Friday Release: 29 मई को एंटरटेनमेंट का महाधमाका, 14 फिल्में-सीरीज होंगी रिलीज; थिएटर्स में 9 और OTT पर 5 की एंट्री

नई दिल्ली। मई महीने का आखिरी शुक्रवार सिनेप्रेमियों के लिए बेहद खास होने वाला है। 29 मई 2026 को मनोरंजन की दुनिया में बड़ा धमाका होने जा रहा है क्योंकि इस दिन एक साथ 14 नई फिल्में और वेब सीरीज रिलीज हो रही हैं। खास बात यह है कि दर्शकों को इस बार थिएटर्स और ओटीटी दोनों प्लेटफॉर्म्स पर भरपूर कंटेंट मिलने वाला है। जहां 9 फिल्में बड़े पर्दे पर दस्तक देंगी वहीं 5 नई फिल्में और सीरीज ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होकर दर्शकों का मनोरंजन करेंगी। ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर इस शुक्रवार कई दिलचस्प कहानियां देखने को मिलेंगी। जियोहॉटस्टार पर रिलीज हो रही ‘कजिन्स एंड कल्याणम्स’ फैमिली ड्रामा और कॉमेडी का शानदार मिश्रण है। यह कहानी छह भाई-बहनों की जिंदगी और उनके रिश्तों के बदलते रंगों को दिखाती है। वहीं नेटफ्लिक्स पर ‘मर्डर माइंडफुली सीजन 2’ रिलीज हो रहा है जो डार्क कॉमेडी और क्राइम थ्रिलर पसंद करने वालों के लिए खास होने वाला है। इस बार कहानी में अपराध से ज्यादा किरदार के मानसिक संघर्ष को दिखाया गया है। स्पोर्ट्स प्रेमियों के लिए नेटफ्लिक्स की मिनी सीरीज ‘ब्राजील 70 द थर्ड स्टार’ भी खास आकर्षण होगी। यह सीरीज 1970 फुटबॉल वर्ल्ड कप में ब्राजील टीम की ऐतिहासिक जीत की कहानी बयां करती है। वहीं अमेजन प्राइम वीडियो पर ‘सुखमानो सुखमन्न’ रिलीज हो रही है जिसमें एक एम्बुलेंस ड्राइवर की अकेलेपन और मानसिक संघर्ष से भरी जिंदगी दिखाई गई है। इसके अलावा एक्शन थ्रिलर ‘लीडर’ भी दर्शकों को रोमांच से भरने के लिए तैयार है। अगर थिएटर रिलीज की बात करें तो इस शुक्रवार बड़े पर्दे पर हर तरह के दर्शकों के लिए कुछ न कुछ मौजूद है। सस्पेंस और थ्रिल पसंद करने वालों के लिए ‘ऑब्सेस’ रिलीज हो रही है जिसमें एक महिला की जिंदगी में घटने वाली रहस्यमयी घटनाओं को दिखाया गया है। फैमिली ड्रामा ‘द ब्रेडविनर’ एक ऐसे पिता की कहानी है जिसे पहली बार घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है। हॉरर फिल्मों के शौकीनों के लिए ‘पैसेंजर’ डर और रहस्य से भरी कहानी लेकर आ रही है। वहीं जैकी श्रॉफ और प्रतीक बब्बर स्टारर ‘द ग्रेट ग्रांड सुपरहीरो’ बच्चों और फैमिली ऑडियंस को पसंद आ सकती है। फिल्म में एक बच्चे को अपने दादाजी की जादुई ताकतों का पता चलता है जो दुनिया को बचा सकती हैं। आध्यात्मिक और बायोपिक कंटेंट पसंद करने वालों के लिए ‘श्री बाबा नीब करोरी महाराज’ रिलीज हो रही है जिसमें नीम करौली बाबा के जीवन सफर को दिखाया गया है। दूसरी तरफ ‘रजनी की बारात’ सामाजिक संदेश और रोमांटिक कॉमेडी का मिश्रण लेकर आ रही है। क्रिकेट और इमोशनल कहानी पसंद करने वालों के लिए ‘कृष्ण और चिट्ठी’ खास हो सकती है जिसमें खेल और आस्था का मेल देखने को मिलेगा। इसके अलावा ‘हीर सारा और पुडुचेरी’ दोस्ती और जिंदगी को नए नजरिए से देखने वाली रोड ट्रिप ड्रामा फिल्म है जबकि ‘जीना दिल से’ युवाओं के सपनों रोमांस और जिंदगी को खुलकर जीने की कहानी दिखाएगी। कुल मिलाकर 29 मई का शुक्रवार हर उम्र और हर पसंद के दर्शकों के लिए एंटरटेनमेंट का फुल पैकेज साबित होने वाला है। चाहे आप ओटीटी पर घर बैठे कंटेंट देखना पसंद करते हों या थिएटर में बड़े पर्दे का रोमांच महसूस करना चाहते हों इस शुक्रवार आपके पास विकल्पों की कोई कमी नहीं रहने वाली।
“परवीन बाबी को लगता था अमिताभ बच्चन उनकी हत्या करना चाहते हैं” – पूजा भट्ट का बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। हिंदी सिनेमा की सबसे ग्लैमरस और चर्चित अभिनेत्रियों में गिनी जाने वाली परवीन बाबी की जिंदगी जितनी चमकदार पर्दे पर नजर आती थी उतनी ही दर्द और अकेलेपन से भरी हुई असल जिंदगी में थी। अब अभिनेत्री पूजा भट्ट ने परवीन बाबी को लेकर कुछ ऐसे खुलासे किए हैं जिन्होंने एक बार फिर बॉलीवुड के उस दर्दनाक दौर की याद दिला दी है। महेश भट्ट की बेटी और अभिनेत्री पूजा भट्ट ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में परवीन बाबी के आखिरी दिनों को याद करते हुए कहा कि वह मानसिक रूप से बेहद परेशान थीं। पूजा ने बताया कि उन्हें आज भी वह समय याद है जब परवीन बाबी को यह डर सताने लगा था कि अमिताभ बच्चन उन्हें मारना चाहते हैं। पूजा भट्ट ने पत्रकार विक्की लालवानी को दिए इंटरव्यू में कहा कि जब परवीन बाबी विदेश से लौटकर आई थीं तब वह स्टारडस्ट मैगजीन के ऑफिस में बैठकर लगातार जेरॉक्स मशीन का इस्तेमाल कर रही थीं और अमिताभ बच्चन के खिलाफ इंटरव्यू दे रही थीं। पूजा के मुताबिक परवीन बाबी को लगता था कि अमिताभ बच्चन अभी भी उनकी हत्या करना चाहते हैं। इतना ही नहीं पूजा ने यह भी खुलासा किया कि परवीन बाबी खाने-पीने की चीजों को लेकर बेहद डरी हुई रहती थीं। उन्हें शक था कि फिल्म इंडस्ट्री के लोग उनके खाने में जहर मिला रहे हैं। यही वजह थी कि वह सिर्फ अंडे खाती थीं क्योंकि उन्हें वही सुरक्षित लगता था। हालांकि पूजा भट्ट ने यह भी साफ कहा कि वह डॉक्टर नहीं हैं इसलिए किसी बीमारी को लेकर दावा नहीं कर सकतीं लेकिन इतना जरूर था कि परवीन बाबी मानसिक रूप से ठीक नहीं थीं। बाद में जांच में सामने आया था कि वह सिजोफ्रेनिया जैसी मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं। परवीन बाबी और अमिताभ बच्चन ने साथ में कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया था जिनमें दीवार अमर अकबर एंथोनी काला पत्थर शान और नमक हलाल जैसी फिल्में शामिल हैं। दोनों की ऑनस्क्रीन जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया था। एक समय उनके अफेयर की अफवाहें भी उड़ी थीं लेकिन दोनों कलाकारों ने इन खबरों को कभी स्वीकार नहीं किया। 1980 के दशक में परवीन बाबी ने अमिताभ बच्चन के खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि अमिताभ बच्चन एक अंतरराष्ट्रीय गैंग का हिस्सा हैं और उनका अपहरण कर उनके कान में माइक्रोचिप लगाने की कोशिश की गई है। हालांकि जांच के दौरान अमिताभ बच्चन के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला। पूजा भट्ट ने परवीन बाबी के व्यक्तित्व को याद करते हुए कहा कि वह बेहद खूबसूरत और दिलदार इंसान थीं। पूजा ने बताया कि जब उनके पिता महेश भट्ट उन्हें परवीन बाबी के घर लेकर जाते थे तब वह हमेशा उन्हें प्यार से मिलती थीं और गिफ्ट दिया करती थीं। पूजा आज भी वह परफ्यूम नहीं भूल पाईं जो परवीन बाबी ने उन्हें दिया था। जनवरी 2005 में परवीन बाबी का निधन हो गया था। वह सिर्फ 50 साल की थीं। उनकी मौत ने पूरे फिल्म जगत को झकझोर दिया था। बताया जाता है कि उनका शव कई दिनों तक मुंबई के कूपर अस्पताल के मुर्दाघर में लावारिस पड़ा रहा था। बाद में महेश भट्ट आगे आए और उन्होंने अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी निभाई। परवीन बाबी की कहानी आज भी बॉलीवुड की सबसे दर्दनाक कहानियों में गिनी जाती है जहां शोहरत के पीछे छिपा अकेलापन और मानसिक संघर्ष साफ दिखाई देता है।
ऑरेंज कैप की रेस में वैभव सूर्यवंशी का जलवा: अब सिर्फ इन 2 खिलाड़ियों से मुकाबला, विराट कोहली काफी पीछे

नई दिल्ली। आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स के युवा स्टार वैभव सूर्यवंशी का बल्ला ऐसा गरजा है कि बड़े-बड़े दिग्गज भी पीछे छूट गए हैं। महज 15 साल की उम्र में वैभव ने ऑरेंज कैप की रेस को पूरी तरह अपने कब्जे में ले लिया है। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ एलिमिनेटर मुकाबले में उन्होंने 97 रनों की विस्फोटक पारी खेलकर न सिर्फ अपनी टीम को जीत दिलाई बल्कि ऑरेंज कैप की दौड़ में भी खुद को सबसे आगे पहुंचा दिया। वैभव सूर्यवंशी अब आईपीएल 2026 में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन चुके हैं। उन्होंने 15 मैचों में 45.33 की शानदार औसत और 242.86 के तूफानी स्ट्राइक रेट से 680 रन बनाए हैं। इस सीजन उनके बल्ले से 55 चौके और 65 गगनचुंबी छक्के निकले हैं। यही नहीं वह आईपीएल इतिहास के पहले ऐसे बल्लेबाज भी बन गए हैं जिन्होंने एक सीजन में 200 से ज्यादा स्ट्राइक रेट के साथ 600 रन का आंकड़ा पार किया है। सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ उनकी 97 रनों की पारी ने पूरे क्रिकेट जगत को हैरान कर दिया। इस पारी में उन्होंने सिर्फ चौकों से नहीं बल्कि लंबे-लंबे छक्कों से गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। वैभव ने 12 छक्के और 5 चौके लगाकर दिखा दिया कि वह सिर्फ भविष्य के स्टार नहीं बल्कि मौजूदा समय के सबसे खतरनाक टी20 बल्लेबाजों में शामिल हो चुके हैं। हालांकि ऑरेंज कैप की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। वैभव सूर्यवंशी को सबसे बड़ा खतरा गुजरात टाइटंस के ओपनर साई सुदर्शन से है। सुदर्शन इस समय 652 रनों के साथ दूसरे नंबर पर मौजूद हैं और दोनों बल्लेबाजों के बीच सिर्फ 28 रनों का अंतर है। खास बात यह है कि अब राजस्थान रॉयल्स और गुजरात टाइटंस के बीच क्वालीफायर-2 मुकाबला खेला जाना है। ऐसे में इस मैच में तय हो सकता है कि ऑरेंज कैप आखिर किस खिलाड़ी के सिर सजने वाली है। साई सुदर्शन के अलावा गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल भी इस रेस में बने हुए हैं। गिल के नाम इस सीजन 618 रन हैं और अगर वह क्वालीफायर-2 में बड़ी पारी खेलते हैं तो ऑरेंज कैप की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। अगर गुजरात फाइनल में पहुंचती है तो गिल और सुदर्शन दोनों को एक अतिरिक्त मैच खेलने का मौका मिलेगा, जिससे उनकी दावेदारी और मजबूत हो जाएगी। दूसरी तरफ विराट कोहली अब इस रेस में काफी पीछे दिखाई दे रहे हैं। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के स्टार बल्लेबाज ने इस सीजन 15 मैचों में 600 रन बनाए हैं और वह ऑरेंज कैप की सूची में छठे स्थान पर हैं। आरसीबी पहले ही क्वालीफायर-1 जीतकर फाइनल में पहुंच चुकी है, ऐसे में विराट के पास अपने रन बढ़ाने का सिर्फ एक ही मौका बचा है। यही वजह है कि अब ऑरेंज कैप की असली जंग वैभव सूर्यवंशी, साई सुदर्शन और शुभमन गिल के बीच सिमटती नजर आ रही है। मगर जिस फॉर्म में वैभव बल्लेबाजी कर रहे हैं उसे देखकर यही लग रहा है कि ऑरेंज कैप उनसे छीनना अब किसी भी बल्लेबाज के लिए आसान नहीं होगा।
राजस्थान रॉयल्स की बड़ी खोज, लेकिन पहली बोली किसी और टीम ने लगाई थी!

नई दिल्ली। राजस्थान रॉयल्स को वैभव सूर्यवंशी के रूप में ऐसा हीरा मिल गया है जिसे अब फ्रेंचाइजी किसी भी कीमत पर अपने से दूर नहीं होने देना चाहेगी। महज 15 साल की उम्र में आईपीएल में तहलका मचाने वाले वैभव आज क्रिकेट दुनिया का सबसे चर्चित नाम बन चुके हैं। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि आईपीएल नीलामी में इस युवा बल्लेबाज पर पहली बोली राजस्थान रॉयल्स ने नहीं बल्कि दिल्ली कैपिटल्स ने लगाई थी। आईपीएल 2025 की नीलामी में जब वैभव सूर्यवंशी का नाम सामने आया तब उनकी उम्र सिर्फ 13 साल थी। बिहार के इस युवा बल्लेबाज का बेस प्राइस 30 लाख रुपए रखा गया था। जैसे ही नाम पुकारा गया वैसे ही दिल्ली कैपिटल्स ने सबसे पहले दांव खेला। राजस्थान रॉयल्स ने तुरंत दूसरी बोली लगाई और फिर दोनों टीमों के बीच जबरदस्त बिड वॉर शुरू हो गई। दिल्ली कैपिटल्स एक विस्फोटक ओपनर की तलाश में थी और टीम मैनेजमेंट को वैभव में भविष्य का बड़ा मैच विनर नजर आ रहा था। दूसरी तरफ राजस्थान रॉयल्स भी इस प्रतिभा को किसी कीमत पर छोड़ना नहीं चाहती थी। आखिरकार बोली 1 करोड़ रुपए तक पहुंची जहां दिल्ली पीछे हट गई और राजस्थान रॉयल्स ने 1.10 करोड़ रुपए में इस युवा खिलाड़ी को अपनी टीम में शामिल कर लिया। उस समय शायद किसी को अंदाजा नहीं था कि यह खिलाड़ी आगे चलकर आईपीएल का सबसे बड़ा आकर्षण बन जाएगा। आईपीएल 2025 के शुरुआती मुकाबलों में वैभव को मौका नहीं मिला। उस समय टीम के हेड कोच राहुल द्रविड़ थे जो युवा खिलाड़ियों को तैयार करने में माहिर माने जाते हैं। वैभव ने आधा सीजन डगआउट में बैठकर खेल को समझा और खुद को बड़े मंच के लिए तैयार किया। आखिरकार 19 अप्रैल 2025 को उन्हें आईपीएल डेब्यू का मौका मिला। तब उनकी उम्र सिर्फ 14 साल 23 दिन थी और वह आईपीएल इतिहास के सबसे युवा डेब्यू करने वाले खिलाड़ी बन गए। वैभव ने अपने करियर की पहली ही गेंदों में बता दिया कि वह साधारण खिलाड़ी नहीं हैं। उन्होंने अपने आईपीएल करियर की शुरुआत शार्दुल ठाकुर के खिलाफ छक्का लगाकर की और पूरे टूर्नामेंट में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से फैंस का दिल जीत लिया। पहले ही सीजन में उन्होंने 32 गेंदों में शतक ठोककर क्रिकेट जगत को चौंका दिया। आईपीएल 2025 में वैभव सूर्यवंशी ने सिर्फ 7 मैचों में 206.56 के स्ट्राइक रेट से 252 रन बनाए। हालांकि असली परीक्षा आईपीएल 2026 में मानी जा रही थी क्योंकि अक्सर खिलाड़ी पहले सीजन में चमकते हैं लेकिन अगले सीजन विरोधी टीमें उनके खिलाफ रणनीति बनाकर उन्हें रोक देती हैं। मगर वैभव ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ ‘वन सीजन वंडर’ नहीं हैं। आईपीएल 2026 में उन्होंने और ज्यादा आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी की। इस सीजन वह 15 मैचों में 680 रन बना चुके हैं और उनका स्ट्राइक रेट 242.86 का है। सबसे बड़ी बात यह रही कि उन्होंने 65 छक्के लगाकर क्रिस गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। आज वैभव सूर्यवंशी सिर्फ राजस्थान रॉयल्स ही नहीं बल्कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य माने जा रहे हैं। जिस खिलाड़ी को दिल्ली कैपिटल्स अपने साथ जोड़ना चाहती थी उसे राजस्थान ने समय रहते पहचान लिया और अब यही ‘कोहिनूर’ पूरी दुनिया में चमक रहा है।
ग्लोबल सप्लाई चेन में बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव, भारत-अमेरिका साझेदारी से क्रिटिकल मिनरल्स पर नया रणनीतिक खेल

नई दिल्ली । भारत और अमेरिका के बीच क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर हुए नए रणनीतिक समझौते को वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक समीकरणों में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य 14 महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और विविध बनाना है, जिनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरणों और स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों में बड़े पैमाने पर होता है। इस समझौते के बाद दोनों देश मिलकर खनन, प्रसंस्करण और आपूर्ति नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में काम करेंगे, जिससे वैश्विक बाजार में एक संतुलित विकल्प तैयार हो सके। विशेषज्ञों के अनुसार अब तक इन खनिजों की प्रोसेसिंग क्षमता कुछ देशों तक सीमित रही है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक तरह का केंद्रीकरण देखा गया है। भारत और अमेरिका का यह सहयोग इसी निर्भरता को कम करने और एक वैकल्पिक ढांचा विकसित करने की दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है। योजना के तहत भारत में रिफाइनिंग और प्रोसेसिंग क्षमताओं को बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिससे कच्चे माल के मूल्यवर्धन की प्रक्रिया देश के भीतर ही पूरी हो सके। इससे औद्योगिक उत्पादन और तकनीकी विकास को भी गति मिलने की संभावना है। इस समझौते का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि इसमें 14 क्रिटिकल मिनरल्स को प्राथमिकता दी गई है, जिनमें लिथियम, कोबाल्ट, निकल और ग्रेफाइट जैसे तत्व शामिल हैं। इन खनिजों का उपयोग आधुनिक तकनीक और ऊर्जा परिवर्तन के लिए अत्यंत आवश्यक माना जाता है। इलेक्ट्रिक वाहनों के बैटरी सिस्टम से लेकर उन्नत सैन्य उपकरणों तक, इन संसाधनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर इनकी आपूर्ति और नियंत्रण को लेकर प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है। इस रणनीतिक साझेदारी के तहत अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों में संयुक्त निवेश और खनन परियोजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। भारत और अमेरिका की संस्थाएं मिलकर इन क्षेत्रों में खनन अवसरों का विस्तार कर सकती हैं, जिससे आपूर्ति श्रृंखला अधिक स्थिर और विविध हो सके। इससे वैश्विक स्तर पर संसाधनों पर एकाधिकार की स्थिति को संतुलित करने का प्रयास माना जा रहा है। भारत में इस समझौते का एक बड़ा प्रभाव सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पर भी देखने को मिल सकता है। देश में विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को गैलियम, जर्मेनियम और इंडियम जैसे दुर्लभ खनिजों की नियमित आपूर्ति की आवश्यकता होती है। इस सहयोग से इन संसाधनों की उपलब्धता में सुधार होने की संभावना है, जिससे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को बल मिल सकता है। इसके साथ ही अमेरिका को भी भारत से उच्च गुणवत्ता वाले प्रोसेस्ड मैग्नेट्स और अन्य औद्योगिक उत्पादों की आपूर्ति का लाभ मिलेगा, जो उनके रक्षा और एयरोस्पेस सेक्टर में उपयोगी होंगे। यह आपसी निर्भरता आधारित व्यापार मॉडल दोनों देशों के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के ढांचे में धीरे-धीरे एक बड़ा बदलाव ला सकता है। क्लीन एनर्जी और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में नए सहयोग मॉडल उभर सकते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और संसाधन प्रबंधन की दिशा बदल सकती है।
युद्धविराम के पीछे कौन सा बड़ा खेल? अमेरिका–इजरायल रिश्तों पर ईरानी विदेश मंत्री के तीखे सवाल

नई दिल्ली । मध्य-पूर्व में जारी तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका और इजरायल के बीच संबंधों और युद्धविराम प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि क्षेत्र में हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उसमें कई अंतरराष्ट्रीय पक्षों की भूमिकाएं स्पष्ट नहीं हैं और विभिन्न स्तरों पर विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। अराघची के इन बयानों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है। विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से आरोप लगाया कि व्हाइट हाउस और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत दिए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हजारों अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व क्षेत्र की ओर तैनात किए जा रहे हैं, जिससे तनाव और बढ़ने की आशंका है। उनके अनुसार, यदि किसी स्तर पर युद्धविराम की कोशिश सफल भी होती है, तो यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका और इजरायल इस संघर्ष के अंतिम परिणाम को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हैं या नहीं। अराघची ने अपने बयान में यह भी कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के एक महीने बाद अब दुनिया भर की सरकारें इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों का आकलन करने में जुटी हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वहां से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ेगा। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रही है। ईरान का दावा है कि कुछ हालिया सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि वह इन कार्रवाइयों को गंभीरता से देख रहा है और आवश्यक प्रतिक्रिया देने का अधिकार सुरक्षित रखता है। मध्य-पूर्व में स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब होर्मुज क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आईं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी और इसका उद्देश्य अपने सैनिकों और नौसैनिक इकाइयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। वहीं ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे आक्रामक कदम बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और सभी पक्षों की नजर आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई है।
गर्मी में स्टाइल भी, सुरक्षा भी! UV कपड़े बन रहे नया फैशन ट्रेंड

नई दिल्ली । भीषण गर्मी, चिलचिलाती धूप और लगातार बढ़ती हीटवेव के बीच अब लोगों को राहत देने का नया तरीका फैशन ट्रेंड बनता जा रहा है। पहले जहां लोग धूप से बचने के लिए सनस्क्रीन, दुपट्टा, ग्लव्स और छाते का सहारा लेते थे, वहीं अब बाजार में ऐसे खास कपड़े तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं जिनमें “सनस्क्रीन” जैसी सुरक्षा पहले से मौजूद है। UV-प्रोटेक्टिव क्लोदिंग यानी अल्ट्रावायलेट किरणों से बचाने वाले कपड़े अब फैशन और हेल्थ दोनों का कॉम्बिनेशन बन चुके हैं। इन खास कपड़ों की मांग खासतौर पर उन लोगों में तेजी से बढ़ रही है जो रोजाना बाइक, स्कूटी, साइकिल या पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करते हैं। लंबे समय तक धूप में रहने से होने वाली टैनिंग, सनबर्न और स्किन डैमेज से बचने के लिए लोग अब UV-सुरक्षा वाले जैकेट, शर्ट, ट्राउजर, टोपी, ग्लव्स और स्कार्फ खरीद रहे हैं। UV-प्रोटेक्टिव कपड़े सामान्य फैब्रिक से अलग तकनीक से तैयार किए जाते हैं। इनमें धागों की बुनाई काफी घनी होती है ताकि सूरज की हानिकारक किरणें आसानी से कपड़े के आर-पार न जा सकें। इसके अलावा इनमें पॉलिएस्टर, नायलॉन और हाई-टेक कॉटन ब्लेंड जैसे फैब्रिक का इस्तेमाल किया जाता है, जो UV किरणों को बेहतर तरीके से ब्लॉक करते हैं। कई कंपनियां इन कपड़ों पर खास मिनरल या केमिकल कोटिंग भी करती हैं, जिसमें जिंक ऑक्साइड और टाइटेनियम डाइऑक्साइड जैसे तत्व शामिल होते हैं। ये UV किरणों को रिफ्लेक्ट करने में मदद करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक जैसे सनस्क्रीन में SPF रेटिंग होती है, वैसे ही इन कपड़ों में UPF यानी अल्ट्रावायलेट प्रोटेक्शन फैक्टर होता है। यह बताता है कि कपड़ा कितनी UV किरणों को रोक सकता है। UPF 15 से 20 वाले कपड़े सामान्य सुरक्षा देते हैं, जबकि UPF 30 से 40 अच्छी सुरक्षा माने जाते हैं। वहीं UPF 50 वाले कपड़े लगभग 98 प्रतिशत तक UV किरणों को ब्लॉक कर सकते हैं। फैशन और स्किन प्रोटेक्शन का यह कॉम्बिनेशन लोगों को खूब पसंद आ रहा है। पहले जहां लोग गर्मी में चेहरा ढंककर निकलते थे, वहीं अब स्टाइलिश UV जैकेट और फुल स्लीव कपड़े नया स्टाइल स्टेटमेंट बनते जा रहे हैं। खासतौर पर युवाओं और आउटडोर एक्टिविटी करने वाले लोगों में इसका क्रेज तेजी से बढ़ा है। बढ़ती गर्मी और सन डैमेज का डर भी इस ट्रेंड के पीछे बड़ी वजह माना जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय तक तेज धूप में रहने से स्किन एजिंग, पिग्मेंटेशन और स्किन कैंसर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में UV कपड़े एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं। हालांकि विशेषज्ञ यह भी साफ करते हैं कि UV-प्रोटेक्टिव कपड़े पहनने का मतलब यह नहीं है कि सनस्क्रीन की जरूरत खत्म हो गई। चेहरे, हाथों और शरीर के खुले हिस्सों पर सनस्क्रीन लगाना अब भी जरूरी है। साथ ही धूप का चश्मा और हाइड्रेशन भी बेहद जरूरी माना जाता है। जानकारों के मुताबिक अगर ये कपड़े गीले हो जाएं तो उनकी UPF क्षमता कम हो सकती है। इसलिए धूप में लंबे समय तक रहने पर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल फैशन इंडस्ट्री में UV-प्रोटेक्टिव क्लोदिंग तेजी से अपनी जगह बना रही है। स्टाइल, आराम और सुरक्षा का यह नया फॉर्मूला आने वाले समय में गर्मियों की जरूरत बन सकता है।
कोयला गैसीकरण को लेकर बड़ा कदम, 37,500 करोड़ की योजना के तहत निवेश और रोजगार सृजन को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली । भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने सतही कोयला और लिग्नाइट गैसीकरण परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। इसी क्रम में गुरुवार को एक राष्ट्रीय स्तर का रोड शो आयोजित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य इस क्षेत्र में निवेश, तकनीक और साझेदारी को प्रोत्साहित करना है। यह पहल कोयला संसाधनों के अधिक कुशल और पर्यावरण-अनुकूल उपयोग को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का मानना है कि गैसीकरण तकनीक के माध्यम से देश के विशाल कोयला भंडार का बेहतर उपयोग किया जा सकता है और आयात पर निर्भरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कोयला मंत्रालय के अनुसार इस योजना का कुल वित्तीय परिव्यय 37,500 करोड़ रुपये रखा गया है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक लगभग 10 करोड़ टन कोयले के गैसीकरण को सुनिश्चित करना है। इस पहल से न केवल ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती मिलेगी, बल्कि एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल जैसे महत्वपूर्ण उत्पादों के आयात पर निर्भरता में भी कमी आने की संभावना है। सरकार का आकलन है कि यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई दिशा देगा और घरेलू उत्पादन क्षमता को बढ़ाएगा। इस योजना के तहत लगभग 2.5 से 3 लाख करोड़ रुपये तक का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद जताई गई है। इससे कोयला उत्पादक क्षेत्रों में लगभग 25 बड़ी परियोजनाओं का विकास हो सकता है, जिनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 50 हजार रोजगार के अवसर उत्पन्न होने का अनुमान है। इसके अलावा, 75 मिलियन टन कोयला और लिग्नाइट के उपयोग से प्रतिवर्ष लगभग 6,300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होने की संभावना जताई गई है। साथ ही जीएसटी और अन्य करों के माध्यम से भी सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी। इस रोड शो का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं है, बल्कि एक मजबूत कोयला गैसीकरण इकोसिस्टम विकसित करना भी है। इसमें नीति निर्माता, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, निवेशक, प्रौद्योगिकी प्रदाता और वित्तीय संस्थान एक साथ मिलकर इस क्षेत्र के भविष्य की रणनीति पर चर्चा करेंगे। सरकार चाहती है कि भारत में इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाया जाए ताकि ऊर्जा उत्पादन को अधिक स्वच्छ, कुशल और आर्थिक रूप से व्यवहारिक बनाया जा सके। कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री G. Kishan Reddy और केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री Satish Chandra Dubey सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। इस आयोजन को नीति और उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा संरचना को अधिक आत्मनिर्भर बनाने में भूमिका निभा सकता है। सरकार का कहना है कि यह पहल देश के कोयला और लिग्नाइट संसाधनों के वैज्ञानिक और औद्योगिक उपयोग को नई गति देगी, जिससे न केवल ऊर्जा क्षेत्र मजबूत होगा बल्कि भारत की वैश्विक ऊर्जा प्रतिस्पर्धा में स्थिति भी बेहतर होगी।
ऑटो सेक्टर में महंगाई का असर, हुंडई मोटर इंडिया ने जून से कीमतों में 12,800 रुपए तक बढ़ोतरी की घोषणा

नई दिल्ली । देश के ऑटोमोबाइल बाजार में एक बार फिर कीमतों में बढ़ोतरी का दौर देखने को मिल रहा है, जहां प्रमुख वाहन निर्माता Hyundai Motor India ने अपने वाहनों की कीमतों में वृद्धि का ऐलान किया है। कंपनी ने जानकारी दी है कि जून 2026 से उसके सभी मॉडलों की कीमतों में अधिकतम 12,800 रुपए तक की बढ़ोतरी लागू की जाएगी। यह फैसला बढ़ती उत्पादन लागत, कच्चे माल की महंगाई और परिचालन खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए लिया गया है। कंपनी का कहना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में लागत दबाव को पूरी तरह से वहन करना संभव नहीं रह गया है, जिसके चलते आंशिक रूप से यह बढ़ोतरी ग्राहकों तक पहुंचाई जा रही है। कंपनी की ओर से जारी नियामक जानकारी में स्पष्ट किया गया है कि कीमतों में यह बदलाव मॉडल और वेरिएंट के आधार पर अलग-अलग होगा। कुछ मॉडलों पर इसका प्रभाव कम होगा, जबकि कुछ प्रीमियम वेरिएंट में यह बढ़ोतरी अधिक हो सकती है। कंपनी ने यह भी कहा है कि वह लगातार उत्पादन लागत को नियंत्रित करने और ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ कम करने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की लागत ने स्थिति को प्रभावित किया है। ऑटोमोबाइल सेक्टर में यह कोई अकेला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी कई बड़ी कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा कर चुकी हैं। हाल ही में Maruti Suzuki India ने भी अपने वाहनों की कीमतों में 30,000 रुपए तक की बढ़ोतरी का ऐलान किया था। इसी तरह Mahindra & Mahindra ने अपने एसयूवी और कमर्शियल वाहनों की कीमतों में संशोधन किया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरे ऑटो सेक्टर पर इनपुट कॉस्ट का दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर स्टील, एल्युमिनियम और अन्य कच्चे माल की कीमतों में तेजी के कारण वाहन निर्माण लागत प्रभावित हो रही है। इसके अलावा लॉजिस्टिक्स और ऊर्जा खर्चों में भी बढ़ोतरी ने कंपनियों के मार्जिन पर असर डाला है। ऐसे में कंपनियां आंशिक रूप से यह बोझ उपभोक्ताओं पर डालने के लिए मजबूर हो रही हैं। इसका सीधा असर मध्यम वर्गीय ग्राहकों पर पड़ सकता है, जो नई कार खरीदने की योजना बना रहे हैं। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, कीमतों में इस तरह की बढ़ोतरी का असर आने वाले महीनों में बिक्री पर देखने को मिल सकता है। हालांकि, ऑटो सेक्टर में मांग अभी भी स्थिर बनी हुई है, खासकर एसयूवी सेगमेंट में, लेकिन लगातार बढ़ती कीमतें ग्राहकों के खरीद निर्णय को प्रभावित कर सकती हैं। कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया है कि नई कीमतें 1 जून 2026 से पूरे देश में लागू होंगी। इसके साथ ही मौजूदा बुकिंग और डिलीवरी पर लागू होने वाले नियमों को लेकर भी डीलर नेटवर्क को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा रहे हैं। कुल मिलाकर, ऑटोमोबाइल बाजार में बढ़ती लागत का असर अब सीधे ग्राहकों की जेब पर दिखाई देने लगा है, और आने वाले समय में अन्य कंपनियों द्वारा भी इसी तरह के फैसले लिए जाने की संभावना बनी हुई है।
सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरी गिरावट, निवेशकों की निगाहें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकीं

नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं पर दबाव स्पष्ट रूप से देखा गया। बाजार में आई इस गिरावट के बाद निवेशकों और कारोबारियों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,539 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद इसका भाव 1,56,072 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले यह कीमत 1,57,611 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी सस्ता होकर 1,42,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जबकि पहले यह 1,44,372 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 18 कैरेट सोने के दाम में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 1,17,054 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। चांदी के बाजार में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। चांदी का भाव 5,296 रुपये प्रति किलो कम होकर 2,60,917 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। इससे पहले यह 2,66,213 रुपये प्रति किलो था। चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि एक ही दिन में इतनी बड़ी कमी को निवेशक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं। वायदा बाजार में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी दोनों के कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट दर्ज की गई है। 5 जून 2026 के लिए सोने का कॉन्ट्रैक्ट और 3 जुलाई 2026 के लिए चांदी का कॉन्ट्रैक्ट दोनों ही दबाव में रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों के दाम नीचे आए हैं। वैश्विक बाजार में कॉमेक्स पर भी कीमती धातुओं में कमजोरी दर्ज की गई है, जहां सोना और चांदी दोनों में प्रतिशत के आधार पर गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक फिलहाल अमेरिका में आने वाले महंगाई और जीडीपी से जुड़े आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिनके आधार पर आगे की दिशा तय होगी। इन आंकड़ों के जारी होने से वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की उम्मीदों पर भी असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई देगा। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्पष्ट नहीं होते, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश की बजाय प्रतीक्षा की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक डेटा इस रुझान को और स्पष्ट कर सकता है और सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।