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शाजापुर कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों का प्रदर्शन: शासकीय भूमि पर कब्जे के आरोप, कलेक्टर के आश्वासन के बाद मामला शांत

शाजापुर। शाजापुर कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान पोलायखुर्द गांव के ग्रामीणों ने शासकीय भूमि पर कथित कब्जे के मामले को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। करीब दो घंटे तक उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी कलेक्टर की वाहन पार्किंग के पास पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठकर विरोध जताने लगे। ग्रामीणों ने कलेक्टर के खिलाफ भी नारे लगाए, जिससे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस और प्रशासन ने संभाली स्थितिघटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कलेक्टर उस समय जनसुनवाई कक्ष में मौजूद थीं। सुंदरसी थाना प्रभारी मनीष शर्मा ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाइश दी और स्थिति को नियंत्रित किया। लंबी समझाइश के बाद ग्रामीणों ने शांत रुख अपनाया और अपने पांच प्रतिनिधियों को कलेक्टर से बातचीत के लिए भेजा गया। कलेक्टर के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शनप्रतिनिधिमंडल की कलेक्टर से मुलाकात के दौरान उन्हें मामले की जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और स्थिति सामान्य हो गई। शासकीय भूमि पर कब्जे और फर्जी नामांतरण का आरोपग्रामीणों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ग्राम पोलायखुर्द स्थित शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 1396 (रकबा 2.045 हेक्टेयर) पर कुछ लोगों ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी नामांतरण कर लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि पर गांव का प्राचीन मंदिर और बच्चों का श्मशान स्थल स्थित है, जिससे यह जमीन सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, ग्राम पंचायत द्वारा अनुसूचित जाति समाज के लिए मांगलिक भवन निर्माण का प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। जातिसूचक गाली और धमकी देने का भी आरोपप्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर संबंधित लोगों द्वारा उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि फर्जी नामांतरण को तत्काल निरस्त किया जाए और दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और अवैध कब्जे का मामला दर्ज किया जाए।

ड्रग्स नेटवर्क, VIP पेशी और राजनीतिक आरोपों ने बढ़ाई हलचल, पाकिस्तान में ‘कोकीन क्वीन’ केस पर घमासान

नई दिल्ली । पाकिस्तान में एक कथित हाई-प्रोफाइल ड्रग्स नेटवर्क के खुलासे के बाद वहां का राजनीतिक और सामाजिक माहौल अचानक चर्चा के केंद्र में आ गया है। कराची में एक महिला की गिरफ्तारी के बाद जिस तरह की जानकारियां सामने आईं, उसने न केवल सुरक्षा एजेंसियों बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हलचल बढ़ा दी है। ‘कोकीन क्वीन’ के नाम से चर्चित इस मामले ने ड्रग्स तस्करी, प्रभावशाली नेटवर्क और जांच प्रक्रिया को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कराची पुलिस द्वारा गिरफ्तार की गई महिला की पहचान अनमोल उर्फ पिंकी के रूप में बताई जा रही है। जांच एजेंसियों के अनुसार उस पर बड़े स्तर पर ड्रग्स नेटवर्क संचालित करने के आरोप लगाए गए हैं। शुरुआती जांच में यह दावा किया गया कि उसका नेटवर्क कराची, लाहौर और इस्लामाबाद जैसे प्रमुख शहरों तक फैला हुआ था। आरोप है कि इस नेटवर्क का दायरा हाई-प्रोफाइल सर्किल और चुनिंदा ग्राहक समूहों तक पहुंच चुका था। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है और कई पहलुओं की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। गिरफ्तारी के बाद सबसे अधिक चर्चा अदालत में उसकी पेशी को लेकर शुरू हुई। सामने आए वीडियो और तस्वीरों में महिला कथित तौर पर काफी आत्मविश्वास के साथ दिखाई दी। रिपोर्ट्स के अनुसार अदालत में उसकी मौजूदगी के दौरान कुछ ऐसे दृश्य सामने आए, जिन्होंने लोगों के बीच सवाल पैदा कर दिए। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह बहस तेज हो गई कि एक गंभीर मामले की आरोपी को इस तरह का व्यवहार क्यों मिला। इसी मुद्दे ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया। जांच एजेंसियों का दावा है कि महिला लंबे समय से ड्रग्स कारोबार से जुड़ी हो सकती है और उसके नेटवर्क में कई स्तरों पर काम करने वाले लोग शामिल थे। बताया जा रहा है कि नेटवर्क संचालन के लिए आधुनिक संचार माध्यमों और विशेष संपर्क प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता था। जांच अब इस बात पर भी केंद्रित है कि नेटवर्क किन क्षेत्रों तक सक्रिय था और इसके पीछे कौन-कौन लोग जुड़े हो सकते हैं। मामले ने नया मोड़ तब लिया जब पेशी के दौरान पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री Raja Pervaiz Ashraf का नाम चर्चा में आने लगा। हालांकि उनके पक्ष की ओर से इन दावों को पूरी तरह खारिज किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर जांच की आवश्यकता होगी तो वह सहयोग करने के लिए तैयार हैं। फिलहाल जांच एजेंसियों ने भी किसी प्रत्यक्ष संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह मामला अब केवल ड्रग्स नेटवर्क तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रिया, राजनीतिक प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और उससे जुड़े नए खुलासों पर सभी की नजर बनी रहेगी। फिलहाल पाकिस्तान में यह मामला सुरक्षा और राजनीति से जुड़ी सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल हो चुका है।

क्या Earbuds से हो सकती है आपकी जासूसी? जानिए साइबर एक्सपर्ट्स की चेतावनी और सच्चाई

नई दिल्ली। आज के समय में वायरलेस ईयरबड्स सिर्फ म्यूजिक सुनने या कॉल करने का साधन नहीं रह गए हैं, बल्कि ये स्मार्ट फीचर्स से लैस ऐसे डिवाइस बन चुके हैं जो माइक्रोफोन, ब्लूटूथ और AI तकनीक के जरिए लगातार फोन से जुड़े रहते हैं। इसी वजह से साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इन डिवाइस को लेकर प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। Earbuds कैसे बन सकते हैं खतरा?आधुनिक Earbuds में माइक्रोफोन और ब्लूटूथ कनेक्टिविटी होती है, जिससे ये फोन से लगातार जुड़े रहते हैं। अगर किसी डिवाइस में सुरक्षा खामी हो या वह किसी मालवेयर से संक्रमित हो जाए तो हैकर माइक्रोफोन तक पहुंच बना सकता है। इस स्थिति में यूजर को बिना जानकारी दिए आसपास की बातचीत रिकॉर्ड होने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि ऐसा आमतौर पर तभी संभव है जब डिवाइस या फोन किसी असुरक्षित ऐप या लिंक से प्रभावित हो। ब्लूटूथ हैकिंग का बढ़ता खतरासाइबर एक्सपर्ट्स का कहना है कि सार्वजनिक जगहों जैसे एयरपोर्ट, मॉल या कैफे में ब्लूटूथ ऑन रखना जोखिम भरा हो सकता है। हैकर्स कई बार नकली ब्लूटूथ डिवाइस बनाकर यूजर्स को कनेक्ट करने के लिए ट्रिक करते हैं। अगर कोई यूजर गलती से ऐसे डिवाइस से कनेक्ट हो जाता है तो उसके फोन का डेटा, कॉन्टैक्ट्स और ऑडियो जानकारी चोरी होने का खतरा बढ़ सकता है। किन लोगों को ज्यादा खतरा?जो लोग लगातार Earbuds का इस्तेमाल ऑफिस कॉल, बिजनेस मीटिंग या निजी बातचीत के लिए करते हैं, वे ज्यादा संवेदनशील स्थिति में हो सकते हैं। खासकर सस्ते या अनजान ब्रांड के डिवाइस में सिक्योरिटी अपडेट की कमी के कारण खतरा बढ़ जाता है। साथ ही, अगर किसी ऐप को जरूरत से ज्यादा माइक्रोफोन परमिशन दी गई हो तो वह बैकग्राउंड में डेटा एक्सेस कर सकता है। कैसे बचें इस खतरे से?यूजर्स को हमेशा भरोसेमंद ब्रांड के Earbuds इस्तेमाल करने चाहिए और समय-समय पर सॉफ्टवेयर अपडेट करना चाहिए। अनजान ब्लूटूथ रिक्वेस्ट को स्वीकार न करें और जरूरत न होने पर ब्लूटूथ बंद रखें। फोन में ऐप्स की माइक्रोफोन परमिशन नियमित रूप से चेक करना भी जरूरी है। किसी भी संदिग्ध लिंक या ऐप से बचकर रहना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

सोशल मीडिया पोस्ट पर बड़ा फैसला: शाजापुर कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए 2 साल की सजा दी

शाजापुर । शाजापुर जिले की न्यायालय ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट डालने के मामले में आरोपी मोहसिन (पिता मुबारिक, निवासी ज्योति नगर, शाजापुर) को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। आरोपी ने फेसबुक पर ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पोस्ट साझा की थी, जिसे राष्ट्रीय भावनाओं को आहत करने वाला माना गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, शाजापुर ने मंगलवार दोपहर सुनवाई के बाद आरोपी को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया और सजा का आदेश दिया। धाराओं के तहत अलग-अलग सजा और जुर्मानाकोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 153-बी के तहत 2 वर्ष के सश्रम कारावास और 1000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। इसके अलावा धारा 505(1)(बी) के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपये का अर्थदंड तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 67-ए के तहत 1 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। 2019 में दर्ज हुई थी शिकायतजिला मीडिया सेल प्रभारी प्रतीक श्रीवास्तव ने बताया कि यह मामला 16 फरवरी 2019 का है। उस समय फरियादी रोहित राठौर ने थाना कोतवाली शाजापुर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि ‘मोहसिन लाला’ नाम की फेसबुक आईडी से यह विवादित पोस्ट डाली गई थी। फरियादी ने पोस्ट का स्क्रीनशॉट भी पुलिस को साक्ष्य के रूप में सौंपा था, जिसके आधार पर जांच शुरू की गई। राष्ट्रीय भावनाओं को आहत करने का आरोपशिकायत में यह भी कहा गया था कि इस तरह की पोस्ट से लोगों की राष्ट्रीय भावनाएं आहत हुईं और समाज में तनाव की स्थिति पैदा होने की आशंका थी। पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज कर इसे न्यायालय में प्रस्तुत किया था। कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर दोष सिद्धन्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और तर्कों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया गया। इस मामले में शासन की ओर से पैरवी प्रतीक श्रीवास्तव और तुलसी मानकर द्वारा की गई। यह फैसला सोशल मीडिया के दुरुपयोग और भड़काऊ पोस्ट के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

महापंचायत में राकेश टिकैत का बड़ा ऐलान, किसानों के हितों पर समझौता नहीं करने की दी चेतावनी

नई दिल्ली । किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों को लेकर गाजियाबाद में सोमवार को माहौल उस समय गर्म हो गया जब किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता Rakesh Tikait ने एक महापंचायत का आयोजन किया। इस पंचायत में बड़ी संख्या में किसानों की मौजूदगी देखने को मिली, जहां कई स्थानीय और क्षेत्रीय समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया। किसानों की ओर से भूमि अधिग्रहण, मुआवजा विवाद और हाल के घटनाक्रमों को लेकर नाराजगी जाहिर की गई। पंचायत के दौरान शुरुआत से ही आंदोलनकारी रुख दिखाई दिया और प्रशासन पर मांगों को लेकर दबाव बनाने की कोशिश की गई। महापंचायत के दौरान किसानों की ओर से प्रशासन को सीमित समय का अल्टीमेटम दिया गया। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची और बातचीत का दौर शुरू हुआ। हालात को देखते हुए कई विभागों से जुड़े अधिकारी भी चर्चा प्रक्रिया में शामिल हुए। बैठक के दौरान किसान नेताओं ने विभिन्न मामलों को गंभीरता से उठाया और कई मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की। लंबे समय तक चली बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई बिंदुओं पर चर्चा हुई। इस दौरान राकेश टिकैत ने एक मामले में कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मंच से अपनी बात रखते हुए प्रशासन के सामने खुली चुनौती पेश की और अपने तेवर साफ कर दिए। पंचायत में मौजूद किसानों ने भी उनके समर्थन में जोरदार आवाज उठाई। किसान नेताओं की सख्त रणनीति और एकजुटता के कारण प्रशासन बेहद सतर्क नजर आया। माहौल को शांत बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए थे। महापंचायत के दौरान किसानों से जुड़े मुद्दों के अलावा अन्य जनहित विषयों पर भी चर्चा की गई। बढ़ती महंगाई और ईंधन कीमतों को लेकर भी नाराजगी जताई गई। साथ ही युवाओं और रोजगार से जुड़े विषयों पर भी चिंता व्यक्त की गई। किसान नेताओं ने कहा कि ग्रामीण और किसान वर्ग से जुड़े मुद्दों को लगातार नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इन विषयों पर गंभीर पहल की आवश्यकता है। सभा में मौजूद लोगों ने भी इन मुद्दों पर अपनी सहमति जाहिर की। कई घंटों तक चले संवाद के बाद स्थिति में कुछ नरमी देखने को मिली। बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने आगे भी चर्चा जारी रखने की सहमति जताई। प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए कि किसानों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर विस्तार से विचार किया जाएगा और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाए जाएंगे। वहीं किसान पक्ष ने भी कहा कि उनकी प्राथमिकता बातचीत के जरिए समाधान निकालना है, लेकिन किसानों के हितों से जुड़े मामलों पर वे पीछे हटने के पक्ष में नहीं हैं। महापंचायत ने एक बार फिर यह संकेत दिया कि किसान संगठनों की आवाज और जमीनी पकड़ अभी भी राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव रखती है।

कब्जा हटाने की कार्रवाई के बाद तनाव: सरपंच प्रतिनिधि को धमकी, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू

शाजापुर । शाजापुर जिले के हिरपुर भज्जा भरड़ क्षेत्र में शासकीय जमीन से अवैध कब्जा हटाने को लेकर दो पक्षों के बीच गंभीर विवाद हो गया। सोमवार रात हुए इस घटनाक्रम का वीडियो मंगलवार को सामने आने के बाद मामला और तूल पकड़ गया। विवाद के बाद सरपंच प्रतिनिधि सवाई सिंह ने कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घर के सामने पहुंचकर गाली-गलौज और हंगामे का आरोपफरियादी सवाई सिंह (49), पिता हीरालाल, निवासी हिरपुर भज्जा भरड़ ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 25 मई 2026 की रात करीब 10 बजे लखन अहिरवार, उनकी मां रामकुंवर बाई और पत्नी उनके घर के सामने पहुंचे। आरोप है कि तीनों शासकीय जमीन से गुमटी हटाने के मुद्दे को लेकर हंगामा करने लगे और जोर-जोर से गाली-गलौज की।सवाई सिंह के अनुसार, उस समय वह अपने साथी जगदीश सोलिया के साथ गांव से घर लौटे थे। उन्होंने जब गाली-गलौज का विरोध किया, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें भी अपशब्द कहे और माहौल तनावपूर्ण हो गया। जान से मारने की धमकी देने का आरोपशिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने सरपंच प्रतिनिधि को झूठे केस में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना से पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई, हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने विवाद को देखा और स्थिति को शांत करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद लोगों ने देखा पूरा घटनाक्रमघटना के दौरान ब्रम्हानंद गोवा, शुभम (भवानी सिंह के पुत्र) और जगदीश सोलिया मौके पर मौजूद थे। इन गवाहों की मौजूदगी में पूरा विवाद हुआ। बताया जा रहा है कि इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और हंगामा साफ दिखाई दे रहा है। पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरूकोतवाली पुलिस ने सवाई सिंह की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार, शासकीय जमीन से कब्जा हटाने को लेकर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई थी, जो अब खुले विवाद में बदल गई।

झाबुआ जनसुनवाई में अनोखा मामला: ‘मृत’ घोषित दिव्यांग पहुंचा प्रशासन के सामने, सिस्टम पर उठे सवाल

झाबुआ । झाबुआ जिले में प्रशासनिक लापरवाही और निजी बस संचालकों की कथित अमानवीयता का गंभीर मामला सामने आया है। आजाद विकलांग कल्याण समिति ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग की है। मामला तब और गंभीर हो गया जब एक दिव्यांग व्यक्ति को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वह स्वयं जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी पीड़ा रखता दिखा। ग्राम पंचायत मदरानी के बादरसिंह मुणिया, जो 98 प्रतिशत दिव्यांग हैं, और उनकी 85 प्रतिशत दिव्यांग पत्नी को पिछले दो वर्षों से सरकारी दस्तावेजों में मृत दर्शाया गया है। इस गंभीर त्रुटि के कारण दोनों की पेंशन, राशन और अन्य सरकारी सुविधाएं पूरी तरह बंद हो गई हैं, जिससे उनका जीवनयापन मुश्किल हो गया है। आधार और योजनाओं से वंचित परिवार, पेंशन और आवास भी अटकेइसी तरह कंजावानी निवासी गवरसिंह सोलंकी का परिवार भी लंबे समय से खाद्यान्न सहायता से वंचित है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिलने वाली किस्तें भी रोक दी गई हैं। नौगावा की 100 प्रतिशत दृष्टिबाधित सवली बेन और नयागांव की सबिस्ता कालिया कटारा के आधार कार्ड अब तक नहीं बन पाए हैं, जिसके चलते वे सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इन मामलों ने प्रशासनिक प्रणाली में गंभीर खामियों को उजागर किया है, जहां वास्तविक पात्र लोग योजनाओं से वंचित हो रहे हैं। व्हीलचेयर परिवहन में भी बाधा, बस स्टाफ पर आरोपआजाद विकलांग कल्याण समिति के अध्यक्ष कमलेश राठौर ने बताया कि हाल ही में समिति ने झाबुआ और अलीराजपुर के पांच दिव्यांगजनों को निःशुल्क इलेक्ट्रिक व्हीलचेयर उपलब्ध करवाई थीं। इन्हें भोपाल से झाबुआ लाया जाना था, लेकिन यहां भी दिव्यांगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। आरोप है कि पहले से सहमति होने के बावजूद भाबर बस के कंडक्टर ने अंतिम समय पर व्हीलचेयर बस में चढ़ाने से इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, बस स्टाफ ने बस में रखी दो व्हीलचेयर भी जबरन उतरवा दीं। समिति द्वारा दोगुना किराया देने की पेशकश के बावजूद बस कर्मियों ने बात नहीं मानी और दिव्यांगों को आधी रात को भोपाल बस स्टैंड पर छोड़ दिया। टेम्पो से मंगानी पड़ी व्हीलचेयर, प्रशासन से कार्रवाई की मांगस्थिति इतनी खराब हो गई कि समिति को 12 हजार रुपये खर्च कर लोडिंग टेम्पो के माध्यम से व्हीलचेयर झाबुआ मंगवानी पड़ी। इस घटना के बाद दिव्यांगजनों और समिति ने प्रशासन से दोषियों पर कार्रवाई और व्यवस्था सुधार की मांग की है। लोगों का कहना है कि ऐसे मामले न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करते हैं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता की कमी को भी सामने लाते हैं।

दहेज उत्पीड़न मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, शादी बचाने की जिद बेटियों को मौत की ओर धकेल रही

नई दिल्ली । देश में दहेज उत्पीड़न और विवाहित महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर सर्वोच्च अदालत ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील टिप्पणी की है। एक मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने भारतीय समाज की उस मानसिकता पर चिंता व्यक्त की, जिसमें बेटियों की खुशियों और सुरक्षा से अधिक शादी बचाने और सामाजिक प्रतिष्ठा को महत्व दिया जाता है। अदालत ने कहा कि कई बार परिवारों की यही सोच महिलाओं को ऐसे हालात में रहने के लिए मजबूर कर देती है, जो आगे चलकर गंभीर और दुखद परिणामों का कारण बनते हैं। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि समाज में आज भी तलाक को लेकर संकोच और सामाजिक दबाव की भावना बनी हुई है। इसी कारण कई परिवार अपनी बेटियों को ससुराल में हो रही मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना के बावजूद वापस घर लाने से हिचकिचाते हैं। कई मामलों में माता-पिता यह मानते हैं कि शादी टूटने से सामाजिक छवि प्रभावित होगी, इसलिए वे बेटियों को हर परिस्थिति में रिश्ता निभाने की सलाह देते हैं। अदालत ने माना कि यह सोच कई बार महिलाओं को बेहद कठिन परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर कर देती है। अदालत ने यह भी कहा कि शादी को किसी भी कीमत पर बचाने की मानसिकता समाज में लंबे समय से मौजूद है। परिवार अक्सर यह सोचते हैं कि रिश्ते टूटने की बजाय उन्हें किसी भी तरह जारी रखना बेहतर विकल्प है। लेकिन जब किसी महिला को लगातार प्रताड़ना, हिंसा या मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है, तब यही सोच उसके जीवन के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। अदालत ने इस सामाजिक सोच को बदलने की जरूरत पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने माता-पिता और अभिभावकों को भी महत्वपूर्ण संदेश दिया। अदालत ने कहा कि परिवारों को अपनी बेटियों को यह भरोसा देना चाहिए कि उनका घर हमेशा उनके लिए सुरक्षित स्थान रहेगा। यदि किसी महिला को अपने वैवाहिक जीवन में उत्पीड़न या असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है तो उसे मजबूरी में वहां रहने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी भी सामाजिक धारणा या प्रतिष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति की सुरक्षा और जीवन होता है। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि कानूनों के बावजूद दहेज जैसी सामाजिक बुराइयां अब भी समाज में मौजूद हैं। समय के साथ कानूनी प्रावधानों को मजबूत किया गया है, लेकिन केवल कानूनों के सहारे इस समस्या का समाधान संभव नहीं माना जा सकता। अदालत का मानना है कि इसके लिए सामाजिक सोच में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है, ताकि महिलाओं को भय और दबाव के बिना जीवन जीने का अवसर मिल सके। विशेषज्ञों का भी मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानूनी ढांचे से नहीं बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता और पारिवारिक समर्थन से भी जुड़ी होती है। जब तक समाज में तलाक और वैवाहिक असफलता को लेकर नकारात्मक सोच बनी रहेगी, तब तक कई महिलाएं दबाव में कठिन परिस्थितियों का सामना करती रहेंगी। अदालत की यह टिप्पणी केवल एक कानूनी टिप्पणी नहीं बल्कि समाज के लिए एक गंभीर संदेश के रूप में भी देखी जा रही है।

ईरान–अमेरिका तनाव फिर बढ़ा: MQ-9 ड्रोन गिराने का दावा, सीजफायर उल्लंघन पर दी कड़ी चेतावनी

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी सेना के एक MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराया है। ईरान का कहना है कि यह ड्रोन उसके हवाई क्षेत्र में घुस आया था। यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब क्षेत्र में अस्थायी संघर्ष विराम (सीजफायर) लागू बताया जा रहा है और इसी दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के पास सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान का दावा और कड़ी चेतावनीईरान की मीडिया एजेंसी मेहर न्यूज के अनुसार, IRGC ने कहा कि अमेरिकी ड्रोन उसकी सीमा में प्रवेश कर रहा था, जिसके बाद उसे निशाना बनाकर मार गिराया गया। साथ ही ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि सीजफायर का उल्लंघन दोबारा किया गया तो इसका “कड़ा और निर्णायक जवाब” दिया जाएगा।ईरान ने यह भी कहा कि उसकी सुरक्षा और संप्रभुता का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अमेरिकी कार्रवाई का दावादूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि उसने आत्मरक्षा में कार्रवाई की है। अमेरिकी प्रवक्ता के मुताबिक, क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों और युद्धपोतों को खतरा पैदा करने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास संदिग्ध बोट्स पर भी कार्रवाई की, जिन पर कथित तौर पर बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश का आरोप था। इसके अलावा बंदर अब्बास के पास एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल साइट पर भी हमले की बात सामने आई है। चार ईरानी सैनिकों की मौत का दावाईरानी मीडिया का दावा है कि अमेरिकी हमलों में रिवोल्यूशनरी गार्ड के चार सैनिकों की मौत हुई है। हालांकि इस पर स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। क्षेत्र में बढ़ता तनावहोर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकती है। ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर तनाव बना हुआ है। इस ताजा घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच हालात को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।

पारिवारिक विवाद पहुंचा पुलिस के पास: बेटों की शिकायत लेकर एसपी ऑफिस पहुंचे माता-पिता

झाबुआ । झाबुआ जिले के पेटलावद तहसील अंतर्गत ग्राम हिरानिनामापाड़ा में एक हृदयविदारक मामला सामने आया है, जहां बुजुर्ग दंपति ने अपने ही बेटों और बहुओं पर लगातार प्रताड़ना, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित दंपति रतनीबाई और उनके पति नाकु डांगी मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे और न्याय की गुहार लगाई। जमीन बांटने के बाद भी नहीं थमी प्रताड़नापीड़ित दंपति ने बताया कि उन्होंने अपनी पूरी जमीन-जायदाद पहले ही अपने तीनों बेटों-धनसिंग, डूंगरसिंग और एक अन्य पुत्र के बीच बांट दी थी। इसके बावजूद उनके पास बची हुई मात्र एक बीघा जमीन से ही वे किसी तरह जीवनयापन कर रहे हैं। लेकिन अब आरोप है कि बेटों और बहुओं द्वारा लगातार उनके साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है। शराब के नशे में मारपीट और गंभीर चोट का आरोपदंपति के अनुसार, बीते रविवार और 23 मई को बेटों और उनकी पत्नियों ने शराब के नशे में उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। नाकु डांगी ने आरोप लगाया कि उन्हें पत्थर मारकर घायल किया गया, जिससे उनके पैर में गंभीर चोट आई है। वहीं, रतनीबाई ने बताया कि आरोपियों ने उनका मकान तोड़ दिया, जिसके चलते उन्हें भीषण गर्मी में खुले बरामदे में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। धमकी देकर कहा-‘पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती’पीड़ित दंपति ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध किया तो बेटों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी और कहा कि अब जमीन और मकान उनके कब्जे में हैं तथा पुलिस भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकती। दंपति ने यह भी बताया कि जब वे रायपुरिया थाने में शिकायत करने पहुंचे तो आरोपी मोटरसाइकिल से उनका पीछा करते हुए वहां तक पहुंच गए, जिससे वे बेहद भयभीत हो गए। एसपी से सख्त कार्रवाई की मांगलगातार प्रताड़ना और जान के खतरे से परेशान बुजुर्ग दंपति ने पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र पाटीदार से निवेदन किया है कि उनके बेटों और बहुओं के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए और उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाए, ताकि वे अपने शेष जीवन को भयमुक्त होकर जी सकें। यह मामला न केवल पारिवारिक टूटन की दर्दनाक तस्वीर पेश करता है, बल्कि बुजुर्गों की सुरक्षा और सामाजिक मूल्यों पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।