MP: ग्वालियर में छुट्टी के दिन खुलीं LPG एजेंसियां, भोपाल-हरदा में सिलेंडर की किल्लत से हंगामा

नई दिल्ली। मध्यप्रदेश में LPG संकट से थोड़ी राहत मिलने लगी है। सोमवार को ग्वालियर में कलेक्टर रुचिका चौहान के आदेश पर साप्ताहिक छुट्टी के दिन भी गैस एजेंसियां खुलीं और बुकिंग के आधार पर सिलेंडर की डिलिवरी शुरू हुई। गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि बुकिंग की 40% समस्या अब खत्म हो गई है। भोपाल में हंगामाभोपाल के टीटी नगर दशहरा मैदान में सोमवार सुबह गैस सिलेंडर से भरा एक ट्रक पहुंचा। सिलेंडर बांटने के बाद 50 से अधिक लोग खाली हाथ रह गए, जिससे वहां हंगामा हो गया। ग्राहकों का कहना था कि सिलेंडर यहीं मंगवाए जाएं, जबकि कर्मचारियों ने उन्हें एजेंसी जाने के लिए कहा। एक घंटे के बाद कर्मचारियों ने अतिरिक्त ट्रक की व्यवस्था कर लोगों की समस्या दूर की। हरदा में भी लगी लंबी लाइनहरदा में एलपीजी एजेंसियों पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी। लोग सुबह से ही सिलेंडर भरवाने के लिए लाइन में खड़े हैं। होटल इंडस्ट्री में राहतएमपी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने कहा, “लगातार 6-7 दिन से प्रदेश के किसी भी होटल या रेस्टोरेंट को एक भी कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिला। अब सरकार ने हमें भी सिलेंडर देने की बात कही है। यह हमारे लिए ‘ऑक्सीजन’ मिलने जैसा है।”सिलेंडर की कमी के कारण प्रदेश में 50 हजार से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट बंद होने की कगार पर थे। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इंडक्शन, डीज़ल भट्ठी आदि की सुविधा की गई थी, लेकिन यह काफी खर्चीला था। भोपाल में कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई शुरूभोपाल गैस एजेंसियों के मुताबिक, सोमवार से कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई शुरू हो गई है। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली ने कहा कि अब होटल संचालक इंडक्शन, इलेक्ट्रिक ग्रिडल और फ्रायर की जगह सिलेंडर का उपयोग कर सकेंगे। ग्वालियर में सभी एजेंसियां खुलींग्वालियर में कलेक्टर रुचिका चौहान के आदेश पर सभी एलपीजी एजेंसियां खुलीं। एजेंसी संचालक धर्मेंद्र गुप्ता ने बताया कि पिछले 3-4 दिन से सॉफ्टवेयर समस्या के कारण बुकिंग नहीं हो पा रही थी। सोमवार से सभी को गैस सिलेंडर मिल रहे हैं और कोई कमी नहीं है।
ईरान तैयार नागरिक इलाकों पर हमलों की जांच में सहयोग देने को, अराघची ने कहा वैध सैन्य कार्रवाई

नई दिल्ली । तेहरान ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच स्पष्ट किया है कि वह नागरिक क्षेत्रों पर हमलों से जुड़े आरोपों की जांच में सहयोग करने को तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघचीने कहा कि उनकी सरकार किसी भी स्वतंत्र जांच का समर्थन करेगी और यह साबित करने को तैयार है कि ईरानी सैन्य कार्रवाई केवल वैध सैन्य लक्ष्यों के खिलाफ है। अराघची ने अल अरबी अल जदीद वेबसाइट को दिए साक्षात्कार में कहा कि ईरान ने जानबूझकर किसी भी आवासीय या नागरिक क्षेत्र को निशाना नहीं बनाया है। यदि किसी घटना में नागरिकों को नुकसान हुआ है तो तथ्यों की निष्पक्ष जांच होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के कुछ ठिकानों पर हाल में हुए हमले पड़ोसी देशों से किए गए थे और जवाबी कार्रवाई करते समय कोशिश होगी कि आबादी वाले क्षेत्रों को नुकसान न पहुंचे। हाल के दिनों में इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमलों के बाद मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र और कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। विशेषज्ञों के अनुसार संघर्ष बढ़ने से मध्य पूर्व की सुरक्षा वैश्विक ऊर्जा बाजार और मानवीय स्थिति पर गंभीर असर पड़ सकता है।अराघची ने कहा कि ईरान किसी भी क्षेत्रीय पहल का स्वागत करेगा जिससे युद्ध का न्यायसंगत अंत हो सके हालांकि अब तक कोई ठोस प्रस्ताव “मेज पर” नहीं आया है। इसके अलावा ईरानी अधिकारियों ने कहा कि हाल के इजरायली हमले में अयातुल्ला अली खामेनेईघायल हुए थे लेकिन उनकी चोट जानलेवा नहीं है। खामेनेई की सार्वजनिक अनुपस्थिति और स्वास्थ्य को लेकर अफवाहें फैल रही थीं। उनका पहला सार्वजनिक संबोधन 12 मार्च को सरकारी मीडिया द्वारा प्रसारित किया गया जिसमें उद्घोषक ने उनका संदेश पढ़ा।ईरान की यह पेशकश क्षेत्रीय तनाव कम करने और युद्ध अपराध की संभावित जांच में सहयोग देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
1968 का माई लाई नरसंहार: वियतनाम युद्ध की वह घटना जिसने दुनिया को झकझोर दिया

नई दिल्ली । वियतनाम युद्ध के दौरान 16 मार्च 1968 को दक्षिण वियतनाम के छोटे गांव My Lai में अमेरिकी सेना द्वारा किए गए नरसंहार ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। अमेरिकी सैनिकों को यह सूचना मिली थी कि गांव में वियतकांग विद्रोही छिपे हुए हैं। इसी आधार पर चार्ली कंपनी को तलाशी अभियान पर भेजा गया जिसका नेतृत्व विलियम कैलीकर रहे थे। जब सैनिक गांव पहुंचे तो वहां कोई संगठित प्रतिरोध नहीं था। बावजूद इसके उन्होंने महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों समेत सैकड़ों निहत्थे नागरिकों को मार डाला। कई घरों को जला दिया गया और ग्रामीणों को समूहों में खड़ा कर गोली मारी गई। बाद में सामने आए आंकड़ों के अनुसार लगभग 500 नागरिक मारे गए। शुरुआत में अमेरिकी सेना ने इस अभियान को सफल सैन्य कार्रवाई बताया। हालांकि कुछ सैनिकों और पत्रकारों की कोशिशों से धीरे धीरे सच्चाई सामने आई। विशेषकर अमेरिकी सैनिक ह्यू थॉम्पसन जूनियर की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे हेलीकॉप्टर से इलाके का निरीक्षण कर रहे थे और निहत्थे नागरिकों पर हो रही गोलीबारी को देखकर हस्तक्षेप किया। उन्होंने कई ग्रामीणों को बचाने की कोशिश भी की। 1969 में अमेरिकी पत्रकार सीमोर हर्षकी रिपोर्ट के बाद माई लाई नरसंहार वैश्विक सुर्खियों में आया। अमेरिका में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और वियतनाम युद्ध के खिलाफ जनता की नाराजगी बढ़ी।जांच के बाद कई सैनिकों पर मुकदमा चला लेकिन केवल विलियम कैली को दोषी ठहराया गया। उन्हें आजीवन कारावास की सजा दी गई हालांकि बाद में यह सजा कम कर दी गई और वे कुछ वर्षों में रिहा हो गए। माई लाई नरसंहार न केवल युद्ध अपराध के प्रतीक के रूप में इतिहास में दर्ज है बल्कि यह उस दौर के मानवाधिकार संकट और युद्ध की क्रूरता को भी उजागर करता है।
100 कुत्तों को दिया जहरीला इंजेक्शन और फिर नदी किनारे दफनाया, तेलंगाना से आई दिल दहला देने वाली घटना; जांच में जुटे अधिकारी

नई दिल्ली /तेलंगाना के मनचेरिल जिले से पशु क्रूरता की एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। जिले के एक गांव में करीब 100 आवारा कुत्तों को बेरहमी से जहर देकर मार डाला गया और बाद में उनके शवों को पास की ही एक नदी के किनारे दफना दिया गया। इस सामूहिक कत्लेआम का खुलासा तब हुआ जब ‘स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ नामक एनजीओ के कार्यकर्ता ए. गौतम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह पूरी बर्बरता गांव के सरपंच और ग्राम पंचायत सचिव के इशारे पर की गई है, जिन्होंने दो लोगों को काम पर रखकर कुत्तों को जहरीले इंजेक्शन लगवाए। पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरपंच और पंचायत सचिव के खिलाफ ‘पशु क्रूरता निवारण अधिनियम’ और ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। चौंकाने वाली बात यह है कि तेलंगाना में आवारा कुत्तों के साथ इस तरह की हिंसा पहली बार नहीं हुई है। आधिकारिक आंकड़ों और कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जनवरी और पिछले साल दिसंबर के बीच राज्य के विभिन्न जिलों में करीब 1,300 आवारा कुत्तों को मारा गया है। इन घटनाओं में भी कई जगह स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत अधिकारियों के शामिल होने की आशंका जताई गई थी। इस सामूहिक हत्या के पीछे एक राजनीतिक एंगल भी सामने आ रहा है। आशंका जताई जा रही है कि पिछले वर्ष दिसंबर में हुए ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान कई प्रत्याशियों ने गांवों को आवारा कुत्तों की समस्या से मुक्त करने का वादा किया था। इसी तथाकथित ‘चुनावी वादे’ को पूरा करने के लिए बेजुबान जानवरों को मौत के घाट उतारने का खौफनाक रास्ता चुना गया। कार्यकर्ता ए. गौतम का कहना है कि समस्या का समाधान नसबंदी और टीकाकरण है, न कि इस तरह का क्रूर हत्याकांड। फिलहाल पुलिस खुदाई कर दफनाए गए अवशेषों की जांच करने और दोषियों के खिलाफ ठोस सबूत जुटाने में लगी है। यह मामला एक बार फिर उस राष्ट्रव्यापी बहस को हवा दे रहा है जिसमें समाज दो हिस्सों में बंटा नजर आता है। जहां पशु प्रेमी और कार्यकर्ता इन बेजुबानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग आवारा कुत्तों को सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं। राजधानी दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में यह मामला अदालतों तक भी पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट में इन्हें सड़कों से हटाने की अर्जी से लेकर कोर्ट के स्टे तक, कानूनी लड़ाई जारी है, लेकिन तेलंगाना की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि जागरूकता के अभाव में क्रूरता किस हद तक जा सकती है।
आईपीएल 2026: मुंबई इंडियंस ने शुरू किया प्री-सीजन अभ्यास, 29 मार्च को पहला मुकाबला

नई दिल्ली /मुंबई इंडियंस ने आईपीएल 2026 की तैयारियों का आगाज कर दिया है। मुख्य कोच महेला जयवर्धने की देखरेख में टीम ने पहला प्री-सीजन ट्रेनिंग सेशन पूरा किया। इस सेशन में गेंदबाजी कोच पारस म्हाम्ब्रे, लसिथ मलिंगा और फील्डिंग कोच कार्ल हॉपकिंसन के साथ-साथ स्ट्रेंथ, कंडीशनिंग और फिजियोथेरेपी स्टाफ भी मौजूद थे। जयवर्धने ने कहा, प्री-सीजन के पहले दिन हमेशा कुछ खास होता है। मकसद मजबूत शुरुआत करना होता है। हमारे पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो इस फ्रेंचाइजी को अच्छे से जानते हैं और कुछ नए चेहरे भी आए हैं। पहला दिन पूरे कैंपेन का माहौल तय करता है। हम चाहते थे कि हर कोई पहले सेशन से ही यह महसूस करे कि हम कैसे ट्रेनिंग करते हैं और एक-दूसरे के लिए कैसे पेश आते हैं। उन्होंने आगे कहा, ओपनिंग सेशन टूर्नामेंट से पहले सीरियस काम की शुरुआत है। स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग स्टाफ ने खिलाड़ियों को मूवमेंट ड्रिल, एजिलिटी रूटीन और फिटनेस असेसमेंट से गुजारा ताकि मुश्किल सीजन से पहले उनकी तैयारी का अंदाजा लगाया जा सके। मुंबई इंडियंस ने सोशल मीडिया पर ट्रेनिंग सेशन की झलकियां साझा की हैं। इस सेशन में शामिल खिलाड़ियों में शार्दुल ठाकुर, मयंक मारकंडे, अल्लाह गजनफर, नमन धीर, राजा अंगद बावा, रॉबिन मिंज, मयंक रावत, मोहम्मद इजहार और अश्विनी कुमार शामिल रहे। आईपीएल 2026 में पांच बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस का पहला मुकाबला 29 मार्च को अपने होम ग्राउंड वानखेड़े स्टेडियम में कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ होगा। टीम की तैयारियों और फिटनेस पर फैंस की नजरें पहले दिन से ही टिकी हुई हैं।
दुबई एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले के बाद सभी उड़ानें अस्थायी रूप से निलंबित, कोच्चि फ्लाइट वापस लौटी

नई दिल्ली । दुबई एयरपोर्ट ने सोमवार को सुरक्षा कारणों के चलते सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया। यह कदम तब उठाया गया जब एयरपोर्ट के पास एक ड्रोन का ईंधन टैंक से टकराने के बाद आग लग गई। दुबई एयरपोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा कि यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है। एयरपोर्ट ने यात्रियों को अपनी एयरलाइन से ताजा उड़ान अपडेट लेने की सलाह दी। दुबई नागरिक उड्डयन प्राधिकरण और मीडिया कार्यालय ने भी कहा कि आग बुझाने और सुरक्षा उपायों को लागू करने के बाद किसी के घायल होने की कोई सूचना नहीं है। आपातकालीन टीम और नागरिक सुरक्षा दल तुरंत तैनात किए गए। इस घटना के चलते सोमवार को कोच्चि से दुबई जा रही एमिरेट्स की फ्लाइट ईके533 को वापस लौटने का निर्देश दिया गया। सीआईएएल के प्रवक्ता ने बताया कि विमान में 325 यात्री सवार थे और एयरपोर्ट अचानक बंद होने की वजह से विमान को कोच्चि लौटना पड़ा। सुरक्षा और आपातकालीन उपायों के बावजूद संयुक्त अरब अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में छह लोगों की मौत की सूचना दी है। इनमें चार नागरिक और दो सैनिक शामिल हैं। सैनिकों की मौत हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुई जो तकनीकी खराबी के कारण हुई। दुबई एयरपोर्ट ने यात्रियों से अपील की है कि वे उड़ानों और सुरक्षा संबंधी जानकारी के लिए आधिकारिक चैनलों से अपडेट लेते रहें। अधिकारियों ने कहा कि आगे की जानकारी उपलब्ध होते ही सभी को सूचित किया जाएगा।
ट्रंप का आरोप: अमेरिकी अदालतें रिपब्लिकन के खिलाफ पक्षपाती, जजों की सोच ने फैसलों को प्रभावित किया

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अदालतों पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका जरूरत से ज्यादा राजनीतिक हो चुकी है और कई मामलों में जजों की सोच फैसलों से अधिक प्रभाव डालती है। ट्रंप का आरोप है कि अदालतें अक्सर रिपब्लिकन नेताओं और उनके साथ जुड़े मामलों में अनुचित रुख अपनाती हैं और कई बार ऐसे लोगों को संरक्षण देती दिखाई देती हैं जिन्हें नहीं बचाया जाना चाहिए। इसके साथ ही ट्रंप ने वॉशिंगटन डीसी में स्थित फेडरल रिजर्व कॉम्प्लेक्स के नवीनीकरण प्रोजेक्ट में बजट और समय की अनियमितताओं की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट बजट से कहीं अधिक खर्च कर रहा है और तय समय से पीछे चल रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले की पूरी पारदर्शी जांच होनी चाहिए और प्रोजेक्ट से जुड़े कॉन्ट्रैक्टरों की जिम्मेदारी तय की जाए। ट्रंप ने विशेष रूप से जज जेम्स बोसबर्ग पर आरोप लगाया कि उन्होंने उनके और रिपब्लिकन नेताओं से जुड़े मामलों में पक्षपातपूर्ण रुख अपनाया। ट्रंप ने कहा कि बोसबर्ग ने डी.सी. सर्किट में बेगुनाह रिपब्लिकन को दोषी ठहराने का समर्थन किया और अब फेडरल रिजर्व की वित्तीय गड़बड़ी की जांच रोक रहे हैं। उन्होंने जज बोसबर्ग को ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम (टीडीएस) के उच्च स्तर से पीड़ित बताया। अमेरिकी राष्ट्रपति ने अदालतों से आग्रह किया कि वे राजनीतिक एजेंडे से दूर रहकर केवल कानून और न्याय के सिद्धांतों पर ध्यान दें। ट्रंप ने बोसबर्ग को उनके और रिपब्लिकन से जुड़े सभी केसों से हटाने और उन पर गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई लेने की मांग की। ट्रंप के बयान ने अमेरिकी न्यायपालिका और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि उन्होंने न्यायिक निष्पक्षता और राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
500 किमी की अविरल-निर्मल यमुना यात्रा का समापन, जल संरक्षण का दिया संदेश

जालौन । बुंदेलखंड की जल सहेलियों द्वारा यमुना नदी को अविरल और निर्मल बनाने के संकल्प के साथ निकाली गई लगभग 500 किलोमीटर लंबी अविरल निर्मल यमुना यात्रा का सफलतापूर्वक समापन हो गया। यह पदयात्रा नदी संरक्षण और जल जागरूकता का संदेश देने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी जिसमें बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। सोमवार को जालौन में आयोजित भेंट वार्ता के दौरान जन जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने यात्रा की जानकारी देते हुए बताया कि यह पदयात्रा 29 जनवरी को पंचनद धाम से शुरू हुई थी। यह स्थान क्षेत्र का एक प्रसिद्ध तीर्थस्थल है।स्थल है जहां से जल सहेलियों ने यमुना नदी को स्वच्छ और अविरल बनाने का संकल्प लेकर यात्रा प्रारंभ की थी। उन्होंने बताया कि यह यात्रा कई जिलों और सैकड़ों गांवों से होकर गुजरी। पदयात्रा के दौरान लोगों को जल संरक्षण नदी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया गया। यात्रा के माध्यम से ग्रामीणों को यह भी बताया गया कि नदियों का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के हर व्यक्ति की भागीदारी से ही संभव है। करीब डेढ़ महीने तक चली इस पदयात्रा का समापन अंततः दिल्ली में स्थित वासुदेव घाट पर हुआ। यहां यात्रा से जुड़े लोगों ने यमुना नदी की स्वच्छता और संरक्षण के लिए सामूहिक संकल्प लिया। आयोजकों के अनुसार इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना था कि यमुना जैसी जीवनदायिनी नदी को प्रदूषण से बचाने और उसकी अविरल धारा बनाए रखने के लिए जनभागीदारी बेहद जरूरी है। यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर सभाएं संवाद कार्यक्रम और जागरूकता अभियान भी आयोजित किए गए। बुंदेलखंड क्षेत्र की जल सहेलियों द्वारा की गई इस पहल को स्थानीय लोगों का व्यापक समर्थन मिला और इसे नदी संरक्षण के लिए जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी शुभकामनाएं

भोपाल । राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही एक समृद्ध और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला होते हैं और इस दिशा में टीकाकरण की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि माताओं और शिशुओं का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करना समाज और देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक है। टीकाकरण न केवल बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाता है बल्कि समाज में स्वास्थ्य सुरक्षा का मजबूत आधार भी तैयार करता है। डॉ. यादव ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित टीकाकरण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश में मातृ और शिशु स्वास्थ्य को मजबूत बनाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे टीकाकरण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी निभाएं और अपने बच्चों का निर्धारित समय पर टीकाकरण अवश्य कराएं। मुख्यमंत्री ने टीकाकरण अभियान को सफल बनाने में योगदान देने वाले स्वास्थ्यकर्मियों आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं स्वयंसेवी संस्थाओं और सभी संबंधित टीमों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस की शुभकामनाएं भी दीं।
मुरैना-धौलपुर रोड पर चलती कार में भ्रूण लिंग परीक्षण का भंडाफोड़, NHM ने केंद्र को भेजी रिपोर्ट

नई दिल्ली । मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की टीम ने एक बड़े स्टिंग ऑपरेशन में चलती कार में अवैध भ्रूण लिंग परीक्षण करने वाले नेटवर्क का पर्दाफाश किया। ऑपरेशन में टीम ने ननद बनकर महिला के साथ बैठी डॉक्टर और गर्भवती महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। स्टिंग ऑपरेशन की झलकघटना 2 मई 2025 को मुरैना-धौलपुर रोड पर चंबल नदी के पुल के पास हुई। एक कार में पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन लगाकर गर्भवती महिला का लिंग पता लगाया जा रहा था। पीछे से आ रही NHM की टीम ने गाड़ी को रोका, शीशे तोड़े और सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। टीम में डॉ. प्रज्ञा तिवारी, डॉ. बिंदु, डॉ. प्रबल, डॉ. अनुभा और संजय जोशी शामिल थे। गिरोह का नेटवर्कजांच में सामने आया कि यह गिरोह मध्यप्रदेश-राजस्थान बॉर्डर क्षेत्रों में लंबे समय से सक्रिय था। नेटवर्क में कुछ एएनएम और आशा कार्यकर्ता भी शामिल थीं। गर्भवती महिलाओं को अलग-अलग लोकेशन पर ले जाकर चलती कार में सोनोग्राफी की जाती थी। भ्रूण का लिंग मौखिक रूप से और स्क्रीन पर दिखाकर बताया जाता था। स्टिंग ऑपरेशन की तैयारीNHM ने करीब 6 महीने की तैयारी के बाद स्टिंग ऑपरेशन किया। एक गर्भवती महिला को डिकॉय के रूप में तैयार किया गया और गिरोह तक पहुंचाने के लिए स्थानीय इंफॉर्मर का उपयोग किया गया। आशा कार्यकर्ता ने भ्रूण लिंग बताने के लिए 50 हजार रुपए की मांग भी की। रिपोर्ट और केंद्र को जानकारीइस स्टिंग ऑपरेशन की जानकारी 6 मार्च 2026 को NHM की संयुक्त संचालक डॉ. प्रज्ञा तिवारी ने केंद्र सरकार को भेजी थी। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश में बिगड़ते लिंगानुपात के पीछे अवैध लिंग परीक्षण और फैमिली बैलेंसिंग तकनीकें बड़ी वजह हैं। लिंगानुपात पर चिंताआंकड़ों के अनुसार, 2016-18 में मध्यप्रदेश का लिंगानुपात 925 था, जो 2020-22 में घटकर 915 हो गया। 2023 में हल्का सुधार हुआ और यह 917 पर पहुंचा। ग्रामीण क्षेत्रों में बेटियों का जन्म अनुपात अभी भी कम (911) है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 941 दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि भ्रूण लिंग परीक्षण और बेटे की चाह सामाजिक मानसिकता के मुख्य कारण हैं। चुनौती अभी बाकीNHM का कहना है कि नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है, लेकिन अवैध कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। जागरूकता अभियान और इनफॉर्मर रिवॉर्ड (50 हजार से 2 लाख रुपए) के जरिए लोगों को सही रास्ते पर लाया जा रहा है। विभाग लगातार निगरानी और कानूनी कार्रवाई से इस काले कारोबार पर लगाम लगाने की कोशिश कर रहा है। यह स्टिंग ऑपरेशन न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में भ्रूण लिंग परीक्षण जैसे अवैध और सामाजिक रूप से घातक कृत्यों पर कड़ी कार्रवाई की मिसाल है।