7 महीने तक किराए के कमरे में रखने का आरोप, आरोपी की तलाश जारी

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले से रिश्तों और भरोसे को शर्मसार करने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। यहां के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में एक युवक द्वारा शादी का झांसा देकर नाबालिग लड़की के साथ लगातार दुष्कर्म किए जाने का मामला उजागर हुआ है। आरोपी ने न केवल नाबालिग को शादी का झूंठा दिलासा दिया, बल्कि समाज की नजरों से बचने के लिए उसे सात महीने तक एक किराए के कमरे में अपनी पत्नी बताकर रखा। जब पीड़िता ने शादी का दबाव बनाया, तो आरोपी अचानक उसे बेसहारा छोड़कर गायब हो गया और अपना मोबाइल फोन भी बंद कर लिया। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उसकी सरगर्मी से तलाश शुरू कर दी है। घटनाक्रम की शुरुआत करीब दो साल पहले हुई थी। पीड़ित 17 वर्षीय नाबालिग लड़की ने हजीरा थाने में अपनी आपबीती सुनाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता के मुताबिक, उसका भाई डीजे (DJ) संचालन का काम करता है। इसी काम के सिलसिले में हजीरा थाना क्षेत्र के यादव धर्मकांटा का रहने वाला राहुल राठौर नाम का युवक उसके भाई के साथ काम करता था। भाई के साथ दोस्ती होने के कारण राहुल का पीड़िता के घर पर अक्सर आना-जाना होने लगा। इसी दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे गहरी पहचान और फिर दोस्ती में बदल गई। समय बीतने के साथ ही यह दोस्ती प्रेम संबंधों में तब्दील हो गई, जिसका फायदा उठाने की साजिश आरोपी ने पहले ही रच ली थी। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी राहुल राठौर ने उसे अपने प्रेम जाल में फंसाकर शादी करने का पक्का वादा किया। इसके बाद वह उसे बहला-फुसलाकर धर्मकांटा इलाके के पास एक किराए के मकान में ले गया। बीते 2 अक्टूबर 2025 से वह नाबालिग को उसी कमरे में रखकर उसका शारीरिक शोषण कर रहा था। शातिर आरोपी ने मकान मालिक को शक न हो, इसलिए नाबालिग का परिचय अपनी ‘पत्नी’ के रूप में कराया था। इस दौरान जब भी नाबालिग उस पर सामाजिक रीति-रिवाज से शादी करने का दबाव बनाती या शारीरिक संबंध बनाने का विरोध करती, तो आरोपी राहुल जल्द ही शादी का मंडप सजाने की बात कहकर उसे चुप करा देता था। इसी बीच आरोपी ने डीजे का काम छोड़कर टमटम (ई-रिक्शा) चलाना भी शुरू कर दिया था ताकि वह गुजारा कर सके। विश्वासघात की पराकाष्ठा तब हुई जब बीते दिनों आरोपी राहुल अचानक नाबालिग को कमरे पर ही छोड़कर लापता हो गया। पीड़िता ने जब उससे संपर्क करने की कोशिश की, तो आरोपी का मोबाइल फोन लगातार बंद आने लगा। खुद को ठगा और अकेला पाकर पीड़िता न्याय की गुहार लेकर पुलिस स्टेशन पहुंची। महाराजपुरा थाना पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता और पीड़िता के नाबालिग होने के कारण तुरंत ऐक्शन लिया। पुलिस ने आरोपी राहुल राठौर के खिलाफ बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और जल्द ही उसे सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
बाबर आजम के फ्लॉप शो से हारा पाकिस्तान, शादाब खान की जुझारू पारी भी नहीं आई काम, सीरीज 1-1 की बराबरी पर पहुंची

नई दिल्ली। पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही तीन मैचों की वनडे इंटरनेशनल सीरीज के दूसरे मुकाबले में मेजबान पाकिस्तान को करारी हार का सामना करना पड़ा है। लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए इस बेहद रोमांचक मुकाबले में मेहमान टीम ऑस्ट्रेलिया ने शानदार पलटवार करते हुए पाकिस्तान को 41 रनों के अंतर से शिकस्त दी। इस धमाकेदार जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने सीरीज में 1-1 की बराबरी हासिल कर ली है, जिससे अब इस सीरीज का तीसरा और अंतिम मुकाबला बेहद दिलचस्प और निर्णायक हो गया है। इस मैच में पाकिस्तान के स्टार बल्लेबाज बाबर आजम, सलमान अली आगा और साहिबजादा फरहान जैसे धुरंधर पूरी तरह फ्लॉप साबित हुए, जिसके चलते मेजबान टीम 232 रनों के आसान दिख रहे लक्ष्य का पीछा करते हुए महज 190 रनों पर ही ढेर हो गई। ऑस्ट्रेलिया की ओर से तेज गेंदबाज नैथन एलिस ने अपनी कातिलाना गेंदबाजी से पाकिस्तानी बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी और उन्हें बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच के पुरस्कार से नवाजा गया। इस मुकाबले में टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही थी। मैच की पहली ही गेंद पर पाकिस्तान के कप्तान शाहीन शाह अफरीदी ने खतरनाक बल्लेबाज एलेक्स कैरी को बोल्ड कर मेजबान टीम को बड़ी सफलता दिलाई थी। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ने नियमित अंतराल पर दो और विकेट गंवा दिए, जिससे टीम संकट में नजर आ रही थी। ऐसी स्थिति में मध्यक्रम के बल्लेबाज कैमरोन ग्रीन ने 53 रनों की शानदार पारी खेली और कप्तान जोश इंग्लिस ने भी 51 रनों का बहुमूल्य योगदान दिया। अंत में ओलिवर पीक के 31 रनों की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने निर्धारित 50 ओवरों में 9 विकेट खोकर 231 रनों का एक सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया। पाकिस्तान की ओर से गेंदबाजी में कप्तान शाहीन अफरीदी ने सबसे ज्यादा तीन विकेट चटकाए, जबकि हारिस राउफ, अराफात मिन्हास और माज सदाकत को दो-दो सफलताएं मिलीं। लक्ष्य का पीछा करने उतरी पाकिस्तानी टीम की शुरुआत बेहद निराशाजनक और भयावह रही। मेजबान टीम ने महज 4 रन के कुल स्कोर पर अपना पहला और 6 रन पर दूसरा विकेट गंवा दिया था। इसके बाद भी बल्लेबाजों के तू चल मैं आया का सिलसिला थमा नहीं और पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह बिखर गई। पाकिस्तान ने 33 रन तक पहुंचते-पहुंचते अपना तीसरा और 44 रन पर चौथा बड़ा विकेट खो दिया, जिससे टीम पूरी तरह बैकफुट पर आ गई। इस बेहद नाजुक मोड़ पर ऑलराउंडर शादाब खान ने एक छोर संभालते हुए 71 रनों की बेहद साहसिक और जुझारू पारी खेली, लेकिन दूसरे छोर से उन्हें किसी भी शीर्ष बल्लेबाज का साथ नहीं मिला। विकेटकीपर गाजी घोरी ने 37 रन और अराफात मिन्हास ने 33 रन बनाकर शादाब का साथ देने की कोशिश जरूर की, लेकिन वे टीम को जीत की दहलीज पार कराने में नाकाम रहे। पूरी पाकिस्तानी टीम 44 ओवरों में सिर्फ 190 रनों के स्कोर पर ऑलआउट हो गई और ऑस्ट्रेलिया ने इस मैच को जीतकर पिछले मैच की हार का हिसाब चुकता कर लिया। ऑस्ट्रेलिया की इस ऐतिहासिक जीत के सबसे बड़े हीरो नैथन एलिस रहे जिन्होंने अपने कोटे के ओवरों में कहर बरपाते हुए 4 महत्वपूर्ण विकेट हासिल किए। उनके अलावा स्पिनर मैथ्यू शॉर्ट ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट अपने नाम किए, जबकि मैथ्यू कुहनेमन, एडम जैम्पा और तनवीर संघा को एक-एक विकेट मिला। अब दोनों टीमों के बीच इस वनडे सीरीज का तीसरा और अंतिम डिसाइडर मुकाबला 4 जून को लाहौर के ऐतिहासिक गद्दाफी स्टेडियम में ही खेला जाएगा, जहां ट्रॉफी पर कब्जा जमाने के लिए दोनों टीमों के बीच कांटे की टक्कर होने की उम्मीद है।
कार की टक्कर से युवक की मौत, बेहट रोड पर छात्र भी हादसे का शिकार

ग्वालियर । ग्वालियर जिले के उटीला थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम कुछ घंटों के भीतर हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों ने इलाके में सनसनी फैला दी। एक हादसे में शोक सभा में शामिल होने जा रहे युवक की तेज रफ्तार कार की टक्कर से मौत हो गई, जबकि दूसरे हादसे में कोचिंग के लिए जा रहे एक छात्र को एम्बुलेंस ने टक्कर मार दी। दोनों घटनाओं के बाद पुलिस ने मामले दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पहला हादसा टांकोली गांव के पास हुआ, जहां गोल पहाड़िया निवासी प्रीतम सिंह सोलंकी रिश्तेदारी में आयोजित शोक सभा में शामिल होने पहुंचे थे। वह बस से उतरने के बाद सड़क पार कर रहे थे, तभी सामने से तेज गति से आ रही एक सफेद वैगनआर कार ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि प्रीतम सिंह कई फीट दूर जा गिरे और उनके सिर तथा सीने में गंभीर चोटें आईं। घटना की सूचना मिलते ही उटीला थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घायल को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने का प्रयास किया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। मामले में अज्ञात वैगनआर चालक के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। इसी क्षेत्र में दूसरा हादसा मुरार-भेहट रोड पर सामने आया। टिहोली गांव निवासी छात्र संदीप पाल अपनी साइकिल से कोचिंग जाने के लिए निकला था। मुख्य सड़क पार करते समय ग्वालियर की ओर से आ रही 108 एम्बुलेंस ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया और सड़क किनारे जा गिरा। स्थानीय लोगों और राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल छात्र को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल एम्बुलेंस को जब्त कर लिया है और चालक के खिलाफ लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाने का मामला दर्ज किया है। दोनों घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहनों के खतरे को उजागर किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों मामलों की गंभीरता से जांच की जा रही है। टांकोली हादसे में फरार कार चालक की पहचान कर उसे जल्द गिरफ्तार किया जाएगा, जबकि एम्बुलेंस चालक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। लगातार सामने आ रहे सड़क हादसों के बीच प्रशासन और पुलिस लोगों से यातायात नियमों का पालन करने तथा वाहन चालकों से सावधानीपूर्वक वाहन चलाने की अपील कर रही है।
जब सरकारी फरमान के आगे नहीं झुके संगीत के सरताज किशोर कुमार, 'आंधी' फिल्म के गानों पर प्रतिबंध से लेकर राजनीतिक टकराव की पूरी कहानी

नई दिल्ली। भारतीय सिनेमा और संगीत के इतिहास में सत्तर का दशक अपनी बेहतरीन कलात्मकता के साथ-साथ राजनीतिक उथल-पुथल के लिए भी जाना जाता है। इस दौर में जहां एक तरफ आरडी बर्मन, गुलजार और किशोर कुमार जैसे दिग्गज मिलकर संगीत के नए कीर्तिमान रच रहे थे, वहीं दूसरी तरफ देश में लागू आपातकाल का साया कला जगत पर भी पड़ने लगा था। इसी दौर की एक बेहद चर्चित और विवादित कहानी फिल्म ‘आंधी’ और उसके सदाबहार गाने ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं’ से जुड़ी हुई है। किशोर कुमार और लता मंगेशकर की जादुई आवाज से सजे इस दर्दभरे और रूहानी गाने को एक समय पर सरकारी कोपभाजन का शिकार होना पड़ा था और इस पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया था। संजीव कुमार और सुचित्रा सेन की मुख्य भूमिका वाली इस फिल्म और इसके गानों को प्रतिबंधित किए जाने के पीछे राजनीतिक गलियारों में उठी एक बड़ी अफवाह थी। उस समय देश के राजनीतिक हालातों को देखते हुए यह बात तेजी से फैली कि फिल्म ‘आंधी’ की कहानी और सुचित्रा सेन का किरदार पूरी तरह से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के जीवन और उनके व्यक्तित्व पर आधारित है। इस अफवाह के सामने आते ही तत्कालीन सरकार ने फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी और इसके चलते ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन जैसे सरकारी माध्यमों पर इस फिल्म के गानों के प्रसारण को पूरी तरह बंद कर दिया गया। हालांकि यह प्रतिबंध बहुत लंबा नहीं चला और कुछ महीनों के बाद जब फिल्म से बैन हटा, तो यह सिनेमाघरों में रिलीज हुई और इसके गाने एक बार फिर दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गए। लेकिन इस प्रतिबंध के पीछे सिर्फ फिल्म की कहानी ही एकमात्र वजह नहीं थी, बल्कि इसके पीछे किशोर कुमार और तत्कालीन सरकार के बीच का सीधा टकराव भी था। कई मीडिया रिपोर्ट्स और ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के प्रचारक और तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री वीसी शुक्ला ने किशोर कुमार तक एक सरकारी संदेश भिजवाया था। इस संदेश में किशोर कुमार से सरकार और इंदिरा गांधी के नीतियों के समर्थन में एक विशेष गाना गाने के लिए कहा गया था। अपनी मर्जी के मालिक और बेहद स्वाभिमानी स्वभाव के धनी किशोर कुमार ने इस सरकारी फरमान को मानने से साफ इनकार कर दिया। किशोर कुमार का यह कड़ा रुख सरकार को नागवार गुजरा और इसके बाद उनके गानों को सरकारी रेडियो और दूरदर्शन चैनलों पर बजाने से पूरी तरह रोक दिया गया। इस विवाद पर किशोर कुमार ने बेहद बेबाकी से कहा था कि कोई भी ताकत उनसे वह काम नहीं करवा सकती जो वह खुद अपनी मर्जी से न करना चाहें और वह किसी और के इशारों पर काम नहीं करेंगे। इस ऐतिहासिक गाने के बनने की कहानी भी अपने आप में बेहद दिलचस्प है। संगीत निर्देशक आरडी बर्मन यानी पंचम दा ने इस गाने की मूल धुन असल में एक बंगाली दुर्गा पूजा एल्बम के लिए तैयार की थी, जिसके बोल ‘जेते जेते पथे होलो देरी’ थे। इस बंगाली गाने को खुद पंचम दा ने अपनी आवाज दी थी, जो मशहूर गीतकार गुलजार को बेहद पसंद आई थी। इसके बाद गुलजार के कहने पर इस धुन को फिल्म ‘आंधी’ में शामिल करने का फैसला किया गया और उन्होंने इस पर ‘तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं’ जैसे कालजयी बोल लिखे। किशोर कुमार भले ही तेरह अक्टूबर उन्नीस सौ सतासी को इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन सरकारी पाबंदियों के आगे न झुकने का उनका यह हौसला और उनकी जादुई आवाज आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में हमेशा के लिए अमर है।
कुमार सानू का वो ऐतिहासिक रिकॉर्ड जिसे आज तक कोई सिंगर नहीं तोड़ पाया, जानिए आखिर क्यों एक ही दिन में रिकॉर्ड करने पड़े थे इतने सारे गाने

नई दिल्ली। भारतीय संगीत जगत में नव्वै का दशक एक ऐसा स्वर्णिम काल माना जाता है जिसने बॉलीवुड को कई सदाबहार और यादगार गाने दिए। इस दौर में अपनी मखमली आवाज से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले दिग्गज पाशर्व गायक कुमार सानू ने सफलता के कई नए आयाम स्थापित किए। आज के समय में जहां आधुनिक तकनीक के बावजूद सिंगर्स के लिए एक दिन में एक गाना पूरी तरह रिकॉर्ड करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है, वहीं कुमार सानू ने करीब तैंतीस साल पहले एक ऐसा ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया था जिसे आज तक कोई भी छू नहीं सका है। उन्होंने महज एक दिन के भीतर रिकॉर्ड अठाइस गाने गाकर अपना नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में हमेशा के लिए दर्ज करा लिया था। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने यह रिकॉर्ड किसी पुरस्कार या प्रसिद्धि की चाह में नहीं बनाया था, बल्कि इसके पीछे एक बेहद व्यावहारिक वजह थी। कुमार सानू को उन दिनों करीब चालीस दिनों के लंबे अमेरिकी दौरे पर जाना था और वह नहीं चाहते थे कि उनके विदेश जाने की वजह से किसी भी संगीतकार का काम रुके या फिल्म की शूटिंग प्रभावित हो, इसलिए उन्होंने जाने से पहले अपना सारा लंबित काम खत्म करने का फैसला किया और मैराथन रिकॉर्डिंग करते हुए यह अद्भुत मुकाम हासिल कर लिया। कोलकाता के एक बंगाली परिवार में जन्मे इस महान गायक का असली नाम सानू भट्टाचार्य है, लेकिन उनके संगीत के सफर में एक बड़ा मोड़ तब आया जब उस दौर की मशहूर संगीतकार जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उन्होंने जब पहली बार सानू की आवाज सुनी, तो उन्हें उसमें महान गायक किशोर कुमार की झलक दिखाई दी। इसके बाद उन्होंने सानू भट्टाचार्य को अपना नाम बदलकर कुमार सानू रखने की सलाह दी ताकि फिल्म इंडस्ट्री में उन्हें एक नई पहचान मिल सके। कुमार सानू के करियर को सबसे बड़ी उड़ान साल उन्नीस सौ नब्बे में आई फिल्म आशिकी से मिली। इस फिल्म के गानों ने भारतीय संगीत उद्योग के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और इसकी ब्लॉकबस्टर कामयाबी ने कुमार सानू को रातों-रात देश का सबसे बड़ा सुपरस्टार सिंगर बना दिया। इसके बाद तो जैसे हिंदी सिनेमा में उनके नाम की आंधी चल पड़ी और वह हर बड़े अभिनेता और निर्माता-निर्देशक की पहली पसंद बन गए। कुमार सानू की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने साल उन्नीस सौ इक्यानवे से लेकर उन्नीस सौ पंचानवे तक लगातार पांच सालों तक फिल्मफेयर बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का पुरस्कार जीतकर एक नया इतिहास रच दिया था। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान साजन, दीवाना, बाजीगर और नाइन्टीन फोर्टी टू ए लव स्टोरी जैसी सुपरहिट फिल्मों के गानों के लिए मिला था। कामयाबी के शिखर पर पहुंचने के बाद जब छठे साल भी उन्हें फिल्मफेयर के लिए नामांकित किया गया, तो उन्होंने अपनी दरियादिली और बड़प्पन का परिचय देते हुए इस अवॉर्ड को लेने से साफ मना कर दिया। उनका मानना था कि अब उन्हें लगातार मिलने वाले इस सम्मान की जगह किसी नए, प्रतिभावान और उभरते हुए कलाकार को मौका मिलना चाहिए ताकि फिल्म इंडस्ट्री में नए चेहरों को प्रोत्साहन मिल सके। अपने पूरे करियर में कुमार सानू ने न सिर्फ हिंदी और अपनी मातृभाषा बंगाली में गाने गाए, बल्कि उन्होंने देश की पंद्रह से अधिक क्षेत्रीय भाषाओं में सैकड़ों सुपरहिट गानों को अपनी सुरीली आवाज से सजाया। भारतीय संगीत जगत और संस्कृति में उनके इस बेमिसाल और अभूतपूर्व योगदान को सम्मानित करते हुए भारत सरकार ने साल दो हजार नौ में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा था। आज भी उनके गाए रोमांटिक गाने युवाओं के बीच बेहद लोकप्रिय हैं और उनका यह सफर संगीत के नए साधकों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा।
केबल कारोबार के विवाद ने लिया हिंसक रूप, गोलीकांड का आरोपी गिरफ्तार

ग्वालियर । ग्वालियर में केबल नेटवर्क कारोबार को लेकर शुरू हुआ विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। कोटेश्वर कॉलोनी निवासी केबल संचालक विक्की यादव का अपहरण कर उसे गोली मारने वाले 10 हजार रुपए के इनामी बदमाश छोटू कमरिया को पुलिस ने मंगलवार रात गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पिछले कई दिनों से पुलिस को चकमा देकर फरार चल रहा था। पुलिस के अनुसार, इस सनसनीखेज वारदात के पीछे केबल नेटवर्क कारोबार में हिस्सेदारी को लेकर चल रहा विवाद मुख्य कारण है। घायल विक्की यादव शहर में डिस्क और केबल नेटवर्क व्यवसाय से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि छोटू कमरिया और उसके साथी विक्की के कारोबार में जबरन साझेदारी चाहते थे। जब विक्की ने उनकी मांग ठुकरा दी तो आरोपियों ने उसे रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। घटना शनिवार रात की बताई जा रही है। आरोपियों ने विक्की यादव को बातचीत और समझौते का झांसा देकर बुलाया और उसे जबरन कार में बैठा लिया। इसके बाद उसे सिटी सेंटर क्षेत्र की ओर ले जाया गया। रास्ते में और सुनसान स्थान पर आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की। जब वह गंभीर रूप से घायल हो गया तो उस पर पिस्टल से फायर कर दिया। गोली लगने के बाद आरोपी उसे मरणासन्न हालत में छोड़कर फरार हो गए। घटना के बाद पुलिस ने अपहरण और हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की। आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहे थे, जिसके चलते उनकी गिरफ्तारी चुनौती बनी हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्वालियर पुलिस अधीक्षक ने मुख्य आरोपियों पर 10-10 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। मंगलवार रात पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि इनामी बदमाश छोटू कमरिया बेहटा चौकी के पास हाईवे पर किसी वाहन का इंतजार कर रहा है और शहर छोड़ने की तैयारी में है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इलाके की घेराबंदी कर दी। सादे कपड़ों में मौजूद पुलिसकर्मियों ने आरोपी को पकड़ने की योजना बनाई। जैसे ही छोटू कमरिया ने पुलिस को देखा, उसने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस टीम ने उसे पीछा कर दबोच लिया। तलाशी के दौरान आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल की गई अवैध पिस्टल और कारतूस बरामद किए गए। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि इस मामले में शामिल अन्य फरार आरोपियों की तलाश भी तेज कर दी गई है। पूछताछ के आधार पर जल्द ही पूरे गिरोह का खुलासा होने और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल घायल विक्की यादव का उपचार जारी है और पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
अमेरिकी बाजार में चीनी ऑटो टेक्नोलॉजी को लेकर विवाद गहराया, डेटा सुरक्षा और जासूसी के खतरे पर अलर्ट

नई दिल्ली । अमेरिका में कनेक्टेड वाहनों और उनसे जुड़े डेटा सुरक्षा जोखिमों को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस शुरू हो गई है। मिशिगन की डेमोक्रेट सांसद डेबी डिंगेल ने अमेरिकी वाणिज्य विभाग के उस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें चीन से गहरे जुड़े संबंध रखने वाली एक विदेशी वाहन निर्माता कंपनी को अमेरिकी बाजार में कनेक्टेड वाहन बेचने और निर्माण की अनुमति दी गई है। इस फैसले को लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और विदेशी प्रभाव से जुड़े जोखिमों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। सांसद डिंगेल ने वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक को लिखे पत्र में कहा है कि आधुनिक कनेक्टेड वाहन केवल परिवहन का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि ये बड़े पैमाने पर संवेदनशील डेटा एकत्र और प्रसारित करने में सक्षम तकनीकी प्लेटफॉर्म बन चुके हैं। इनमें जियोलोकेशन, ड्राइविंग पैटर्न, इंफ्रास्ट्रक्चर मैपिंग और उपभोक्ता की व्यक्तिगत जानकारी शामिल हो सकती है, जो गलत हाथों में जाने पर गंभीर सुरक्षा खतरा पैदा कर सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि ऐसी तकनीक का दुरुपयोग जासूसी और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका अपने ऑटोमोबाइल सेक्टर में विदेशी तकनीक के प्रभाव को सीमित करने के लिए सख्त नीतियां लागू कर रहा है। कनेक्टेड व्हीकल नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी विरोधियों से जुड़ी कंपनियां अमेरिकी बाजार में संवेदनशील तकनीक तक अनियंत्रित पहुंच न बना सकें। हालांकि, हालिया मंजूरी ने इस नीति की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सांसद का कहना है कि चीन के ऑटोमोटिव उद्योग को सरकारी समर्थन, उत्पादन क्षमता और व्यापार नीतियों का लाभ मिलता है, जिससे अमेरिकी कंपनियों के सामने प्रतिस्पर्धा की चुनौती और बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि ऐसे मामलों में ढील दी जाती रही तो यह घरेलू विनिर्माण और तकनीकी सुरक्षा दोनों के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकता है। इस पूरे मामले में अब अमेरिकी वाणिज्य विभाग से यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि किन आधारों पर यह अनुमति दी गई और क्या इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों की राय शामिल थी या नहीं। साथ ही यह भी पूछा गया है कि भविष्य में ऐसे मामलों में किस तरह की सख्त निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था लागू की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि कनेक्टेड वाहनों का बढ़ता उपयोग वैश्विक ऑटो उद्योग को तेजी से बदल रहा है, लेकिन इसके साथ साइबर सुरक्षा, डेटा गोपनीयता और भू-राजनीतिक जोखिम भी बढ़ रहे हैं। यही कारण है कि यह मुद्दा अमेरिका और यूरोप जैसे बाजारों में नीति निर्धारण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
अमेरिका की चेतावनी: चीन पर निर्भर क्रिटिकल मिनरल्स सप्लाई चेन बन सकती है राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती

नई दिल्ली । वैश्विक स्तर पर रणनीतिक महत्व रखने वाले क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर अमेरिका ने गंभीर चिंता जताई है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा है कि दुनिया भर में जरूरी खनिजों के उत्पादन और प्रोसेसिंग पर एक ही देश की अत्यधिक निर्भरता आर्थिक स्थिरता और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। उनके अनुसार लिथियम, कोबाल्ट, रेयर अर्थ एलिमेंट्स और ग्रेफाइट जैसे खनिज आधुनिक तकनीक, रक्षा प्रणालियों, इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर्स और रिन्यूएबल एनर्जी के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, और इन पर सीमित देशों का नियंत्रण वैश्विक असंतुलन पैदा कर सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने संसद में दिए बयान में कहा कि यदि किसी जरूरी संसाधन की सप्लाई का लगभग पूरा हिस्सा एक ही देश पर केंद्रित हो जाए, तो यह स्थिति केवल आर्थिक जोखिम नहीं बल्कि रणनीतिक कमजोरी भी बन जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी निर्भरता संकट के समय राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने का माध्यम बन सकती है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका रहती है। उन्होंने बताया कि अमेरिका इस स्थिति से निपटने के लिए दुनिया के कई देशों के साथ साझेदारी बढ़ा रहा है ताकि सप्लाई चेन को अधिक विविध और संतुलित बनाया जा सके। इसके तहत केवल कच्चे माल की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि उनकी प्रोसेसिंग क्षमता को भी विभिन्न देशों में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। उनका कहना था कि अब यह रणनीति अमेरिकी विदेश नीति का एक अहम हिस्सा बन चुकी है और लगभग सभी राजनयिक मिशनों में इस विषय पर काम किया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर अमेरिका की नीति चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव के संदर्भ में और अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिकी पक्ष का मानना है कि क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य में रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में गंभीर चुनौतियां खड़ी कर सकती है। इसी कारण अमेरिका कई देशों को साथ लेकर एक व्यापक सप्लाई नेटवर्क बनाने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि किसी एक देश पर निर्भरता को कम किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में रेयर अर्थ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों की भूमिका लगातार बढ़ रही है, जिससे इनके उत्पादन और आपूर्ति पर नियंत्रण रखने वाले देशों की रणनीतिक शक्ति भी बढ़ती जा रही है। इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा और अधिक तेज होती दिख रही है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक व्यापार और तकनीकी संतुलन को प्रभावित कर सकती है। अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी संकेत दिया कि केवल खनिज ही नहीं, बल्कि दवा निर्माण जैसे अन्य क्षेत्रों में भी उत्पादन का अत्यधिक केंद्रीकरण चिंता का विषय है। उनके अनुसार भविष्य की वैश्विक नीतियों में सप्लाई चेन की सुरक्षा और विविधीकरण को प्राथमिकता देना अनिवार्य हो गया है, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में दुनिया को बड़े व्यवधान से बचाया जा सके।
अमेरिका की नई व्यापार नीति से बढ़ी चिंता: 60 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव, भारत भी शामिल

नई दिल्ली। वैश्विक व्यापार पर एक बड़ा प्रभाव डालने वाला प्रस्ताव सामने आया है, जिसमें अमेरिका ने भारत सहित लगभग 60 देशों और अर्थव्यवस्थाओं पर अतिरिक्त 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना पेश की है। यह प्रस्ताव अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) द्वारा 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत रखा गया है, जिसका आधार इन देशों में जबरन श्रम (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े उत्पादों के आयात को रोकने में कथित विफलता बताया गया है। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, कई देशों ने ऐसे उत्पादों की पहचान और उनके आयात पर रोक लगाने के लिए पर्याप्त और प्रभावी कदम नहीं उठाए हैं, जो जबरन श्रम से तैयार किए गए हो सकते हैं। यूएसटीआर का कहना है कि यह स्थिति वैश्विक व्यापार में असंतुलन पैदा करती है और अमेरिकी श्रमिकों को अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। यूएसटीआर के प्रस्ताव के अनुसार, जिन देशों ने पहले से जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने या आंशिक नियंत्रण लागू करने के प्रयास किए हैं, उन पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। वहीं, जिन देशों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है, उन पर 12.5 प्रतिशत तक का अतिरिक्त टैरिफ लागू करने का प्रस्ताव है। इस सूची में भारत भी शामिल बताया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी तरह का जबरन श्रम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों द्वारा इस दिशा में पर्याप्त कार्रवाई न करना चिंता का विषय है और इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार व्यवस्था प्रभावित होती है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि कुछ देशों ने पहले से ही अमेरिकी व्यापार समझौतों जैसे यूएसएमसीए के तहत इस दिशा में कुछ प्रतिबद्धताएं जताई हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं हैं। अमेरिका का मानना है कि सभी व्यापारिक साझेदारों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि वैश्विक व्यापार किसी भी रूप में जबरन श्रम को बढ़ावा न दे। इसके अलावा, यूएसटीआर ने एक विशेष टेक्सटाइल मैकेनिज्म का भी प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत कुछ देशों से आने वाले कपड़ा और परिधान उत्पादों की सीमित मात्रा को कम टैरिफ दर पर अमेरिका में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है। यह व्यवस्था विशेष रूप से उन देशों के लिए होगी जो आंशिक रूप से अनुपालन कर रहे हैं। प्रस्तावित नियमों पर आगे की प्रक्रिया के तहत 7 जुलाई 2026 को सार्वजनिक सुनवाई की जाएगी, जिसमें विभिन्न देशों और हितधारकों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि इन टैरिफ को किस तरह लागू किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो इससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है और कई विकासशील देशों के निर्यात पर दबाव बढ़ सकता है। खासकर उन देशों के लिए चुनौती बढ़ सकती है जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर वस्त्र, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उत्पाद निर्यात करते हैं। इस प्रस्ताव ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में नई बहस छेड़ दी है, जहां एक ओर श्रम अधिकारों की सुरक्षा की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर व्यापारिक बाधाओं और आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंता जताई जा रही है।
इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट से चलाता था गैंग, लाखों का माल बरामद

ग्वालियर । ग्वालियर पुलिस ने शहर में सक्रिय एक हाईटेक चोरी गिरोह का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है। इंदरगंज थाना पुलिस ने दो और आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए करीब 94 लाख 25 हजार रुपए मूल्य का चोरी का माल बरामद किया है। बरामदगी में सोना, चांदी, नकदी और चोरी के पैसों से खरीदी गई एक कार शामिल है। पुलिस इसे वर्ष 2026 की सबसे बड़ी रिकवरी मान रही है। इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि गिरोह का मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति कंप्यूटर इंजीनियरिंग का छात्र रहा है। पुलिस के अनुसार, जल्दी और अधिक पैसा कमाने की चाह में उसने अपराध का रास्ता चुना और तकनीक का इस्तेमाल करते हुए एक संगठित गिरोह तैयार कर लिया। गिरोह के सदस्य बेहद सुनियोजित तरीके से सूने मकानों को निशाना बनाते थे और पुलिस की निगरानी से बचने के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लेते थे। मामले की शुरुआत 5 मई 2026 को हुई थी, जब इंदरगंज क्षेत्र निवासी अजय शंकर मित्तल के घर में चोरी की बड़ी वारदात हुई। मकान सूना होने का फायदा उठाकर चोरों ने ताला तोड़ा और लाखों रुपए के जेवरात तथा अन्य कीमती सामान लेकर फरार हो गए। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने में सफलता हासिल की। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गिरोह का सरगना विवेक प्रजापति अपने साथियों और परिजनों से संपर्क करने के लिए सामान्य फोन कॉल या मैसेजिंग एप का इस्तेमाल नहीं करता था। वह इंस्टाग्राम कॉल और सीक्रेट चैट फीचर का उपयोग करता था, ताकि उसकी बातचीत को ट्रैक करना मुश्किल हो सके। गिरफ्तारी के बाद भी उसने करीब 48 घंटे तक पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन उसके साथी फरहान खान से मिली जानकारी ने पूरे नेटवर्क की परतें खोल दीं। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस पनिहार टोल प्लाजा के आगे बीहड़ क्षेत्र में पहुंची, जहां चोरी का माल जमीन में गाड़कर और पत्थरों के नीचे छिपाकर रखा गया था। यहां से बड़ी मात्रा में सोना और चांदी बरामद की गई। पुलिस ने चोरी के गहने खरीदने के आरोप में एक सराफा कारोबारी विवेक सोनी को भी गिरफ्तार किया है। सीएसपी रोबिन जैन के मुताबिक अब तक गिरोह के कई सदस्य पुलिस गिरफ्त में आ चुके हैं। इनमें मास्टरमाइंड विवेक प्रजापति, फरहान खान, आकाश माहौर, मयूर राठौर, एक नाबालिग आरोपी और चोरी का माल खरीदने वाला सुनार शामिल हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 300 ग्राम सोना, साढ़े 14 किलो चांदी तथा चोरी की रकम से खरीदी गई आई-20 कार जब्त की है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य संभावित अपराधों और नेटवर्क की जांच कर रही है। माना जा रहा है कि आरोपियों ने शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई अन्य वारदातों को भी अंजाम दिया हो सकता है।