कच्चे तेल में नरमी के बावजूद तुरंत नहीं घटेंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें, सरकार ने बताया 12,000 करोड़ रुपये के बोझ और वैश्विक हालात का पूरा गणित

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट के बाद देश में पेट्रोल और डीजल के दाम कम होने की उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल कच्चे तेल के सस्ता होने से उपभोक्ताओं को तुरंत राहत मिलना संभव नहीं है। सरकार का कहना है कि घरेलू ईंधन कीमतों का निर्धारण एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें वैश्विक बाजार की स्थिति के साथ-साथ आयात, परिवहन, कर व्यवस्था और तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति जैसे कई महत्वपूर्ण पहलू शामिल होते हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से दिए गए बयान में कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारतीय बाजार तक पहुंचने में समय लगता है। कम कीमत पर खरीदा गया कच्चा तेल तुरंत रिफाइनरियों तक नहीं पहुंचता, बल्कि इसके आयात, परिवहन और प्रसंस्करण की पूरी प्रक्रिया में कई सप्ताह लग सकते हैं। ऐसे में वैश्विक बाजार में आई तात्कालिक नरमी का सीधा प्रभाव घरेलू खुदरा कीमतों पर तुरंत दिखाई नहीं देता। सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी थी। इस दौरान कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला, जिससे आयात लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ डालने के बजाय सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अतिरिक्त वित्तीय दबाव अपने ऊपर लिया। सरकारी आकलन के अनुसार, बढ़ी हुई लागत का असर सीमित रखने के प्रयास में केंद्र को लगभग 12,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ा। सरकार का मानना है कि इस आर्थिक दबाव की भरपाई और बाजार संतुलन बनाए रखने के लिए मूल्य निर्धारण में सावधानी बरतना आवश्यक है। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में थोड़ी गिरावट आते ही खुदरा ईंधन दरों में तत्काल कटौती करना व्यावहारिक नहीं माना जा रहा है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल के अंतरराष्ट्रीय भाव से निर्धारित नहीं होतीं। इसमें रिफाइनिंग लागत, फ्रेट चार्ज, बीमा, मुद्रा विनिमय दर, केंद्रीय और राज्य कर तथा विपणन खर्च भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि इनमें से किसी एक क्षेत्र में लागत बढ़ती है तो उसका असर अंतिम कीमतों पर पड़ सकता है। इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 78 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड भी नरम रुख के साथ 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कूटनीतिक प्रयासों में प्रगति के संकेतों ने निवेशकों की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया है, जिससे तेल कीमतों पर दबाव घटा है। हालांकि ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि वैश्विक बाजार अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे कारक आने वाले समय में तेल कीमतों की दिशा तय करेंगे। ऐसे में भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर किसी भी त्वरित निर्णय की संभावना फिलहाल सीमित दिखाई देती है।
शिवपुरी ब्लास्ट में दूसरी मौत: 11 साल के मासूम ने तोड़ा दम, 4 साल की बच्ची की पहले ही जा चुकी थी जान

मध्यप्रदेश । शिवपुरी जिले के खनियाधाना थाना क्षेत्र स्थित गुड़र गांव में हुए दर्दनाक ब्लास्ट ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। बुधवार सुबह हुए इस भीषण हादसे में गुरुवार को दूसरी मौत हो गई। ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में भर्ती 11 वर्षीय कल्ला आदिवासी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इससे पहले हादसे में 4 वर्षीय जानवी प्रजापति की मौके पर ही मौत हो गई थी। दो मासूमों की मौत के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे गुड़र गांव में स्थित प्राणसिंह प्रजापति के घर में अचानक जोरदार धमाका हुआ। उस समय घर में खाना बनाने का काम चल रहा था। धमाका इतना भीषण था कि मकान की छत और दीवारें पलभर में ढह गईं। विस्फोट के साथ आग की तेज लपटें उठीं और आसपास का क्षेत्र दहल उठा। धमाके की आवाज दूर-दूर तक सुनाई दी, जिससे ग्रामीण बड़ी संख्या में घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। हादसे के समय घर में मौजूद 4 वर्षीय जानवी प्रजापति मलबे के नीचे दब गई थी। ग्रामीणों और बचाव दल ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। इस दर्दनाक दृश्य ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। वहीं पड़ोस में रहने वाला 11 वर्षीय कल्ला आदिवासी भी उस समय घर के भीतर मौजूद था और विस्फोट में गंभीर रूप से झुलस गया था। कल्ला को गंभीर हालत में पहले शिवपुरी मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने उसकी स्थिति नाजुक देखते हुए उसे तत्काल ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल रेफर कर दिया था। पिछले दो दिनों से उसका इलाज चल रहा था, लेकिन गुरुवार को उसने भी जिंदगी की जंग हार दी। उसके निधन की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। हादसे में रौशनी प्रजापति, प्राण सिंह प्रजापति और शिवा प्रजापति भी गंभीर रूप से घायल हुए हैं। तीनों का उपचार ग्वालियर में जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन और पुलिस की प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि घर में रखे पेट्रोल-डीजल या गैस सिलेंडर में विस्फोट के कारण यह हादसा हुआ हो सकता है। हालांकि अभी तक ब्लास्ट के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। विशेषज्ञों की टीम विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद ही विस्फोट की असली वजह सामने आ सकेगी। घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर अर्पित वर्मा, पुलिस अधीक्षक यांगचेन डोलकर भूटिया और स्थानीय विधायक प्रीतम लोधी ने मौके का निरीक्षण किया था। अधिकारियों ने पीड़ित परिवारों को हर संभव सहायता का भरोसा दिया है। वहीं प्रशासन ने हादसे की विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। दो मासूमों की मौत ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। गांव के लोग अब भी उस भयावह धमाके को याद कर सहम जा रहे हैं। हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जिसने कुछ ही पलों में दो मासूम जिंदगियों को निगल लिया।
उज्जैन में स्कूल बसों पर चला सुरक्षा का चाबुक: 70 वाहनों की जांच, फिटनेस से लेकर सीसीटीवी तक की हुई पड़ताल

मध्यप्रदेश । उज्जैन में नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होते ही विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन और यातायात पुलिस पूरी तरह सक्रिय नजर आ रही है। स्कूल खुलने के साथ ही शहर में छात्र परिवहन वाहनों की व्यापक जांच शुरू कर दी गई है। इसी क्रम में बुधवार और गुरुवार को यातायात पुलिस द्वारा विशेष वाहन जांच अभियान चलाया गया, जिसके तहत करीब 70 स्कूल बसों और अन्य छात्र परिवहन वाहनों का निरीक्षण किया गया। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विद्यार्थियों को स्कूल लाने-ले जाने वाले वाहन सभी निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं। हाल के वर्षों में स्कूल वाहनों से जुड़े हादसों को देखते हुए प्रशासन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। यही वजह है कि नए सत्र के पहले ही सप्ताह में सुरक्षा व्यवस्था की गहन समीक्षा शुरू कर दी गई है। मोहन नगर चौराहे पर आयोजित इस विशेष जांच अभियान में ट्रैफिक डीएसपी विक्रम कनपुरिया, डीएसपी दिलीप परिहार और यातायात थाना प्रभारी सूबेदार इंद्रपाल सिंह सहित पुलिस अधिकारियों की टीम मौजूद रही। अधिकारियों ने एक-एक वाहन की बारीकी से जांच कर सुरक्षा से जुड़े सभी आवश्यक पहलुओं का परीक्षण किया। जांच के दौरान स्कूल बसों की फिटनेस को विशेष रूप से परखा गया। साथ ही यह भी देखा गया कि वाहन के पास वैध दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। इसके अलावा अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट एड बॉक्स, आपातकालीन निकास द्वार, स्पीड गवर्नर और सीसीटीवी कैमरों जैसी जरूरी सुरक्षा सुविधाओं की भी जांच की गई। अधिकारियों ने वाहन चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस, अनुभव और परिचालकों की उपलब्धता की भी जानकारी ली। यातायात डीएसपी दिलीप परिहार ने बताया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह अभियान चलाया गया है। स्कूल वाहन संचालकों और प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परिस्थिति में सुरक्षा नियमों से समझौता नहीं किया जाएगा। जिन वाहनों में सुरक्षा संबंधी कमियां पाई गईं, उन्हें तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने स्कूल संचालकों को यह भी समझाया कि बच्चों के परिवहन में उपयोग होने वाले वाहनों का नियमित रखरखाव और समय-समय पर तकनीकी परीक्षण बेहद आवश्यक है। छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है, इसलिए सभी सुरक्षा उपकरण हमेशा कार्यशील स्थिति में रहने चाहिए। यातायात पुलिस ने साफ किया है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि आगे भी लगातार जारी रहेगा। समय-समय पर स्कूल बसों और छात्र परिवहन वाहनों की जांच की जाएगी ताकि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित हो सके। पुलिस का मानना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षित यात्रा केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन, वाहन संचालकों और अभिभावकों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ शुरू हुआ यह अभियान स्कूल परिवहन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल वाहन संचालकों में जवाबदेही बढ़ेगी, बल्कि अभिभावकों को भी अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर अधिक भरोसा मिलेगा।
रणथंभौर एक्सप्रेस में धुआं उठते ही मची भगदड़: यात्री पटरियों पर कूदे, 10 मिनट बाद दूसरी ट्रेन पहुंची, मुरैना हादसे जैसी स्थिति बनी

मध्यप्रदेश । रतलाम जिले के आलोट क्षेत्र स्थित लूणी-रीछा स्टेशन के पास गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब इंदौर से जोधपुर जा रही रणथंभौर एक्सप्रेस के जनरल कोच के पहियों से अचानक धुआं निकलने लगा। सुबह करीब पौने 10 बजे हुई इस घटना ने यात्रियों को दहशत में डाल दिया और कई लोग अपनी जान बचाने के लिए सामान सहित ट्रेन से उतरकर पटरियों पर कूद पड़े। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रेन स्टेशन के पास पहुंची ही थी कि जनरल कोच के पहियों से धुआं उठता दिखाई दिया। कुछ यात्रियों ने इसे आग लगने की घटना समझ लिया, जिसके बाद कोचों में हड़कंप मच गया। देखते ही देखते यात्री ट्रेन से बाहर निकलने लगे और कई लोग सीधे रेलवे ट्रैक पर उतर गए। इस दौरान मौके पर अफरा-तफरी और भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक लूणी-रीछा स्टेशन पर रणथंभौर एक्सप्रेस का निर्धारित ठहराव नहीं है। अचानक सिग्नल रेड होने के कारण लोको पायलट को इमरजेंसी ब्रेक लगाने पड़े। इसी दौरान एक पहिए के हार्ड एक्सल पर ब्रेक शू जाम होकर चिपक गया, जिससे अत्यधिक घर्षण पैदा हुआ और धुआं निकलने लगा। हालांकि यह तकनीकी खराबी थी और आग लगने जैसी कोई बड़ी घटना नहीं हुई। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे कर्मचारी अग्निशमन यंत्र लेकर मौके पर पहुंचे और तत्काल स्थिति को नियंत्रित किया। फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से धुआं उठने की समस्या पर काबू पाया गया। करीब 20 मिनट तक ट्रेन स्टेशन पर खड़ी रही, जिसके बाद तकनीकी जांच पूरी कर उसे सुरक्षित आगे के लिए रवाना कर दिया गया। इस घटना के दौरान सबसे चिंताजनक बात यह रही कि यात्रियों की अफरा-तफरी के बीच करीब 10 मिनट बाद कोटा-उज्जैन मेमू ट्रेन भी उसी स्टेशन पर पहुंच गई। सौभाग्य से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, लेकिन हालात कुछ समय के लिए बेहद खतरनाक बन गए थे। रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि किसी भी आपात स्थिति में बिना पुष्टि के पटरियों पर न उतरें और रेलवे कर्मचारियों के निर्देशों का पालन करें। यह घटना हाल ही में मुरैना में हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे की याद भी ताजा कर गई। 14 जून को खजुराहो-उदयपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस में मोबाइल फटने के बाद आग लगने की अफवाह फैल गई थी। घबराकर कई यात्री ट्रेन से उतरकर दूसरे ट्रैक पर पहुंच गए थे, जहां दूसरी ट्रेन की चपेट में आने से चार लोगों की मौत हो गई थी। उस हादसे ने रेलवे सुरक्षा और यात्रियों की जागरूकता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। गौरतलब है कि इसी लूणी-रीछा क्षेत्र में पिछले महीने राजधानी एक्सप्रेस के एसी कोच में भी आग लगने की घटना सामने आई थी। ऐसे में एक बार फिर रेलवे सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि इस बार रेलवे कर्मचारियों की त्वरित कार्रवाई के चलते बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यात्रियों में भय और असुरक्षा की भावना जरूर देखने को मिली।
महाकाल मंदिर में गर्भगृह प्रवेश पर फिर विवाद, डिजिटल क्रिएटर की तस्वीरों से उठा VIP कल्चर का मुद्दा; सांसद फिरोजिया ने जताई नाराजगी

मध्यप्रदेश ।उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर गर्भगृह प्रवेश को लेकर विवादों में घिर गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हुई कुछ तस्वीरों ने मंदिर प्रशासन की व्यवस्था और आम श्रद्धालुओं के साथ किए जा रहे व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है। तस्वीरों में दिल्ली निवासी डिजिटल क्रिएटर अक्षय आनंद अपनी पत्नी और मित्रों के साथ महाकाल मंदिर के गर्भगृह में दर्शन करते दिखाई दे रहे हैं। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने वीआईपी संस्कृति और दोहरे मापदंडों को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार यह तस्वीरें 15 जून की बताई जा रही हैं। उस दिन सोमवती अमावस्या होने के कारण महाकाल मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी। इसी दौरान अक्षय आनंद ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर गर्भगृह में दर्शन करते हुए तस्वीरें साझा कीं। तस्वीरों में वे पारंपरिक धोती-सोला पहनकर गर्भगृह में मौजूद नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, गर्भगृह परिसर में फोटो भी खिंचवाई गईं, जबकि मंदिर परिसर में फोटोग्राफी पर प्रतिबंध लागू है। तस्वीरें वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि जब आम भक्तों को वर्षों से गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति नहीं है, तो कुछ चुनिंदा लोगों को विशेष सुविधा कैसे दी जा रही है। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे वीआईपी कल्चर का उदाहरण बताया। विवाद बढ़ने के बाद महाकाल मंदिर प्रशासन की ओर से सफाई भी सामने आई। मंदिर प्रशासक ने बताया कि अक्षय आनंद और उनके साथ मौजूद अन्य लोग हाईकोर्ट के न्यायाधीशों के साथ मंदिर पहुंचे थे। इसी वजह से उन्हें गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति दी गई थी। हालांकि इस स्पष्टीकरण के बाद भी लोगों की नाराजगी कम होती दिखाई नहीं दे रही है। मामले में उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने भी खुलकर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महाकाल मंदिर में वीआईपी संस्कृति का बढ़ता प्रभाव चिंता का विषय है और वे इसके घोर विरोधी हैं। सांसद ने कहा कि वे स्वयं आज भी सामान्य श्रद्धालुओं की तरह लाइन में लगकर भगवान महाकाल के दर्शन करते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी माताजी पिछले कई दशकों से नियमित रूप से महाकाल मंदिर जाती हैं और कभी किसी विशेष सुविधा का लाभ नहीं लेतीं। सांसद फिरोजिया ने कहा कि भगवान के दरबार में सभी समान हैं। यहां किसी राजा और रंक में कोई अंतर नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को भी चेताते हुए कहा कि उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि अंततः सभी को भगवान महाकाल की शरण में ही जाना है। उन्होंने मांग की कि प्रतिदिन कम से कम दो घंटे के लिए महाकाल मंदिर का गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोला जाए, ताकि भक्त स्वयं जलाभिषेक और पूजन कर सकें। उन्होंने बताया कि इस विषय पर वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा कर चुके हैं। गौरतलब है कि महाकाल मंदिर का गर्भगृह जुलाई 2023 में श्रावण मास के दौरान बढ़ती भीड़ को देखते हुए आम श्रद्धालुओं के लिए बंद किया गया था। उस समय इसे अस्थायी व्यवस्था बताया गया था, लेकिन लंबे समय बीत जाने के बाद भी गर्भगृह आम भक्तों के लिए नहीं खोला गया। अब वायरल तस्वीरों ने एक बार फिर मंदिर में वीआईपी व्यवस्था और श्रद्धालुओं के अधिकारों को लेकर बहस को तेज कर दिया है।
पति और सास की प्रताड़ना से टूटी जिंदगी: आत्महत्या के बाद दर्ज हुई FIR, जांच में सामने आए गंभीर आरोप

मध्यप्रदेश । इंदौर में विवाहिता आत्महत्या के दो अलग-अलग मामलों में पुलिस जांच के बाद ससुराल पक्ष के खिलाफ कार्रवाई की गई है। विजयनगर और तिलक नगर थाना क्षेत्रों से जुड़े इन मामलों में पुलिस ने मर्ग जांच, साक्षियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। दोनों घटनाओं ने एक बार फिर घरेलू प्रताड़ना और वैवाहिक विवादों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला मामला विजयनगर थाना क्षेत्र का है, जहां भमौरी स्थित न्यू अंजनी नगर में रहने वाली सीमा जैन ने 19 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला, वहीं मृतका के परिजनों और अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए गए। पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि सीमा को कथित रूप से दहेज की मांग और घरेलू प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा था। जांच में मिले साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर पुलिस ने पति अमन जैन और सास सपना जैन निवासी खरगोन के खिलाफ दहेज प्रताड़ना सहित संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया है। मृतका के परिजनों ने पुलिस को बताया कि सीमा की शादी पिछले वर्ष मई माह में खरगोन जिले के कसरावद क्षेत्र में हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के समय ससुराल पक्ष ने दूल्हे की बीमारी की जानकारी छिपाई थी। विवाह के बाद जब इस बात की जानकारी सीमा को मिली तो दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने लगे। परिजनों के अनुसार लगातार तनाव और प्रताड़ना के कारण सीमा मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थी। बताया गया कि सीमा पिछले चार महीनों से इंदौर में अपनी मां और भाई के साथ रह रही थी। पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ चुका था कि दोनों के बीच तलाक का मामला भी न्यायालय में विचाराधीन था। इसी दौरान उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। वहीं दूसरा मामला तिलक नगर थाना क्षेत्र का है, जहां संविद नगर निवासी 26 वर्षीय आरती पटेल ने 25 मई को अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। पुलिस ने घटना के बाद मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान मृतका के पिता द्वारका पटेल, भाई दीपक पटेल और रिश्तेदार खेमचंद पटेल के बयान दर्ज किए गए। परिजनों ने आरोप लगाया कि आरती का पति गोपाल पटेल, जो सागर जिले के ग्राम सरदई का निवासी है, शादी के बाद से ही उसके साथ विवाद करता था और कई बार मारपीट भी करता था। परिवार का कहना है कि लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के चलते आरती गहरे तनाव में रहने लगी थी। मर्ग जांच में सामने आए तथ्यों, साक्षियों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने गोपाल पटेल के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर लिया है। दोनों मामलों में पुलिस आगे की जांच कर रही है और आरोपियों से पूछताछ की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। इन घटनाओं ने घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और वैवाहिक विवादों के गंभीर सामाजिक पहलुओं को फिर उजागर किया है। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इजरायली तकनीक से नरसिंहपुर में चमत्कार: बंजर जमीन पर खड़ा किया 70 एकड़ का 'मैंगो किंगडम', अब लंदन-दुबई में धूम

मध्य प्रदेश। राज्य के नरसिंहपुर जिले के छेना गाँव से आधुनिक कृषि और दृढ़ संकल्प की एक ऐसी अभूतपूर्व कहानी सामने आई है, जिसने देश के कृषि विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। जहां की पथरीली और कम उपजाऊ जमीन पर पारंपरिक खेती करना भी घाटे का सौदा माना जाता था, वहीं आज इजरायली तकनीक के चमत्कार से 70 एकड़ का एक विशाल और आधुनिक आमों का साम्राज्य खड़ा हो चुका है। स्थानीय प्रगतिशील किसान के इस साहसिक और तकनीकी प्रयास की बदौलत अब नरसिंहपुर के रसीले आमों का स्वाद सात समंदर पार दुबई और लंदन जैसे वैश्विक बाजारों तक पहुँच गया है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस सफलता के पीछे इजरायल की प्रसिद्ध ‘अल्ट्रा हाई डेंसिटी प्लांटेशन’ (UHDP) यानी सघन बागवानी कूटनीति और आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली का कुशल उपयोग है। पारंपरिक तरीके से जहां एक एकड़ में आम के बेहद सीमित पौधे लगाए जाते हैं, वहीं इस आधुनिक इजरायली तकनीक के माध्यम से प्रति एकड़ पौधों की संख्या कई गुना बढ़ा दी गई। इसके साथ ही, बूंद-बूंद सिंचाई और नियंत्रित खाद प्रबंधन के जरिए पौधों को सीधे जड़ों तक पोषक तत्व दिए गए, जिससे पथरीली और कम पानी वाली जमीन पर भी पौधों का तेजी से और स्वस्थ विकास संभव हो सका। नरसिंहपुर के इस विशाल मैंगो ऑर्चर्ड (आम के बाग) में आम की कई उन्नत और व्यावसायिक प्रजातियों का उत्पादन किया जा रहा है, जिनकी मांग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बहुत अधिक है। फसल की गुणवत्ता, रंग और स्वाद को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाए रखने के लिए पूरी तरह से जैविक और वैज्ञानिक पद्धतियों का पालन किया जाता है। यही कारण है कि इस बाग के आमों को सीधे विदेशों में निर्यात करने के लिए अंतरराष्ट्रीय डीलर्स और बड़ी कंपनियों से अनुबंध मिले हैं, जिससे स्थानीय क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी आय के नए मार्ग खुल गए हैं। इस चमत्कारिक कृषि मॉडल ने न केवल नरसिंहपुर बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के कृषि परिदृश्य को एक नई दिशा दिखाई है। जिला प्रशासन और बागवानी विभाग के अधिकारी भी इस सफलता को एक बड़े उदाहरण के रूप में देख रहे हैं। इस बागवानी मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम पानी और विपरीत भौगोलिक परिस्थितियों में भी बंपर पैदावार सुनिश्चित करता है। लंदन और दुबई जैसे बड़े व्यापारिक केंद्रों में यहां के आमों की खेप पहुंचने से भारतीय कृषि उत्पादों की साख अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत हुई है। इस कृषि क्रांति ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही तकनीक, कड़ा परिश्रम और आधुनिक दृष्टिकोण को मिला दिया जाए, तो किसी भी बंजर या कम उम्मीद वाली जमीन को सोने की खान में बदला जा सकता है। आज इस 70 एकड़ के आम साम्राज्य को देखने और समझने के लिए दूर-दूर से किसान और कृषि वैज्ञानिक नरसिंहपुर के छेना गाँव पहुँच रहे हैं। यह प्रोजेक्ट अब क्षेत्र के ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का एक बड़ा जरिया बन चुका है और आत्मनिर्भर खेती की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
इंदौर मेट्रो का कमर्शियल रन फिर अटका, 24 जून को खत्म होगी CMRS मंजूरी; दोबारा होगा सेफ्टी निरीक्षण

मध्यप्रदेश । इंदौरवासियों का मेट्रो में सफर करने का इंतजार एक बार फिर लंबा होता नजर आ रहा है। सुपर कॉरिडोर से विजय नगर तक प्रस्तावित इंदौर मेट्रो का कमर्शियल रन फिर टल गया है। पहले जहां 18 जून को इसका शुभारंभ होने की उम्मीद जताई जा रही थी, वहीं अब स्थिति ऐसी बन गई है कि मेट्रो संचालन शुरू होने में और अधिक समय लग सकता है। मेट्रो परियोजना के तहत सुपर कॉरिडोर के लगभग 5.9 किलोमीटर लंबे हिस्से में संचालन की तैयारियां काफी पहले पूरी होने का दावा किया गया था। इसके बावजूद मेट्रो अभी तक ट्रायल और सीमित संचालन के दायरे से बाहर नहीं निकल पाई है। कमर्शियल रन शुरू नहीं होने के कारण यात्रियों को अभी भी मेट्रो सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (CMRS) द्वारा कमर्शियल रन के लिए दी गई मंजूरी की वैधता 24 जून को समाप्त हो रही है। मेट्रो अधिकारियों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इस तारीख तक नियमित यात्री सेवा शुरू कर पाना मुश्किल दिखाई दे रहा है। यदि ऐसा होता है तो मेट्रो प्रबंधन को पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू करनी पड़ेगी। सूत्रों के अनुसार, मंजूरी की अवधि समाप्त होने के बाद सीएमआरएस से दोबारा निरीक्षण कराना अनिवार्य होगा। इसके लिए नए सिरे से आवेदन, दस्तावेजी प्रक्रिया और तकनीकी परीक्षणों की आवश्यकता पड़ेगी। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग एक महीने का समय लग सकता है। ऐसे में कमर्शियल रन की शुरुआत जुलाई या उससे आगे तक खिसकने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने भी स्वीकार किया है कि कमर्शियल रन की नई तारीख अभी निर्धारित नहीं की गई है। उन्होंने बताया कि 24 जून से पहले सीएमआरएस को दोबारा निरीक्षण के लिए पत्र भेजा जाएगा। निरीक्षण और आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही यात्री सेवाएं शुरू की जा सकेंगी। गौरतलब है कि पहले केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर के हाथों 18 जून को कमर्शियल रन का शुभारंभ प्रस्तावित था। कार्यक्रम की तैयारियां भी लगभग पूरी कर ली गई थीं, लेकिन राज्यसभा चुनाव की व्यस्तताओं के कारण यह आयोजन स्थगित कर दिया गया। इसके बाद उम्मीद थी कि 20 जून को केंद्रीय मंत्री के इंदौर दौरे के दौरान मेट्रो को हरी झंडी मिल सकती है, लेकिन फिलहाल ऐसा कोई कार्यक्रम तय नहीं किया गया है। बार-बार टल रहे कमर्शियल रन ने शहरवासियों की उत्सुकता को निराशा में बदलना शुरू कर दिया है। इंदौर देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में शामिल है और यहां मेट्रो को शहरी परिवहन की बड़ी जरूरत माना जा रहा है। ऐसे में परियोजना के संचालन में लगातार हो रही देरी कई सवाल खड़े कर रही है। हालांकि मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी मानकों को पूरा करने के बाद ही सेवा शुरू की जाएगी। लेकिन फिलहाल इतना तय है कि इंदौरवासियों को मेट्रो की पहली नियमित सवारी के लिए अभी कुछ और समय इंतजार करना पड़ेगा।
20 जून को होगा इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर का भूमि पूजन, 30 मिनट में तय होगा सफर; सिंहस्थ-2028 को मिलेगी नई रफ्तार

मध्यप्रदेश । मालवा क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित और महत्वाकांक्षी इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर परियोजना अब धरातल पर उतरने जा रही है। 20 जून को इंदौर जिले के चंद्रावतीगंज में इस परियोजना का भूमि पूजन किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर विशेष रूप से शामिल होंगे। इस परियोजना को सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 48.10 किलोमीटर लंबे इस एक्सेस-कंट्रोल्ड फोरलेन कॉरिडोर का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) द्वारा हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत कराया जाएगा। इसकी अनुमानित निर्माण लागत लगभग 1,089 करोड़ रुपए है। परियोजना का उद्देश्य इंदौर और उज्जैन के बीच तेज, सुरक्षित और बाधारहित यातायात सुविधा उपलब्ध कराना है। भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट और इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बुधवार को कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मंच व्यवस्था, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, पेयजल, विद्युत आपूर्ति और बैठक व्यवस्था जैसी सुविधाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि कार्यक्रम में आने वाले अतिथियों और आम नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो तथा सभी व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली जाएं। ग्रीनफील्ड कॉरिडोर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके निर्माण के बाद इंदौर से उज्जैन की दूरी महज 30 से 35 मिनट में तय की जा सकेगी। वर्तमान में दोनों शहरों के बीच बढ़ते ट्रैफिक और यात्रा समय की समस्या को देखते हुए यह परियोजना एक बड़ी राहत साबित होगी। इससे मौजूदा हाईवे पर वाहनों का दबाव भी कम होगा और यात्रा अधिक सुरक्षित एवं सुगम बनेगी। धार्मिक पर्यटन के दृष्टिकोण से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण है। उज्जैन में महाकाल मंदिर, महाकाल लोक और सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं इंदौर प्रदेश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ हवाई और व्यावसायिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। नया कॉरिडोर दोनों शहरों को आधुनिक और तेज संपर्क मार्ग से जोड़कर श्रद्धालुओं, पर्यटकों और व्यापारिक वर्ग को बड़ी सुविधा देगा। परियोजना का प्रारंभ इंदौर के पित्र पर्वत क्षेत्र के पास से होगा और इसका अंतिम छोर उज्जैन के सिंहस्थ बायपास क्षेत्र तक रहेगा। यह सड़क भविष्य में यातायात की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए विस्तार योग्य भी होगी। इससे न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। सरकार ने निर्माण एजेंसी को परियोजना पूरा करने के लिए लगभग 24 महीने का समय दिया है। लक्ष्य है कि सिंहस्थ-2028 से पहले यह कॉरिडोर पूरी तरह तैयार हो जाए ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर परिवहन सुविधा मिल सके। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मालवा क्षेत्र के धार्मिक, आर्थिक और पर्यटन विकास के नए कॉरिडोर के रूप में देखा जा रहा है। महाकाल लोक, ओंकारेश्वर, इंदौर एयरपोर्ट और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्र के समग्र विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
ऐतिहासिक कूटनीतिक कामयाबी: ट्रंप और पेजेश्कियान के हस्ताक्षरों से टला महायुद्ध, अमेरिका-ईरान शांति समझौता तत्काल प्रभाव से लागू

नई दिल्ली। वैश्विक कूटनीति के पन्नों में आज का दिन एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव के रूप में दर्ज हो गया है। पिछले कई महीनों से युद्ध की कगार पर खड़े अमेरिका और ईरान ने अपने सारे विवादों और दुश्मनी को पीछे छोड़ते हुए आखिरकार शांति समझौते पर आधिकारिक मुहर लगा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने दोनों देशों के बीच जारी सैन्य टकराव को हमेशा के लिए खत्म करने के मकसद से एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस बड़े घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव पूरी तरह समाप्त हो गया है और यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू माना जा रहा है। व्हाइट हाउस और ईरानी राजनयिकों द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस शांति समझौते से जुड़ी दो बेहद महत्वपूर्ण तस्वीरें और वीडियो वैश्विक मीडिया के सामने आए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के वर्साय महल में आयोजित एक विशेष रात्रिभोज के दौरान इस समझौते की मूल प्रति पर हस्ताक्षर किए। इस ऐतिहासिक क्षण के दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी उनके ठीक बगल में मौजूद थे, जिनकी गवाही में व्हाइट हाउस ने हस्ताक्षर का वीडियो भी जारी किया है। दूसरी तरफ, तेहरान से ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान की भी समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए तस्वीरें दुनिया के सामने आईं। इससे पहले बीते रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद गालिबाफ ने इस मसौदे पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद स्विट्जरलैंड में होने वाले औपचारिक समारोह की जगह इसे तुरंत ही लागू करने का फैसला लिया गया। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत कुल 14 प्रमुख शर्तें तय की गई हैं, जो दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की दिशा तय करेंगी। समझौते की पहली और सबसे बड़ी शर्त के अनुसार, अमेरिका और ईरान सभी मोर्चों पर अपनी सैन्य कार्रवाइयों को तत्काल और स्थायी रूप से रोकने की घोषणा करते हैं। दोनों देशों ने वचन दिया है कि वे भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी तरह का युद्ध या सैन्य अभियान शुरू नहीं करेंगे। इसके साथ ही, लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का पूरा सम्मान किया जाएगा। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप न करने और 60 दिनों के भीतर बातचीत के जरिए एक अंतिम और पूर्ण रूप से बाध्यकारी समझौता तैयार करने की प्रतिबद्धता जताई है। मध्य प्रदेश और देश के अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समझौते से वैश्विक बाजार और तेल आपूर्ति को बड़ी राहत मिलेगी। समझौते के तहत अमेरिका अगले 30 दिनों के भीतर ईरान के खिलाफ लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी और सभी व्यापारिक अवरोधों को पूरी तरह हटा लेगा। इसके बदले में ईरान फारस की खाड़ी से लेकर ओमान सागर तक आने-जाने वाले सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए अगले 60 दिनों तक पूरी तरह निशुल्क और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए ओमान के साथ बातचीत शुरू की जाएगी। इसके अतिरिक्त, अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के आर्थिक पुनर्वास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की भारी-भरकम फंडिंग सुनिश्चित करने पर सहमत हुआ है। परमाणु कार्यक्रम के मोर्चे पर भी इस समझौते ने बेहद संवेदनशील मुद्दों को सुलझाया है। ईरान ने स्पष्ट रूप से पुष्टि की है कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, जबकि उसके पास मौजूद संवर्धित परमाणु सामग्री के प्रबंधन का समाधान दोनों देश आपसी सहमति के मैकेनिज्म से निकालेंगे। जब तक अंतिम समझौता पूरा नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखेंगे, जिसके तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को वर्तमान स्थिति से आगे नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा। इसके अलावा, अमेरिकी वित्त विभाग ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के लिए तत्काल बैंकिंग और बीमा छूट प्रदान करेगा, और विदेशों में फ्रीज की गई ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को भी पूरी तरह रिलीज किया जाएगा। इस ऐतिहासिक शांति समझौते को अंतिम रूप देने के बाद अब इसे औपचारिक मंजूरी के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के समक्ष भेजा जाएगा।