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देवास में दर्दनाक हादसा, टूटे बिजली तार की चपेट में आने से युवक की मौत

देवास । देवास जिले के विजयागंज मंडी क्षेत्र स्थित बरखेड़ा गांव में बिजली विभाग की कथित लापरवाही एक युवक की जान पर भारी पड़ गई। खेत में चरी काटने गए 22 वर्षीय युवक की टूटे हुए बिजली तार की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है, वहीं परिजनों ने बिजली कंपनी के अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मृतक की पहचान अरुण मालवीय (22) के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार मंगलवार शाम अरुण अपने खेत पर चरी काटने गया था। इसी दौरान खेत के ऊपर से गुजर रही विद्युत लाइन का तार अचानक टूटकर नीचे आ गिरा और वह उसकी चपेट में आ गया। करंट लगने से अरुण की मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि खेत के ऊपर से गुजरने वाली बिजली लाइन के तार लंबे समय से नीचे झूल रहे थे और किसी भी समय बड़े हादसे की आशंका बनी हुई थी। इस संबंध में कई बार बिजली कंपनी और संबंधित अधिकारियों को शिकायत भी की गई थी, लेकिन डेढ़ से दो वर्षों के दौरान समस्या का समाधान नहीं किया गया। परिवार का आरोप है कि यदि समय रहते तारों की मरम्मत कर दी जाती तो यह हादसा टाला जा सकता था। घटना का पता तब चला जब काफी देर तक अरुण का मोबाइल फोन नहीं उठा। चिंतित परिजन और ग्रामीण उसे तलाशते हुए खेत पहुंचे, जहां वह बिजली तार की चपेट में आने के बाद जमीन पर पड़ा मिला। इसके बाद उसे तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की असामयिक मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव के लोगों में भी बिजली विभाग के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर और झूलते बिजली तारों की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल की शवगृह में रखवाया गया था। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। जांच के दौरान पुलिस हादसे के सभी पहलुओं की पड़ताल करेगी। यह घटना एक बार फिर बिजली लाइनों के रखरखाव और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े करती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए तथा क्षेत्र में झूल रहे बिजली तारों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

देवास में युवक ने फांसी लगाकर दी जान, सुबह पत्नी ने देखा तो मचा हड़कंप

देवास । देवास शहर के जवाहर नगर क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां 26 वर्षीय युवक ने कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। युवक का शव घर में फंदे पर लटका मिला। घटना का पता उस समय चला जब सुबह उसकी पत्नी की नींद खुली और उसने पति को फांसी के फंदे पर झूलते देखा। यह दृश्य देखकर वह घबरा गई और तुरंत परिजनों को सूचना दी। मृतक की पहचान अजय जाटव (26) के रूप में हुई है। वह जवाहर नगर क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रहा था और मूल रूप से उत्तर प्रदेश का निवासी था। परिजनों के अनुसार अजय पिछले तीन वर्षों से एक निजी कंपनी में हेल्पर के रूप में कार्यरत था। उसके परिवार में पत्नी और एक छोटा बेटा है। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे और अजय को तत्काल जिला अस्पताल लेकर गए। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की अचानक मौत से परिवार में मातम का माहौल है और परिजन गहरे सदमे में हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार अजय ने अपनी पत्नी की साड़ी से फंदा बनाकर यह कदम उठाया। हालांकि उसने आत्महत्या जैसा कठोर फैसला क्यों लिया, इसका कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं होने की जानकारी सामने आई है। सूचना मिलने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस परिजनों, परिचितों और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है, ताकि आत्महत्या के पीछे की वजह का पता लगाया जा सके। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि युवक ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया।

होर्मुज संकट के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक चाल, वेनेजुएला से तेल डील की संभावनाएं तेज, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया आधार

नई दिल्ली । वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितताओं और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बने तनावपूर्ण हालात के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम उठाता नजर आ रहा है। इसी क्रम में वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज का 3 से 7 जून तक भारत दौरा प्रस्तावित है, जिसे ऊर्जा सहयोग और निवेश साझेदारी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच कच्चे तेल की आपूर्ति, निवेश विस्तार और दीर्घकालिक ऊर्जा समझौतों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौते आगे बढ़ते हैं तो भारत की तेल आयात निर्भरता रूस और खाड़ी देशों पर कम हो सकती है और ऊर्जा आपूर्ति में विविधता आएगी। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी अनिश्चितताओं ने कच्चे तेल की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है। ऐसे में भारत लगातार वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में है ताकि किसी एक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता से बचा जा सके। वेनेजुएला, जिसके पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडारों में से एक माना जाता है, भारत के लिए एक रणनीतिक विकल्प के रूप में उभर रहा है। हाल के आंकड़ों के अनुसार भारत पहले ही वेनेजुएला से तेल आयात में उल्लेखनीय वृद्धि कर चुका है और यह देश भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल हो गया है। वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति के साथ इस यात्रा में ऊर्जा, व्यापार, स्वास्थ्य, फार्मास्यूटिकल्स और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। विदेश मंत्रालय के अनुसार इस प्रतिनिधिमंडल में कई वरिष्ठ मंत्री भी शामिल हैं, जो द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर भारत के साथ चर्चा करेंगे। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक तेल बाजार अस्थिर है और कई देशों की अर्थव्यवस्था ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि यदि भारत वेनेजुएला के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते करता है तो यह न केवल आपूर्ति सुरक्षा को मजबूत करेगा बल्कि कीमतों में स्थिरता लाने में भी मदद करेगा। साथ ही, अमेरिका और अन्य प्रतिबंधों के बावजूद वेनेजुएला से तेल आपूर्ति भारत के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान कर सकती है, जिससे किसी एक क्षेत्रीय संकट का प्रभाव सीमित हो जाएगा।

लोकायुक्त के भीतर कथित रिश्वतखोरी का खुलासा, सिस्टम की पारदर्शिता पर बहस तेज

जबलपुर। मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली लोकायुक्त संस्था खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। एक स्टिंग ऑपरेशन में लोकायुक्त संगठन के कुछ कर्मचारियों पर रिश्वत लेकर ट्रैप मामलों को कमजोर करने और आरोपियों को राहत पहुंचाने की कथित डील करते हुए सामने आने का दावा किया गया है। इस खुलासे ने उस व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है, जिसका काम भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। स्टिंग ऑपरेशन के दौरान रिपोर्टर ने रिश्वत लेते पकड़े गए सरकारी कर्मचारियों के रिश्तेदार बनकर लोकायुक्त के कर्मचारियों से संपर्क किया। बातचीत में कुछ कर्मचारियों ने कथित तौर पर ऐसे तरीके बताए, जिनके जरिए ट्रैप मामलों की जांच को प्रभावित किया जा सकता है। इनमें वॉयस सैंपल की प्रक्रिया को प्रभावित करना, जांच को वर्षों तक लंबित रखना और गवाहों को मैनेज करने जैसे दावे शामिल हैं। भोपाल लोकायुक्त में पदस्थ टेक्नीशियन अमित विश्वकर्मा के साथ हुई मुलाकात में कथित तौर पर यह दावा किया गया कि जांच को आरोपी की सेवानिवृत्ति तक लंबा खींचा जा सकता है, जिससे पेंशन और अन्य सेवा लाभों पर तत्काल प्रभाव न पड़े। बातचीत के दौरान वॉयस सैंपल को प्रभावित करने और जांच प्रक्रिया को धीमा करने के लिए लाखों रुपये की मांग किए जाने का भी दावा किया गया। स्टिंग में यह भी सामने आया कि कुछ मामलों में आरोपी को पहले से यह बताया जा सकता है कि उसे वॉयस सैंपल के दौरान क्या बोलना है और क्या नहीं। कथित तौर पर गवाहों को भी प्रभावित करने की बात कही गई, ताकि जांच की दिशा बदली जा सके। इस पूरी प्रक्रिया के लिए 3 लाख से 5 लाख रुपये तक की डील की चर्चा सामने आई। सागर में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल यशवंत सिंह के साथ हुई बातचीत में भी जांच को प्रभावित करने, भाषा और बोलने के तरीके में बदलाव कर वॉयस सैंपल को कमजोर करने तथा फॉरेंसिक रिपोर्ट पर असर डालने जैसे दावे किए गए। उन्होंने कथित तौर पर जांच को कई महीनों तक टालने और दस्तावेजों को मैनेज कराने की बात भी कही। वहीं, लोकायुक्त के अन्य कर्मचारियों के नाम भी सामने आए, जिन पर कथित तौर पर आरोपियों और अधिकारियों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने के आरोप लगे हैं। एक अन्य कर्मचारी ने तो कथित रूप से 3 लाख रुपये में पूरा मामला “मैनेज” करने का दावा करते हुए पहले किस्त के रूप में रकम देने की बात कही। यह खुलासा इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि लोकायुक्त जैसी संस्था पर आम लोगों का भरोसा भ्रष्टाचार के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई के लिए टिका होता है। यदि जांच एजेंसियों के भीतर ही ऐसे नेटवर्क सक्रिय हैं, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया और भ्रष्टाचार विरोधी अभियान दोनों प्रभावित हो सकते हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इन आरोपों और स्टिंग में सामने आए तथ्यों पर क्या कार्रवाई होती है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल कुछ कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे तंत्र की जवाबदेही और पारदर्शिता पर व्यापक बहस खड़ी कर सकता है।

डीके शिवकुमार का शपथ ग्रहण आज, बीजेपी नेता येदियुरप्पा से मुलाकात के बाद सियासी संदेशों पर तेज हुई बहस

नई दिल्ली । कर्नाटक की राजनीति में आज एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जहां डीके शिवकुमार राज्य के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। बेंगलुरु स्थित लोक भवन के ग्लास हाउस में शाम 4 बजकर 5 मिनट पर होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। राज्यपाल थावरचंद गहलोत उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे, जबकि उनके साथ नई कैबिनेट के 10 से 12 मंत्रियों के भी शपथ लेने की संभावना है। समारोह में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ कई वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी अपेक्षित है, जिससे यह कार्यक्रम राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बन गया है। शपथ ग्रहण से पहले डीके शिवकुमार की लगातार हो रही मुलाकातों ने सियासी हलचल को और बढ़ा दिया है। उन्होंने पहले पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से मुलाकात की और उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा से भी भेंट की। इस मुलाकात को राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसे केवल औपचारिक मुलाकात के बजाय एक बड़े सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम राज्य में संतुलन और संवाद की नीति को दर्शाने का प्रयास हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक व्याख्या सामने नहीं आई है। शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही हैं और बेंगलुरु शहर को विशेष रूप से सजाया गया है। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें दिहाड़ी मजदूर, किसान प्रतिनिधि, दलित संगठन, महिला समूह, युवा नेता और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके साथ ही मीडिया, फिल्म, खेल, न्यायपालिका, उद्योग और कला जगत से जुड़े लोगों की भी उपस्थिति तय मानी जा रही है, जिससे यह आयोजन व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व का प्रतीक बनता दिखाई दे रहा है। नई कैबिनेट को लेकर अभी आधिकारिक रूप से पूरी सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन संकेत हैं कि पुराने और नए चेहरों का मिश्रण देखने को मिल सकता है। पार्टी के भीतर संतुलन साधने और विभिन्न गुटों को प्रतिनिधित्व देने की रणनीति पर काम चल रहा है। इस बीच डिप्टी सीएम और अन्य प्रमुख मंत्रालयों को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि अंतिम फैसला शपथ ग्रहण के बाद ही स्पष्ट होगा। डीके शिवकुमार ने पहले ही संकेत दिए हैं कि उनके नेतृत्व में कर्नाटक में एक नए युग की शुरुआत होगी, विशेष रूप से युवाओं के लिए अवसरों को बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि जिम्मेदारियां आसान नहीं होंगी और सरकार के सामने कई चुनौतियां रहेंगी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में नई सरकार की नीतियां और कैबिनेट संरचना राज्य की दिशा तय करेगी। इस बीच शपथ ग्रहण से पहले उनके आवास पर सुरक्षा व्यवस्था को भी सख्त कर दिया गया है। समर्थकों में उत्साह का माहौल है और पूरे राज्य में राजनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार अपने पहले फैसलों के साथ किस दिशा में आगे बढ़ती है और राज्य की राजनीति में क्या नया संतुलन स्थापित होता है।

31 खदानों का 16 करोड़ का ठेका, बीच में रेत माफिया सक्रिय होने के आरोप

जबलपुर। जबलपुर जिले में पिछले सात महीनों से रेत खदानों की नीलामी नहीं होने का खामियाजा सरकार और आम जनता दोनों को भुगतना पड़ रहा है। नवंबर 2025 से जिले की वैध रेत खदानें बंद पड़ी हैं, जिसके चलते सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। दूसरी ओर इस स्थिति का सबसे अधिक फायदा अवैध खनन माफियाओं को मिल रहा है, जिन्होंने नर्मदा समेत अन्य नदियों में रेत उत्खनन का समानांतर कारोबार खड़ा कर लिया है। जिले में नर्मदा, हिरण और गौर नदी क्षेत्र में करीब 42 रेत खदानें स्थित हैं, जिनमें से 31 खदानों को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की स्वीकृति प्राप्त है। राज्य सरकार ने इन खदानों के लिए लगभग पांच लाख घनमीटर रेत उत्खनन का टेंडर जारी किया था। इसके बदले करीब 16.5 करोड़ रुपये की लीज राशि निर्धारित की गई थी, लेकिन ऊंची प्रीमियम दर और अधिक उत्खनन लक्ष्य के कारण किसी भी ठेकेदार ने रुचि नहीं दिखाई। लगातार तीन बार टेंडर प्रक्रिया दोहराने के बावजूद खदानों का आवंटन नहीं हो सका। खनिज कारोबार से जुड़े जानकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में इतनी बड़ी राशि और निर्धारित शर्तों के साथ खदानों का संचालन आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं है। यही कारण है कि ठेकेदारों ने दूरी बनाए रखी। अब खनिज विभाग नई रणनीति पर काम कर रहा है। विभाग खदानों की संख्या, उत्खनन की मात्रा और प्रीमियम दरों में कमी कर टेंडर को व्यावहारिक बनाने की तैयारी कर रहा है। जानकारी के अनुसार पांच लाख घनमीटर की सीमा घटाकर करीब साढ़े तीन लाख घनमीटर करने पर विचार किया जा रहा है। उधर वैध खदानों के बंद होने से अवैध खनन का नेटवर्क लगातार मजबूत हुआ है। रात के अंधेरे में पोकलेन, जेसीबी और हाईवा जैसे भारी वाहनों की मदद से नर्मदा और उसकी सहायक नदियों से बड़े पैमाने पर रेत निकाली जा रही है। कई स्थानों पर नदी की धाराओं को प्रभावित कर अस्थायी रास्ते और पुल तक बनाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि रातभर ट्रैक्टर और हाईवा के जरिए अवैध परिवहन खुलेआम चलता है, लेकिन प्रभावी रोक नहीं लग पा रही। इसका असर रेत बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। वैध आपूर्ति ठप होने से रेत की उपलब्धता कम हो गई है और कीमतों में भारी उछाल आया है। वर्तमान में जबलपुर में एक हाईवा रेत 28 से 30 हजार रुपये तक बिक रही है, जबकि पड़ोसी कटनी जिले में इसकी कीमत 50 हजार रुपये प्रति हाईवा तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों का असर निर्माण कार्यों और रियल एस्टेट गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। हालांकि प्रशासन अब सक्रिय नजर आ रहा है। जिला खनिज विभाग, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बेलखाड़ू, बरगी, सिहोरा और चरगवां क्षेत्रों में लगातार कार्रवाई कर रही हैं। अवैध रूप से भंडारित रेत को जब्त कर नष्ट किया जा रहा है। वहीं भोपाल स्थित खनिज मुख्यालय ने भी जबलपुर की खदानों से संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके बावजूद सवाल यही है कि जब तक वैध खदानों का संचालन शुरू नहीं होगा, तब तक अवैध खनन पर पूरी तरह लगाम लगाना बड़ी चुनौती बना रहेगा।

एक ही सीढ़ी, धुएं से भरा होटल और मौत का मंजर: दिल्ली आग हादसे में 21 की मौत, रेस्क्यू पर उठे सवाल

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर दिया है, जहां एक होटल में लगी भीषण आग में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हादसे में दर्जनों लोग घायल हुए हैं, जबकि बचाव दल ने कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग की कार्रवाई तेज कर दी गई है, लेकिन शुरुआती जांच में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही के संकेत सामने आए हैं। यह आग मालवीय नगर स्थित एक बहुमंजिला इमारत के ‘लेमन ग्रीन रेस्टोरेंट’ में सुबह करीब 8.50 से 9 बजे के बीच लगी। देखते ही देखते आग ने पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया और ऊपरी मंजिलों तक धुआं फैल गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में केवल एक ही सीढ़ी होने के कारण लोग फंस गए और बाहर निकलने का कोई सुरक्षित रास्ता नहीं बचा। हादसे के दौरान कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए खतरनाक कदम उठाए और तीसरी मंजिल से नीचे बिछाए गए गद्दों पर छलांग लगा दी। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया और गली में गद्दे बिछाकर फंसे हुए लोगों को बचाने की कोशिश की। कई लोग इस दौरान गंभीर रूप से घायल भी हो गए, जिनमें कुछ के पैर टूटने की भी जानकारी सामने आई है। स्थानीय नागरिकों और चश्मदीदों के अनुसार, आग लगने के बाद पूरी इमारत धुएं से भर गई थी, जिससे लोगों को सांस लेने और बाहर निकलने में भारी दिक्कत हुई। कई लोग बेसमेंट में भी फंस गए थे, जिन्हें स्थानीय लोगों ने शटर तोड़कर बाहर निकाला। प्रत्यक्षदर्शियों ने यह भी बताया कि इमारत में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था और एक ही एग्जिट होने के कारण हालात और बिगड़ गए। घटना पर बयान देते हुए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कहा कि शुरुआती जानकारी के अनुसार होटल में सुरक्षा व्यवस्थाएं बेहद कमजोर थीं। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन प्रारंभिक आशंका है कि आग रेस्टोरेंट के किचन या इलेक्ट्रिक उपकरण से शुरू हुई हो सकती है। दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार, उन्हें सुबह 8.50 बजे सूचना मिली जिसके बाद सात फायर टेंडर तुरंत मौके पर भेजे गए। राहत और बचाव अभियान में कुल 37 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इमारत में बेसमेंट सहित कुल छह मंजिलें थीं, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। अधिकारियों ने यह भी बताया कि इमारत में कई विदेशी नागरिक भी ठहरे हुए थे, जो पास के अस्पताल में इलाज के लिए आए थे। हादसे के बाद बिजली आपूर्ति तुरंत काट दी गई और बचाव कार्य तेजी से पूरा किया गया। इस दुखद घटना पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया है और मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता की घोषणा की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि घटना की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। दिल्ली का यह अग्निकांड एक बार फिर शहरी भवन सुरक्षा मानकों और आपातकालीन निकास व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय पर सुरक्षित निकास और पर्याप्त सीढ़ियों की व्यवस्था होती, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

14 साल बाद मांगी गई ₹3.33 लाख की वसूली, ट्रिब्यूनल ने मांगा जवाब

जबलपुर। जबलपुर की 91 वर्षीय श्यामा देवी झा को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) से बड़ी राहत मिली है। अधिकरण ने उनकी पारिवारिक पेंशन से की जा रही 3.33 लाख रुपए की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयुध निर्माणी विभाग ने कथित अधिक पेंशन भुगतान का हवाला देते हुए यह राशि वापस लेने का आदेश जारी किया था, लेकिन बुजुर्ग महिला ने इसे न्यायिक चुनौती देते हुए अधिकरण का दरवाजा खटखटाया। प्रारंभिक सुनवाई में अधिकरण ने मामले को गंभीर मानते हुए विभाग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। श्यामा देवी झा के पति शंभू दयाल झा आयुध निर्माणी में कार्यरत थे। सेवानिवृत्ति के बाद वे नियमित पेंशन प्राप्त कर रहे थे। वर्ष 2012 में उनके निधन के बाद पारिवारिक पेंशन का लाभ उनकी पत्नी श्यामा देवी को मिलने लगा। पिछले 14 वर्षों से उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत पेंशन मिल रही थी, लेकिन हाल ही में विभाग ने आदेश जारी कर दावा किया कि उन्हें अधिक भुगतान किया गया है और करीब 3 लाख 33 हजार रुपए की राशि की वसूली की जाएगी। विभाग के इस फैसले ने बुजुर्ग महिला के सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया। याचिका में कहा गया कि 91 वर्ष की उम्र में पेंशन ही उनका एकमात्र सहारा है और इसी राशि से उनका जीवन-यापन चलता है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि यदि किसी प्रकार का अधिक भुगतान हुआ भी है तो उसमें उनका कोई दोष नहीं है। उन्होंने न तो कोई गलत जानकारी दी और न ही किसी प्रकार की तथ्यात्मक जानकारी छिपाई। ऐसे में 14 साल बाद वसूली की कार्रवाई न केवल अनुचित है बल्कि मानवीय दृष्टि से भी न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती। मामले में श्यामा देवी की ओर से अधिवक्ता आकाश सिंघई ने पक्ष रखा। उन्होंने अधिकरण के समक्ष दलील दी कि विभागीय त्रुटि का भार एक वृद्ध पेंशनभोगी पर नहीं डाला जा सकता। सुनवाई के दौरान अधिकरण ने प्रथम दृष्टया इन तर्कों को उचित माना और वसूली आदेश के क्रियान्वयन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। CAT के आदेश के बाद फिलहाल श्यामा देवी की पारिवारिक पेंशन से किसी प्रकार की कटौती नहीं की जाएगी। अधिकरण ने संबंधित विभाग को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में विभाग का पक्ष सामने आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी। यह मामला उन हजारों पेंशनभोगियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिनके खिलाफ वर्षों बाद अधिक भुगतान के नाम पर रिकवरी की कार्रवाई की जाती है। फिलहाल बुजुर्ग महिला को राहत मिलने से उनके परिवार ने संतोष जताया है और न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा व्यक्त किया है।

फर्जी बैंक खाता और किसान सदस्य दिखाकर लाखों की सरकारी राशि हड़पी

जबलपुर । जबलपुर में सरकारी योजनाओं में सेंध लगाकर लाखों रुपए की राशि हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कृषि विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि रायसेन जिले की बेगमगंज सीड प्रोड्यूसर लिमिटेड कंपनी ने फर्जी बैंक खाता, नकली किसान सदस्य और नियम विरुद्ध नियुक्तियों के जरिए सरकारी खजाने से 39.67 लाख रुपए हासिल कर लिए। मामले का खुलासा होते ही प्रशासन और पुलिस हरकत में आ गई है तथा कंपनी के 6 डायरेक्टरों और 3 कर्मचारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज किया गया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2022-23 में अनाज उपार्जन कार्यों के लिए पात्रता हासिल करने के उद्देश्य से कंपनी ने कई फर्जी दस्तावेज तैयार किए। सरकारी नियमों के मुताबिक ऐसी संस्थाओं के पास कम से कम 50 लाख रुपए की नकद राशि या क्रेडिट लिमिट होना अनिवार्य है, लेकिन जांच में पाया गया कि कंपनी ने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत दिखाने के लिए आईसीआईसीआई बैंक का एक ऐसा खाता प्रस्तुत किया, जो वास्तव में उसके नाम पर था ही नहीं। बैंक सत्यापन के दौरान यह फर्जीवाड़ा सामने आ गया। जांच का दायरा बढ़ा तो किसान सदस्यों की सूची भी संदेह के घेरे में आ गई। अधिकारियों ने सूची में दर्ज मोबाइल नंबरों पर संपर्क किया तो कई ग्रामीणों ने साफ शब्दों में कहा कि वे न तो कंपनी को जानते हैं और न ही उसके सदस्य हैं। कई नामों के साथ पते, शेयर राशि और अन्य जरूरी जानकारियां भी दर्ज नहीं मिलीं। इससे स्पष्ट हुआ कि कागजों में फर्जी सदस्य जोड़कर संस्था को पात्र साबित किया गया और सरकारी लाभ हासिल किया गया। मामले में एक और बड़ा खुलासा कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर हुआ। कंपनी के प्रबंधक मनीष चौरसिया, लेखापाल कमलेश साहू और कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा की नियुक्ति बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के की गई। रिकॉर्ड में न तो बैठक का कोई प्रस्ताव मिला और न ही नियुक्ति की स्वीकृति संबंधी दस्तावेज। कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षरों में भी अंतर पाया गया, जिससे जालसाजी की आशंका और गहरा गई। मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, जबलपुर की रिपोर्ट में सामने आया कि कंपनी ने प्रासंगिक व्यय, हैंडलिंग चार्ज और कमीशन के नाम पर 39 लाख 67 हजार 781 रुपए की सरकारी सहायता राशि प्राप्त की थी। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह राशि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हासिल की गई। पूरे मामले की शुरुआत किसान मजदूर महासंघ के जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह ठाकुर की शिकायत से हुई थी। कलेक्टर के निर्देश पर हुई उच्च स्तरीय जांच ने फर्जीवाड़े की परतें खोल दीं। इसके बाद किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सहायक संचालक रवि कुमार आम्रवंशी ने पाटन थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने कंपनी के डायरेक्टर सचिन दुबे, रंजना पाण्डे, संदीप दुबे, अंशुल बर्मन, नेहा पाण्डे और उमा सिंह के साथ प्रबंधक मनीष चौरसिया, लेखापाल कमलेश साहू और कंप्यूटर ऑपरेटर नीलेश विश्वकर्मा को आरोपी बनाया है। फिलहाल आरोपियों की तलाश में दबिश दी जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि सरकारी राशि का उपयोग कहां और कैसे किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस पूरे नेटवर्क से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

आरबीआई एमपीसी की तीन दिवसीय बैठक शुरू, ब्याज दरों पर फैसले को लेकर बाजार की निगाहें टिकीं, महंगाई और वैश्विक तनाव बना मुख्य फोकस

नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो गई है, जिसमें देश की मौद्रिक नीति की दिशा तय करने को लेकर गहन विचार-विमर्श किया जा रहा है। यह बैठक ऐसे समय पर हो रही है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई प्रकार की चुनौतियों से गुजर रही है और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा बाजारों को अस्थिर कर दिया है। ऐसे में भारतीय अर्थव्यवस्था पर महंगाई और विकास दर दोनों को संतुलित रखने का दबाव बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आरबीआई रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करेगा और मौजूदा दरों को यथावत बनाए रखेगा, हालांकि नीति वक्तव्य में अधिक सतर्क रुख देखने को मिल सकता है। इस बैठक पर बाजार और निवेशकों की खास नजर बनी हुई है क्योंकि इससे आने वाले महीनों में ऋण, निवेश और आर्थिक गतिविधियों की दिशा तय होगी। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा शुक्रवार को बैठक के बाद नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिसका सीधा असर भारत की महंगाई दर पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तेल की कीमतें स्थिर नहीं रहती हैं तो उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर दबाव बढ़ सकता है और महंगाई अनुमान में वृद्धि संभव है। एचएसबीसी और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों के विश्लेषकों का कहना है कि निकट भविष्य में आरबीआई ब्याज दरों को स्थिर रखने की रणनीति अपनाएगा, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार आगे चलकर सख्ती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह भी संकेत दिए गए हैं कि बाजार 2026 के अंत तक दरों में हल्की कटौती की संभावना को देख रहा है, हालांकि यह पूरी तरह वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। अर्थशास्त्रियों का यह भी कहना है कि महंगाई का मौजूदा दबाव मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष से जुड़ा हुआ है, न कि मांग में तेजी के कारण। ऐसे में आरबीआई के लिए चुनौती यह होगी कि वह विकास दर को प्रभावित किए बिना मूल्य स्थिरता बनाए रखे। अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 6.6 से 6.7 प्रतिशत के बीच रह सकती है, बशर्ते वैश्विक तेल कीमतें नियंत्रित रहें।