालिया फैसलों ने एक बात साफ कर दी है…सिर्फ बैंक में कैश जमा होना अपराध नहीं है। सवाल यह है कि उस कैश का स्रोत क्या है और क्या करदाता उसे साबित कर सकता है। क्या है पूरा मामला? हालिया मामलों में आयकर विभाग ने नोटबंदी के दौरान जमा बड़ी नकद रकम को अघोषित आय मानकर टैक्स की मांग की। एक मामले में स्क्रैप कारोबारी के खाते में 1.28 करोड़ नकद जमा हुए थे। विभाग ने इसे शक के दायरे में मानते हुए भारी टैक्स मांग बनाई। करदाता ने कहा, यह रकम उसके स्क्रैप कारोबार की बिक्री से जुड़ी थी। पिछले वर्षों में भी इसी तरह के कारोबार और नकद बिक्री को विभाग स्वीकार कर चुका था। आईटीएटी ने करदाता को राहत देते हुए कहा, अगर कारोबार का पुराना रिकॉर्ड, बहीखाते और बिक्री का पैटर्न नकद जमा को समर्थन देते हैं, तो केवल बैंक में पैसा जमा होने से उसे अघोषित आय नहीं कहा जा सकता। फिर दूसरे मामले में करदाता क्यों हारादिल्ली आईटीएटी के एक अन्य मामले में 1.34 करोड़ की नकद जमा को लेकर करदाता को राहत नहीं मिली। करदाता ने इसे नकद बिक्री बताया, लेकिन जांच में खरीद-बिक्री के दावों, दस्तावेजों और लेनदेन में गंभीर विसंगतियां मिलीं। खरीद लेनदेन वास्तविक नहीं लगे और बिक्री की कहानी बहीखातों से मजबूत तरीके से साबित नहीं हो पाई। आईटीएटी ने माना, कारोबार की कहानी कागजों पर बनाई गई लगे और खरीद बिक्री का आधार भरोसेमंद न हो, तो नकद जमा अघोषित आय मानी जाएगी। आईटीएटी का संदेश क्या है?– दोनों फैसलों का सार है कि आयकर विभाग सिर्फ रकम नहीं, बल्कि उसकी कहानी देखता है। बैंक में जमा नकद आपकी आय, कारोबार, पुराने रिकॉर्ड, खरीद-बिक्री बिल, स्टॉक रजिस्टर और कैश बुक से मेल खाती है, तो उसे समझाया जा सकता है। – अगर रिटर्न में कम आय दिखाई गई हो, कारोबार का रिकॉर्ड कमजोर हो और अचानक खाते में लाखों या करोड़ों रुपये नकद जमा हो जाएं, तो नोटिस आने और टैक्स मांग बनने की आशंका बढ़ जाती है।– अगर नकद जमा अघोषित आय मानी गई, तो आयकर कानून की धारा 69ए और 115बीबीई के तहत टैक्स बहुत भारी पड़ सकता है। ये दस्तावेज जरूरी नकद बिक्री या कारोबार से आई रकम साबित करने के लिए करदाता के पास खरीद-बिक्री बिल, स्टॉक रजिस्टर, कैश बुक, बैंक स्टेटमेंट, जीएसटी रिटर्न, आयकर रिटर्न, पुराने वर्षों का टर्नओवर और ग्राहक सप्लायर रिकॉर्ड होना चाहिए। अगर कारोबारी कहता है कि नकद जमा बिक्री से आया है, तो उसे दिखाना होगा कि उसके पास इतना स्टॉक था, बिक्री वास्तव में हुई थी और रकम बहीखातों में सही तरीके से दर्ज थी।
अवैध इमिग्रेशन और नशे की तस्करी रोकने के लिए साथ काम करेंगे रूस-पाकिस्तान, दोनों के बीच हुई बड़ी डील

बिश्केक। किर्गिस्तान (Kyrgyzstan) की राजधानी बिश्केक (Bishkek) में शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organization- SCO) के गृह और सार्वजनिक सुरक्षा मंत्रियों की अहम बैठक के दौरान पाकिस्तान और रूस (Pakistan and Russia) के बीच एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। पाकिस्तानी गृह मंत्रालय के मुताबिक, दोनों देशों ने अवैध इमिग्रेशन और नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए एक साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी इस विशेष बैठक में हिस्सा लेने के लिए बिश्केक में मौजूद थे। इस दौरे पर उन्होंने रूस के अलावा कई अन्य सदस्य देशों के नेताओं से भी मुलाकात की, जिसमें अफगानिस्तान से पनप रहे ‘आतंकवाद’ का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। रूस के साथ समझौते की अहम बातेंपाकिस्तानी गृह मंत्रालय के अनुसार, गृह मंत्री मोहसिन नकवी और उनके रूसी समकक्ष व्लादिमीर कोलोकोल्त्सेव के बीच जिन समझौतों पर मुहर लगी है, वे इस प्रकार हैं-– अवैध नागरिकों का डिपोर्टेशन: पाकिस्तान के गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, दोनों देश एक-दूसरे के यहां अवैध रूप से रह रहे नागरिकों की पहचान करने और उनकी वतन वापसी सुनिश्चित करने में एक-दूसरे की मदद करेंगे।– घुसपैठ पर लगाम: अवैध इमिग्रेशन को रोकने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाया जाएगा ताकि गैर-कानूनी तरीके से होने वाली आवाजाही को रोका जा सके।– ड्रग्स तस्करी पर एक्शन: नशीले पदार्थों की हेराफेरी को जड़ से खत्म करने के लिए भी दोनों पक्षों के बीच एक अलग और महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। इसके तहत ड्रग सिंडिकेट्स के खिलाफ साझा कार्रवाई की जाएगी। SCO के मंच का फायदा उठाते हुए पाकिस्तानी गृह मंत्री ने उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के प्रतिनिधियों के साथ भी अलग-अलग बैठकें कीं।– उज्बेकिस्तान: उज्बेक गृह मंत्री अजीज ताशपुलातो के साथ लॉ एन्फोर्समेंट एजेंसियों (कानून लागू करने वाली संस्थाओं) के बीच सहयोग और जॉइंट ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू करने पर चर्चा हुई। इसके लिए दोनों देशों के गृह मंत्रालयों के बीच एक ‘वर्किंग ग्रुप’ बनाने का भी फैसला लिया गया।– किर्गिस्तान: किर्गिस्तान के गृह मंत्री उलान नियाजबेकोव के साथ आपसी हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार पर सहमति बनी। नकवी ने किर्गिस्तान को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का गैर-स्थायी सदस्य चुने जाने पर बधाई दी और SCO बैठक के शानदार इंतजामों के लिए उनका शुक्रिया अदा किया।– कजाकिस्तान: कजाख समकक्ष यर्झान सादेनोव के साथ अवैध इमिग्रेशन को रोकने के लिए द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने और आपसी रिश्तों को मजबूत करने के लिए एक वर्किंग ग्रुप बनाने पर रजामंदी हुई। अफगानिस्तान में रूस का ‘डबल गेमदूसरी तरफ रूस और अफगानिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों ने क्षेत्रीय कूटनीति में बड़ी हलचल पैदा कर दी है। कूटनीतिक मामलों की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘द डिप्लोमैट’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, रूस अब अफगानिस्तान को लेकर एक बेहद सधी हुई दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है। मॉस्को और तालिबान के बीच तेजी से गहरे होते संबंध इस बात का साफ इशारा हैं कि अफगानिस्तान की विदेश नीति में बड़े बदलाव आ रहे हैं और इस पूरे खेल में सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ रहा है। रूस की दोहरी रणनीति क्या है?रिपोर्ट के मुताबिक, रूस अफगानिस्तान के मामले में एक साथ दो अलग-अलग मोर्चों पर काम कर रहा है। आतंकवाद पर सार्वजनिक रुख: रूस एक तरफ सार्वजनिक मंचों पर अफगानिस्तान से पनपने वाले आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मध्य एशिया के देशों में अपनी व्यापक सुरक्षा भूमिका और सैन्य दखल को सही ठहराना है। तालिबान के साथ सुरक्षा गठजोड़: वहीं दूसरी तरफ, रूस पर्दे के पीछे तालिबान के साथ अपने सुरक्षा संबंधों का लगातार विस्तार कर रहा है। मॉस्को का लक्ष्य तालिबान के साथ इस रणनीतिक गठजोड़ के जरिए मध्य एशिया में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए एक ठोस जमीनी हथियार तैयार करना है। पाकिस्तान के लिए सिकुड़ती जा रही है जमीनरूस और तालिबान के बीच इस नए समीकरण ने पाकिस्तान के रणनीतिक दांव-पेंच को बुरी तरह उलझा दिया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया है कि पाकिस्तान के लिए अब अफगानिस्तान में पैंतरेबाजी की गुंजाइश लगातार खत्म होती जा रही है। रूस के साथ नए समझौते और संबंध स्थापित होने के बाद, अफगानिस्तान (काबुल) अब इस स्थिति का इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ एक ‘लेवरेज’ या कूटनीतिक हथियार के तौर पर कर रहा है। पहले जो पाकिस्तान अफगानिस्तान के मामलों में एक ‘रिंगमास्टर’ की भूमिका में खुद को देखता था, अब रूस की सीधी एंट्री और तालिबान की स्वतंत्र विदेश नीति के कारण उसका प्रभाव तेजी से घट रहा है।
लक्षद्वीप को लेकर केन्द्र सरकार का बड़ा फैसला…., 47 साल से लागू शराबबंदी को किया खत्म

नई दिल्ली। लक्षद्वीप (Lakshadweep) को लेकर केंद्र सरकार (Central government) ने बड़ा फैसला किया है। यहां 47 साल पहले लागू की गई शराबबंदी (Prohibition of alcohol) अब खत्म कर दी गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक द्वीपसमहू में पर्यटन को बढ़ावा देने और राजस्व के लिए सरकार ने यह फैसला किया है। आपको बता दें कि लक्षद्वीप में मुस्लिम आबादी ज्यादा है। ऐसे में इस्लामिक सिद्धातों को देखते हुए यहां 1979 में शराबबंदी लागू की गई थी। रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से लक्षद्वीप के लोग खुश नहीं हैं। क्यों हटा ली गई शराबबंदीराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने लक्षद्वीप एक्साइज रेग्युलेशन 2026 पर साइन कर दिए हैं। इसके बाद लक्षद्वीप प्रोहिबिशन रेग्युलेश 1979 को वापस ले लिया गया है। केंद्र सरकार लक्षद्वीप को वैश्विक पर्यटन के केंद्र के रूप में विकसित करना चाहती है। ऐसे में विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए रेस्तरां और होटलों में शराब उपलब्ध करवाने और रेवेन्यू जनरेट करने के लिए सरकार ने लगभग 50 साल पुराना कानून वापस ले लिया है। नए नियमों के मुताबिक नियंत्रित तरीके से द्वीपसमूह में शराब बेची जा सकगी। सरकार को इससे बड़ा मुनाफा होने वाला है. सरकार शराब पर एक्साइज ड्यूटी, लाइसेंस फीस और अन्य चार्ज लगाकर कमाई करेगी। पूरी तरह से लागू की गई शराबबंदी को नए कानून ने रिप्लेस कर दिया है और अब नियंत्रित करीके से शराब की मैन्युफेक्चरिंग, आयात, निर्यात, ट्रांसपोर्ट और बिक्री को लागू किया जाएगा। साथ ही सरकार इन सारी गतिविधियों पर पूरी नजर रखेगी। कैसे काम करेगा नया नियमरिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऐसा नहीं है कि शराब को मनमाने तरीके से बेचने की छूट दे दी गई है। इसपर सरकार का पूर् नियंत्रण होगा। देसी और विदेशी शराब पर 400 फीसदी का आबकारी कर लगाया गया है। इसके अलावा बियर पर 200 फीसदी और वाइन पर 80 पर्सेंट का कर वसूला जाएगा। इसके अलावा सरकारी और प्राइवेट एजेंसियां शराब बिक्री के लिए लाइसेंस ले सकती हैं। 21 साल से नीचे वालों को शराब बेचने की अनुमति नहीं होगी। क्यों है इस फैसले पर विवाद कि आशंकालक्षद्वीप में 96.5 पर्सेंट मुसलमान रहते हैं। 1979 में शराबबंदी इस्लामिक सिद्धातों को ध्यान में रखकर ही की गई थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां शराब बेचने की अनुमति देकर माहौल बिगाड़ने का ही प्रयास है। अपने फायदे के लिए सरकार समाज को दूषित करना चाहती है। लक्षद्वीप से सांसद हमदुल्लाह सईद ने भी सरकार के इस फैसले का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस तरह से सरकार की उपलब्धता से युवाओं को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। वे नशे के आदी हो जाएंगे और फिर लक्षद्वीप में भी अपराध बढ़ने लगेंगे।
शेयर बाजार में आज रहना होगा सतर्क! ग्लोबल दबाव के बीच उतार-चढ़ाव की आशंका, निवेशकों की नजर निफ्टी-सेंसेक्स पर

नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए आज का कारोबारी सत्र उतार-चढ़ाव भरा रहने की संभावना है। सोमवार को बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद निवेशकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सेंसेक्स और निफ्टी संभल पाएंगे या फिर दबाव और बढ़ेगा। वैश्विक संकेत फिलहाल बाजार के पक्ष में नजर नहीं आ रहे हैं। एशियाई बाजारों में कमजोरी, अमेरिका के बाजारों में बिकवाली, मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली थी। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों महत्वपूर्ण स्तरों से नीचे फिसल गए थे। बाजार पूंजीकरण में भी भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों की संपत्ति में लाखों करोड़ रुपये की कमी आई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितताओं का असर अभी भी बना हुआ है। आज के कारोबार में सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों का रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी भारत जैसे आयातक देशों के लिए चिंता का विषय है। इससे महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका रहती है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार की धारणा पर पड़ता है। हालांकि बाजार के लिए कुछ सकारात्मक संकेत भी मौजूद हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी निवेश को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदम और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की लगातार खरीदारी बाजार को समर्थन दे सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत घरेलू निवेश प्रवाह बाजार में बड़ी गिरावट को सीमित कर सकता है। तकनीकी दृष्टि से देखें तो निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि यह स्तर बना रहता है तो बाजार में रिकवरी देखने को मिल सकती है। वहीं इसके नीचे फिसलने पर बिकवाली का दबाव और बढ़ सकता है। निवेशकों को फिलहाल जल्दबाजी में बड़े दांव लगाने से बचने और गुणवत्ता वाले शेयरों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। बैंकिंग, एफएमसीजी और चुनिंदा डिफेंस शेयरों में निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है, जबकि आईटी और निर्यात आधारित सेक्टर वैश्विक दबाव के कारण कमजोर रह सकते हैं। कुल मिलाकर आज का दिन बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है, लेकिन चुनिंदा सेक्टरों में अवसर भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रणनीति के साथ बाजार में कदम रखने की जरूरत होगी।
मौसम का बदलेगा मिजाज! आंधी, बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, कई राज्यों में राहत तो कहीं बढ़ेगी उमस

मध्य प्रदेश। देशभर में मौसम का मिजाज एक बार फिर बदलने जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 9 जून को कई राज्यों में तेज आंधी, बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम सक्रिय रहने की संभावना है। मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, जिसके चलते कई क्षेत्रों में राहत की बारिश देखने को मिल सकती है, जबकि कुछ इलाकों में गर्मी और उमस का असर बरकरार रहेगा। मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और अन्य राज्यों में तेज हवाओं के साथ बारिश की संभावना जताई है। कई स्थानों पर 60 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है। लोगों को अनावश्यक यात्रा से बचने और खराब मौसम के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। मध्य प्रदेश में भी मौसम के तेवर बदले हुए नजर आ सकते हैं। भोपाल, सीहोर, विदिशा, सागर, सतना, उज्जैन और आसपास के इलाकों में तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश के आसार हैं। पिछले दिनों प्रदेश के कई हिस्सों में तेज हवाएं दर्ज की गई थीं, जिससे तापमान में गिरावट और मौसम में बदलाव देखने को मिला था। दक्षिण भारत में मानसून की गतिविधियां तेज हो रही हैं। केरल और कर्नाटक में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है। कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने बाढ़ और जलभराव की आशंका को देखते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पूर्वोत्तर भारत में भी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना है। असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और आसपास के राज्यों में व्यापक वर्षा के संकेत हैं। वहीं उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में बादलों की आवाजाही के बावजूद उमस और गर्मी का असर महसूस किया जा सकता है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की प्रगति के साथ आने वाले दिनों में देश के अधिक हिस्सों में वर्षा गतिविधियां बढ़ेंगी। हालांकि कुछ क्षेत्रों में अभी भी गर्म और शुष्क हवाओं का प्रभाव बना रह सकता है। ऐसे में नागरिकों को मौसम विभाग की चेतावनियों और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की आवश्यकता है। कुल मिलाकर 9 जून का दिन मौसम के लिहाज से काफी सक्रिय रहने वाला है। कहीं बारिश राहत देगी तो कहीं तेज हवाएं और बिजली गिरने का खतरा चुनौती बन सकता है। इसलिए घर से निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें और आवश्यक सावधानी बरतें।
नींबू से स्किन केयर: चेहरे पर निखार या नुकसान? जानिए सही इस्तेमाल का तरीका

नई दिल्ली । सुंदर और बेदाग त्वचा पाने के लिए लोग अक्सर घरेलू नुस्खों का सहारा लेते हैं। इन्हीं में से एक है नींबू, जो विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है। नींबू को त्वचा की रंगत निखारने, अतिरिक्त तेल कम करने और दाग-धब्बों को हल्का करने के लिए लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है। हालांकि त्वचा विशेषज्ञों का मानना है कि नींबू का उपयोग सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि इसकी अम्लीय प्रकृति कई लोगों की त्वचा को नुकसान भी पहुंचा सकती है। नींबू में मौजूद विटामिन-सी त्वचा में कोलेजन उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करता है, जिससे त्वचा स्वस्थ और चमकदार दिखाई दे सकती है। इसके अलावा इसमें प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं, जो मुंहासों की समस्या को कम करने में सहायक हो सकते हैं। तैलीय त्वचा वाले लोगों के लिए नींबू अतिरिक्त तेल को नियंत्रित करने में मददगार माना जाता है। हालांकि नींबू को सीधे चेहरे पर लगाना हमेशा सुरक्षित नहीं माना जाता। इसकी अधिक अम्लीयता त्वचा में जलन, लालिमा, खुजली और रुखापन पैदा कर सकती है। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को विशेष रूप से सावधानी बरतनी चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नींबू के रस को सीधे लगाने के बजाय शहद, दही या गुलाब जल जैसी चीजों के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना बेहतर होता है। स्किन केयर के लिए एक लोकप्रिय उपाय नींबू और शहद का मिश्रण है। एक चम्मच शहद में कुछ बूंदें नींबू का रस मिलाकर चेहरे पर 10 से 15 मिनट तक लगाया जा सकता है। इसके बाद सादे पानी से चेहरा धो लें। यह त्वचा को नमी देने के साथ हल्की चमक भी प्रदान कर सकता है। वहीं दही और नींबू का मिश्रण त्वचा की टैनिंग कम करने में मददगार माना जाता है। नींबू का इस्तेमाल करने के बाद धूप में जाने से बचना चाहिए। नींबू में मौजूद कुछ तत्व सूर्य की किरणों के प्रति त्वचा को अधिक संवेदनशील बना सकते हैं, जिससे जलन या पिग्मेंटेशन की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए नींबू आधारित फेस पैक का उपयोग शाम के समय करना अधिक उपयुक्त माना जाता है। यदि त्वचा पर पहले से किसी प्रकार की एलर्जी, घाव, एक्जिमा या गंभीर मुंहासे हैं, तो नींबू का प्रयोग करने से पहले त्वचा विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। किसी भी घरेलू नुस्खे को अपनाने से पहले पैच टेस्ट करना भी एक अच्छा विकल्प है। कुल मिलाकर, नींबू स्किन केयर में उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसका सही और संतुलित इस्तेमाल ही त्वचा को लाभ पहुंचाता है। बिना जानकारी के अत्यधिक प्रयोग करने से फायदे की जगह नुकसान भी हो सकता है।