अमेरिका-ईरान तनाव का असर: एक महीने में पेट्रोल-डीजल 7.5 रुपए तक महंगा, एलपीजी भी उछला

नई दिल्ली । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर भी साफ दिखाई देने लगा है। पिछले एक महीने के दौरान देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हो गया है। ऊर्जा बाजार में बनी अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण ईंधन लागत लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा असर परिवहन, व्यापार और दैनिक जीवन पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। राजधानी दिल्ली में बीते एक महीने के दौरान पेट्रोल की कीमत में कुल 7.35 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसके बाद पेट्रोल का दाम 94.77 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 102.12 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया है। इस अवधि में सरकार ने चार अलग-अलग चरणों में ईंधन कीमतों में संशोधन किया। 15 मई को पेट्रोल के दाम में 3 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि की गई, जबकि 19 और 23 मई को 0.87-0.87 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई। इसके बाद 25 मई को फिर 2.61 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया गया। लगातार हुई इन बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा दिया है। डीजल की कीमतों में भी लगभग इसी तरह की वृद्धि दर्ज की गई है। दिल्ली में डीजल का दाम 87.67 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 95.20 रुपए प्रति लीटर हो गया है। कुल मिलाकर डीजल 7.53 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ है। 15 मई को इसमें 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि 19 और 23 मई को 0.91-0.91 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि दर्ज की गई। इसके बाद 25 मई को डीजल के दाम में 2.71 रुपए प्रति लीटर का इजाफा किया गया। डीजल कीमतों में बढ़ोतरी का असर माल ढुलाई, कृषि गतिविधियों और सार्वजनिक परिवहन पर भी पड़ सकता है, जिससे कई वस्तुओं की लागत बढ़ने की संभावना है। ईंधन के साथ-साथ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर भी महंगा हुआ है। दिल्ली में 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़कर 3,113.50 रुपए तक पहुंच गई है। एक जून को सिलेंडर के दाम में 42 रुपए की नई बढ़ोतरी की गई। खास बात यह है कि जनवरी से अब तक कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 1,400 रुपए से अधिक की वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। वर्ष की शुरुआत में इसकी कीमत 1,691.50 रुपए थी, जो अब दोगुने के करीब पहुंच चुकी है। इसका असर होटल, रेस्तरां, कैटरिंग और छोटे व्यवसायों की लागत पर पड़ सकता है। हालांकि घरेलू बाजार में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारत अभी भी कई देशों की तुलना में अपेक्षाकृत कम कीमत पर पेट्रोल और डीजल उपलब्ध करा रहा है। विकसित अर्थव्यवस्थाओं में पेट्रोल की खुदरा कीमतें 150 रुपए प्रति लीटर से ऊपर बताई जा रही हैं, जबकि कई देशों में यह 180 रुपए प्रति लीटर से भी अधिक है। यूरोपीय संघ के देशों में पेट्रोल और डीजल दोनों की औसत कीमत भारत की तुलना में काफी ज्यादा है। वहीं पड़ोसी देशों पाकिस्तान, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और फिलीपींस में भी पेट्रोल की कीमतें भारतीय स्तर से ऊपर बनी हुई हैं। वैश्विक ऊर्जा बाजार में जारी अस्थिरता का असर भारत के ईंधन बाजार पर लगातार दिखाई दे रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो आने वाले महीनों में परिवहन लागत और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव देखने को मिल सकता है।
अशोकनगर में स्वास्थ्य सेवाएं चरमराईं, संविदा कर्मचारियों की हड़ताल का असर

मध्य प्रदेश । अशोकनगर जिला अस्पताल में मंगलवार सुबह से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। कर्मचारी अपनी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं, जिसके चलते अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो गई हैं। धरने के दौरान संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के बैनर तले कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। आक्रोशित कर्मचारियों ने अप्रेजल आदेशों की प्रतियां जलाकर अपना विरोध जताया। कई महत्वपूर्ण सेवाएं बाधितहड़ताल के कारण जिला अस्पताल की कई अहम सेवाएं ठप हो गई हैं। इनमें टीकाकरण, एसएनसीयू, जननी सुरक्षा योजना के भुगतान, ओपीडी सेवाएं, सीएम हेल्पलाइन से जुड़े कार्य, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना और टीबी मरीजों को दवा वितरण जैसी सेवाएं शामिल हैं।इसके अलावा ब्लड बैंक का अधिकांश कार्य भी प्रभावित हुआ है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की प्रमुख मांगेंसंविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियमितीकरण, स्वास्थ्य बीमा, वेतन वृद्धि और समान कार्य के लिए समान वेतन जैसी आठ सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन और अधिक उग्र किया जाएगा। आंदोलन की चेतावनी, भोपाल घेराव की तैयारीसंघ ने यह भी घोषणा की है कि उनका यह आंदोलन 8 जून को भोपाल में मुख्यमंत्री निवास घेराव के बाद समाप्त होगा। तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी। मरीजों पर बढ़ा असरहड़ताल के चलते सबसे ज्यादा असर मरीजों पर पड़ा है, जिन्हें इलाज और जरूरी सेवाओं के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में सामान्य कामकाज बाधित होने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है।
रजिस्ट्री की मांग लेकर पहुंचे लोग, तनाव में बिगड़ी महिला की तबीयत

मध्य प्रदेश । देवास कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब मकानों के मालिकाना हक की मांग को लेकर पहुंचे रहवासियों के बीच एक महिला अचानक बेसुध होकर गिर पड़ी। एलआईजी श्रमिक कॉलोनी के लोग अपनी आवासीय समस्या के समाधान की मांग लेकर कलेक्टर से मिलने आए थे। महिला की पहचान विद्या शर्मा के रूप में हुई है। मौके पर मौजूद अन्य महिलाओं ने तुरंत उन्हें संभाला, चेहरे पर पानी के छींटे मारे और हवा देकर होश में लाने का प्रयास किया। कुछ ही देर में महिला को होश आ गया। “टेंशन में खाना नहीं खाया” – भावुक हुई महिलाहोश में आने के बाद विद्या शर्मा भावुक हो गईं और रोते हुए कहा कि मकान के विवाद के तनाव में उन्होंने सुबह से कुछ नहीं खाया था। उन्होंने कहा, “अगर मेरी मौत हो जाए तो मेरा शव कंपनी में ले जाना।” उनकी यह बात सुनकर वहां मौजूद अन्य लोग भी भावुक हो गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। रजिस्ट्री की मांग को लेकर लंबे समय से विवाददरअसल, एलआईजी श्रमिक कॉलोनी के रहवासी गजरा गियर्स लिमिटेड की हायर परचेज स्कीम के तहत दिए गए मकानों की रजिस्ट्री की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि सेवा अवधि पूरी करने वाले कर्मचारियों को मकान दिए गए थे और तय शर्तों के अनुसार 15 वर्षों तक वेतन से राशि काटकर भुगतान किया गया था। रहवासियों का आरोप है कि कई कर्मचारियों ने 15 वर्ष से अधिक सेवा दी, इसके बावजूद अब तक उनके नाम पर मकानों की रजिस्ट्री नहीं की गई है। साथ ही, मकानों से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी उन्हें उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। कंपनी पर वादाखिलाफी का आरोपरहवासियों का कहना है कि पहले मकानों के बदले राशि काटी गई, लेकिन वह हाउसिंग बोर्ड में जमा नहीं कराई गई। अब कंपनी का कहना है कि ये मकान केवल सेवा अवधि तक रहने के लिए दिए गए थे और उन्हें खाली करना होगा। इस स्थिति ने रहवासियों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। कलेक्टर ने दिया आश्वासनमामले को लेकर कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने रहवासियों से मुलाकात कर उन्हें हरसंभव मदद और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। प्रशासन ने मामले की जांच और समाधान की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। दस्तावेजों और रजिस्ट्री की मांग पर अड़ा मामलारहवासियों ने ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि उन्हें मकानों के वैध दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं और उनके नाम पर रजिस्ट्री तत्काल की जाए, ताकि वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म हो सके।
तेज हवाओं का असर, इंदौर में व्यवस्था बहाली के लिए युद्धस्तर पर काम

मध्य प्रदेश । इंदौर में सोमवार को अचानक मौसम ने करवट ली और तेज धूलभरी आंधी ने शहर में काफी नुकसान पहुंचाया। आंधी के चलते शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 150 स्थानों पर पेड़ और डगाले गिरने की घटनाएं सामने आईं, जिससे कई इलाकों में यातायात और सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ। जैसे ही सूचना नगर निगम को मिली, टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया और पेड़ों व डगालों को हटाने का काम शुरू किया गया। मंगलवार को भी शहर के कई हिस्सों में सफाई और मलबा हटाने का कार्य लगातार जारी रहा। निगम की टीमें अलर्ट मोड पर, 24 घंटे निगरानीनगर निगम ने स्थिति को देखते हुए अपनी सभी टीमों को अलर्ट मोड पर रख दिया है। अधिकारियों के अनुसार अब दिन या रात किसी भी समय सूचना मिलने पर टीम तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहेगी। उद्यान विभाग के अधिकारी शांतिलाल यादव ने बताया कि आंधी के कारण बड़ी संख्या में पेड़ और डगाले गिरे, जिनमें से कई को सोमवार को ही हटाकर सड़क किनारे कर दिया गया था, जबकि बाकी को मंगलवार को भी हटाया जा रहा है। वाहनों को नुकसान, लेकिन जनहानि नहींप्रशासन के अनुसार आंधी के कारण कुछ स्थानों पर खड़े वाहनों को नुकसान पहुंचा है, हालांकि राहत की बात यह है कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। नगर निगम की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लगातार काम कर रही हैं ताकि जल्द से जल्द यातायात और सामान्य स्थिति बहाल की जा सके। तेज हवाओं के बाद सतर्कता बढ़मौसम विभाग की चेतावनियों को देखते हुए नगर निगम ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमें तैयार रखी गई हैं और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
शिवपुरी में खेत में मिला युवक का शव: शरीर पर चोट के निशान, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले के गौचोनी गांव में मंगलवार सुबह एक 27 वर्षीय युवक का शव खेत में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही हिम्मतपुर चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण करते हुए शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मृतक की पहचान पवन लोधी पुत्र रामेश्वर लोधी, निवासी गौचोनी के रूप में हुई है। पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया। रखवाली करने गया था युवक, सुबह मिला शवपरिजनों के अनुसार, सोमवार को गांव में रामायण पाठ के उपलक्ष्य में भंडारे का आयोजन था। कार्यक्रम के बाद पवन लोधी खेत की रखवाली करने गया था। मंगलवार सुबह उसके मौत की सूचना मिली, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने जताई हत्या की आशंकामृतक के रिश्तेदार उमेश लोधी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पवन के शरीर पर चोट के निशान पाए गए हैं। साथ ही उसका मोबाइल फोन शव से करीब 50 मीटर दूर टूटी हुई हालत में मिला, जिससे मामले को संदिग्ध माना जा रहा है। परिजनों का कहना है कि गांव में कुछ लोगों से पुरानी रंजिश चल रही थी, इसलिए उन्हें आशंका है कि यह हत्या का मामला हो सकता है। पुलिस जांच में जुटी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजारहिम्मतपुर चौकी प्रभारी धर्मेंद्र सिंह गुर्जर ने बताया कि मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच कर रही है। गांव में तनाव, जांच पर टिकी नजरघटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और लोग अलग-अलग तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। पुलिस ने कहा है कि हर पहलू की गहन जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
26 लाख की स्मैक के साथ तस्कर गिरफ्तार, बड़े नेटवर्क का खुलासा

मध्य प्रदेश । शिवपुरी जिले में नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत फिजिकल थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने ग्वालियर जिले के एक कथित स्मैक तस्कर को गिरफ्तार किया है, जिसके कब्जे से भारी मात्रा में नशीला पदार्थ, नकदी और वाहन बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रामनिवास उर्फ करुआ रावत (35) निवासी ग्राम पाटई, थाना आरोन, जिला ग्वालियर के रूप में हुई है। पुलिस ने उसके पास से 106 ग्राम स्मैक, 52 हजार रुपये नकद, एक मोबाइल फोन और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही मोटरसाइकिल जब्त की है। जब्त सामग्री की कुल कीमत करीब 28 लाख रुपये से अधिक बताई गई है। मुखबिर की सूचना पर हुई कार्रवाईफिजिकल थाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने बताया कि पुलिस को सूचना मिली थी कि करवला पुलिया के पास एक व्यक्ति स्मैक बेचने की फिराक में मौजूद है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची, जहां संदिग्ध व्यक्ति पुलिस को देखकर भागने लगा। घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया गया। पूछताछ में बड़ा खुलासा: फैला था नेटवर्कपूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह अपने साथी राजेंद्र रावत के साथ मिलकर स्मैक तस्करी का नेटवर्क संचालित करता था। पुलिस के अनुसार, राजेंद्र बड़े सप्लायरों से नशीला पदार्थ लाकर दोनों मिलकर उसे ग्वालियर और आसपास के क्षेत्रों में सप्लाई करते थे। जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क केवल ग्वालियर तक सीमित नहीं था, बल्कि शिवपुरी, करेरा, सुभाषपुरा और बैराड़ जैसे क्षेत्रों तक फैला हुआ था। युवाओं को बनाया जा रहा था निशानापुलिस जांच में यह भी पता चला है कि आरोपियों ने कई गांवों में युवाओं को निशाना बनाकर स्मैक की सप्लाई शुरू कर दी थी, जिससे क्षेत्र में नशे का नेटवर्क तेजी से फैल रहा था। पहले से दर्ज हैं मामले, एनडीपीएस एक्ट में केसफिजिकल थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/21 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब उसके नेटवर्क और मुख्य सप्लायरों की तलाश में जुटी है। जानकारी के अनुसार, आरोपी रामनिवास के खिलाफ पहले भी बैराड़ थाना में एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज है, जो न्यायालय में विचाराधीन है। पुलिस का सख्त संदेशथाना प्रभारी कृपाल सिंह राठौड़ ने कहा कि नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
विदिशा में अड़ीबाजी पर पुलिस का बड़ा एक्शन, बदमाश का निकाला जुलूस

मध्य प्रदेश । विदिशा जिले में कोतवाली पुलिस ने अड़ीबाजी और अवैध वसूली के आरोपी राहुल अहिरवार (36) का सार्वजनिक जुलूस निकालकर कड़ा संदेश दिया है। आरोपी पर कृषि उपज मंडी के व्यापारियों से मारपीट, धमकी और पैसों की जबरन मांग करने के गंभीर आरोप थे। पुलिस ने आरोपी को मंडी क्षेत्र, बरईपुरा चौराहा और आसपास के इलाकों में घुमाया, जहां उसने लोगों के सामने अपने अपराधों के लिए माफी मांगते हुए तौबा करने की बात कही। मंडी में व्यापारियों से मारपीट और धमकी का मामलाकोतवाली थाना प्रभारी आनंद राज ने बताया कि आरोपी राहुल अहिरवार कुछ समय पहले कृषि उपज मंडी क्षेत्र में शराब के नशे में व्यापारियों से पैसे मांग रहा था। विरोध करने पर उसने व्यापारियों के साथ मारपीट की और उन्हें धमकाया भी था। इस मामले में उसके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद से वह फरार चल रहा था। पुलिस की सख्त कार्रवाई, फरार आरोपी गिरफ्तारपुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी के निर्देश पर जिले में फरार और आदतन अपराधियों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत कोतवाली पुलिस ने मुखबिर तंत्र और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से आरोपी को बरईपुरा क्षेत्र से गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को उन स्थानों पर ले जाकर कार्रवाई दिखाई, जहां उसने पहले लोगों को डराने-धमकाने और अवैध वसूली की घटनाओं को अंजाम दिया था। सार्वजनिक संदेश: अपराधियों में डर, जनता में भरोसापुलिस द्वारा निकाले गए इस जुलूस का उद्देश्य आमजन में सुरक्षा का विश्वास बढ़ाना और अपराधियों में कानून का भय पैदा करना बताया गया। थाना प्रभारी आनंद राज ने कहा कि गुंडागर्दी, अड़ीबाजी और अवैध वसूली करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ न केवल कानूनी कार्रवाई की जाएगी, बल्कि सार्वजनिक रूप से भी सख्त संदेश दिया जाएगा, ताकि शहर में कानून व्यवस्था मजबूत बनी रहे।
स्क्रीन पर कॉपियां जांचने का सिरदर्द: सीबीएसई के नए सिस्टम से शिक्षक बेहाल

ज्ञान चंद पाटनीसेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) के नए ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम ने विद्यार्थियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इससे बोर्ड की साख भी प्रभावित हुई है। 12वीं कक्षा के हजारों विद्यार्थियों ने अपनी आंसर शीट की स्कैन कॉपी मांगी है क्योंकि वे परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं। ओएसएम सिस्टम की वजह से परिणाम में गड़बड़ी के आरोप गंभीर बात है। बारहवीं के बाद विद्यार्थी प्रोफेशनल और उच्च शिक्षा की राह खोजने के लिए निकलते हैं। ऐसे समय में विद्यार्थी अपने परिणाम को लेकर आशंकित हैं, तो सवाल तो उठेंगे ही। सीबीएसई के नए ऑन स्क्रीन मार्किंग(ओएसएम) सिस्टम पर स्टूडेंट्स, अभिभावक और विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं। इस सिस्टम को उत्तरपुस्तिकाओं की जांच को सटीक और तेज बनाने के लिए लाया गया था, लेकिन सामने आ रही गड़बड़ियां दूसरी ही कहानी कह रही हैं। विद्यार्थी अपने आपको ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पहले परीक्षा के बाद उत्तरपुस्तिकाओं के बंडल बनाकर अध्यापकों को दिए जाते थे। वे उन्हें जांचते थे, नंबर जोड़ते थे और साइन करते थे। इस बार सीबीएसई ने नया तरीका अपनाया। पहले सभी कॉपियां स्कैन की गईं। यानी उनकी डिजिटल फोटो खींची गईं। फिर यह फोटो ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड की गई। शिक्षकों ने कंप्यूटर या लैपटॉप की स्क्रीन पर कॉपी की फोटो देखकर नंबर दिए। सीबीएसई ने ओएसएम सिस्टम को लेकर कहा कि इससे जांच की प्रक्रिया ज्यादा तेज और सटीक हो सकेगी। साथ ही मैनुअल गलतियां कम से कम रहेंगी लेकिन अब इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं। 12वीं कक्षा के बहुत से विद्यार्थी धुंधली उत्तरपुस्तिका और उत्तरपुस्तिका बदलने तक की शिकायत कर रहे हैं। मुद्दा इतना तूल पकड़ चुका है कि सीबीएसई के 12वीं बोर्ड परीक्षा में बैठे हर चार में से करीब एक छात्र ने अपनी जांची हुई आंसर शीट की स्कैन कॉपी मांगी है। एक छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि बोर्ड ने उन्हें एक विषय की गलत आंसर शीट भेजी है। मामला तब और बढ़ गया जब उन्हें पाकिस्तानी बताकर ट्रोल किया गया। सोशल मीडिया पर हुए हल्ले के बाद सीबीएसई ने वेदांत के केस में हुई तकनीकी समस्या को तो हल कर दिया लेकिन नए असेसमेंट सिस्टम यानी ओएसएम से जुड़ी शिकायतें कम नहीं हुईं। कई विद्यार्थियों का कहना है कि स्कैन कॉपी में दिख रही उत्तरपुस्तिका उनकी है ही नहीं, जैसे वेदांत के मामले में हुआ था। कुछ विद्यार्थियों के मुताबिक, उनकी सप्लीमेंट्री शीट गायब है। कई जवाबों को जांचा ही नहीं गया। स्टेप मार्किंग के सिस्टम को नजरअंदाज किया गया। अगर छात्र ने सवाल का पूरा जवाब न लिखा हो, लेकिन कुछ स्टेप सही किए तो भी उसे नंबर मिलते थे, लेकिन कई विद्यार्थियों का आरोप है कि उनकी कॉपी जांचते समय इस प्रावधान का पालन नहीं हुआ। ओएसएम प्रणाली से कॉपी जांचने वाले परीक्षकों की ट्रेनिंग पर सवाल उठ रहे हैं। पहले अध्यापक ऑफलाइन में भी गड़बड़ियां करते थे। कभी टोटलिंग में नंबर छूट जाते थे, तो कभी सही जवाब को गलत मार्क कर दिया जाता था। इन सबसे बचने के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम लाया गया। एग्जाम ऑफलाइन लिया जा रहा है और जांच ऑनलाइन हो रही है। इस प्रक्रिया के लिए परीक्षकों को लंबी ट्रेनिंग मिलनी चाहिए थी, लेकिन सतही प्रशिक्षण के बाद सिस्टम लागू हो गया। बेहतर तो यह था कि जब तक शिक्षक इस तकनीक में पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं होते, तब तक इसे अपनाया नहीं जाता, लेकिन पता नहीं किस दबाव में इसे लागू कर दिया गया। इससे सीबीएसई की साख पर सवाल लगा ही, विद्यार्थी अपने भविष्य को लेकर आशंकित भी हो रहे हैं। बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक छात्र को न्याय मिले, उनका भरोसा बना रहे और उनका भविष्य प्रभावित न हो। तभी शिक्षा व्यवस्था विश्वसनीय बनी रहेगी। 12वीं के बाद अच्छी यूनिवर्सिटी में एडमिशन चाह रहे विद्यार्थी तनाव में हैं। अंकों में मामूली गड़बड़ी भी उनके भविष्य पर असर डाल सकती है। यह बात भी उठ रही है कि जब मैनुअल जांच पर ही भरोसा करना है तो ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम लागू ही क्यों हुआ? तकनीकी गड़बड़ी सीधे-सीधे छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर रही है। स्कैन कॉपी मिलने के बाद री-इवैल्यूएशन होगा, तब कहीं जाकर सही स्थिति पता लगेगी। इसमें समय लगेगा। इस बीच कई कॉलेजों में काउंसलिंग शुरू होने जा रही है। सीबीएसई के ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। ऐसे में अचानक कई स्कूलों के प्रिंसिपल वीडियो जारी कर रहे हैं। इनमें वे दावा करते हुए दिखाई दे रहे हैं कि सीबीएसई की नई मार्किंग स्कीम ओएसएम अच्छी है, सुरक्षित है और छात्रों के लिए फायदेमंद है। असल में सीबीएसई को समझ नहीं आ रहा है कि वह अपने नए सिस्टम को कैसे बचाए। मां-बाप परेशान हैं, विद्यार्थियों के रिजल्ट पर सवाल उठ रहे हैं, स्कैन कॉपी में धुंधलापन, गलत आंसर शीट और नंबर न मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इस बीच प्रिंसिपल को पीआर वीडियो बनाने पर मजबूर किया जा रहा है। यह संकेत है कि सीबीएसई का संकट बहुत बड़ा है और वह अपने सिस्टम की सच्चाई को छिपाने के लिए अन्य तरीके अपना रहा है। 17 लाख 68 हजार विद्यार्थियों में से 4 लाख 4 हजार छात्रों ने स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया है। यह कुल विद्यार्थियों का 23 फीसदी है। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की शिकायतें हैं, लेकिन सीबीएसई प्रिंसिपल के वीडियो के जरिए यह बताने की कोशिश कर रहा है कि सब ठीक है। यह गलत संकेत है। सीबीएसई को छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेना चाहिए, न कि प्रचार के जरिए उन्हें छिपाना चाहिए। प्रिंसिपल के वीडियो क्यों आ रहे हैं? शायद स्कूल प्रबंधन पर सीबीएसई का दबाव है। शायद प्रिंसिपलों को आदेश दिया गया है कि वे ओएसएम के समर्थन में वीडियो बनाएं। यह डराने-धमकाने की प्रक्रिया हो सकती है। अगर ऐसा है, तो यह चिंता की बात है। सीबीएसई को समस्याओं को सुलझाना चाहिए। इन्हें छिपाने के लिए नए—नए हथकंडे नहीं अपनाने चाहिए। तकनीक का उपयोग समस्या के समाधान के लिए होना चाहिए, न कि समस्या बढ़ाने के लिए। विद्यार्थियों के भविष्य को जोखिम में डालकर कोई भी नया
विदिशा में अवैध कॉलोनियों का दर्द, सुविधाओं के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे लोग

मध्य प्रदेश । विदिशा जिले में अवैध कॉलोनियों का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। जतरपुरा क्षेत्र स्थित गोकुलधाम फेस-1 और सूरज नगर कॉलोनी के रहवासी मंगलवार को अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां उन्होंने जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कराते हुए कॉलोनाइजर पर गंभीर आरोप लगाए। रहवासियों का कहना है कि प्लॉट बेचते समय उन्हें सड़क, बिजली, पानी, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी कॉलोनी में कोई व्यवस्था नहीं की गई है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन मुश्किलकॉलोनी में रहने वाले लोगों का कहना है कि वे आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गोकुलधाम कॉलोनी के रहवासी पहले भी कई बार जनसुनवाई में पहुंचकर शिकायत दर्ज करा चुके हैं और कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं। पूर्व में प्रशासन द्वारा मामले की जांच भी कराई गई थी और तहसीलदार ने रहवासियों के बयान दर्ज किए थे। जांच में कॉलोनी में सुविधाओं की गंभीर कमी की पुष्टि भी हुई थी, जिसके बाद कॉलोनाइजर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। “वादे किए गए, लेकिन सुविधाएं नहीं मिलीं”स्थानीय निवासी पूजा वर्मा ने बताया कि प्लॉट खरीदते समय सभी सुविधाएं देने का वादा किया गया था, लेकिन आज तक सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं की गई हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर कुछ लोगों द्वारा दबाव बनाने और धमकाने जैसी घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे रहवासी डर के माहौल में रहने को मजबूर हैं। अवैध कॉलोनियों का बढ़ता जाल, प्रशासन पर सवालविदिशा शहर और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कॉलोनियों का तेजी से विस्तार हो रहा है। आकर्षक दावों और विकास के वादों के नाम पर लोगों को प्लॉट बेच दिए जाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक ढिलाई के कारण कॉलोनाइजर बेखौफ होकर ऐसे काम कर रहे हैं। समय पर कार्रवाई न होने से आम लोग अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर भी परेशान हो रहे हैं। प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवालइस पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अवैध कॉलोनियों का विस्तार हो रहा था, तब संबंधित विभागों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की। अब रहवासियों की मांग है कि कॉलोनाइजर के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और कॉलोनियों में जल्द से जल्द सड़क, पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
कटनी में मेडिकल कॉलेज निर्माण शुरू, विरोध के बीच भूमिपूजन टला

मध्य प्रदेश । कटनी जिले में पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज का निर्माण कार्य सोमवार से शुरू कर दिया गया है। कछगवां क्षेत्र के पास चिह्नित लगभग 25 एकड़ भूमि पर यह परियोजना अब बिना किसी औपचारिक भूमिपूजन या वीआईपी कार्यक्रम के आगे बढ़ाई जा रही है। यह परियोजना मध्य प्रदेश सरकार और स्वामी विवेकानंद फाउंडेशन के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत विकसित की जा रही है। हालांकि, शुरुआत से ही इस योजना को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध और आपत्तियां सामने आती रही हैं। लगातार विरोध के चलते टला भूमिपूजनस्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को निजी हाथों में नहीं दिया जाना चाहिए। इसी मुद्दे को लेकर जिले में लंबे समय से असंतोष बना हुआ है। विरोध के कारण इस परियोजना का भूमिपूजन दो बार टालना पड़ा। पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन विरोध की आशंका के चलते उसे स्थगित कर दिया गया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा का कार्यक्रम भी रद्द कर दिया गया। स्थिति को देखते हुए अब प्रशासन ने बिना किसी वीआईपी आयोजन के सीधे निर्माण कार्य शुरू कराने का निर्णय लिया है। सरकार का तर्क: स्वास्थ्य ढांचे को मिलेगा मजबूत आधारसरकारी पक्ष का मानना है कि यह मेडिकल कॉलेज क्षेत्र में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करेगा। इससे स्थानीय युवाओं को मेडिकल शिक्षा के बेहतर अवसर अपने ही जिले में मिल सकेंगे। पीपीपी मॉडल को लेकर सरकार का दावा है कि इससे परियोजना तेजी से पूरी होगी और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा। जनता की चिंता: निजीकरण पर उठे सवालहालांकि दूसरी ओर स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में इस मॉडल को लेकर गहरी नाराजगी है। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सेवाओं को निजी प्रबंधन के हवाले करने से आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। लोगों का कहना है कि इलाज और मेडिकल शिक्षा महंगी हो सकती है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए पहुंच कठिन हो जाएगी। “शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो वोट नहीं” का नारास्थानीय समाजसेवी विंधेश्वरी पटेल ने कड़े शब्दों में विरोध जताते हुए कहा कि वे लंबे समय से पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीपीपी मॉडल का वे विरोध नहीं कर रहे, लेकिन शासकीय नियंत्रण जरूरी है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि आने वाले समय में बड़ा जन आंदोलन चलाया जाएगा और इसका नारा होगा- “कटनी को शासकीय मेडिकल कॉलेज नहीं तो भाजपा को वोट नहीं।” आगे की राह पर नजरफिलहाल परियोजना का निर्माण कार्य प्रारंभ हो चुका है, जिसमें पहले चरण में बाउंड्री वॉल का निर्माण और भूमि की सुरक्षा शामिल है। प्रशासन का कहना है कि यह एक दीर्घकालिक विकास परियोजना है, जबकि विरोधी इसे निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बता रहे हैं। अब देखना यह होगा कि यह विवाद आगे राजनीतिक रूप लेता है या सरकार और जनता के बीच कोई बीच का रास्ता निकल पाता है।