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सतना में वन्यजीव शिकार का खुलासा, डॉग स्क्वॉड की निशानदेही पर घर से खून लगे हथियार बरामद

सतना । सतना जिले के सगमनिया क्षेत्र में वन विभाग ने वन्यजीव शिकार से जुड़े एक संदिग्ध मामले का बड़ा खुलासा किया है। बीट खम्हरिया के अंतर्गत ग्राम पंचायत नैना सगमनिया में पानी की टंकी के पास किसी वन्य प्राणी के शिकार की सूचना मिलने के बाद वन अमला सक्रिय हो गया और मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की गई। प्रारंभिक निरीक्षण के दौरान घटनास्थल पर खून के नमूने मिलने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई। इसके बाद वन विभाग ने डॉग स्क्वॉड की मदद ली। प्रशिक्षित डॉग “स्पार्टन” को मौके पर सर्चिंग के लिए लगाया गया, जिसने जांच के दौरान पास में स्थित रामाधार बंसल के घर की ओर स्पष्ट संकेत दिया। घर पर ताला लगा होने के कारण अधिकारियों को आशंका हुई कि अंदर वन्यजीव शिकार से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकते हैं। इस पर वन परिक्षेत्राधिकारी शुभम दुबे की अनुशंसा पर उप वन मंडल अधिकारी बहादुर सिंह द्वारा सर्च वारंट जारी किया गया। वारंट मिलने के बाद टीम ने घर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान घर के भीतर से खून से सने हथियार, एक तराजू और वन्य प्राणी के बाल बरामद किए गए। वन विभाग ने सभी सामान को जब्त कर लिया है और मामले की जांच तेज कर दी है। वन विभाग ने इस मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों का कहना है कि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि शिकार किस वन्य प्राणी का किया गया था। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को सुरक्षित रख लिया गया है। बरामद किए गए बाल और खून के नमूनों को डीएनए जांच के लिए जबलपुर स्थित फोरेंसिक प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि किस वन्यजीव का शिकार किया गया था और मामले में किन लोगों की संलिप्तता है। वन विभाग ने कहा है कि जांच के आधार पर आगे की सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

सतना में स्कॉर्पियो सवारों का हंगामा, पत्थरबाजी के बाद चलाई गोली; 7 पर FIR, एक हिरासत में

सतना । सतना जिले के कोलगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत टिकुरिया टोला-बाइपास के पास मंगलवार देर शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई जब स्कॉर्पियो सवार युवकों ने मजदूरों के एक समूह पर हमला कर दिया। विवाद इतना बढ़ा कि पहले पत्थरबाजी हुई और फिर पिस्टल से फायरिंग तक की नौबत आ गई। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है, जबकि वाहन को जब्त कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार, ईंट-भट्टे के पास बैठे मजदूरों के बीच उस समय तनाव पैदा हो गया जब स्कॉर्पियो (एमपी 19 सीबी 1665) वहां आकर रुकी। वाहन से एक युवक नीचे उतरा और कथित रूप से सार्वजनिक स्थान पर अनुचित हरकत करने लगा। इस पर मजदूरों में शामिल एक महिला गुड़िया प्रजापति ने आपत्ति जताई, जिससे विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि आपत्ति जताने पर युवक ने गाली-गलौज करते हुए महिला पर पत्थर फेंक दिया, जिससे वह घायल हो गई। इसके बाद स्कॉर्पियो में सवार अन्य 5-6 युवक भी मौके पर उतर आए और मजदूरों से मारपीट शुरू कर दी। कुछ ही देर में स्थिति और बिगड़ गई। इसी दौरान आरोपियों में शामिल प्रभु सिंह परिहार ने विनोद प्रजापति को जान से मारने की धमकी देते हुए पिस्टल से फायर कर दिया। हालांकि, विनोद प्रजापति समय रहते झुक गए, जिससे गोली उन्हें नहीं लगी और एक बड़ा हादसा टल गया। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई। भीड़ को बढ़ता देख आरोपी अपनी स्कॉर्पियो छोड़कर भागने लगे। स्थानीय लोगों ने भाग रहे आरोपियों में से एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। सूचना मिलने पर कोलगवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने स्कॉर्पियो को क्रेन की मदद से जब्त कर थाने भेज दिया है। साथ ही घटना में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस ने इस मामले में कुल 7 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।सतना जिले के कोलगवां थाना क्षेत्र अंतर्गत टिकुरिया टोला-बाइपास के पास मंगलवार देर शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई जब स्कॉर्पियो सवार युवकों ने मजदूरों के एक समूह पर हमला कर दिया। विवाद इतना बढ़ा कि पहले पत्थरबाजी हुई और फिर पिस्टल से फायरिंग तक की नौबत आ गई। घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है, जबकि वाहन को जब्त कर लिया गया है। जानकारी के अनुसार, ईंट-भट्टे के पास बैठे मजदूरों के बीच उस समय तनाव पैदा हो गया जब स्कॉर्पियो (एमपी 19 सीबी 1665) वहां आकर रुकी। वाहन से एक युवक नीचे उतरा और कथित रूप से सार्वजनिक स्थान पर अनुचित हरकत करने लगा। इस पर मजदूरों में शामिल एक महिला गुड़िया प्रजापति ने आपत्ति जताई, जिससे विवाद शुरू हो गया। आरोप है कि आपत्ति जताने पर युवक ने गाली-गलौज करते हुए महिला पर पत्थर फेंक दिया, जिससे वह घायल हो गई। इसके बाद स्कॉर्पियो में सवार अन्य 5-6 युवक भी मौके पर उतर आए और मजदूरों से मारपीट शुरू कर दी। कुछ ही देर में स्थिति और बिगड़ गई। इसी दौरान आरोपियों में शामिल प्रभु सिंह परिहार ने विनोद प्रजापति को जान से मारने की धमकी देते हुए पिस्टल से फायर कर दिया। हालांकि, विनोद प्रजापति समय रहते झुक गए, जिससे गोली उन्हें नहीं लगी और एक बड़ा हादसा टल गया। गोली चलने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए, जिससे अफरा-तफरी मच गई। भीड़ को बढ़ता देख आरोपी अपनी स्कॉर्पियो छोड़कर भागने लगे। स्थानीय लोगों ने भाग रहे आरोपियों में से एक युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। सूचना मिलने पर कोलगवां थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने स्कॉर्पियो को क्रेन की मदद से जब्त कर थाने भेज दिया है। साथ ही घटना में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। पुलिस ने इस मामले में कुल 7 आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। अधिकारियों के अनुसार, मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और जल्द ही सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।

चार साल के बच्चे की संदिग्ध मौत का खुलासा, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हत्या के आरोप में प्रेमी गिरफ्तार

नई दिल्ली । महाराष्ट्र के ठाणे जिले में चार वर्षीय बच्चे की कथित हत्या का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। शुरुआती जांच में जिस मौत को सामान्य माना जा रहा था, वह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद एक गंभीर आपराधिक मामले में बदल गई। पुलिस ने बच्चे की मौत के संबंध में उसकी मां के साथ रह रहे व्यक्ति को गिरफ्तार कर हत्या का मामला दर्ज किया है। मामले की जांच जारी है और पुलिस घटना के पीछे की पूरी परिस्थितियों को समझने का प्रयास कर रही है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यह घटना ठाणे जिले के काशीमीरा क्षेत्र की है, जहां एक महिला अपने चार वर्षीय बेटे के साथ आरोपी शंभू शर्मा के साथ रह रही थी। प्रारंभिक जानकारी में बच्चे की मौत को स्वाभाविक बताया गया था, लेकिन मौके पर की गई औपचारिक जांच और पंचनामे के दौरान अधिकारियों को बच्चे के शरीर पर चोटों के कई निशान दिखाई दिए। इन परिस्थितियों ने पुलिस को संदेह पैदा करने पर मजबूर किया, जिसके बाद शव को विस्तृत पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि बच्चे की मौत गंभीर अंदरूनी चोटों के कारण हुई थी। रिपोर्ट में स्पष्ट संकेत मिले कि शरीर पर मौजूद चोटें सामान्य नहीं थीं और हिंसक मारपीट का परिणाम हो सकती हैं। मेडिकल निष्कर्ष सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को हत्या के रूप में दर्ज करते हुए जांच का दायरा बढ़ाया। इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी ने बच्चे के साथ मारपीट करने की बात स्वीकार की। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि मारपीट के पीछे तत्काल कारण क्या था। पुलिस अब यह जानने का प्रयास कर रही है कि घटना अचानक हुई या इसके पीछे कोई पुराना विवाद या तनाव मौजूद था। साथ ही यह भी जांच का विषय है कि घटना के समय बच्चे की मां की क्या भूमिका थी और क्या उसे कथित हिंसा की जानकारी थी। इस मामले ने एक बार फिर बच्चों की सुरक्षा और घरेलू परिवेश में होने वाली हिंसा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार या निकट संबंधों के दायरे में होने वाली हिंसा कई बार लंबे समय तक सामने नहीं आ पाती, जिसके कारण मासूम बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे मामलों में समय पर हस्तक्षेप और संवेदनशील निगरानी की आवश्यकता महसूस की जाती है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से जांच की जा रही है। आरोपी के खिलाफ हत्या से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। जांच टीम पड़ोसियों, परिचितों और परिवार से जुड़े अन्य लोगों के बयान भी दर्ज कर रही है ताकि घटना से पहले की परिस्थितियों का सही आकलन किया जा सके। फिलहाल इस दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। एक मासूम बच्चे की असमय मौत ने लोगों को स्तब्ध कर दिया है और सभी की नजरें अब जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर टिकी हैं। पुलिस का कहना है कि मामले के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

धमकी देकर नाबालिग से दुष्कर्म, रीवा में आरोपी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया

मध्यप्रदेश । रीवा शहर के अमहिया थाना क्षेत्र में नाबालिग से दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि एक युवक लंबे समय तक जान से मारने की धमकी देकर पीड़िता का शोषण करता रहा। लगातार डर और दबाव में रहने के बाद पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने 1 जून को अमहिया थाने में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उसने बताया कि क्षेत्र निवासी सरताज अंसारी उसे लगातार धमकाता था और इसी डर का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। पीड़िता के बयान के आधार पर पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपी की तलाश के लिए विशेष टीम गठित की और संभावित ठिकानों पर दबिश दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 5/6 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। चूंकि पीड़िता नाबालिग है, इसलिए पूरे मामले की जांच पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, पीड़िता लंबे समय से आरोपी की धमकियों के कारण चुप रही। बाद में परिवार को जानकारी मिलने पर मामला पुलिस तक पहुंचा। पुलिस अब घटना से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों में त्वरित कार्रवाई की जा रही है और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

रीवा के सिलपरा डैम में सेना का जवान डूबा, SDERF का सर्च ऑपरेशन जारी

मध्यप्रदेश । रीवा जिले के बिछिया थाना क्षेत्र स्थित सिलपरा डैम में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसा हुआ, जहां भारतीय सेना का एक जवान डूब गया। घटना के बाद से इलाके में हड़कंप मच गया है और SDRF की टीम लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय जवान गौरव द्विवेदी अपने भाई और बहन के साथ डैम घूमने के लिए पहुंचे थे। बघवार गांव निवासी गौरव सुबह करीब 6 बजे सिलपरा डैम पहुंचे थे। बताया जा रहा है कि नहाने के दौरान जब वह पानी के किनारे आगे बढ़े, तभी उनका संतुलन बिगड़ गया और वे अचानक गहरे पानी में चले गए। इसके बाद वे लापता हो गए, जिससे मौके पर मौजूद परिजनों में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और SDRF की टीम मौके पर पहुंची और तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। गोताखोरों की मदद से डैम में लगातार सर्चिंग की जा रही है, लेकिन समाचार लिखे जाने तक जवान का कोई सुराग नहीं मिल सका है। बताया जा रहा है कि गौरव द्विवेदी भारतीय सेना में पदस्थ हैं और कुछ दिन पहले ही छुट्टी लेकर अपने घर आए थे। परिवार के साथ समय बिताने के दौरान यह हादसा हो गया। घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गए। SDRF टीम के प्रभारी विकास पांडेय ने बताया कि सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है और जब तक जवान को ढूंढ नहीं लिया जाता, तब तक रेस्क्यू अभियान बंद नहीं किया जाएगा। टीम हर संभव तरीके से डैम में तलाश कर रही है। फिलहाल पूरे इलाके में माहौल गमगीन है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन द्वारा सुरक्षा के दृष्टिकोण से डैम क्षेत्र में लोगों की आवाजाही पर भी नजर रखी जा रही है।

हरित परिवहन की ओर कदम, 500 किमी रेंज वाली इलेक्ट्रिक कार काफिले में शामिल

मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब मुख्यमंत्री अपने आधिकारिक दौरे और आवागमन के लिए इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग करेंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री के काफिले में पहली बार एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक कार को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री के लिए खरीदी गई नई इलेक्ट्रिक कार Mahindra XEV 9e बुधवार से आधिकारिक तौर पर उनके काफिले का हिस्सा बन जाएगी। मुख्यमंत्री आज शाम भोपाल से दिल्ली रवाना होते समय मुख्यमंत्री निवास से स्टेट हैंगर तक इसी इलेक्ट्रिक वाहन से यात्रा करेंगे। इस पहल को हरित परिवहन और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रतीकात्मक और व्यावहारिक कदम माना जा रहा है। इस नई कार को विशेष वीआईपी नंबर MP 02 VB 2047 आवंटित किया गया है। यहां ‘VB’ का अर्थ ‘विकसित भारत’ है, जबकि ‘2047’ भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर संकेत करता है। इस नंबर के माध्यम से सरकार ने विकसित भारत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री इससे पहले भी ईंधन की खपत कम करने के लिए अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या घटा चुके हैं। जहां पहले उनके काफिले में 13 वाहन शामिल रहते थे, वहीं बाद में इसे घटाकर 7 वाहन कर दिया गया। उनकी इस पहल के बाद कई मंत्रियों और अधिकारियों ने भी कम वाहनों के उपयोग और कार पूलिंग को अपनाया। नई इलेक्ट्रिक कार आधुनिक तकनीक और उन्नत सुरक्षा सुविधाओं से लैस है। इसमें 79kWh क्षमता का बैटरी पैक दिया गया है, जो एक बार चार्ज होने पर 500 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में सक्षम बताया गया है। वाहन में 286 हॉर्सपावर की इलेक्ट्रिक मोटर दी गई है, जो बेहतरीन प्रदर्शन और तेज रफ्तार प्रदान करती है। कंपनी के अनुसार यह कार महज 7.45 सेकंड में 0 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है। इंटीरियर की बात करें तो वाहन में 16-स्पीकर प्रीमियम ऑडियो सिस्टम, ऑगमेंटेड रियलिटी हेड-अप डिस्प्ले, पैनोरमिक ग्लास रूफ, वायरलेस चार्जिंग और मल्टीकलर एम्बिएंट लाइटिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके अलावा ‘पेट मोड’ और ‘कैंपिंग मोड’ जैसे विशेष फीचर भी दिए गए हैं। सुरक्षा के लिहाज से कार में 360 डिग्री कैमरा, सर्विलांस मोड, मल्टीपल एयरबैग्स, एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) और अन्य आधुनिक सुरक्षा तकनीकें मौजूद हैं। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा वाहन की जांच पूरी कर ली गई है और ड्राइवरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। मुख्यमंत्री के काफिले में इलेक्ट्रिक वाहन की एंट्री को सरकारी स्तर पर ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का संदेश भी जाएगा।

साइबर ठगों का नया जाल, कार्ड एक्टिवेशन के नाम पर धोखाधड़ी

ग्वालियर । ग्वालियर में साइबर अपराधियों ने एक युवती को निशाना बनाते हुए उसके क्रेडिट कार्ड से करीब 1.48 लाख रुपए की ठगी कर ली। ठगों ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताकर पहले क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने का झांसा दिया और बाद में राशि वापस दिलाने के नाम पर ओटीपी हासिल कर खाते से रकम निकाल ली। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, 24 वर्षीय अक्षिता बांगड़ के पास एक निजी बैंक का क्रेडिट कार्ड था, जो उन्हें फरवरी 2026 में प्राप्त हुआ था। हालांकि उन्होंने उस कार्ड को सक्रिय नहीं कराया था। 6 अप्रैल को उनके पास एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने स्वयं को बैंक का प्रतिनिधि बताया और क्रेडिट कार्ड एक्टिवेट कराने की प्रक्रिया समझाने लगा। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अक्षिता को एक मोबाइल एप डाउनलोड करने के लिए कहा। युवती ने उसकी बातों पर भरोसा कर निर्देशों का पालन किया। इसके कुछ समय बाद उनके क्रेडिट कार्ड से करीब 99 हजार 861 रुपए का ट्रांजेक्शन हो गया। पीड़िता को इस लेनदेन की जानकारी तत्काल नहीं मिल सकी, जिससे उन्हें धोखाधड़ी का पता नहीं चला। करीब एक महीने बाद 4 मई को अक्षिता को फिर एक अन्य नंबर से कॉल आया। इस बार कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को मददगार बताते हुए पिछले ट्रांजेक्शन की जानकारी दी और कहा कि यदि वह चाहें तो निकाली गई राशि वापस दिलाई जा सकती है। बातचीत के दौरान आरोपी ने प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर उनसे ओटीपी साझा करने को कहा। पीड़िता ने जब ओटीपी बताया तो ठगों ने कुछ ही मिनटों में उनके क्रेडिट कार्ड से दो और ट्रांजेक्शन कर दिए। इस तरह कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 48 हजार रुपए की राशि निकाल ली गई। इसके बाद जब युवती को ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मामला कोतवाली थाने पहुंचा, जहां पुलिस ने अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है। जांच के दौरान संबंधित मोबाइल नंबरों, बैंक ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर ओटीपी, कार्ड विवरण, सीवीवी नंबर या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें। बैंक या वित्तीय संस्थान कभी भी फोन पर ग्राहकों से ओटीपी नहीं मांगते। थोड़ी सी सावधानी साइबर ठगी जैसी घटनाओं से बचा सकती है।

आरबीआई का बड़ा बयान: सोना बेचने की खबरें फर्जी, भारत के पास अब भी 880.52 टन गोल्ड रिजर्व सुरक्षित

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने देश के स्वर्ण भंडार को लेकर फैल रही अटकलों और मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास मौजूद भौतिक सोने के भंडार में किसी प्रकार की बिक्री या कमी नहीं हुई है और यह पहले की तरह 880.52 टन पर स्थिर है। आरबीआई ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि केंद्रीय बैंक ने अपने गोल्ड रिजर्व का एक हिस्सा बेच दिया है, जो पूरी तरह गलत और भ्रामक है। बैंक ने दोहराया कि उसके पास मौजूद भौतिक सोने का भंडार सुरक्षित है और इसमें कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है। केंद्रीय बैंक ने यह भी बताया कि स्वर्ण भंडार से संबंधित सभी आधिकारिक आंकड़े नियमित रूप से मासिक बुलेटिन में प्रकाशित किए जाते हैं, जिन्हें आरबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है। बैंक ने लोगों से अपील की कि वे केवल आधिकारिक स्रोतों से जारी जानकारी पर ही भरोसा करें और अफवाहों से बचें। इस मामले में प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की फैक्ट चेक यूनिट ने भी स्थिति स्पष्ट करते हुए इन खबरों को फर्जी बताया है। पीआईबी ने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि आरबीआई ने लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेच दिया है, लेकिन यह जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है। पीआईबी के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। सितंबर 2025 के अंत में यह हिस्सेदारी 13.92 प्रतिशत थी, जो 31 मार्च 2026 तक बढ़कर 16.70 प्रतिशत हो गई। इसके बाद 22 मई 2026 तक यह और बढ़कर 16.85 प्रतिशत तक पहुंच गई। ये आंकड़े यह संकेत देते हैं कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की भूमिका मजबूत हो रही है। इससे पहले एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ब्लूमबर्ग के हवाले से आरबीआई ने हाल के दो हफ्तों में लगभग 12 अरब डॉलर मूल्य का सोना बेचकर विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां खरीदी हैं। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद वित्तीय बाजारों और निवेशकों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि आरबीआई और पीआईबी दोनों ने इन दावों को स्पष्ट रूप से खारिज करते हुए कहा कि यह रिपोर्ट तथ्यों पर आधारित नहीं है। केंद्रीय बैंक ने दोहराया कि भारत का स्वर्ण भंडार पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें किसी तरह की बिक्री या गिरावट नहीं हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की बढ़ती हिस्सेदारी देश की आर्थिक स्थिरता और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक सुरक्षा कवच के रूप में देखी जाती है। सोने को हमेशा से एक सुरक्षित निवेश माना जाता है और केंद्रीय बैंक भी इसे अपने रिजर्व पोर्टफोलियो का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाए रखते हैं। इस स्पष्टीकरण के बाद अब बाजार में फैली अटकलों पर विराम लगने की उम्मीद है और निवेशकों के बीच स्थिति को लेकर स्पष्टता आई है। आरबीआई ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि देश की वित्तीय स्थिति मजबूत है और स्वर्ण भंडार पूरी तरह सुरक्षित और स्थिर बना हुआ है।

सुख-समृद्धि के लिए वास्तु सम्मत होना चाहिए नए आशियाने का कोना-कोना, उत्तर-पूर्व दिशा में भूलकर भी न करें यह निर्माण

नई दिल्ली। जीवन भर की जमापूंजी लगाकर जब कोई व्यक्ति अपने सपनों का आशियाना तैयार करता है, तो उसकी सबसे बड़ी कामना यही होती है कि नए घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास हो। इसके लिए गृह निर्माण के समय वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना अनिवार्य माना गया है। कई बार जानकारी के अभाव में लोग मकान का निर्माण तो करा लेते हैं, लेकिन अनजाने में की गई छोटी-छोटी गलतियां आगे चलकर गंभीर मानसिक तनाव और भारी आर्थिक नुकसान का कारण बन जाती हैं। वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार, नए घर के निर्माण के दौरान कुछ खास हिस्सों की दिशा और स्थान को लेकर बेहद सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि इन जगहों से ही घर के भीतर सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह तय होता है। यदि शुरुआत में ही इन बातों का ध्यान रख लिया जाए, तो भविष्य में आने वाली तमाम तरह की परेशानियों और वास्तु दोषों से आसानी से बचा जा सकता है। वास्तु विज्ञान में घर के मुख्य प्रवेश द्वार को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है, जहां से खुशियां और समृद्धि घर के भीतर प्रवेश करती हैं। नया मकान बनवाते समय मुख्य द्वार की दिशा का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण कदम होता है। इसके लिए सबसे उपयुक्त और शुभ दिशा उत्तर, पूर्व या फिर उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण को माना जाता है। इसके विपरीत दिशा में बना मुख्य द्वार घर में नकारात्मकता को निमंत्रण देता है। इसके साथ ही इस बात का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए कि मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने की जगह हमेशा साफ-सुथरी और खाली हो, ताकि सकारात्मक ऊर्जा बिना किसी अवरोध के घर में आ सके। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में प्रचलित वास्तु मान्यताओं के अनुसार, मुख्य द्वार के सामने किसी भी प्रकार का खंभा, गड्ढा या भारी अवरोध होना परिवार के मुखिया की उन्नति में बाधा उत्पन्न करता है। घर का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रसोईघर होता है, जिसे मां अन्नपूर्णा और देवी लक्ष्मी का वास स्थान माना जाता है। नए घर में किचन की सही दिशा पूरे परिवार के स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति को सीधे प्रभावित करती है। वास्तु के स्थापित सिद्धांतों के मुताबिक, रसोईघर के लिए सबसे शुभ और उत्तम दिशा दक्षिण-पूर्व अर्थात आग्नेय कोण को माना गया है। यदि किसी कारणवश इस दिशा में निर्माण संभव न हो, तो विकल्प के रूप में उत्तर-पश्चिम दिशा का चुनाव किया जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे कि उत्तर-पूर्व दिशा में कभी भी भूलकर भी रसोईघर नहीं बनाना चाहिए, क्योंकि इससे घर के सदस्यों के बीच आपसी कलह और बीमारियां बढ़ती हैं। इसके अलावा, उत्तर-पूर्व दिशा को देवताओं का स्थान माना जाता है, इसलिए इस बेहद पवित्र कोने में सीढ़ियां, स्टोर रूम, भारी कबाड़ या शौचालय का निर्माण करने से सबसे गंभीर वास्तु दोष उत्पन्न होता है, जो मनुष्य को हमेशा अशांत और चिंतित रखता है।

सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना कीर्तिमान दांव पर, 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू की मांग तेज

नई दिल्ली। भारतीय क्रिकेट के गलियारों में इस समय केवल एक ही नाम की गूंज सुनाई दे रही है और वह नाम है 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी का। अपनी असाधारण प्रतिभा और मैदान के हर कोने में शॉट लगाने की काबिलियत से चयनकर्ताओं को प्रभावित करने वाले वैभव अब इतिहास रचने की दहलीज पर खड़े हैं। इस महीने के अंत में भारतीय क्रिकेट टीम को दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के लिए आयरलैंड का दौरा करना है और इसके ठीक बाद टीम पांच मैचों की सीरीज के लिए इंग्लैंड रवाना होगी। इस व्यस्त शेड्यूल को देखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के शीर्ष अधिकारी सीनियर खिलाड़ियों को आराम देकर युवाओं को आजमाने की रणनीति पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। इस दौड़ में वैभव सूर्यवंशी का नाम सबसे आगे चल रहा है क्योंकि आईपीएल के हालिया सीजन में उनके बल्ले से जो रनों का तूफान निकला है, उसने क्रिकेट पंडितों को हैरान कर दिया है। अगर चयन समिति उन्हें आयरलैंड के खिलाफ होने वाली सीरीज के लिए टीम इंडिया की जर्सी सौंप देती है, तो वह भारतीय क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का करीब 37 साल पुराना एक महाकीर्तिमान ध्वस्त कर देंगे। सचिन तेंदुलकर ने साल 1989 में जब पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दुनिया में कदम रखा था, तब उनकी उम्र महज 16 साल थी और वह भारत के लिए डेब्यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बने थे। अब ठीक 37 साल बाद 15 साल की उम्र में वैभव सूर्यवंशी इस चमत्कार को दोहराने के बेहद करीब नजर आ रहे हैं। अगर वह मैदान पर उतरते हैं, तो वह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिनिधित्व करने वाले इतिहास के सबसे युवा क्रिकेटर बन जाएंगे। हालांकि सचिन तेंदुलकर के नाम टेस्ट और वनडे क्रिकेट में सबसे कम उम्र में पदार्पण करने का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में यह गौरव ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर के नाम है। सुंदर ने साल 2017 में श्रीलंका के खिलाफ 18 साल और 80 दिन की उम्र में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय टी20 मैच खेला था। ऐसे में यदि वैभव सूर्यवंशी आगामी सीरीज में भारतीय टीम की प्लेइंग इलेवन का हिस्सा बनते हैं, तो वह वॉशिंगटन सुंदर के इस 9 साल पुराने रिकॉर्ड को भी बेहद आसानी से पीछे छोड़ देंगे। वैभव सूर्यवंशी की इस दावेदारी को उनके आईपीएल 2026 के अविश्वसनीय प्रदर्शन से सबसे ज्यादा मजबूती मिली है। उन्होंने इस सीजन के 16 मुकाबलों में लगभग 48.50 की बेहतरीन औसत और 237.30 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट के साथ कुल 776 रन कूटे हैं। इस दौरान उनके बल्ले से एक शानदार शतक और पांच अर्धशतक निकले हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 103 रन रहा है। इतना ही नहीं, अपनी आक्रामक शैली का मुजाहिरा पेश करते हुए उन्होंने पूरे सीजन में रिकॉर्डतोड़ 72 छक्के भी जड़े हैं। उनके इसी गैरमामूली टैलेंट को देखते हुए उन्हें पहले ही इंडिया ए टीम में शामिल किया जा चुका है, जहां वह श्रीलंका ए और अफगानिस्तान ए के खिलाफ होने वाली त्रिकोणीय सीरीज में हिस्सा लेने जा रहे हैं। इंडिया ए की इस टीम में वह कप्तान तिलक वर्मा के नेतृत्व में खेलेंगे, जबकि सीनियर खिलाड़ी ऋतुराज गायकवाड़ भी मार्गदर्शन के लिए टीम में मौजूद रहेंगे। मध्य प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों के क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव की यह टाइमिंग और खेल की समझ उन्हें लंबी रेस का घोड़ा बनाती है। उपकप्तान रियान पराग के चोटिल होने के बाद वैभव के लिए मुख्य राष्ट्रीय टीम के दरवाजे और तेजी से खुल गए हैं और अब खेल प्रेमियों की नजरें चयनकर्ताओं के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।